Saturday, 21 October 2017

#3173
दीपावली पर मुस्लिम महिलाओं की आरती पर दारुल उलूम देवबंद को ऐतराज। सोशल मीडिया पर फोटो और महिलाओं के बाल कटवाने को भी इस्लाम विरोध बताया।
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दीपावली पर यूपी के बनारस में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा उर्दू में रचित श्रीराम की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करने को देवबंद स्थित दरुल उलूम ने गैर इस्लामिक करार दिया है। दरअसल मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं के लिए संघर्ष करने वाली नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने दीपावली पर श्रीराम की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इस पर दरुल उलूम ने फतवा जारी कर कहा है कि अल्लाह को छोड़ कर किसी अन्य ईश्वर की पूजा करने वाला मुस्लिम नहीं रह सकता। मालूम हो कि नाजनीन अंसारी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 501 रुपए का चंदा भी दिया है तथा अपने संगठन मुस्लिम महिला फाउंडेशन की ओर से सबसे पहले तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार के रुख का समर्थन भी किया था। 
फोटो और बल कटवाने पर भी ऐतराजः
दारुल उलूम ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम पुरुष और महिलाओं की फोटो बेवजह अपलोड करने को भी नजायज बताया है। अपने फतवे में दारुल उलूम ने कहा मुस्लिम महिलाओं एवं पुरुषों को अपनी या अपने परिवार के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इससे पहले भी दारुल उलूम ने मुस्लिम महिलाओं की हेयर कटिंग और आइब्रो बनवाने को भी नजायज करार दिया था। दरअसल सहारनपुर के एक शख्स ने जानना चाहा था कि क्या वह अपनी पत्नी को बाल कटवाने और आइब्रो बनवाने की इजाजत दे सकता है? इस पर दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि इस्माल में आइब्रो बनवाना और बाल कटवाना धर्म के खिलाफ है। कोई महिला ऐसा करती है तो वह इस्माल के नियमों का उल्लंघन कर रही है। इस फतवे को जारी करने के पीछे तर्क दिया गया कि इस्लाम में महिलाओं पर दस पाबंदिया लगाई गई है उन्हीं में से बाल काटना और आइब्रो बनवाना भी शामिल है। इस्लाम मजबूरी में बाल काटने की इजाजत देता है बिना किसी मजबूरी के बाल कटवाना नाजायज है। 
एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3172
सरवाड़ दरगाह के निलंबित मुतवल्ली के मामले में जांच शुरू। बेटा जमानत पर छूटा।
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सूफी संत ख्वाजा साहब के पुत्र ख्वाजा फखरुद्दीन की सरवाड़ (अजमेर) स्थित दरगाह के निलंबित मुतवल्ली मोहम्मद यूसुफ खान के मामले में राजस्थान वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमान उल्ला खान ने जांच शुरू कर दी है। 21 अक्टूबर को खान ने सरवाड़ पहुंचकर दरगाह से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुतवल्ली खान पर वित्तीय अनियमित्ताओं का आरोप लगाते हुए विगत दिनों मुसलमानों के प्रतिनिधि मंडलों ने सीएम वसुंधरा राजे को ज्ञापन दिए थे। सीएम के दिशा निर्देश पर ही 18 अक्टूबर को वक्फ बोर्ड की आपात बैठक कर खान को मुतवल्ली के पद से निलंबित किया गया तथा जांच के लिए अमान उल्ला खान को सरवाड़ भेजा गया। हालांकि बोर्ड की इस जांच में निलंबित मुतवल्ली के पुत्र रेहान खान ने बाधा डालने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने सख्त कार्यवाही करते हुए रेहान को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। बाद में एसडीएम की अदालत से रेहान की जमानत हुई।
नहीं दिया चार्जः
यूसुफ खान ने दरगाह के मुतवल्ली पद का चार्ज अभी तक नहीं दिया है। इसके साथ ही खान जांच को भी प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के बयान दर्ज करवाए गए हैं जो मुतवल्ली के समर्थक हैं। दरगाह परिसर में दुकान चलाने वाले अनेक दुकानदार अब यूसुफ खान को ईमानदार बता रहे हैं। सीएम को ज्ञापन देने वालों का कहना है कि यूसुफ खान अभी भी अपने पद के प्रभाव को काम में ले रहे हैं।

एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3171
तो वसुंधरा राजे के राज में भ्रष्टाचारियों की हो जाएगी मौज। कोर्ट के आदेश से भी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज नहीं हो सकेगा मुकदमा। विधानसभा के इसी सत्र में रखा जाएगा विधेयक।
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23 अक्टूबर से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र में राजस्थान की भाजपा सरकार एक ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है जिसके पास होने पर भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी और कर्मचारी और निर्भय हो जाएंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सीएम वसुंधरा राजे ने इस विधेयक को प्रस्तुत करने की स्वीकृति दे दी है। असल में यह विधेयक सीएम की पहल पर ही लाया जा रहा है। सरकार ने भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए एसीबी का गठन कर रखा है, लेकिन यह जांच एजेंसी भी सरकार की स्वीकृति के बिना किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती है। इसलिए भ्रष्टाचारियों से परेशान पीड़ित लोग कई अफसरों के खिलाफ सीधे कोर्ट में इस्तेगासा दायर कर मुकदमे के आदेश करवा रहे हैं। सरकार में बैठे लोगोें का यह मानना है कि इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। अदालत के आदेश होते ही अफसरों के नाम अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर छप रहे हैं। सरकार अब जो विधेयक ला रही है उसमें ऐसा प्रावधान है कि अदालत के आदेश के बाद भी पुलिस सरकारी कर्मिकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती है। भले ही कोर्ट ऐसे आदेश कर दें यानि कोर्ट के आदेश के बाद भी संबंधित पुलिस को पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। जब तक सरकार की अनुमति नहीं मिलेगी तब तक मुकदमा भी दर्ज नहीं हो सकेगा। इतना ही नहीं मात्र आरोप के आधार पर खबर प्रकाशित करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष तक की सजा दी जा सकेगी। सरकार में बैठे लोग माने या नहीं, लेकिन यदि यह विधेयक पास होता है तो भ्रष्ट अधिकारी और निर्भय हो जाएंगे। अभी जिन लोगों का सरकारी दफ्तरों में काम पड़ता है उन्हें पता है कि भ्रष्टाचार किस तरह फैला हुआ है। जायज काम भी रिश्वत दिए बिना नहीं होता। अच्छा होता कि सरकार ऐसा कोई कानून लाती, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता। सब जानते है कि सरकार का यह विधेयक आसानी से विधानसभा में पास हो जाएगा, क्योंकि 200 में से 162 विधायक भाजपा के हैं।
एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3170
अब 23 अक्टूबर को होगा अजमेर के पटेल मैदान में दुधियों का सम्मेलन। सीएम राजे के सामने डेयरी अध्यक्ष चैधरी करेंगे शक्ति प्रदर्शन।
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राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे की उपस्थिति में 22 अक्टूबर को होने वाला अजमेर जिले के दुधियों का सम्मेलन अब 23 अक्टूबर को पटेल मैदान पर होगा। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चैधरी ने बताया कि सीएम राजे के 22 अक्टूबर को अयंत्र व्यस्त होने के कारण अब यह सम्मेलन 23 अक्टूबर को रखा गया है। इस सम्मेलन में सीएम राजे डेयरी के नए प्लांट का शिलान्यास भी करेंगी। यह सम्मेलन प्रातः 11 बजे शुरू होग जाएगा। केन्द्र सरकार ने नए प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत किया है। इसमें 50 करोड़ रुपए की राशि अनुदान के तौर पर मिलेगी। नया प्लांट अत्याधुनिक तकनीक पर बनेगा। जिससे डेयरी के उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। दूध उत्पादक और डेयरी के कारोबार से जुड़े सभी ग्रामीणों को दोपहर का भोजन डेयरी प्रबंधन की ओर से कराया जाएगा। वाहनों के लिए पटेल मैदान के आसपास ही इंतजाम किए गए हैं।
चैधरी का शक्ति प्रदर्शनी भीः
जिलेभर के दुधियों का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। इस चुनावों के मद्देनजर ही सीएम राजे जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद का कार्य कर चुकी हैं। इन सभी जन संवादों में क्षेत्रीय भाजपा विधायक और नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन भी किया। ऐसे में डेयरी के सम्मेलन और प्लांट के शिलान्यास को भी डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चैधरी का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। चैधरी भी उपचुनाव में भाजपा के टिकट के प्रमुख दावेदार हैं। सीएम के सामने 20 हजार से भी ज्यादा ग्रामीणों की उपस्थिति दर्ज करवा कर चैधरी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि पूरा आयोजन चैधरी पर ही निर्भर है। डेयरी के इस आयोजन मे भाजपा संगठन की भी कोई भूमिका नहीं है। जिलेभर से ग्रामीणों को लाने और फिर वापस गांव तक पहुंचाने के सारे प्रबंध चैधरी के समर्थक ही कर रहे हैं। सम्मेलन स्थल पटेल मैदान पर लगने वाले टेंट, मंच आदि का खर्च भी चैधरी के माध्यम से हो रहा है। असल में चैधरी सीएम के सामने यह दिखाना चाहते हैं कि अजमेर जिले में उनकी कितनी पकड़ है। वह अकेले दम पर हजारों की भीड़ एकत्रित कर सकते हैं।
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Friday, 20 October 2017

#3167
आखिर भाजपा में रासासिंह रावत की उपेक्षा क्यों की जा रही है ?
18 साल संसद में बैठने की वजह से कान तक खराब हो गए।
नरेन्द्र मोदी और अमित शाह तथा राजस्थान में वसुन्धरा राजे के नियंत्रण वाली भाजपा में ऐसे अनेक नेता हैं जो एक या दो बार सांसद रहे, लेकिन आज वे किसी प्रांत के राज्यपाल हैं अथवा अन्य किसी सरकारी पद पर बैठे हुए सत्ता का सुख प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन अजमेर से पांच बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले 77 वर्षीय रासासिंह रावत आज किसी मंत्री अथवा मुख्यमंत्री के आने पर लाइन में माला लेकर खड़े नजर आते हंै। रावत ने 6 बार अजमेर और एक बार भाजपा के टिकट पर राजसमंद से चुनाव लड़ा और पांच बार विजयी हुए। पांच बार चुने जाने की वजह से ही रावत ने करीब 18 साल अजमेर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। यह रावत का दुर्भाग्य रहा कि जब वे अजमेर से चुनाव जीते तो केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी, इसलिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट तो रावत अजमेर में नहीं ला सके। लेकिन रेल्वे कारखाने का आधुनीकीकरण, ब्राडगेज की लाइन, बीसलपुर का पानी आदि उपलब्धियां रावत के खाते में गनाई जा सकती हैं। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट जब केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री थे तब अजमेर के सीआरपीएफ के एक ग्रुप सेंटर को दौसा जिले में ले जाना चाहते थे, लेकिन तब रावत ने संसद में पायलट के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया। आज दोनों ग्रुप सेंटर अजमेर में चल रहे हैं। अजमेर संभवत देश में एक मात्र शहर होगा, जहां सीआरपीएफ के दो सेंटर संचालित हैं। चूंकि एक सेंटर में हजारों जवान मौजूद रहते हंै, इसलिए इसका असर अजमेर शहर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। चूंकि रावत शिक्षाविद हैं इसलिए संसद में हर विषय पर बोलने की क्षमता रखते हंै। भाजपा की राजनीति में जब अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आड़वाणी, मुरली मनोहर जोशी का दखल था तब प्रखर वक्ता के तौर पर रावत ही संसद में सत्तापक्ष को जवाब देते थे। रावत की संसद में कितनी प्रभावी भूमिका रही इस बात को आडवाणी और जोशी जैसे नेता अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन भाजपा में अब दोनों ही नेताओं का कोई वजूद नहीं है, इसलिए पांच बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले रासासिंह रावत मंत्रियों के स्वागत के लिए माला लेकर खड़े हुए हैं।
कान भी हो गए खराब:
संसद में रावत की सौ प्रतिशत उपस्थिति रही है। चूंकि पूरे समय रावत संसद में सक्रिय रहते थे इसलिए अपने कान पर ईयर फोन लगा कर रखते थे। ईयरफोन के लगातार लगे रहने से रावत की सुनने की क्षमता भी आज कम हो गई है। यही वजह है कि उन्हें दोनों कानों में सुनने की मशीन लगाकर रखनी पड़ती है, लेकिन उनकी कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं है। स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल बने हुए है तो रासासिंह तो अभी फर्राटा दौड़ में भाग ले सकते हैं। जो लोग इस समय भाजपा के कर्णधार बने हुए है वे माने या नहीं, लेकिन रासासिंह रावत ने राजस्थान में विपरीत परिस्थितियों में अजमेर से भाजपा का झंडा बुलंद रखा था। बल्कि यह भी कहा जा सकता है कि 1977 में जब पहली बार रावत ने चुनाव लड़ा तब जन्म लेने वाले भाजपा के आज के नेता भी रावत की राजनीतिक यात्रा को नहीं देख रहे हंै। राजस्थान भाजपा में रावत अकेले ऐसे नेता हैं जो पांच बार सांसद रह चुके हैं।
उपचुनाव में दावेदार:
अजमेर संसदीय क्षेत्र में इसी वर्ष लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। रावत ने एक बार फिर पुरजोर तरीके से अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। सीएम वसुंधरा राजे ने अजमेर जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद किया। सातों जगह रावत ने सीएम को गुलदस्ता भेंट किया। नसीराबाद के अंतिम जनसंवाद में तो सीएम को भी कहना पड़ा कि रासासिंह जी आप तो अभी भी जवान हो। यह टिप्पणी सीएम ने रावत की राजनीतिक सक्रियता पर की। रावत अब इस बात से बेहद उत्साहित हैं कि सीएम ने अपनी आफिशियल फेसबुक पर रावत के स्वागत वाला फोटो पोस्ट किया है। रावत का भी मानना है कि यदि सीएम राजे चाहे तो उपचुनाव में भाजपा का उम्मीदवार बनवा सकती हैं। रावत ने अपनी उम्मदवारी के लिए सीएम राजे को 6 पेज का बायोडेटा भी दे दिया है। यदि इस बायोडेटा को कोई नेता पढ़े तो वाकई प्रभावित होगा। उम्र के लिहाज से भले ही रावत को उपचुनाव में उम्मीदवार न बनाया जाए, लेकिन कम से कम गोवा जैसे छोटे प्रांत का राज्यपाल तो बनाया ही जा सकता है। लेकिन रावत का मानना है कि यदि उन्हें उम्मीदवार बनाया जाता है तो वे बड़ी आसानी से उपचुनाव में भाजपा की जीत करवा सकते हैं। ब्यावर विधानसभा क्षेत्र भले ही अजमेर ससंदीय क्षेत्र में न आता हो, लेकिन उनकी जाति के डेढ़ लाख रावत मतदाता आज भी हंै। चूंकि पचास साल के राजनीतिक सफर में आज तक भी उन पर भष्ट्चार का कोई दाग नहीं लगा है, इसलिए सर्व समाज में उनकी इमेज साफ सुथरी है। किसी समय जब टेलिफोन और रसोई गैस कनेंशन संासद कोटे में मिलते थे तब उन्होंने पार्टी के कार्यकत्र्ताओं और आमजनों को यह सुविधा उपलब्ध करवाई। उपचुनाव में अपनी उम्मीदवारी को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिल चुके हंै और अब उनका प्रयास राष्ट््ीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का है। विदेशमंत्री श्रीमति सुषमा स्वराज ने भी रावत को अमित शाह से मिलने की सलाह दी। 
एस.पी.मित्तल) (20-10-17)
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