Sunday, 6 May 2018

तो इस बार भाजपा का शीर्ष नेतृत्व वसुंधरा राजे के दबाव में नहीं आएगा। अब यह राजे के समझने की जरुरत है। दिल्ली में भी हो सकती है भाजपा विधायक दल की बैठक।
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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अब यह समझना चाहिए कि दिल्ली में बैठा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनके दबाव में नहीं आएगा। यदि दबाव में होता तो गत 26 अप्रैल को तीन घंटे की मुलाकात में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष का मामला निपटा देेते। यानि वसुंधरा राजे जिस नेता को चाहती थीं उसे अध्यक्ष घोषित कर दिया जाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमितशाह का शीर्ष नेतृत्व भी समझ रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष की घोषणा नहीं होने से राजस्थान में भाजपा को राजनीतिक दृष्टि से नुकसान हो रहा है। कुछ जानकारों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व कर्नाटक के चुनाव में व्यस्त है, इसलिए प्रदेशाध्यक्ष का मामला टाल दिया है, लेकिन जो जानकार मोदी-शाह की कार्यशैली से वाकिफ है, उनका मानना है कि राजनीति के पिच पर वसुंधरा राजे को दौड़ने का मौका दिया जा रहा है, ताकि दमखम को देखा और समझा जा सके। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के पद से अशोक परनामी से 16 अप्रैल को इस्तीफा लेने के बाद राजे की हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। नेतृत्व को यह भी पता है कि वसुंधरा राजे ने अब सार्वजनिक सभाओं में केन्द्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करना छोड़ दिया है तथा विकास कार्यों का स्वयं ही श्रेय ले रही हैं। मुख्य सचिव के एक्सटेंशन का मामला हो या आईएएस कैडर में वृद्धि के प्रस्ताव का। सभी में वसुंधरा राजे को सबक सीखाने की जरुरत है। यह माना कि पूर्व में राजे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को झुकाती रही हैं, लेकिन इस बार मामला उल्टा है। वैसे तो अशोक परनामी से इस्तीफा लेने के बाद ही वसुंधरा राजे को समझ लेना चाहिए था, लेकिन वसुंधरा राजे को अब भी लगता है कि भाजपा नेतृत्व झुकेगा। शायद इस बार राजे राजनीतिक स्थितियों का गलत आंकलन कर रही हैं। राजे माने या नहीं प्रदेश भर में उन्हें लेकर भारी नाराजगी है। यदि नवम्बर में होने वाले चुनाव में राजे के फेस को आगे रखा गया तो भाजपा की स्थिति और खराब होगी। हाल के उपचुनाव में सभी 17 विधानसभा क्षेत्रों में मिली हार से राजे को कुछ तो सबक लेना ही चाहिए। यदि राजे को यह लगता है कि उपचुनाव की हार का असर विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा तो यह उनकी बड़ी भूल होगी। चुनाव की राजनीति समझने वालों का कहना है कि यदि राजे की जगह नरेन्द्र मोदी का चेहरा ही सामने रख कर विधानसभा का चुनाव लड़ा जाता है तो उपचुनाव की हार का असर कम होगा। यदि विजय राजे सिंधिया द्वारा खड़ी की गई पार्टी से वसुंधरा राजे को वाकई प्यार है तो शीर्ष नेतृत्व का कहना मानना चाहिए। जो लोग वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान में तीसरे मोर्चे के सपने देख रहे हैं वे मुंगेरीलाल ही साबित होंगे।
दिल्ली में हो सकती है भाजपा विधायक दल की बैठकः
वसुंधरा राजे की रणनीति को देखते हुए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश के भाजपा विधायकों की बैठक दिल्ली में बुला सकता है। जब वसुंधरा राजे अपने हिमायती मंत्रियों और विधायकों को दिल्ली भेज सकती हैं तो फिर विधायक दल की बैठक दिल्ली में क्यों नहीं हो सकती? आने वाले दिनों में राजस्थान की भाजपा की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा, जिसकी केन्द्र स्वयं राजे होंगी।

गृहमंत्री का जमीन पर गिर जाना सरकार के लिए शुभ नहीं।

गृहमंत्री का जमीन पर गिर जाना सरकार के लिए शुभ नहीं। 
उदयपुर पुलिस की खुल गई पोल।
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राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया पांच मई को जब उदयपुर में अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोहा बाजार में जनसुनवाई कर रहे थे कि तभी एक बड़ा हादसा हो गया। सुनवाई के दौरान कटारिया कुर्सी से खड़े हुए तो एक कार्यकर्ता ने कुर्सी हटा ली। कुर्सी हटने से अनजान कटारिया जब बैठे तो जमीन पर धड़ाम से गिर गए। हालांकि यह पुलिस और प्रशासन की लापरवाही भी है कि गृहमंत्री की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा गया। लेकिन इससे पहले इसे सरकार के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है। राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे धर्म कर्म में बहुत विश्वास रखती हैं। राजस्थान के सभी प्रमुख मंदिरों और देश के प्रमुख मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान कर चुकी हैं। वे स्वयं अपनी राजनीतिक सफलता ईश्वर की कृपा को ही मानती हैं। कटारिया वसंुंधरा राजे के विश्वास पात्र मंत्रियों में से हैं। ऐसे में यदि राजस्थान के ताजा राजनीतिक हालातों में गृहमंत्री जमीन पर गिर जाते हैं तो फिर यह सरकार और मुख्यमंत्री के लिए शुभ संकेत नहीं है। 
पुलिस की पोल खुलीः
अपने गृहमंत्री की सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी पुलिस की होती है। यह माना कि जब गृहमंत्री कटारिया अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाते हैं तो कार्यकर्ताओं में उत्साह कुछ ज्यादा ही होता है। लेकिन फिर भी पुलिस का यह दायित्व है कि वह अपने विभाग के मंत्री का तो ख्याल रखे ही। जनसुनवाई के दौरान कार्यकर्ता ने जिस तरह गृहमंत्री की कुर्सी हटा ली उससे प्रतीत होता है कि पुलिस ने अपने विभाग के मंत्री की सुरक्षा का ख्याल ही नहीं रखा। यदि उदयपुर पुलिस की निगरानी कटारिया पर होतीे तो न कुर्सी खिसकती न गृहमंत्री धड़ाम से जमीन पर गिरते, गंभीर बात तो ये है कि उदयपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने गृहमंत्री के जमीन पर गिर जाने की खबर को दबाए रखा। पुलिस को उम्मीद थी कि गृहमंत्री के जमीन पर गिरने का कोई सबूत नहीं है, इसलिए इस खबर को झुठला दिया जाए। लेकिन जनसुनवाई में मौजूद एक कार्यकर्ता ने जमीन पर गिरे गृहमंत्री का फोटो खींच ही लिया और भास्कर अखबार को दे दिया, यही वजह रही कि 6 मई को भास्कर में गृहमंत्री का जब फोटो छपा तो उदयपुर पुलिस की पोल खुल गई। सब जानते है कि कटारिया बुजुर्ग मंत्री हैं। ऐसे में जमीन पर अचानक गिर जाने से उन्हें चोट भी आई होगी। 

आखिर क्या हो गया है अजमेर के भाजपा नेताओं को।

आखिर क्या हो गया है अजमेर के भाजपा नेताओं को।
पानी बिजली की त्राहि-त्राहि पर भी चुप्पी क्यों?
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अजमेर के शहरी क्षेत्रों में तीन और चार दिनों में मात्र एक घंटे के लिए कम प्रेशर से पेयजल की सप्लाई की जा रही है। शहर की इस स्थिति से ग्रामीण क्षेत्रों के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। अजमेर जिले में पेयजल का मुख्य स्रोत 130 किलोमीटर दूर बीसलपुर बांध ही है। माना तो यही जाता है कि बीसलपुर बांध का निर्माण अजमेर की प्यास बुझाने के लिए हुआ था, लेकिन इसे अजमेर में कमजोर राजनीतिक नेतृत्व ही कहा जाएगा कि आज बीसलपुर बांध से अजमेर को मात्र 250 एमएल पानी रोजाना मिल रहा है तो जयपुर को करीब 500 एमएल पानी प्रतिदिन बीसलपुर बांध से दिया जा रहा है। अजमेर के भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि चैबीस घंटे में पेयजल की सप्लाई होगी। अब जब साढ़े चार साल गुजर गए हैं तब मई माह में तीन चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है। इतनी बुरी दशा में भी भाजपा का कोई जन प्रतिनिधि पेयजल की समस्या को नहीं उठा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि पम्पिंग स्टेशनों पर आए दिन खाली मटके फोड़ कर प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं की जुबान नहीं खुल रही है। सवाल ये भी है कि अजमेर की जनता ने भाजपा को दिल खोल कर समर्थन दिया। गत विधानसभा के चुनाव में जिले के सभी आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत करवाई। इतना ही नहीं मेयर, जिला प्रमुख, स्थानीय निकायों के अध्यक्षों, पंचायत समिति के प्रधानों आदि सभी पर भाजपा के नेताओं को बैठाया। आज हर महत्वपूर्ण पद पर भाजपा के नेता बिराजमान हैं। यूं पेयजल की समस्या के लिए भाजपा के नेता विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस को कोसते रहते थे। लेकिन पिछले साढ़े चार साल में भाजपा नेताओं ने कुछ भी नहीं किया। जबकि बीसलपुर बांध से जयपुर की सप्लाई लगातार बढ़ रही है। किसी भी भाजपा नेता में इतनी हिम्मत नहीं कि वह अजमेर की पेयजल समस्या का मुददा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समक्ष रख सके। भाजपा के सात में से चार विधायक मंत्री स्तर की सुविधाएं भोग रहे हैं। इन मंत्रियों का काम सिर्फ एसी सरकारी गाड़ियों में इधर-उधर घुमना और अभी भी फीते काटना है। समझ में नहीं आता कि भाजपा के जनप्रतिनिधि कौन सी उपलब्धियां गिना रहे हैं। जब पेयजल की समस्या का निदान नहीं हुआ तो फिर दूसरे दावों में कितनी सच्चाई है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अजमेर शहर की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी टाटा पावर को देने का काम भी भाजपा की सरकार में ही हुआ। आज अनियमित बिजली सप्लाई की वजह से पेयजल व्यवस्था भी गड़बड़ा रही है। लेकिन इसके बाद भी भाजपा का कोई नेता टाटा पावर कंपनी के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। टाटा पावर अपनी मनमर्जी से वितरण व्यवस्था कर रहा है। कंपनी पर कोई नियंत्रण नहीं है। 
अजमेर में नारद जयंती पर पत्रकार सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी 8 मई को।
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विश्व संवाद केन्द्र अजयमेरु की ओर से 8 मई को अजमेर मे इंडिया मोटर सर्किल स्थित स्वामी काॅम्प्लेक्स के सभागार में प्रातः 11 बजे पत्रकार सम्मान समारोह एवं विचार गोष्ठी रखी गई है। केन्द्र के सचिव निरंजन शर्मा ने बताया कि शहर के सात प्रमुख पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान परिवेश में पत्रकारिता की भूमिका विषय पर एक विचार गोष्ठी होगी, गोष्ठी के मुख्यवक्ता यूएनआई समाचार एजेंसी के समाचार सम्पादक रहे तथा भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य गुलाब बत्रा होंगे। गोष्ठी की अध्यक्षता एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर विजय श्रीमाली करेंगे। शर्मा ने बताया कि प्रति वर्ष नारद जयंती के उपलक्ष में सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी आयोजित की जाती है। देवर्षि नारद को दुनिया का प्रथम संवाददाता माना जाता है। सम्मानित होने वाले पत्रकारों को शाॅल ओढ़ा कर श्रीफल और प्रशंसा पत्र भेंट किया जाएगा। 

Saturday, 5 May 2018

छुट्टी के दिन अफसरों की बैठक कर अजमेर की नई कलेक्टर आरती डोगरा ने अपनी कार्यशैली के संकेत दिए। न्याय आपके द्वार अभियान में कौताही बर्दाश्त नहीं।
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अजमेर की नवनियुक्त कलेक्टर आरती डोगरा ने छुट्टी के दिन 5 मई को जिले भर के उपखंड अधिकारियों और प्रमुख विभागाध्यक्षों की बैठक कर अपनी कार्यशैली के संकेत दे दिए हैं। 2006 के बैच की आईएएस डोगरा का कद मात्र 3 फीट 3 इंच का है। लेकिन कलेक्टर ने 5 मई को यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी कार्य क्षमता को कद से नहीं आका जाए। अधिकारियों को अब रात और दिन काम करना पड़ेगा। सरकार की जितनी भी कल्याणकारी योजनाएं हैं उन सब का लाभ जरुरतमंद व्यक्तियों को दिलवाना होगा। सरकारी कार्मिक के लिए अवकाश कोई मायने नहीं रखता है। सरकार से जब सभी प्रकार की सुविधाएं ली जाती है तो फिर छुट्टी के दिन भी काम करना चाहिए। 5 मई को सरकार के न्याय आपके द्वारा अभियान की समीक्षा के लिए कलेक्टर ने बैठक की। बैठक में उपस्थित सभी उपखंड अधिकारियों से कहा गया कि शिविरों में ग्रामीणों को सभी प्रकार की सुविधाएं दिलवानी जरूरी है। ऐसा न हो कि शिविर नाम मात्र के हो जाए। सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मंशा के अनुरूप शिविरों में काम होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं शिविरों का औचक निरीक्षण करेंगी और यदि कौताही मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। हालांकि आरती डोगरा को पहले भी दो जिलों में कलेक्टर का अनुभव रहा है। लेकिन प्रदेश में अजमेर का कलेक्टर बनना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है। कलेक्टर ने पहली ही बैठक में आभास करा दिया कि वे हर चुनौती को स्वीकार करेंगी। बैठक में जलदाय विभाग के इंजीनियरों से भी कलेक्टर ने कहा कि नियमित सप्लाई की जाए। जिन क्षेत्रों में पेयजल योजना नहीं है वहां टेंकरों के जािए पेयजल की सप्लाई की जावे।