Tuesday, 19 September 2017

#3043
स्मार्ट सिटी में बातें ज्यादा काम कम हो रहा है। स्वायत्त शासन मंत्री कृपालनी की उपस्थिति में देवनानी और अजमेर के अन्य जनप्रतिनिधियों ने जताया असंतोष।
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19 सितम्बर को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में राजस्थान के स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने अजमेर जिले की स्थानीय निकाय संस्थाओं के प्रमुखों, विधायकों तथा भाजपा संगठन प्रमुख, प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। अजमेर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर आयोजित इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन निकायों के प्रमुखों, विधायकों और भाजपा के पदाधिकारियों का कहना रहा कि अफसरशाही की वजह से निकायों का काम संतोषजनक नहीं है। 
स्मार्ट सिटी में काम कम बाते ज्यादा-देवनानी:
बैठक में अजमरे उत्तर क्षेत्र के भाजपा विधायक और प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट कहा कि अजमेर को स्मार्ट सिटी बानने की योजना में काम कम और बातें ज्यादा हो रही हैं। यदि कार्यों की गति इसी प्रकार रही तो अजमेर को स्मार्ट बनाने में वर्षों लग जाएंगे। उन्होंने मंत्री कृपलानी को सुझाव दिया कि वे निर्माण कार्यों की स्वयं निगरानी करें ताकि कामों का गति मिल सके। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना में लगे अधिकारी और इंजीनियर बातें बहुत करते हैं, लेकिन मौके पर काम बहुत कम होता है।
स्ट्रीट लाइट पर नाराजगी:
जनप्रतिनिधियों ने सबसे ज्यादा गुस्सा स्ट्रीट लाइट का संचालन करने वाली ईएसएल कंपनी पर उतारा। अजमेर नगर निगम के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, पुष्कर के पालिकाध्यक्ष कमल पाठक आदि का कहना रहा कि कंपनी के कर्मचारी जन शिकायतों का समाधान नहीं करते हैं। चूंकि कंपनी पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई नियंत्रण नहीं है, इसलिए कर्मचारी कोई परवाह नहीं करते। संवाद में यह बात भी सामने आई कि अजमेर जिले में स्ट्रीट लाइट का ठेका इस कंपनी को दिलवाने में स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव मंजीत सिंह की भूमिका रही है। इसलिए कंपनी के कर्मचारी किसी से भी नहीं डरते हैंं। स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल, विधायक भागीरथ चौधरी आदि ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को रखा। संवाद में देहात भाजपा के अध्यक्ष प्रो.बी.पी.सारसस्वत और शहर अध्यक्ष अरविंद यादव ने अपने विचार रखे। यादव ने कहा कि निकाय अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं है। यादव का यह भी कहना रहा कि बैठक में एजेंडे के विपरित संवाद हो रहा है। अधिकारी वर्ग अपनी मनमर्जी कर रहा है। इस पर मंत्री कृपलानी ने यादव को इशारों में समझाया कि वे उनसे अलग से बात कर लें। 
दो माह से लगातार जल रही है लाइट-सरस्वत:
बैठक में देहात भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रो.बी.पी.सारस्वत ने कहा कि सिविल लाइन स्थित उनके आवास के बाहर स्ट्रीट लाइट पिछले दो माह से लगातार जल रही हैं। दिन में भी लाइट जलने की शिकायत उन्होंने नगर निगम से लेकर सरकार के पोर्टल तक पर दर्ज कराई, लेकिन आज तक भी सुधार नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जब मेरे घर के बाहर ही स्ट्रीट लाइट का ये हाल है तो फिर जिले में हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सारस्वत की बात सुनते ही मंत्री कृपलानी ने तत्काल मौके पर भेज कर सच्चाई पता लगाया। 
नालों को कवर करें-भदेल:
श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि उनके दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में खुले नालों को कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की योजना ऐसी बनाई जाए जिसमें उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को भी सुविधाएं मिल सके। 
नहीं आए तीन विधायक :
बैठक में केकड़ी के भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम, पुष्कर के सुरेश सिंह रावत तथा मसूदा की श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा नहीं आईं। इन तीनों विधायकों की गैर मौजूदगी संवाद में चर्चा का विषय बनी रही। 
हर समस्या का समाधान होगा-कृपालनी :
बैठक में श्रीचंद कृपलानी ने अजमेर के जनप्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहती हैं कि अजमेर का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो, इसलिए अजमेर को स्मार्ट सिटी का तोहफा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जन समस्याओं का कभी अंत नहीं होता। लेकिन हम सबकी यह जिम्मेदारी है कि सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के सामने लाया जाए। अब जब अजमेर में उपचुनाव होने हैं तो फिर सरकार की उपलब्धियां भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने विधायकों और स्थानीय निकायों के प्रमुखों से कहा कि वे अपनी समस्याएं लिखित में उन्हें दे दें वे सबका का समाधान करवाएंगे। 
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3042
नोबल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने भी माना की रोहिंग्या मुसलमानों में आतंकी भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा म्मांयार।
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19 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र संघ की सभा में म्मांयार की स्टेट काउंसलर और नोबल शांति पुरस्कार आंग सांग सू ची की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि म्मांयार अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश के आराकान इलाके में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के बीच आतंकी भी हैं जो हमारे देश का माहौल बिगड़ रहे हैं। सरकार की ओर से हाल ही में ऐसे तत्वों के विरुद्ध जो कार्यवाही की गई है वह उचित है। उन्होंने माना कि मानवाधिकार का उल्लंघन ठीक नहीं है, लेकिन रोहिंग्या मुसलमानों का एक वर्ग पुलिस बलों पर हमले और देश विरोधी काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो शरणार्थी लौटना चाहते हैं वे जांच के बाद म्मांयार आ सकते हैं। सू ची के ताजा बयान से भारत के रुख को भी मदद मिली है। एक दिन पहले ही केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर रोहिंग्या मुसलमानों की उपस्थिति को गैर कानूनी करार दिया था। केन्द्र सरकार का कहना रहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के एक वर्ग के संबंध पाकिस्तान के आतंकवादी गुटों से है, इसलिए इन्हें भारत में शरण नहीं दी जा सकती है। अब जब नोबल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सख्त टिप्पणी की है तब भारत के रुख को समर्थन मिला है। मालूम हो कि म्मांयार में लोकतंत्र की बहाली के लिए सू ची ने लम्बा संघर्ष किया। उन्हें कई वर्षों तक जेल में भी रहना पड़ा। लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष पर ही उन्हें शांति का नोबल पुरस्कार मिला। ऐसे में रोहिंग्या मुसलमानों पर सू ची का दिया गया बयान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में महत्व रखता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर पूरी दुनिया में आवाज उठ रही है।
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3041
सीएम वसुंधरा राजे ने संघ प्रमुख भागवत को दी सरकार की रिपोर्ट। नासाज तबीयत के बारे में ली जानकारी। 
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19 सितम्बर को जयपुर के भारती भवन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत से राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने मुलाकात की। भागवत तीन दिन के जयपुर प्रवास पर हंै। 19 सितम्बर को प्रवास का अंतिम दिन रहा। फाइल का फोल्डर लेकर पहुंची राजे ने भागवत के सामने अपनी सरकार के काम काज और विभिन्न योजनाओं की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संघ के काम काज की दृष्टि से सीएम की मुलाकात एक सामान्य प्रक्रिया है। संघ प्रमुख के प्रवास के समय संबंधित प्रांत के प्रचारक और प्रमुख स्वयं सेवक अपने-अपने संगठन की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। चूंकि भाजपा भी संघ परिवार का सदस्य है। इस नाते सीएम राजे ने भी अपनी सरकार की रिपोर्ट दी। भागवत ने सीएम राजे के कथन को भी उसी अंदाज में सुना, जिसमें दूसरे संगठनों के प्रमुखों को सुना। आम तौर पर संघ प्रमुख कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, लेकिन सीएम राजे की तबीयत खराब होने के संबंध में भागवत ने सलाह दी कि वे पहले अपने स्वास्थ का ख्याल रखंे। सीएम ने बताया कि वे पिछले तीन दिन से बूंदी जिले के दौरे पर थीं। आसोज की झुलसा देने वाली गर्मी में गांव-ढाणी के दौरे तथा लगातार जनसुनवाई व सरकारी बैठकों की वजह से थकावट कुछ ज्यादा ही हो गई। भागवत और राजे की मुलाकात का माहौल भी अच्छा रहा। इस मुलाकात में जयपुर के रामगंज क्षेत्र में हाल ही में हुई आगजनी और कफ्र्यू की घटना पर विचार हुआ। सीएम ने बताया कि किन परिस्थतियों में हालात बिगड़े और प्रशासन ने किस सूझबूझ से नियंत्रण पाया। 
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3040
सीकर में गैंगरेप, जोधपुर में व्यापारी की हत्या जैसी घटनाएं सरकार की छवि खराब कर रही हैं। बड़े अफसर भी खुले आम झगड़ रहे हैं।
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19 सितम्बर को राजस्थान का जोधपुर शहर बंद रहा, तो सीकर में दिनभर हंगामा होता रहा। जोधपुर में एक डिपार्टमेंटल स्टोर के मालिक वासुदेव इसरानी की सरेआम हत्या और सीकर में एक प्राइवेट स्कूल के मालिक व शिक्षक द्वारा 12वीं की एक छात्रा के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं राजस्थान में सरकार की छवि खराब कर रही हैं। यह छवि तब खराब हो रही है, जब राजस्थान में भाजपा की सरकार को लोकसभा  के दो और एक विधानसभा के उपचुनाव की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जोधपुर में सरेआम व्यापारी की हत्या पर तो हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोविंद माथुर और विनीत कुमार ने पुलिस और सरकार के कामकाज पर बेहद ही सख्त टिप्पणी की है। दोनों न्यायाधीशों ने व्यापारी की हत्या पर कहा कि यदि हम पुलिस कमिश्नर होते तो अब तक इस्तीफा दे देते। या तो पुलिस नाकारा है या फिर अपराधियों से मिली भगत है। पुलिस नाम की कोई चीज नहीं है। शहर भाग्य भरोसे चल रहा है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से राजस्थान में पुलिस महकमे का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना है कि वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चल रही सरकार हाईकोर्ट की टिप्पणी को कितनी गंभीरता के साथ लेती है। 
सीकर के स्कूल में गैंगरेप: 
गुरुग्राम के रेयान स्कूल में एक सात वर्षीय मासूम छात्र की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि राजस्थान के सीकर जिले के अजीतगढ़ क्षेत्र में चलने वाले जनता बाल निकेतन स्कूल की 12वीं की छात्रा के साथ स्कूल के प्रबंधक जगदीश यादव, शिक्षक जगत सिंह गुर्जर के द्वारा गैंगरेप करने का गंभीर मामला उजागर हो गया। अब 18 वर्षीया पीड़िता जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। शर्मनाक बात तो यह है कि बार-बार बलात्कार करने के बाद छात्रा का गर्भपात शाहपुरा राजनीश अस्पताल में करवाया गया और तभी छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। हालांकि पुलिस ने दोनों बलात्कारियों को हिरासत में लेकर अस्पताल के डाॅक्टर रजनीश और डाॅक्टर कानन शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। लेकिन आखिर सवाल उठता है कि हमारी बेटियां स्कूलों में सुरक्षित क्यों नहीं है? असल में अपराधी पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को भी शिक्षा के मंदिर चलाने के लाइसेंस दे दिए जाते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्कूल का मालिक ही छात्रा से बलात्कार कर रहा है तो उस स्कूल के हालात कैसे होंगे? यूं दिखाने को राजस्थान में सरकार ने महिला आयोग बना रखा है, लेकिन जाहिर है कि इस आयोग की कोई प्रभावी भूमिका नहीं है। आपराधिक तत्वों में कानून का भय नहीं है। 
झगड़ रहे हैं अफसर: 
एक ओर जहां हाईकोर्ट सरकार के काम काज पर प्रतिकूल टिप्पणी कर रहा है, तो वहीं सरकार में बैठे आईएएस स्तर के अधिकारी आपस में झगड़ रहे हैं। आयुर्वेद विभाग के शासन सचिव आर वेकेटश्वरन अपने अधिनस्थ मेडिशनल प्लांटस बोर्ड के सदस्य सचिव भरत तेमनी को सस्पेंड करने की धमकी देते हैं। तो तेमनी का कहना है कि वेकेटश्वरन मेरे बाॅस नहीं हैं। असल में दो अफसरों के झगड़े में भी सरकार की लापरवाही ही है। तेमनी 1987 बैच के आईएसएफ अधिकारी हैं। जबकि उन्हें 1990 बैच के आईएएस वंेकटेश्वरन के अधीन नियुक्त किया गया। यदि सरकार में बैठे लोग थोड़े भी समझदार होते तो एक सीनियर को जूनियर के नीचे नियुक्ति नहीं देते।
उपचुनाव की है चुनौतियां:
हालांकि राजस्थान में अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। लेकिन इससे पहले भाजपा सरकार को इसी वर्ष होने वाले दो लोकसभा (अजमेर और अलवर) और एक विधानसभा का (भीलवाड़ा के माडलगढ़) के उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। सरकार में बैठे लोग माने या नहीं, लेकिन ये तीनों उपचुनाव चुनौती भरे हैं। ऐसे में जहां सरकार की उपलब्धियां सामने आनी चाहिए वहां सरेआम हत्या, गैंगरेप, जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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Monday, 18 September 2017

#3038
भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं रोहिंग्या मुसलमान। केन्द्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा। पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्यों नहीं लेते शरण।
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18 सितम्बर को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश कर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत की सुरक्षा के लिए खतरा माना है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या मुसलमानों के सम्पर्क पाकिस्तान के अनेक आतंकी संगठनों से हैं। इतना ही नहीं खूंखार आतंकी संगठन आईएस से भी तार जुड़े हुए हैं। हवाला के जरिए भी रोहिंग्या मुसलमानों को मदद मिलती है, मानव तस्करी में भी लिप्त हैं। हलफनामे में गृह मंत्रालय ने रोहिंग्य मुसलमानों की उपस्थित को भारत में गैरकानूनी माना है। 16 पन्ने के हलफनामे में कहा गया है कि अनेक रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत में मतदाता पहचान पत्र तथा पेन कार्ड तक बनवा लिए हैं। हलफनामे में कहा गया कि यदि रोहिंग्य मुसलमानों को भारत में शरण दी जाती है तो भारत के नागरिकों के अधिकारों का हनन होगा। मालूम हो कि म्मांयार से 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में आ चुके हैं। इनमें से 10 हजार से ज्यादा आतंकवाद ग्रस्त कश्मीर में हैं। 
प्रशांत भूषण की है याचिकाः
आम आदमी के संस्थापक सदस्य रहे प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि म्मांयार में इन मुसलमानों पर अत्याचार हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे पर अब प्रशांत भूषण से जवाब मांगा गया है। इस मामले में 3 अक्टूबर को सुनवाई होगी। 
पाक-बांग्लादेश क्यों नहीं देते शरण?ः
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सुब्रह्मणय स्वामी ने सवाल उठाया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान और बांग्लादेश शरण क्यों नहीं देते हैं? यदि मुसलमानों को अपने समुदाय के लोगों की इतनी ही चिंता है तो उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश पर दबाव बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों को वहां बसाना चाहिए। स्वामी ने कहा कि जब पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसे मुस्लिम राष्ट्र ही रोहिंग्य मुसलमानों को शरण देने को तैयार नहीं है तो फिर भारत में शरण देने का माहौल क्यों बनाया जा रहा है? रोहिंग्या मुसलमानों ने म्मांयार में जो कृत्य किया उसी की वजह से उन्हें म्मांयार से भगाया गया है। रोहिंग्य मुसलमानों को भारत में रहने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। स्वामी ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि रोहिंग्य मुसलमानों को शरण दिलवाने के लिए जुम्मे की नमाज के बाद जुलूस निकाले जा रहे हैं। जबकि  कश्मीर घाटी से 4 लाख हिन्दुओं को पीट-पीट कर भगा दिया, लेकिन किसी ने भी हिन्दुओं की वापसी की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि रोहिंग्य मुसलमानों पर बेवहज की राजनीति की जा रही है। भारत में रोहिंग्य मुसलमानों को किसी भी स्थिति में शरण नहीं दी जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (18-09-17)
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