Sunday, 31 January 2016

अजमेर में स्मार्ट सिटी पर अब कांग्रेस कर रही है नौटंकी।


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स्मार्ट सिटी के नाम पर गत दो वर्षों से अजमेर के नागरिकों को भाजपा बेवकूफ बनाती रही और अब विरोध के नाम पर कांग्रेस नौटंकी कर रही है। कांग्रेस की ओर से 30 जनवरी को कलेक्ट्रेट के बाहर तीन घंटे का धरना दिया है। कांग्रेस के नेताओं ने जोश के साथ कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर भाजपा ने जो झूठ बोला है, उसका अब बदला लिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और शहर अध्यक्ष महेन्द्र सिंह रलावता यदि आह्वान करेंगे तो अजमेर में भाजपा के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस को यह धरना इसलिए देना पड़ा, क्योंकि केन्द्र सरकार ने 20 स्मार्ट सिटी के शहरों की घोषणा की है, उसमें अजमेर का नाम शामिल नहीं है, जबकि अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं घोषणा की थी। गत नगर निगम के चुनाव में भी भाजपा ने प्रधानमंत्री की घोषणा को आगे रखकर प्रचार किया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस नगर निगम और भाजपा के खिलाफ कोई आंदोलन कर सकती है? 30 जनवरी को जिन कांग्रेस नेताओं के हाथ में धरने की कमान थी, उन नेताओं के रिश्तेदार अथवा परिचित नगर निगम में ठेकेदारी का काम करते हैं। एक बहुचर्चित नेता तो सफाई के ठेके में साझेदार भी बताया जाता है। पहले भी इसी कांग्रेसी नेता के पास सफाई का ठेका था। यह माना कि शहर अध्यक्ष महेन्द्र सिंह रलावता कि संगठन में पकड़ है, लेकिन क्या रलावता भाजपा शासित नगर निगम के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन कर सकते हैं? सब जानते हैं कि रलावता के सगे भाई गजेन्द्र सिंह रलावता अजमेर नगर निगम में उपायुक्त के पद पर कार्यरत हैं।
मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का सबसे ज्यादा भरोसा रलावता पर ही है। इस भरोसे का पता इससे भी चलता है कि पिछले दिनों जब सीईओ एच.गुइटे एक माह के अवकाश पर गए तो गहलोत ने रलावता को ही सीईओ का अतिरिक्त कार्य सौंपने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं रलावता को पुष्कर नगर पालिका के ईओ का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप रखा था। जहां तक रलावता की कार्य कुशलता का सवाल है तो उस पर किसी को भी संदेह नहीं है। रलावता ने अपनी मेहनत से जिला प्रशासन और भाजपा के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का भरोसा जीता है। शहर में निगम की ओर से जो भी महत्त्वपूर्ण काम होते हैं,उसमें रलावता की सक्रिय भूमिका होती है। ऐसे में कांग्रेस भाजपा शासित नगर निगम के खिलाफ कोई आंदोलन करें, इससे संशय नजर आता है। इसे अजमेर के नागरिकों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि पिछले दो साल से भाजपा के नेता स्मार्ट सिटी का झुनझुना बजाते रहे और अब विरोध के नाम पर कांग्रेस नौटंकी कर रही है। 
गांधी की पुण्यतिथि पर एकत्रित हुए कांग्रेसी:
कांग्रेस की ओर से 30 जनवरी को धरना तब रखा गया जब कांग्रेसी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर एकत्रित हुए। यदि गांधी जी की पुण्यतिथि नहीं होती तो इतने कांग्रेसी धरने में शामिल नहीं हो सकते थे। भले ही पुण्यतिथि पर कांग्रेसी एकत्रित हुए हो,लेकिन धरने पर कांग्रेसियों की एकजुटता नजर आई। शहर अध्यक्ष रलावता के साथ-साथ पूर्व मंत्री ललित मोदी पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, डॉ. राजकुमार जयपाल, युवा नेता हेमंत भाटी, राजेश टंडन, प्रताप यादव, शैलेन्द्र अग्रवाल, सबा खान आदि उपस्थित थे। 
गहलोत है ताकतवर:
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कांग्रेस आंदोलन की कितनी भी घोषणा कर ले, लेकिन नगर निगम में वो ही होगा जो मेयर धर्मेन्द्र गहलोत चाहेंगे। गहलोत की निगम पर मजबूत पकड़ है। गहलोत के कार्यकाल में भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के पार्षद संतुष्ट रहते हैं। गहलोत के पूर्व के कार्यकाल में भी कांग्रेस के पार्षद पांच वर्ष तक गहलोत की जय-जयकार करते रहे और वर्तमान में भी कांग्रेस के पार्षद गहलोत के कामकाज से संतुष्ट नजर आते हैं। यदि कभी गहलोत को विरोध का सामना करना पड़ा तो भाजपा के कुछ पार्षद ही विरोध कर सकते हैं।
(एस.पी. मित्तल)  (31-01-2016)
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एक फरवरी से अजमेर डेयरी का दूध महंगा मिलेगा



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अजमेर जिले के उपभोक्ताओं को एक फरवरी से डेयरी का दूध महंगा खरीदना पड़ेगा। डेयरी ने अपने टोण्ड दूध का मूल्य 32 रुपए से बढ़ाकर 34 रुपए तथा गोल्ड का एक लीटर दूध 42 रुपए से बढ़ाकर 44 रुपए कर दिया है। डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने बताया कि यह वृद्धि मजबूरी में की गई है, लेकिन आज भी निजी डेयरियों के मुकाबले अजमेर डेयरी का दूध सस्ता है। उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादकों से एक फरवरी से 33 रुपए प्रतिलीटर के हिसाब से दूध खरीदा जाएगा। अभी तक 32 रुपए प्रतिलीटर के हिसाब से दूध खरीदा जा रहा था। उन्होंने बताया कि यह वृद्धि अप्रैल तक 35 रुपए तक की जाएगी। अजमेर डेयरी सहकारिता की भावना से चलती है। डेयरी का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। जिले के उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध मिलता रहे इसलिए दोनों प्रमुख ब्रांडो में दो-दो रुपए प्रतिलीटर की वृद्धि की गई है।

(एस.पी. मित्तल)  (31-01-2016)
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मित्तल अस्पताल में मरीज से अधिक राशि वसूलने का एक और मामला उजागर



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अजमेर के पुष्कर रोड स्थित प्राइवेट मित्तल अस्पताल में मरीजों से अधिक राशि वसूलने के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे है। इसमें संबंधित इंश्योरेंस कंपनी की मिलीभगत भी उजागर हो रही है। ऐसा ही एक आरोप 31 जनवरी को पुष्कर रोड स्थित महावीर कॉलोनी के पीछे रहने वाले नरेन्द्र शर्मा ने लगाया है। शर्मा ने बताया कि गत 8 जनवरी को अपनी आंख का ऑपरेशन मित्तल अस्पताल में करवाया था। ऑपरेशन से पहले आंख की जांच कर मुझे बताया कि सब कुल 25 हजार रुपए लगेंगे। इसमें सभी प्रकार के खर्च शामिल है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद मैंने बताया कि मेरे पास ईफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की मेडिक्लेम पॉलिसी है। यही वजह रही कि मुझे ऑपरेशन के बाद 33 हजार 163 रुपए का बिल दिया है। इस पर जब मैंने एतराज किया तो अस्पताल के प्रबंधन ने कहा कि आपको तो एक रुपए का भी भुगतान नहीं करना है। हम अपने स्तर पर सारी राशि इंश्योरेंस कंपनी से वसूल लेंगे। चूंकि मेरी आंख का ऑपरेशन हुआ था इसलिए मैंने बिना किसी विवाद में पड़े अस्पताल के कागजातों पर हस्ताक्षर कर दिए लेकिन मुझे आज भी इस बात का दुख है कि मित्तल अस्पताल के प्रबंधन ने अधिक राशि वसूली है। शर्मा ने बताया कि इफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी वालों ने भुगतान भी सीधे मित्तल अस्पताल को ही किया है। शर्मा ने मांग की है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि जब 25 हजार रुपए में ऑपरेशन का पैकेज बताया गया था तो फिर 33 हजार 163 रुपए का बिल इंश्योरेंस कंपनी ने क्यों दिया गया? शर्मा ने कहा कि उनके पास वो सब दस्तावेज सुरक्षित है जिससे जाहिर होता है कि मित्तल अस्पताल के प्रबंधन ने मेडिक्लेम के लिए 33 हजार 163 रुपए का खर्चा बताया है। शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन के इशारों पर अस्पताल के अधिकारी नवीन काबरा और श्याम सोमानी का व्यवहार गैर जिम्मेदाराना रहा।
(एस.पी. मित्तल)  (31-01-2016)
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शोध के विषयों में बदलाव को लेकर नागपुर में राष्ट्रीय सेमीनार।



भारतीय संस्कृति के अनुरूप हों शोध। 
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से 11,12 व 13 फरवरी को नागपुर में एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार आयोजित की जा रही है। इस सेमीनार में शोध के विषयों में बदलाव को लेकर महत्त्वपूर्ण चर्चा होगी। इस सेमीनार का महत्त्व इस बात से पता चलता है कि सेमीनार में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जाड़वेकर, केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ-साथ देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों के चालीस कुलपति एवं शिक्षाविद् भाग लेंगे। मंडल के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने बताया कि नागपुर में होने वाली इस तीन दिवसीय सेमीनार में सीआईआई व फिक्की से जुड़े बड़े पदाधिकारी भी भाग लेंगे। सेमीनार का मुख्य उद्देश्य शोध के विषयों में बदलाव करना है। वर्तमान में विश्वविद्यालयों एवं अन्य क्षेत्रों में जो शोध के कार्य हो रहे हैं वे सार्थक साबित नहीं हो रहे है। विश्वविद्यालयों में शोध करने वाले विद्यार्थियों को ऐसे विषय दिए जाते हैं जो किसी काम के नहीं होते। आज जब अमरीका और इंग्लैंड जैसे देश भारतीय संस्कृति को देखकर शोध के काम कर रहे है, तब सरकार को भी ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे भारतीय संस्कृति की उपयोगिता बढ़ सकती है। कानिटकर ने बताया कि हमारे वेदशास्त्रों पर पश्चिमी देशों में शोध का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। विदेशी शिक्षाविद् हमारे वेदपाठी विद्यार्थियों को बुलाकर वेदशास्त्र समझ रहे हैं। हमारे वेदों में हर समस्या का समाधान है, आज विज्ञान जो कल्पना कर रहा है, उसे हमारे शास्त्रों में पहले से ही लिखा गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कोई नई दिशा नहीं मिली और न ही शिक्षा को हमारे वैदिक शास्त्रों के अनुरूप पढ़ाया गया। अब जब पश्चिमी देश हमारे वेदों की नकल कर रहे हैं, तब हमारी सरकार को भी चाहिए कि हमारे संस्कृति के अनुरूप शिक्षाहो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को शोध के जो विषय दिए जाते हैं, वे वेदों के अनुरूप होने चाहिए। इससे जहां युवा पीढ़ी को हमारी संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा। वहीं समाज को एक नई दिशा भी मिलेगी। आज दुनियाभर में पर्यावरण की सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या का समाधान भी हमारे पास है। कानिटकर ने बताया कि सेमीनार के लिए अब तक 700 पत्र प्राप्त हो चुके हैं, इनमें से 40 पत्रों की प्रस्तुति सेमीनार में की जाएगी। साथ ही सेमीनार के समापन पर एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। इस प्रस्ताव में बताया जाएगा कि अब शोध के लिए कौन-कौन से विषय होने चाहिए तथा शोधकार्य को किस प्रकार से प्रभावी बनाया जाए। सेमीनार में देशभर में कोई 500 प्रतिनिधि भाग लेंगे। 
(एस.पी. मित्तल)  (31-01-2016)
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Saturday, 30 January 2016

नेत्रहीन, मूक-बधिर, मंदबुद्धि का बनकर करें दिव्यांग बच्चों की पीड़ा का अहसास।



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समाज में ऐसे अनेक दानदाता मिल जाएंगे जो दिव्यांग बच्चों से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग करते हैं लेकिन सवाल उठता है कि क्या किसी सामान्य व्यक्ति ने नेत्रहीन, मूक बधिर, मंदबुद्धि का बनकर दिव्यांग बच्चों की पीड़ा का अहसास किया? ऐसे ही सवाल को लेकर 30 जनवरी को अजमेर के निकटवर्ती चाचियावास स्थित मीनू मनोविकास स्कूल के परिसर में बच्चों का एक मेला आयोजित हुआ। इस मेले का शुभारंभ रेंज के आईजी श्रीमती मालिनी अग्रवाल के साथ-साथ मैंने तथा सामाजिक कार्यकर्ता सोमरत्न आर्य ने किया। इस मेले का यही उद्देश्य था कि सामान्य बच्चे दिव्यांग बच्चों की पीड़ा का अहसास करें। मेले में जो स्टॉल लगाई गई, उनके माध्यम से भी सामान्य बच्चों को बताया गया कि नेत्रहीन, मूक-बधिर, मंदबुद्धि का बच्चे किस प्रकार अपना जीवन जीते हैं। स्कूल की निदेशक क्षमा कौशिक और सीईओ राकेश कौशिक ने बताया कि आज इस मेले में सामान्य और दिव्यांग बच्चों को एक साथ शामिल किया गया है। उनकी स्वयं की संस्था में पढऩे वाले दिव्यांग बच्चों के साथ-साथ मयूर, मेयो, सेंट जोजफ दयानंद बाल निकेतन, रेयान इंटरनेशनल, सावित्री प्रेसीडेंसी आदि स्कूल के सामान्य बच्चों को भी बुलाया गया। आईजी श्रीमती अग्रवाल ने संवेदनशीलता के साथ यह जाना कि दिव्यांग बच्चों की क्या-क्या परेशानी होती है। उनका कहना रहा कि ऐसे मेले से दिव्यांग बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। जब एक मंदबुद्धि का बच्चा सामान्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेलेगा तो मंदबुद्धि वाले बच्चों का विकास तेजी से होगा। इस प्रकार यदि कोई मूक विद्यार्थी बोलने वाले विद्यार्थी के साथ काम करेगा तो हो सकता है मूक विद्यार्थी की जुबान की आवाज भी खुलने लगेगी। मेले में मेरी राय थी कि जब तक हम दिव्यांग नहीं बनेंगे तब तक उनकी पीड़ा का अहसास नहीं होगा। मैंने एक स्टॉल पर काला चश्मा लगाया और यह समझा कि नेत्रहीन व्यक्ति किस प्रकार से जीवन जीता है। सरकार ने दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए अनेक योजना चला रखी है लेकिन इन योजना का पूरा लाभ दिव्यांग बच्चों को नहीं मिलता है जबकि इन बच्चों और अभिभावकों की अपनी परेशानी होती है। कई अभिभावक ऐसे दिव्यांग बच्चों को घर में भी नहीं रख सकते। स्कूल के निदेशक कौशिक ने बताया कि उनकी संस्था में दिव्यांग और सामान्य दोनों तरह के बच्चों को पढ़ाया जाता है। दिव्यांग बच्चों का जीवन वाकई में कष्टदायक होता है लेकिन यदि नई तकनीक अपना कर बच्चों को पाला जाए तो कठिनाई कम हो सकती है। कई बार जानकारी के अभाव में बच्चों को कष्ट सहने के लिए छोड़ दिया जाता है। मेले में मेरा भी यह मानना रहा कि जिस बच्चे का जन्म हुआ है वह किसी से भी कमजोर नहीं है। यदि ईश्वर ने कष्ट दिया है तो कष्ट सहने की ताकत भी दिव्यांग बच्चों को दी है।
(एस.पी. मित्तल)  (30-01-2016)
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विदेशी सामान से कम नहीं हमारे घरेलू उत्पाद



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राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अजमेर में वैशाली नगर स्थित अरबन हाट परिसर में अमृता हाट नाम की प्रदर्शनी लगाई गई है। यह प्रदर्शनी आगामी 3 फरवरी तक चलेगी। प्रदर्शनी में प्रतिदिन होने वाले समारोह में 29 जनवरी को मुझे भी मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया। मैंने प्रदर्शनी के नियमों के मुताबिक 3 लक्की ड्रा भी निकाले और विजेताओं को इनाम भी दिए। एक हजार रुपए का सामान खरीदने पर लक्की ड्रा का कूपन दिया जाता है। प्रथम विजेता को चांदी का सिक्का, द्वितीय को आकर्षक उपहार व तृतीय को अजमेर शहर के प्रसिद्ध रसोई रेस्टोरेंट में डिनर या लंच की सुविधा है। लक्की ड्रा से पहले मुझे भी विभाग की अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन करवाया। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस प्रदर्शनी में सस्ती दरों पर उत्पाद मिल रहे है। यह उत्पाद किसी विदेशी कम्पनी के सामान से कम नहीं हैं। विदेशी कंपनी के सामान की तो गारन्टी भी नहीं होती, जबकि हाथ से बनाए गए उत्पाद को ग्राहक के सामने ही ठोक बजाकर दिया जाता है। कोटा से आई श्रीमती मोहसीना ने बताया कि उसने अपने घर पर ही साड़ी बनाने की फैक्ट्री लगा रखी है। हाथ से चलने वाले उपकरण पर वे स्वयं ही साड़ी तैयार करती हैं। कोटा डोरिया के नाम से मशहूर साड़ी 500 रुपए से लेकर 5000 तक में उपलब्ध है। धनाढ्य लोग साडिय़ों में सोने-चांदी का काम भी करवाते हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने भी अपने उत्पाद स्टॉलों पर सजा रखे है। समूह की एक कार्यकर्ता ने बताया कि जो परिधान बड़े शोरूम में पांच हजार रुपए तक मिलते है उन्हें हम यहां मात्र पांच सौ रुपए से लेकर हजार रुपए तक में बेच रहे हैं। यह सामान इसलिए सस्ता बेचा जा रहा है कि बीच में कमीशन एजेन्ट नहीं है। हमारे द्वारा तैयार उत्पाद सीधा उपभोक्ता को मिल रहा है। प्रदर्शनी में आकर्षक पौधे जो घरों के अंदर सजावट के लिए लगाए जाते है वो भी बहुत कम कीमत पर मिल रहे हैं। विदेशी कंपनियां भले ही चपाती बनाने के लिए केमिकल लगा फ्राईंगपेन बेचती हो इस प्रदर्शनी में मिट्टी से बना तवा भी मात्र 80 रुपए में उपलब्ध है। इस तवे पर तैयार रोटी का स्वाद अलग ही होता है। यानि यह प्रदर्शनी विदेशी कंपनियों को टक्कर दे रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती अनिता भदेल के निर्देश पर प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर अमृता हाट प्रदर्शनी लगाई गई है। अजमेर में अंतिम दौर है। इस प्रदर्शनी में आने वाले स्वयं सहायता समूह को नि:शुल्क दुकान उपलब्ध करवाई जाती है। यहां तक कि प्रतिनिधियों के आवास और भोजन की सुविधा भी विभाग ही उपलब्ध करवाता है। विभाग का उद्देश्य यही है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाए आत्मनिर्भर हो। शहरवासियों को इस प्रदर्शनी में खरीददारी कर सामाजिक सरोकार भी निभाना चाहिए।
अमृता हाट प्रदर्शनी में भाजपा के वरिष्ठ नेता और स्वामी कॉम्पलेक्स के मालिक कंवल प्रकाश किशनानी की भी सक्रिय भूमिका है। प्रदर्शनी को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल ने किशनानी को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ किशनानी भी प्रदर्शनी के स्टॉल लगाने वालों का ध्यान रख रहे हैं।
(एस.पी. मित्तल)  (30-01-2016)
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मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की इच्छा से तय हुए


राजस्थान लोक सेवा आयोग के तीन सदस्य
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संवैधानिक संस्थानों में ईमानदारी और निष्पक्षता के कितने भी दावे किए जाएं, लेकिन होता वही है जो सरकार का मुखिया चाहता है। 29 जनवरी की रात को राजस्थान लोकसेवा आयोग में 3 सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए। इन तीनों ही सदस्यों ने आयोग के अजमेर स्थित मुख्यालय पर 30 जनवरी को पद भार संभाल लिए। अब आयोग में अध्यक्ष सहित 7 सदस्य हो गए हैं। ऐसे में कार्य को गति मिलेगी ही। जो तीन सदस्य नियुक्त हुए उनमें डॉ. शिव सिंह राठौड़ जोधपुर, श्यामसुन्दर शर्मा झालावाड़ तथा हरिकिशन खीचड़ जयपुर के निवासी हैं। इन तीनों ही सदस्यों की नियुक्ति में मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की व्यक्तिगत पसन्द रही है। झालावाड़ के श्यामसुन्दर शर्मा पेशे से वकील हैं और वसुन्धरा राजे के सबसे विश्वासपात्र हैं। अभी हाल ही में प्रदेश में भाजपा संगठन के जो चुनाव हुए, उसकी कमान भी राजे ने शर्मा को ही दे रखी थी। झालवाड़ा से वसुन्धरा राजे चुनाव लड़े या बेटा दुष्यन्त सिंह। चुनाव का जिम्मा शर्मा के पास ही होता है। गत विधानसभा चुनाव के दौरान राजे ने जो सुराज यात्रा निकाली, उसकी कमान भी शर्मा के पास ही थी। ऐसे में शर्मा को आयोग का सदस्य बनने में कोई परेशानी नहीं हुई। अब ललित के पंवार भले ही आयोग के अध्यक्ष हों लेकिन रुतबा शर्मा का ज्यादा होगा, क्योंकि शर्मा जब चाहे तब सीएम राजे से सीधे संवाद कर सकते हैं। सम्पूर्ण सत्तारूढ़ पार्टी में पता है कि शर्मा और राजे के बीच किसी भी भूमिका नहीं है। इसी प्रकार जोधपुर के डॉ. शिव सिंह राठौड़ की नियुक्ति भी राजे की व्यक्तिगत पसन्द मानी जा रही है। हालांकि राजे का जातिवाद में कोई भरोसा नहीं है लेकिन फिर भी यह तो सत्य ही है कि राठौड़ भी राजपूत समुदाय से सम्मानित सदस्य हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि डॉ. राठौड़ की जोधपुर में जबरदस्त प्रतिष्ठा है। जोधपुर क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर पर डॉ. राठौड़ ने शोध किया है। राठौड़ ने उन कारणों का पता लगाया है जिसकी वजह से जलस्तर गिरा और साथ ही अपने शोध में सुझाव भी दिए कि किन उपायों से जलस्तर को ऊंचा किया जा सकता है। इसे एक संयोग ही कहा जाएगा कि जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत हैं तो प्रभारी मंत्री भी। गजेन्द्र सिंह खींमसर बने हुए हैं। इतना ही नहीं जोधपुर राजघराने के गज सिंह भी मुख्यमंत्री के निकट माने जाते हैं। जहां तक राठौड़ की पिछली राजनीति का सवाल है तो राठौड़ जोधपुर नगर सुधार न्यास के सदस्य रह चुके हैं तथा उपभोक्ता सहकारी भंडार के संचालन में भी भूमिका रही है। तीसरे सदस्य हरिकिशन खीचड़ सेवानिवृत जज हैं।
पहले ही दिन रुतबा उजागर:
आयोग में नवनियुक्त सदस्य श्यामसुन्दर शर्मा का रुतबा पहले दिन ही उजागर हो गया। शर्मा ने जब शपथ ली तब भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष बीपी सारस्वत, शहर अध्क्ष अरविन्द यादव सहित भाजपा के बड़े नेता उपस्थित थे। शर्मा से मुलाकात करने के लिए स्कूली शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी भी उतावले नजर आए। यदि देवनानी मंत्री नहीं होते तो शर्मा के शपथ लेने के समय आयोग के दफ्तर पहुंच जाते। शर्मा से मुलाकात करने के लिए देवनानी सर्किट हाऊस पहुंच गए। देवनानी ने सर्किट हाऊस में शर्मा को माला पहनाकर अभिनन्दन किया। भाजपा नेताओं को अच्छी तरह पता है कि शर्मा की सीधी एप्रोच मुख्यमंत्री से है।
(एस.पी. मित्तल)  (30-01-2016)
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आखिर कश्मीर में क्या चाहती हैं महबूबा मुफ्ती



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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन 7 जनवरी को हुआ था। तब यह उम्मीद थी कि अगले 2-3 दिन में पीडीपी की प्रमुख और सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री की शपथ ले लेंगी। लेकिन 30 जनवरी तक भी महबूबा ने सीएम पद की शपथ नहीं ली है और अब कहा जा रहा है कि निकट भविष्य में भी महबूबा सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगी। इतना ही नहीं महबूबा ने उस सरकारी आवास को भी खाली कर दिया है जो उनके पिता को मुख्यमंत्री रहते हुए मिला था। इससे महबूबा ने यह संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री बनने की कोई जल्दबाजी नहीं है और महबूबा मुख्यमंत्री अपनी शर्तों पर बनेंगी। सब जानते हैं कि कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार चल रही थी। 87 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 25 और पीडीपी के 27 विधायक हैं। भाजपा तो चाहती थी कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के अगले ही दिन महबूबा सीएम बन जाए। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि महबूबा अपनी शर्तों पर मुख्यमंत्री बनना चाहती है या अपने भाई को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं। हालांकि अभी महबूबा ने अपनी ओर से सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। लेकिन भाजपा पर पूरा दबाव बनाया है कि उन्हीं की शर्त पर सीएम का पद स्वीकार किया जाए। इसे भाजपा की राजनैतिक मजबूरी ही कहा जाएगा कि वह महबूबा के परिवार को मुख्यमंत्री का पद थाली में परोसकर दे रही है। आज कश्मीर के जो हालात हो गए हैं उसमें भाजपा कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है। सब जानते हैं कि महबूबा कश्मीर के अलगाववादियों का समर्थन करती रही हैं। महबूबा ने कई बार कहा है कि कश्मीर की समस्या के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान को आपस में वार्ता करनी चाहिए। भले ही महबूबा के पिता मुख्यमंत्री रहे हों लेकिन महबूबा पूरी तरह कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानती हैं। शायद इसी सोच के खातिर महबूबा चाहती हैं कि उनके भाई को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया जाए ताकि वे स्वयं पीडीपी के अध्यक्ष की हैसियत से केन्द्र सरकार की नीतियों की आलोचना करती रहे। सीएम की कुर्सी पर बैठने के बाद महबूबा के लिए अलगाववादियों का सीधा समर्थन करना संवैधानिक दृष्टि से सही नहीं होगा। महबूबा यह भी चाहती है कि कश्मीर में सेना और सीआरपीएफ को जो विशेष अधिकार मिले हुए हैं उन्हें भी खत्म किया जाएगा। इतना ही नहीं महबूबा कश्मीर से सेना की वापसी भी चाहती हैं। महबूबा यह शर्तें तब रख रही है जब कश्मीर में खुलेआम आईएस और पाकिस्तान के झंडे लहराए जा रहे हैं। यह बात अलग है कि पाकिस्तान में जब उमरदराज नाम के एक क्रिकेट प्रेमी ने आस्ट्रेलिया पर भारत की जीत के मौके पर तिरंगा झंडा फहरा दिया तो उसे जेल भेज दिया गया। उमरदराज को पाकिस्तान में देश विरोधी कृत्य करने का आरोपी माना गया है। यानि पाकिस्तान में यदि कोई नागरिक भारत का झंडा दिखा भी दे तो उसे देशद्रोही माना जाता है और कश्मीर में खुलेआम आतंकी संगठन आईएस और पाकिस्तान का झंडा लहराया जाता है। इतना ही नहीं कश्मीर की धरती पर खड़े होकर पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगाकर स्वयं को गौरवांवित महसूस करते हैं। इसके बावजूद भी महबूबा का दबाव है कि कश्मीर को और स्वतंत्रता प्रदान की जाए।
(एस.पी. मित्तल)  (30-01-2016)
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राज्यपाल ने की अजमेर के उद्यमिता केन्द्र की प्रशंसा।



सभी यूनिवर्सिटीज में चले ऐसे केन्द्र
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राजस्थान के राज्यपाल कल्याणसिंह ने अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी में चल रहे उद्यमिता केन्द्र की जमकर प्रशंसा की है। 29 जनवरी को राजभवन में कुलपति समन्वय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में अन्य मुद्दों के साथ-साथ उद्यमिता केन्द्र को लेकर भी विचार हुआ। बैठक में इस केन्द्र को चलाने वाले एमडीएस यूनिवर्सिटी के वाणिज्य संकाय के अध्यक्ष प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि केन्द्र के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के विभिन्न प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। आज अनेक महिलाएं अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हंै। इसी प्रकार बेरोजगार युवाओं को भी तकनीक से जुड़े प्रशिक्षण दिलवाए गए हैं। अब ऐसे युवा अपना निजी कार्य कर धन कमा रहे हैं। सारस्वत के प्रजेन्टेशन पर राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटीज का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना नहीं है बल्कि डिग्री लेकर निकलने वाले युवा को रोजगार उपलब्ध करवाना भी यूनिवर्सिटीज का दायित्व है और इस मामले में अजमेर एमडीएस यूनिवर्सिटी में प्रेरणादायक कार्य हो रहा है। राज्यपाल ने बैठक में उपस्थित सभी कुलपतियों से कहा कि जिस प्रकार अजमेर में काम हो रहा है उसी प्रकार सभी यूनिवर्सिटीज में होना चाहिए। कुलपतियों से कहा गया कि वे 29 फरवरी को अपनी योजना बनाकर प्रस्तुत करें।
प्रो.सारस्वत ने बताया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी पूर्व में सभी कुलपतियों को निर्देश दिए थे कि अजमेर की तर्ज पर उद्यमिता केन्द्र खोलकर युवाओं को रोजगार के प्रशिक्षण दिए जाए। सरकार की विभिन्न योजनाओं में आर्थिक सहयोग भी मिलता है। सारस्वत ने उम्मीद जताई है कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति और राज्यपाल कल्याण सिंह के निर्देश के बाद अब प्रदेशभर की यूनिवर्सिटीज में उद्यमिता केन्द्र खुलने लगेंगे। उन्होंने कहा कि यह अजमेर के लिए हर्ष की बात है कि राज्यपाल ने प्रशंसा की है।
(एस.पी. मित्तल)  (30-01-2016)
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Friday, 29 January 2016

मित्तल अस्पताल में भर्ती होने वाले रेल कर्मचारियों के भुगतान की भी जांच हो।


रेलमंत्री सुरेश प्रभु को लिखा पत्र।
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अजमेर के पुष्कर रोड स्थित प्राइवेट मित्तल अस्पताल में प्रतिमाह अनेक रेल अधिकारी एवं कर्मचारी इलाज के लिए भर्ती होते हैं। रेलवे प्रतिमाह लाखों रुपए का भुगतान मित्तल अस्पताल के प्रबंधन को करता है। जबकि अजमेर में रेलवे का अपना बड़ा अस्पताल है और एक साथ सौ मरीज अस्पताल में भर्ती रह सकते हैं। रेलवे प्रशासन अपने इस अस्पताल पर कई करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करता है। अस्पताल में रेल कर्मचारी के इलाज की अच्छी व्यवस्था है। लेकिन इसके बावजूद  भी छोटी-छोटी बीमारियों के मरीजों को रेलवे के डॉक्टर मित्तल अस्पताल के लिए रैफर कर देते हैं। जिन मरीजों का इलाज आसानी से रेलवे अस्पताल में हो सकता है। उनको भी मित्तल अस्पताल में रैफर कर दिया जाता है। जो रेल कर्मचारी रैफर होने के बाद मित्तल अस्पताल में भर्ती होता है, उसका सरा खर्च रेल प्रशासन देता है। 
गंभीर बात है कि रेलवे में अनुबंध के आधार पर जो डॉक्टर काम कर रहे है, उन डॉक्टरों की रुचि भी मित्तल अस्पताल में अधिक से अधिक मरीज भेजने की होती है। अजमेर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विनीत गर्ग ने 29 जनवरी को केन्द्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु को एक मेल भेजा है। इस मेल में बताया गया है कि मित्तल अस्पताल का प्रबंधन किस तरह इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों से मिली भगत से मेडीक्लेम की राशि का भुगतान प्राप्त करते हैं। डॉक्टर गर्ग ने रेलमंत्री से मांग की है कि पिछले एक वर्ष में रेलवे अस्पताल में जितने भी मरीज मित्तल अस्पताल रैफर किए उन सभी की बीमारियों की जांच होनी चाहिए। जांच में इस बात का पता लगाए जाए कि ऐसे मरीजों का इलाज रेलवे अस्पताल में ही क्यों नहीं हुआ? इसके साथ ही संभावित मरीज के इलाज की एवज में रेलवे से मित्तल अस्पताल को जो राशि मिली उसकी भी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। डॉक्टर विनीत गर्ग का मानना है कि इस जांच के परिणाम से अनेक लोगों के चेहरे पर से नकाब उतर जाएगी। चिकित्सा के क्षेत्र में जो महाघोटाला हो रहा है वह भी सामने आ जाएगा। 
समझौते का दबाव:
उधर मित्तल अस्पताल में गत 22 जनवरी से भर्ती श्रीनगर (अजमेर) की सरपंच श्रमती चन्द्रकांता राठी की तबीयत स्थिर बनी हुई है। श्रीमती राठी के पति दिलीप राठी ने 28 जनवरी को आरोप लगया था कि मित्तल अस्पताल का प्रबंधन और मेडीक्लेम पॉलिसी करने वाली कम्पनियों के प्रतिनिधि मिलीभगत कर वित्तिय अनियमितता कर रहे हैं। मरीज जब भर्ती होता है तो आईसीयू का किराया 4 हजार 800 रुपए बताया जाता है, लेकिन इंश्योरेन्स कम्पनी से 6 हजार 800 रुपए वसूले जाते हैं। राठी के इस आरोप के बाद अब अस्पताल प्रबंधन समझौते का दबाव बना रहा है।
(एस.पी. मित्तल)  (29-01-2016)
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भारतीय सेना के ऑपरेशन पर अंगुली उठाना मकसद नहीं।



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26 जनवरी को बाड़मेर सीमा पर पाकिस्तान से आए एक गुब्बारे को हमारे लड़ाकू सुखोई विमान से गिराए जाने लेकर 28 जनवरी को मैंने एक ब्लॉग पोस्ट किया था। इस ब्लॉग को लेकर मुझे सेना से जुड़े व्यक्तियों के फोन आए। कुछ लोगों का कहना था कि मैंने बेवजह सेना की कार्यशैली की आलोचना की है। मुझे सेना के कामकाज की जानकारी नहीं है। मुझे यह बताया गया कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि प्रांतों में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेरे इस ब्लॉग को वायरल किया है। मैं यहां यह स्पष्ट कर देना चाहता हंूं कि मैं किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा हंू। मैं हमेशा से ही देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए लिखता हंू। मैं पिछले तीस वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हंू। 28 जनवरी को भी जब मैंने पाकिस्तान के गुब्बारे पर लिखा तो मेरा मकसद भारतीय सेना के ऑपरेशन पर अंगुली उठाना नहीं था। सेना के जो जवान हमारे लिए सीमा पर गोली खा रहे हैं, उनकी कार्यशैली दोषपूर्ण हो ही नहीं सकती है। पाकिस्तान के गुब्बारे को ध्वस्त करने के लिए लड़ाकू विमान सुखोई का इस्तेमाल सेना के बड़े अधिकारियों ने सोच-समझ कर ही किया होगा। मैंने जब यह ब्लॉग लिखा तब मेरे मन में यही भाव था कि एक चूहे को मारने के लिए शेर का उपयोग किया गया। मेरी नजर में भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की सेना चूहे के समान ही है। हो सकता है कि चूहे की खतरनाक स्थिति को देखते हुए सेना को शेर जैसी कार्यवाही करनी पड़ी, क्योंकि इसी चूहे ने हाल ही में पंजाब के पठानकोट के एयरफोर्स बेस पर भारी नुकसान किया था। हमारी सेना देश की सीमाओं पर ही नहीं बल्कि देश के अंदर भी अलगाववादियों, नक्सलियों, आंतकियों आदि से लड़ रही है। हमारे जवानों का हौंसला हमेशा बुलंद रहना चाहिए। 
(एस.पी. मित्तल)  (29-01-2016)
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अजमेर प्रशासन में कलेक्टर की दहशत।



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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खुले संरक्षण की वजह से अजमेर जिला प्रशासन में कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक की दहशत है। सिटी मजिस्ट्रेट हरफूल सिंह यादव को प्रभावहीन करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि जिला रसद अधिकारी सुरेश सिंधी के कामकाज को लेकर राज्य के कार्मिक विभाग को शिकायती पत्र लिख दिया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि सुरेश सिंधी बिना स्वीकृति के अवकाश पर चले जाते हैं और अपने विभाग का काम भी संतोषजनक तरीके से नहीं करते। चूंकि यह पत्र कलेक्टर ने लिखा है इसलिए माना जा रहा है कि सिंधी को चार्जशीट मिल सकती है।  हालांकि सिंधी भी पुराने और होशियार अधिकारी माने जाते हैं, लेकिन कलेक्टर ने जिस तरह से बड़ी कार्यवाही की है, उससे पूरे प्रशासन में दहशत है। ऐसे माहौल को देखते हुए ही अतिरिक्त कलेक्टर प्रशासन किशोर कुमार पुरजोर कोशिश कर रहे हंै कि अजमेर से स्थानांतरण हो जाए। लेकिन जैसे-तैसे कुमार तो अपना काम कर ही रहे हैं। दहशत के इस माहौल में एसडीओ हीरालाल मीणा और सहायक कलेक्टर राधेश्याम मीणा निर्डर होकर काम कर रहे है, क्योंकि बड़े अधिकारियों के काम इन दोनों जूनियर अधिकारियों से करवाए जा रहे हैं।  पीडि़त प्रशासनिक अधिकारियों ने अजमेर के प्रभारी मंत्री वासुदेव देवनानी के समक्ष अपनी पीड़ा का इजहार किया है, लेकिन देवनानी एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं। इसलिए किसी भी दखलंदाजी से बचे रहे हैं। देवनानी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि वे प्रभारी मंत्री की हैसियत से जो सरकारी मीटिंग लेते हैं, उसमें कलेक्टर भी शामिल हो जाती हंै। देवनानी को अच्छी तरह पता है कि यदि कलेक्टर न आए तो वे कुछ भी नहीं कर सकते हैं। देवनानी पीडि़त अफसरों की मदद करने के बजाए अपनी बैठकों को गरिमा और सम्मान के साथ सम्पन्न करवाने में ज्यादा रुचि रखते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि देवनानी एक अनुभवी राजनेता की भूमिका निभा रहे हैं। माना जा रहा है कि दो वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। इसलिए डॉ. आरुषि मलिक का अजमेर से स्थानांतरण हो जाएगा, लेकिन जानकारों की माने तो कलेक्टर आगामी अप्रैल माह से पहले अजमेर से नहीं जाएंगी। कलेक्टर ने गांवों में शौचालय निर्माण में पूरे प्रदेश में अजमेर को नम्बर वन बना रखा है। ऐसे में 31 मार्च तक कलेक्टर इस अभियान को और आगे तक ले जाएंगी। ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि अभियान के अंतर्गत पुरस्कार प्राप्त कर सकें। यह बात अलग है कि सरकार ने दो करोड़ रुपए में से 52 लाख रुपए का भुगतान भी सुलभ शौचालय के लिए किया है। इसे कलेक्टर की प्रशासनिक कुशलता ही कहा जाएगा कि सरकारी धनराशि के अभाव में भी गांव-गांव में शौचालयों का निर्माण कर दिया है। जिन अधिकारियों ने ग्रामीणों की मदद से शौचालय बनवाए हंै, उन्हें पूरी उम्मीद है कि कलेक्टर मलिक अपने प्रभाव से बकाया राशि का भुगतान करवाएंगी। ऐसे अधिकारी भी नहीं चाहते है कि अभी कलेक्टर का तबादला हो जाए तो शौचालयों के निर्माण की राशि खतरे में पड़ सकती है। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-01-2016)
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Thursday, 28 January 2016

मित्तल अस्पताल और मेडीक्लेम पॉलिसी कंपनियों के बीच मिलीभगत उजागर।



अस्पताल में हुआ हंगामा।
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अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल के प्रबंधन और मेडीक्लेम पॉलिसी करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच मिली भगत होने का एक मामला 28 जनवरी को उजागर हुआ है। आरोपों को सही माने तो कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर मित्तल अस्पताल का प्रबंधन खुलेआम वित्तीय अनियमितताएं कर रहा है। 28 जनवरी को इस मुद्दे को लेकर अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा भी हुआ। अब मित्तल अस्पताल का प्रबंधन आरोप लगाने वालों के सामने गिड़गिड़ाने की स्थिति में खड़ा है। अजमेर जिले के श्रीनगर कस्बे में रहने वाले दिलीप राठी ने बताया कि उसकी पत्नी श्रीमती चन्द्रकांता श्रीनगर की सरपंच हैं। चन्द्रकांता को दिल की बीमारी की वजह से 22 जनवरी को मित्तल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में ले जाते ही डॉक्टरों ने पत्नी को वेंटीलेटर पर रखने की आवश्यकता जताई। लेकिन पत्नी की स्थिति को देखते हुए हमने वेंटीलेटर पर रखने से मना कर दिया। फिर डॉक्टरों ने अपने स्तर पर निर्णय कर पत्नी को आईसीयू में भर्ती कर लिया। भर्ती के समय बताया गया कि आईसीयू के 4 हजार 800 रुपए प्रतिदिन लगेंगे तथा सिटी स्केन का 2 हजार 100 रुपए का शुल्क होगा। हमने इन शुल्कों पर सहमति दे दी, लेकिन 28 जनवरी को हमें पता चला कि आईसीयू रूम के 6 हजार 800 रुपए प्रतिदिन तथा सिटी स्कैन के 2 हजार 800 रुपए बिल में लगाए गए हैं। इतना ही नहीं रविवार को किसी भी डॉक्टर ने चन्द्रकांता के स्वास्थ्य की जांच नहीं की। लेकिन इसके बावजूद भी बिल में डॉक्टर का विजिट चार्ज शामिल था। इस पर हमने अस्पताल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्यामसुंदर सोमानी के समक्ष नाराजगी प्रकट की, तो सोमानी का कहना रहा कि आपकी पत्नी की यूनाईटेड इश्योरेंस कंपनी से मेडीक्लेम पॉलिसी है। आपको तो अस्पताल का सारा खर्च कंपनी से मिल जाएगा। सोमानी का यह भी कहना रहा कि आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। कंपनी से हम पूरा भुगतान प्राप्त कर लेंगे। 
दिलीप राठी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन का यह जवाब सुनकर मुझे बेहद आश्चर्य हुआ। चूंकि मेरी पत्नी जनप्रतिनिधि है और मैं स्वयं भी वार्ड पंच हंू। इसलिए मुझे यह उचित नहीं लगा कि मिली भगत से देश के संसाधनों का नुकसान हो। राठी ने कहा कि पॉलिसी का प्रीमियम  तो ग्राहक देता है,लेकिन उसका फायदा मित्तल अस्पताल का प्रबंधन उठा रहा है। राठी ने कहा कि अब इस मामले की शिकायत प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ से जी जाएगी। इसके साथ ही यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी के बड़े अधिकारियों का भी ध्यान आकर्षित किया जाएगा कि किस प्रकार अजमेर में कंपनी के प्रतिनिधि मित्तल अस्पताल के प्रबंधन से मिलकर देश का नुकसान कर रहे हैं। राठी ने बताया कि जब अस्पताल प्रबंधन की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई तो अब वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोमानी और अन्य अधिकारी समझौता करने की बात कह रहे हैं। सोमानी का कहना है कि बिलिंग करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही से कुछ गड़बड़ी हो गई है। राठी ने स्पष्ट कहा है कि वे मित्तल अस्पताल के प्रबंधन से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। क्योंकि यह राष्ट्रीय हित का मामला है। इस बात की जांच होनी ही चाहिए कि अस्पताल प्रबंधन मेडीक्लेम वाले मरीजों से ज्यादा शुल्क क्यों वसूलता है?
(एस.पी. मित्तल)  (28-01-2016)
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पाक के गुब्बारे पर हमारा सुखोई हमला।



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यह कोई वाह-वाही लूटने की बात नहीं है कि पाकिस्तान से आए एक गुब्बारे को हमारे लड़ाकू सुखोई विमान ने फायर कर उड़ा दिया। सवाल यह है कि आखिर हमें एक गुब्बारे के लिए सुखोई जैसे लड़ाकू विमान का इस्तेमाल क्यों करना पड़ा? सरकार और सेना बार-बार यह दावा करते हैं कि हमारे पास ऐसी दूरबीन है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर तक देख सकती है। इन दूरबीनों से ही देश की सीमा की रक्षा होती है। 26 जनवरी को बाड़मेर की सीमा पर पाकिस्तान की ओर से एक गुब्बारा उड़ कर आया तो जोधपुर स्थित एयर फोर्स बेस में खलबली मच गई। गुब्बारे टुकड़े-टुकड़े करने के लिए जोधपुर से हमारा सुखाई लड़ाकू विमान उड़ा और 79 फायर कर गुब्बारे को ध्वस्त कर दिया। इससे प्रतीत होता है कि हमारे जवानों ने गुब्बारे को एक ऐसा उपकरण समझा जो भारत को नुकसान कर सकता था। इसलिए सुखोई से 79 राउंड फायर करवाए। यह सही है कि देश की सुरक्षा के लिए कोई चूक नहीं होनी चाहिए। इस लिहाज से सेना की कार्यवाही उचित मानी भी जा सकती है। लेकिन हमें भविष्य में यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि आखिर दुश्मन के किस हथियार का मुकाबला हमारे किस हथियार से किया जाए। यदि हम पाकिस्तान के एक गुब्बारे को ध्वस्त करने के लिए लड़ाकू विमान का उपयोग करेंगे तो कभी पाकिस्तान की ओर से मानव रहित हेलीकॉप्टर आ गया तो क्या हम तोप, टेंक, मिसाइल और सुखोई आदि का इस्तेमाल करेंगे? गुब्बारे को ध्वस्त करने के बाद गुब्बारे के मलबे को ढूंढने के लिए भी सेना ने दो हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया। गुब्बारे के टुकड़े बाड़मेर की सीमा से 250 किमी दूर पाली जिले के गांव गुंदोज में मिले। इस घटना से सेना को सबक लेने की जरुरत है। ऐसा नहीं कि पाकिस्तान से उड़कर आया गुब्बारा कोई छोटा सा था। सेना के अनुसार ही गुब्बारा 10 फीट लम्बा और तीन मीटर व्यास का था। यानि इस गुब्बारे को नंगी आंखों से भी आसानी से देखा जा सकता था। क्या सेना के किसी विशेषज्ञ ने गुब्बारे को नहीं देखा? सेना की चौकसी के मुताबिक तो गुब्बारा जब पाकिस्तान की सीमा के आसमान पर उड़ रहा था, तभी हमारी नजर पहुंच जानी चाहिए थी। क्या भारतीय आसमान में घुसने के बाद सेना को पाकिस्तान का गुब्बारा नजर आया? हमारे सैनिकों की वीरता पर किसी को भी संदेह नहीं है, लेकिन यदि इस मामले में कोई चूक हुई है तो उसे भविष्य में रोकने की सख्त जरुरत है। 
(एस.पी. मित्तल)  (28-01-2016)
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स्मार्ट सिटी में अजमेर फेल।



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28 जनवरी को केन्द्रीय नगरीय विकास मंत्री वेकैंया नायडु ने देश के जिन 20 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की है, उसमें अजमेर शामिल नहीं है। इस सूची में राजस्थान के जयपुर और उदयपुर शहर को ही शामिल किया गया है। जयपुर तीसरे नम्बर पर तथा उदयपुर 16वें नम्बर पर आया है। जबकि अजमेर स्मार्ट सिटी के मापदंडों पर फिलहाल खरा नहीं उतरा है। 
राज्य सरकार ने जयपुर, उदयपुर के साथ-साथ अजमेर और कोटा को भी स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था, लेकिन केन्द्र सरकार ने अजमेर और कोटा को पहले चरण में शामिल नहीं किया है। केन्द्र सरकार की घोषणा के मुताबिक स्मार्ट सिटी के लिए जो भौगोलिक स्थिति और संसाधन चाहिए, उससे जयपुर और उदयपुर ही खरे उतरते हैं। अजमेर और कोटा में वे हालात नहीं है, जिनके अंतर्गत इन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाया जाए। 
राजनीतिक कमजोरी:
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केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी की सूची में अजमेर का नाम नहीं आने का कारण अजमेर में राजनीतिक कमजोरी माना जा रहा है। अजमेर में इस समय सत्तारुढ़ भाजपा नेताओं की स्थिति बहुत मजबूत है, लेकिन जिले के किसी भी  नेता में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अथवा केन्द्रीय नगरीय विकास मंत्री वैंकेया नायडु के समक्ष अपनी बात को दमदार तरीके से रख सकें। कहने को भाजपा के 7 विधायकों में से 3 राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है। वासुदेव देवनानी स्कूली शिक्षा मंत्री, अनिता भदेल महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री हंै। जबकि पुष्कर के विधायक सुरेश सिंह रावत को हाल ही में संसदीय सचिव बनाकर उपकृत किया गया है। इतना ही नहीं अजमेर से जुड़े औंकार सिंह लखावत राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं, जबकि भूपेन्द्र सिंह यादव भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व राज्यसभा सांसद हैं। इसके साथ ही अजमेर के सांसद सांवरलाल जाट केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री है। राजनीतिक दृष्टि से इतनी मजबूत स्थिति होने के बाद भी स्मार्ट सिटी की दौड़ में अजमेर का फेल हो जाना इन राजनेताओं के लिए शर्म की बात होनी चाहिए। अजमेर नगर निगम पर भाजपा का ही कब्जा है तथा हाल ही में अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के पद पर भाजपा के वरिष्ठ नेता शिव शंकर हेड़ा की नियुक्ति की गई है। 
सबसे पहले हुई थी घोषणा:
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नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने देश के तीन प्रमुख शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी। इन तीन शहरों में अजमेर भी शामिल था। अजमेर के लिए तो अमरीका के साथ समझौता भी किया। लेकिन अजमेर के भाजपा नेताओं के आपसी झगड़ों और कमजोरी की वजह से अजमेर स्मार्ट सिटी की दौड़ में फेल हो गया। इसके लिए पूरी तरह अजमेर के भाजपा नेता दोषी हंै। यदि अजमेर के नेताओं में एक जुटता होती तो बीस शहरों में अजमेर का नाम भी शामिल होता। 
निगम बनाएगा स्मार्ट:
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स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल नहीं होने पर मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का कहना है कि अब नगर निगम अपने संसाधनों से ही अजमेर को स्मार्ट बनाएगा। उन्होंने माना कि मास्टर प्लान की जटिलताओं को लेकर भी शहर में अनेक योजनाएं क्रियान्विति नहीं हो पा रही हैं। 
(एस.पी. मित्तल)  (28-01-2016)
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महिलाएं क्यों नहीं चढ़ा सकती शनि मंदिर में तेल।



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महाराष्ट्र के शनि सिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के तेल चढ़ाने को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है, कोई भी व्यक्ति इस बहस से दूर नहीं रहना चाहता है। जो लोग धर्म में दखलंदाजी के पक्षधर हैं वो भी इस आग लगाने वाली बहस में घी डालने का काम कर रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से लेकर आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेयता श्रीश्री रविशंकर भी इस बहस में कूद पड़े हैं। सबको लगता है कि यदि धर्म की परंपराओं में बदलाव की जरुरत है तो उसे समय के साथ किया जाना चाहिए। यानि सब लोग चाहते हैं कि महाराष्ट्र के शनि मंदिर में महिलाएं प्रवेश करें और प्रतिमा पर तेल चढ़ाएं। यह बात अलग है कि इस शनि मंदिर में महिला के प्रवेश नहीं देने की परंपरा बरसों पुरानी हैं। लेकिन अब लोग चाहते हैं कि महिला और पुरुष में भेदभाव करने वाली इस परंपरा को तोड़ दिया जाए। चूंकि यह परंपरा हिन्दू धर्म से जुड़ी हुई है, इसलिए इसे महिला और पुरुष की समानता से जोड़ा जा रहा है। यदि मंदिर के ट्रस्ट ने महिलाओं को तेल चढ़ाने की अनुमति नहीं दी तो दुनिया भर में यह प्रचारित होगा की भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। हो सकता है कि इस मुद्दे को आगे चलकर महिलाओं के साथ असहिष्णुता से जोड़ दिया जाए। 
जहां तक शनि सिंगणापुर मंदिर के ट्रस्ट का सवाल है तो भी हाल ही में इस ट्रस्ट का अध्यक्ष अनिता शेट्टी नाम की एक महिला को बनाया गया है। इतना ही नहीं शालिनी लांडे नाम की एक और महिला को ट्रस्ट का सदस्य नियुक्त किया गया है। यानि समय के साथ धार्मिक परंपराओं में जो बदलाव की बयार आ रही है, उससे शनि मंदिर भी अछूता नहीं है। इस मंदिर में महिलाएं प्रवेश करें और प्रतिमा पर तेल चढ़ाए, यह मामला क्या मंदिर ट्रस्ट पर नहीं छोड़ा जा सकता है?  क्या जिस ट्रस्ट की अध्यक्ष महिला है, वह ट्रस्ट महिलाओं के साथ कोई भेदभाव करेगा? हो सकता है कि भविष्य में ट्रस्ट ही महिलाओं को प्रवेश का निर्णय ले ले। लेकिन इस मुद्दे पर जिस तरह राजनीति और टीवी चैनलों पर बहस हो रही है, उसे उचित नहीं माना जा सकता। अधिकांश चैनलों पर महिलाएं ही एंकर का काम करती हैं और ऐसी टीवी एंकर नोएडा और मुम्बई के स्टूडियों में बैठकर किसी से भी कुछ भी सवाल पूछ सकती है। भले ही ऐसे टीवी पत्रकारों को मंदिर की धार्मिक परंपराओं की कोई जानकारी न हो। सवाल उठता है कि क्या शनि मंदिर में तेल चढ़ा देने से महिलाएं पुरुषों की बराबरी कर लेंगी? भारतीय संस्कृति में तो महिला को देवी स्वरूप माना गया है। ऐसे में हिन्दू संस्कृति में तो महिलाओं के साथ भेदभाव हो ही नहीं सकता। जब कभी भेदभाव की बात सामने आती है तो उसमें पुरुष का स्वार्थ होता है। जो लोग भारतीय संस्कृति को थोड़ा बहुत भी समझते हैं, उन्हें अच्छी तरह पता है कि हिन्दू धर्म में महिलाओं के साथ कभी भी भेदभाव नहीं होता। मेरी नजर में शनि मंदिर में तेल चढ़ाने का मुद्दा महिला-पुरुष की समानता का है ही नहीं। यह शनि सिंगणापुर मंदिर के निजी ट्रस्ट का विषय है। खगोल विज्ञान में तो शनि को एक ग्रह माना गया है और इस ग्रह का ही पूरे ब्रह्मांड पर असर पड़ता है, जिससे न पुरुष और न महिला अछूती है।
(एस.पी. मित्तल)  (28-01-2016)
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Wednesday, 27 January 2016

ब्लासम स्कूल के विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति।



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अजमेर के वैशाली नगर स्थित ब्लोसम सीनियर सैकंडरी स्कूल में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का समारोह उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। समारोह में मैंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उत्सव मंच के संस्थापक राकेश आनंदकर और मैंने विद्यार्थियों को पारीतोषिक दिए। समारोह में स्कूल के निदेशक  अशोक कश्यप ने स्कूल की गतिविधियों की जानकारी दी। समारोह में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के छात्र छात्राओं ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों का अभिभावकों ने भी आनंद उठाया। समारोह में मैंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और मनोरंजन की गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए। स्कूली बच्चों को न केवल मोबाइल से परहेज करना चाहिए बल्कि अपने माता-पिता का भी सम्मान करना चाहिए। शिक्षकों का यह दायित्व है कि वह बच्चों को घर परिवार में रहने की नैतिक शिक्षा दें। अभिभावक भी अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखे। इंटरनेट तकनीक का उपयोग सिर्फ पढ़ाई के लिए होना चाहिए। आधुनिकता की वजह से जो सामाजिक बुराइयां उत्पन्न हो रही है। उससे विद्यार्थियों को खतरा बढ़ गया है। 

(एस.पी. मित्तल)  (27-01-2016)
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पलाड़ा के समस्या समाधान शिविर में मंत्री और कलेक्टर पहुंचे।



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भाजपा विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा और उनके पति व समाजसेवी भंवरसिंह पलाड़ा ने 27 जनवरी को मसूदा विधानसभा क्षेत्र के देवलियावास गांव में समस्या समाधान शिविर आयोजित किया। इस शिविर में अजमेर जिले के प्रभावी मंत्री वासुदेव देवनानी, प्रभारी सचिव श्रीमत पांडे, जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक आदि बड़े अधिकारियों ने अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। इस मौके पर देहात भाजपा के अध्यक्ष बी.पी.सारस्वत भी उपस्थित रहे। देवनानी और बड़े अधिारियों ने पलाड़ा दम्पत्ति को इस बात के लिए शाबाशी दी कि वे अपने स्तर पर शिविर लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करवा रहे हैं। शिविर में पलाड़ा ने कहा कि शिविर में 22 विभागों के कर्मचारी और अधिकारी उपस्थित हैं और मौके पर ही नामांतरण, पेंशन,जाति प्रमाण पत्र, विकलांगता आदि की समस्याओं का समाधान किया जाता है। आए हुए सभी ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच भी शिविर में होती है। उन्होंने बताया कि शिविरों में 20 लाख रुपए की लागत के कम्बल और आटे का वितरण जरूरतमंद ग्रामीणों को किया जा रहा है। आज भी निकटवर्ती चार ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शिविर में उपस्थित हैं। वे इस शिविर में तब तक बैठे रहेंगे, जब तक एक एक ग्रामीण की समस्या का समाधान न हो जाए। पलाड़ा ने बताया कि पिछले दिनों ही जयपुर में वसुंधरा राजे को शिविर की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। तब राजे ने कहा कि ऐसे शिविर हर विधायक को अपने विधानसभा क्षेत्रों में लगाने चाहिए। इसके साथ ही पलाड़ा ने इस बात पर अफसोस जताया कि शिविर में बड़े अधिकारी शामिल नहीं होते हैं। इसलिए जिला स्तर की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है। पलाड़ा ने कलेक्टर से आग्रह किया कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दे कि शिविर में आएं। पलाड़ा ने अपने अंदाज में कहा कि शिविर में जो इतने विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों  की उपस्थित है, वह उनकी राठौड़ की वजह से हैं,जबकि होना यह चाहिए कि ऐसे शिविर में जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी स्वयं उपस्थित रहें। पलाड़ा ने कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं  गांव मं जाकर समस्याएं जान रही हंै तो फिर अधिकारियों को हमारे शिविर में आने में शर्म क्यों आ रही है? हमारे शिविर में दो से तीन हजार ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं। क्या अफसरों की यह जवाबदेही नहीं है कि वे शिविर में आकर समस्याओं का समाधान करंे। पलाड़ा ने देवनानी, श्रीमंत पांडे, कलेक्टर आदि का आभार जताया कि आज शिविर में आए है,वहीं देवनानी ने कलेक्टर मलिक से कहा कि वे पलाड़ा के शिविर में अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिलवाएं। कलेक्टर मलिक ने भी कहा कि भविष्य में विधायक के शिविरों में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि विधायक प्रशासन का ही अंग होते हैं। जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर समस्याओं का समाधान करते हैं। 
समारोह में कलेक्टर ने कहा कि ऐसे शिविरों से आम लोगों को तत्काल राहत मिलती है। समारोह में प्रभारी सचिव पांडे ने पलाड़ा दम्पत्ति की समाजसेवा की जमकर तारीफ की। शिविर में श्रीमती पलाड़ा ने कहा कि वे विधायक पद के वेतन का उपयोग अपने निजी कार्यों में नहीं करती है। वेतन की राशि कन्या विवाह में खर्च की जाती है। इसी प्रकार पलाड़ा का कहना रहा कि मसूदा विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं के अलावा कुछ भी नहीं है। यहां युवाओं के रोजगार के लिए कोई फैक्ट्री अथवा बड़ा उद्योग नहीं है। आमतौर पर ग्रामीण नरेगा के कार्यों पर ही निर्भर है। पलाड़ा ने देवनानी से शिकायत के लहजे में कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक तक नहीं है। ऐसे में बच्चे पढ़ाई कर नहीं कर पा रहे हैं। 
बग्गी में निकली सवारी:
समस्या समाधान शिविर से पहले प्रभारी मंत्री देवनानी को बेगलियावास गांव में बग्गाी में घुमाया गया। इस बग्गी में देवनानी के साथ पलाड़ा दम्पत्ति भी बैठे। ग्रामीणों ने पलाड़ा दम्पत्ति के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। उत्साही युवाओं ने आतिशबाजी भी की। 
मंदिर के दर्शन:
देवनानी और पलाड़ा दम्पत्ति ने इससे पहले गांव के राधाकृष्ण मंदिर में दर्शन भी किए। मंदिर के उपासक राधेश्याम शर्मा ने प्रसाद वितरण किया। 
(एस.पी. मित्तल)  (27-01-2016)
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मुख्यमंत्री जल स्वाबलंबन समारोह में नोटों की बरसात।



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27 जनवरी को अजमेर जिले के बांदनवाड़ा कस्बे में मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन योजना का जिला स्तरीय समारोह हुआ। इस समारोह में जिले के प्रभारी मंत्री वासुदेव देवनानी जिला प्रमुख वंदना नोगिया, संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत, विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के साथ-साथ रेंज की आईजी श्रीमती मालिनी अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक नितिन दीप ब्लग्गन, कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक, जिले के प्रभारी सचिव श्रीमत पांडे आदि उपस्थित थे। समारोह के शुभारंभ में कलेक्टर मलिक का कहना रहा कि बरसात के पानी के संरक्षण के लिए सरकार ने जल स्वालम्बन की जो योजना चलाई है, उसमें जन सहयोग जरूरी है। प्रशासन और सरकार अपने बूते पर योजना को सफल नहीं बना सकते। जिस व्यक्ति के पास दान करने के लिए जो भी साधन हो, उसे इस योजना में दान किया जाए। कोईव्यक्ति श्रमदान कर सकता है तो कोई अपनी जेसीबी ट्रेक्टर आदि से खुदाई का काम कर सकताहै। धनाढ्य व्यक्ति धनराशि देकर सहयोग कर सकते हैं। कलेक्टर ने कहा कि विधायक भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जनसहयोग से धनराशि एकत्रित करें और क्षेत्र में जल संरक्षण का काम करवावें। जो कुए-बावड़ी सूख गए हैं उन्हें फिर से चालू करवाया जाए। जिला प्रशासन भी अपने स्तर पर पूर्ण सहयोग करेगा। कलेक्टर के इस आह्वान के बाद पुष्कर के विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने घोषणा की कि वे अपने क्षेत्र से पचास लाख रुपए एकत्रित कर इस योजना में लगाएंगे। इसके साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक सुशील कंवर पलाड़ा के पति भंवर सिंह पलाड़ा ने घोषणा की है कि वे मसूदा विधानसभा क्षेत्र से 61 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाएंगे। पलाड़ा ने यह भी कहा कि प्रभारी मंत्री वासुदेव देवनानी अपने उत्तर विधानसभा क्षेत्र से जो राशि उपलब्ध करवाएंगे, उसकी मैं डबल राशि दूंगा। यदि देवनानी ने एक करोड़ रुपए अपने क्षेत्र से दिलवाए तो में मसूदा क्षेत्र से दो करोड़ रुपए दिलवाऊंगा। पलाड़ा ने देवनानी को समारोह में ही चुनौती दी कि वे अपनी सहयोग राशि की घोषणा इसी वक्त करे। लेकिन देवनानी पलाड़ा के जाल से बचते हुए निकल गए। देवनानी ने कहा कि मैं तो जिले का प्रभारी मंत्री हंू, इसलिए मेरी जिम्मेदारी तो सम्पूर्ण जिले की है, लेकिन फिर भी उत्तर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना के अंतर्गत कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। इसके साथ ही पलाड़ा ने कलेक्टर से दो टूक शब्दों में कहा कि मसूदा विधानसभा क्षेत्र से जो राशि दी जाएगी, वह इसी क्षेत्र में खर्च होनी चाहिए। जबकि कलेक्टर का कहना था कि यह राशि मुख्यमंत्री  कोष में जमा होगी और फिर जहां जरुरत होगी, वहां खर्च किया जाएगा। समारोह में देहात भाजपा के अध्यक्ष बी.पी.सारस्वत ने कहा कि उनकी ओर से एक लाख 11 हजार रुपए की राशि सरकार के खजाने में जमा करवा दी गई है। 
नेताओं-अफसरों को माला न पहनाएं:
रामस्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर रामदयाल महाराज ने समारोह में कहा कि समारोहों में नेताओं और अफसरों को माला नहीं पहनाई जानी चाहिए। जो 10-20 या 50-100 रुपए मालाओं आदि पर खर्च किए जाते हैं, उस राशि को गायों के संरक्षण में खर्च किया जाए। नेता और अफसर गले में माला पहने और गोशालाओं में गाय भूखी मर जाए, ऐसा नहीं होना चाहिए। जल स्वालम्बन योजना का स्वागत करते हुए महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जो शुरुआत की है, वह जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कलेक्टर आरुषि मलिक के नेतृत्व में अजमेर जिले में योजना की क्रियान्वित प्रभावी तरीके से होगी। 
माला साफा नहीं पहनेंगे:
देहात भाजपा के जिला अध्यक्ष बी.पी. सारस्वत ने समारोह में ही घोषणा की कि अब अजमेर जिले में देहात भाजपा की ओर से जो भी आयोजन होंगे। उनमें कोई भी नेता माला और साफा नहीं पहनेंगे। वे स्वयं भी इसी समारोह में संकल्प ले रहे हैं कि अब भविष्य में कभी भी माला साफा नहीं पहनेंगे। 
संतों की उपस्थिति:
समारोह में मसाणिया भैरव धाम के उपासक चम्पालाल महाराज और विभिन्न सम्प्रदाय के धर्मगुरु भी उपस्थित रहे। सभी ने मुख्यमंत्री की इस योजना को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। संतों काकहना रहा कि भारतीय संस्कृति में जल को देवता की उपमा दी गई है। इसलिए हर व्यक्ति को जल आ अनादर नहीं करना चाहिए। 
देवनानी ने उठाई तगारी:
समारोह के बाद नाड़ी की खुदाई का काम भी किया गया। प्रभारी मंत्री देवनानी ने मिट्टी से भरी तगारी को अपने सिर पर रख अन्यंत्र फेंका।
(एस.पी. मित्तल)  (27-01-2016)
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Tuesday, 26 January 2016

आसान नहीं रहा 1000 नम्बर के ब्लॉग तक पहुचना। सबका शुक्रिया।


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इसे एक संयोग ही कहा जाएगा कि मेरा 1000वां ब्लॉग देश के गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2016 को आ रहा है। मैं अपने इस ब्लॉग को देश के जवानों को समर्पित कर रहा हंू। जो जवान देश की रक्षा के खातिर शहीद हुए हैं। उनके माता-पिता और अन्य परिजन के चरणों में भी यह ब्लॉग रखा जा रहा है।
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मेरा यह ब्लॉग 1000 नम्बर वाला है। इस ब्लॉक को लिखते हुए मुझे बेहद खुशी और संतोष है, लेकिन इसके साथ ही आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। कोई सालभर पहले मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था। पठकों ने मुझे जो स्नेह प्यार और मार्गदर्शन दिया, उसी की वजह है कि अब में उत्साह के साथ रोजाना ब्लॉग लिख रहा हंू। मैं कोई तीस वर्ष से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हंू। मैंने जहां दैनिक भास्कर में मुख्य संवाददाता के रूप में काम किया, तो वहीं राष्ट्रदूत में लम्बे अर्से तक ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया। वर्तमान में भी मैं अजमेर में पंजाब केसरी के ब्यूरो ऑफिस का प्रभारी हंू। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया के व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर आदि पर लिखने का अपना अंदाजा और लोकप्रियता है, लेकिन इसके साथ ही जवाबदेही भी ज्यादा है। यदि  कोई बात गलत लिखी गई है तो हाथों हाथ आलोचना का शिकार होना पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण 24 जनवरी का ब्लॉग है। बीकानेर के दिग्गज भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार पर जो टिप्पणी की उसमें मैंने भाटी को भाजपा का विधायक लिख दिया, जबकि भाटी इस बार चुनाव हार गए थे। इस गलती को लेकर न केवल फोन आए बल्कि सोशल मीडिया पर मेरी आलोचना भी हुई। पाठकों की आलोचना सिर माथे पर। इससे यह प्रतीत होता है कि मेरे ब्लॉग को पाठक कितनी गंभीरता के साथ पढ़ता है और फिर अपनी प्रतिक्रिया देता है। राजस्थान का शायद ही कोई शहर होगा, जहां मेरा ब्लॉग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए न पढ़ा जाता हो। जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर जैसे बड़े शहरों में तो कई ग्रुप जुड़े हुए हैं। इससे अतिरिक्त देश के बड़े शहरों में  भी इसी तकनीक से ब्लॉग पढ़ा जा रहा है। मैं प्रतिदिन कोई 500 व्हाट्सएप ग्रुप में ब्लॉग पोस्ट करता हंू। इसके अतिरिक्त spmittal.blogspot.in के माध्यम से कोई 50 हजार पाठक जुड़े हुए हैं। मेरा अनुमान है कि 50 हजार से भी ज्यादा पाठक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सीधे मुझसे जुड़े हुए हंै। सैकड़ों पाठक अपनी पसंदीदा पोस्ट को दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट करते हैं। इसका मुझे अंदाजा नहीं कि कितने लोग पढ़ते होंगे। फेसबुक पर भी पांच हजार तक सदस्य जुड़ चुके हैं।
अजमेर जिले के गांव ढाणी तक के व्हाट्सएप गु्रप जुड़े हुए हैं। अब मेरे पास गांव की खबरें भी प्राथमिकता के साथ आती हैं और कई बार में इन खबरों का अपने ब्लॉग में उपयोग भी करता हंू। मेरे ब्लॉग पर जो प्रतिक्रियाएं प्राप्त होती है। मेरा प्रयास होता है कि सबका जवाब दे सकंू। लेकिन कई बार समय के अभाव की वजह से जवाब देना संभव नहीं होता है। मैं यह बताना चाहता हंू कि व्हाट्सएप के पांच सौ ग्रुप में ब्लॉग पोस्ट करने के लिए दो मोबाइल फोन का उपयोग होता है। इसमें मुझे रोजाना कई घंटे लगते हैं। इसलिए यदि में कभी प्रतिक्रियाओं का जवाब न दंू तो पाठक मुझे क्षमा करेंगे। मेरे ब्लॉग पर जो प्रतिक्रिया आती है, उससे मेरी हौंसला अफजाई होती है। मेरा सभी जागरुक पाठकों से आग्रह है कि अपनी प्रतिक्रिया देना जारी रखे। कई बार इन्हीं प्रतिक्रियाओं से नया ब्लॉग लिखने की प्रेरणा मिलती है। 
इस मौके पर में यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हंू कि मैं सभी धर्मों का मान सम्मान करता हंू। चूंकि मेरी अपनी कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं है। इसलिए में आम व्यक्ति के मन की बात ब्लॉग में लिखता हंू, हो सकता है कि कई बार मन की बात समझने में गलती हो जाए, लेकिन मेरी दुर्भावना कभी भी नहीं रहती है। मेरा हमेशा यह प्रयास रहता है कि सभी धर्मों के लोग अमन और भाई चारे के साथ जिएं। जहां तक सरकारों का सवाल है तो जनसमस्याओं को लेकर आलोचना करने में मुझे कभी भी झिझक नहीं होती है। मैं यहा स्पष्ट कर देना चाहता हंू कि मैं स्वार्थवश कोई ब्लॉग नहीं लिखता हंू। मुझे उम्मीद है कि पाठकों का प्यार स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहेगा। कुछ लोगों का कहना है कि मेरे ब्लॉग लम्बे होते हैं। इस संबंध में पाठकों ने मुझे सुझाव भी दिए हैं। इस मामले में मेरा यह कहना है कि मैं किसी भी मुद्दे को स्पष्ट कर लिखता हंू। इसलिए ब्लॉग लम्बा होता है। कुछ लोगों का कहना है कि मैं रोजाना तीन अथवा चार ब्लॉग पोस्ट करता हंू जो ज्यादा हंै। इस संबंध में मेरा यह कहना है कि में न्यूनतम तीन ब्लॉग इसलिए लिखता हंू कि ताकि हर पाठक ब्लॉग को पढ़ सके। जो लोग अजमेर से बाहर रहते हैं, उनकी रुचि अजमेर और राजस्थान से जुड़े ब्लॉग में नहीं होती है। इसलिए ऐसे पाठकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का ब्लॉग लिखता हंू। एक ब्लॉग अपने प्रदेश की स्थितियों पर और तीसरा अजमेर से जुड़े मुद्दों पर। अजमेर में हजारों ऐसे पाठक हैं, जिन्हें सिर्फ अजमेर की ही खबर पढऩी होती है। तीनों स्तरों का ध्यान रखते हुए मुझे तीन अथवा चार ब्लॉग लिखने पड़ते हैं। यदि कुछ लोगों को मेरे ब्लॉग लम्बे और ज्यादा लगते हैं उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हंू। 

(एस.पी. मित्तल)  (25-01-2016)
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Monday, 25 January 2016

आखिर पांच लाख युवाओं की परेशानी का जिम्मेदार कौन।



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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस बार बीकानेर में गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह मना रही है। देश के गणतंत्र दिवस का समारोह धूमधाम व उमंग से मनाया जाना चाहिए। इसमें वसुंधरा राजे कोई कसर नहीं छोड़ रही हंै। 25 जनवरी को शाम शानदार एटहोम का आयोजन किया गया। 26 जनवरी को समारोह में प्रदेश के विकास की झांकियों का प्रदर्शन भी होगा, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल उठता है कि जेल प्रहरी परीक्षा में शामिल होने वाले प्रदेश के पांच लाख युवाओं को हुई परेशानी का जिम्मेदार कौन है? जेल प्रहरी के मात्र 950 पद हंै, लेकिन पांच लाख युवाओं ने परीक्षा के लिए आवेदन किया। इन युवाओं ने 24 जनवरी को मुश्किल उठाते हुए परीक्षा भी दी। लेकिन परीक्षा करवाने वाली एजेंसी मणिपाल टेक्नोलॉजी लिमिटेड का प्रश्न पत्र आउट हो गया। दो लाख रुपए तक में प्रश्न पत्र बिकने की खबरों के बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को इस बात का अहसास होना चाहिए कि प्रदेश का युवा वर्ग बड़ी मुश्किल में परीक्षा दे पाता है। 24 जनवरी की प्रात: 8:30 बजे होने वाली परीक्षा के लिए युवा 23 जनवरी की रात को ही परीक्षा केन्द्र के आसपास जमा हो गए। युवा किसी होटल में नहीं बल्कि मंदिर धर्मशाला, फुटपाथ, सड़क, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर ही सोते रहे। युवाओं ने जिन कठिनाइयों में परीक्षा दी उसका अहसास शायद उन लोगों को न हो जो पांच सितारा होटलों में ठहरते हैं। यह सही है कि प्रश्न पत्रों की खरीद फरोख्त मुश्किल से दो चार सौ युवाओं ने की होगी। लेकिन इसका खामियाजा पांच लाख युवाओं को उठाना पड़ा है। सवाल उठता है कि क्या सरकार एक भर्ती परीक्षा भी पुख्ता तरीके से नहीं करवा सकती? सरकार ने एक निजी कंपनी को परीक्षा का ठेका देकर स्वयं को जिम्मेदारी से मुक्त कर लिया। सरकार ने यह भी नहीं देखा कि इस कंपनी के पास अपना नेटवर्क है या नहीं। 24 जनवरी को परीक्षा के जो हालात दिखे उससे साफ जाहिर था कि परीक्षा कराने वाली कंपनी का अपना कोई नेटवर्क राजस्थान में नहीं है। जिन व्यक्तियों को ठेके पर रखा गया, उनमें आपस में ही तालमेल नहीं था। परीक्षा प्रात:11 बजे ही समाप्त हो गई। लेकिन केन्द्रों पर ओएमआर शीट सायं चार बजे तक पड़ी रही। यही हालत प्रश्न पत्रों का भी रहा। सरकार को जेल प्रहरी परीक्षा में हुए घोटाले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही हो जिन्होंने निजी कंपनी को परीक्षा कराने का ठेका दिया। वसुंधरा राजे भले ही बीकानेर में गणतंत्र दिवस का जश्न मनाए लेकिन उनकी सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती है। 
दो दिन का रिमांड:
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अजमेर के क्रिश्चियनगंज पुलिस ने 24 जनवरी को परीक्षा के प्रश्न पत्र बेचने के आरोप में जिन 38 युवाओं को गिरफ्तार किया था, उन्हें 25 जनवरी को अजमेर की अदालत में दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब पुलिस यह पता लगाएगी कि इन युवाओं के पास प्रश्न पत्र कहां से आए। 
(एस.पी. मित्तल)  (25-01-2016)
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कोर्ट के आदेश पर भी मित्तल अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही नहीं।



आखिर मर गई वकील की माताजी। 
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अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल के खिलाफ कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। अजमेर के ही रामनगर में राहने वाले वकील गोविंद सिंह का आरोप है कि मित्तल अस्पताल की लापरवाही की वजह से उनकी माताजी गुलाब देवी की मौत हो गई। वकील ने बताया कि मित्तल अस्पताल में सर्वश्रेष्ठ ईलाज होता है, इस दावे के प्रभाव में आकर ही उसने 13 नवम्बर 2015 को अपनी माताजी को मित्तल अस्पताल में भर्ती करवाया। अस्पताल के चिकित्सकों ने माताजी के स्वास्थ्य को देखते हुए दवाई युक्त ग्लुकोज चढ़ाने का निर्णय लिया। दवा को शरीर में समावेश करने के लिए हाथ में केंडुला लगाया, लेकिन अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही की वजह से केंडुला सही प्रकार से नहीं लगा, जिसकी वजह से माताजी के हाथ में जख्म हो गया। यह जख्म दोनों हाथों में किए गए। मैं बार-बार अस्पताल के प्रबंधन और चिकित्सकों के समक्ष यह गुहार लगाता रहा कि माताजी का इलाज सावधानी से नहीं हो रहा है, लेकिन मेरी एक नहीं सुनी गई। मैंने जब नाराजगी दिखाई तो प्रबंधन ने माताजी को जबरन डिस्चार्ज कर दिया। मैंने जब इलाज के कागजात मांगे तो मुझे कागजात भी नहीं दिए गए। चूंकि मित्तल अस्पताल की लापरवाही की वजह से माताजी के दोनों हाथों में जख्म हो गए थे, इसलिए मुझे अन्यंत्र इलाज करवाना पड़ा। लेकिन अथक प्रयासों के बाद भी माताजी के हाथ के जख्म ठीक नहीं हुए और 9 दिसम्बर 2015 को माताजी की मौत हो गई। इस संबंध में जब मित्तल अस्पताल के प्रबंधन के खिलाफ क्रिश्चियनगंज पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट दी गई तो पुलिस ने दर्ज करने से भी मना कर दिया। 
अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की मिली भगत को देखते हुए न्यायिक मजिस्टे्रट संख्या-3 की अदालत में मित्तल अस्पताल के निदेशक सुनील मित्तल, मनोज मित्तल और अन्यों के खिलाफ धारा 420, 491, 323, 504, 406 के अंतर्गत इस्तगासा प्रस्तुत किया गया। इस पर अदालत ने 156/3 के अंतर्गत क्रिश्चियनगंज पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। सिंह ने बताया कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने क बाद भी आज तक मित्तल अस्पताल के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस मित्तल अस्पताल के प्रबंधन को बचा रही है। इस पूरे मामले में अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी नवीन काबरा की भूमिका भी गैर जिम्मेदारानापूर्ण रही है। मेरी माताजी के संक्षिप्त इलाज के अस्पताल प्रबंधन ने 13 हजार रुपए वसूले हैं। यदि अस्पताल में केंडुला लगाने में लापरवाही नहीं होती तो मेरी माताजी की मौत भी नहीं होती। माताजी की मौत का जिम्मेदार अस्पताल प्रबंधन ही है। 
(एस.पी. मित्तल)  (25-01-2016)
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आखिर क्या मिला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से। मेले में लगी शराब की दुकान भी।



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राजस्थान की राजधानी जयपुर में लिटरेचर फेस्टिवल का समापन 25 जनवरी को हो गया। कोई चार दिनों तक चले इस मेले में देश-विदेश के साहित्यकारों ने भाग लिया। मेले का शुभारंभ सीएम वसुंधरा राजे ने अंग्रेजी का भाषण देकर किया। अखबारों में पढऩे से लगा कि इस मेले में अंग्रेजी के लेखक या अंग्रेजियत की जिन्दगी जीने वाले ही ज्यादा आए। अब चूंकि इस मेले का समापन हो चुका है, इसलिए यह बात सामने आनी चाहिए कि इस मेले से आखिर मिला क्या है? क्या यह मेला उच्च घरानों से जुड़े लोगों का एक जमावड़ा था? आमतौर पर ऐसे मेलों में जो स्टार आते हैं, उन्हें मेहनताना देकर बुलाया जाता है। आने-जाने का हवाई जहाज का किराया, पांच सितारा होटल में आवास और खाने पीने का पूरा इंतजाम होने पर ही स्टार आते हैं, जो स्टार मेहनताना लेकर आता हो वो स्टार साहित्य के मेले में क्या परोसेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जेएलएफ अब हर साल होने लगा है। लेकिन इस मेले के बाद इस बात की समीक्षा नहीं होती कि आखिर इस मेले से राजस्थान के साहित्य को क्या मिला है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि राजस्थानी भाषा को केन्द्रीय अनुसूची में शामिल करने के लिए लम्बे अर्से से आंदोलन हो रहा है, लेकिन जेएलएफ में कभी भी राजस्थानियों के इस संघर्ष पर चर्चा नहीं होती। जो लोग जेएलएफ को करवाते हैं क्या उनका यह दायित्व नहीं कि अपनी मातृ भाषा को मान्यता दिलाने के लिए भी काम करें। जेएलएफ पर करोड़ों रुपया फूंका जाता है और राजस्थानी भाषा की मान्यता का आंदोलन दर-दर की ठोकरें खा रहा है। 
अजीब बात तो यह है कि जेएलएफ में हिन्दी से भी परहेज किया जाता है। अधिकांश स्टार अंग्रेजी में ही अपनी बात को रखते हैं। जहां तक जेएलएफ में युवाओं की उपस्थिति का सवाल है तो यह उपस्थिति बहुत कम होती है जो स्कूल कॉलेज के युवा पहुंचते हैं, उनका भी कॉलेज कैम्पस वाला ही नजरिया होता है। जेएलएफ के अंदर का माहौल कैसा होता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां शराब की दुकान भी लगी होती है। कोई भी व्यक्ति बड़े आराम से खुले स्थान पर बैठकर शराब का सेवन कर सकता है। एक और जब सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है, तब क्या किसी साहित्य के मेले में शराब परोसी जानी चाहिए? यदि शराब साहित्य मेले का फैशन बन गई है तो फिर ऐसे मेलों का भगवान ही मालिक है। 
जेएलएफ में कैसा साहित्य परोसा गया, इसका अंदोजा भी अंग्रेजी उपन्यासकार अनीष त्रिपाठी की एक पुस्तक से लगाया जा सकता है। इस पुस्तक में लिखा गया कि 'दशरथ ने अपने पुत्र राम से कहा कि भाड़ में जाओ मुझे तुम्हारी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।Ó इस संबंध में जब त्रिपाठी से सफाई मांगी गई तो उसने कहा कि यह संस्कृत भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद करते समय गलती से हो गया। यह घटना बताती है कि अंग्रेजी लिखने वाले हमारे धार्मिक ग्रंथों का कितना मजाक उड़ाते हैं। जेएलएफ में यदि राजस्थान की समस्याओं को भी उठाया जाता तो अच्छा रहता। 
(एस.पी. मित्तल)  (25-01-2016)
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Sunday, 24 January 2016

जेल प्रहरी परीक्षा रद्द



कर्नाटक की मणीपाल टेक्नोलॉजी लिमिटेड कम्पनी के लापरवाह रवैये से एक लाख रुपए में बिका जेल प्रहरी परीक्षा का प्रश्न पत्र।
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24 जनवरी को राजस्थान में जेल प्रहरी परीक्षा का प्रश्नपत्र एक लाख रुपए तक में बिकने का जो मामला उजागर हुआ है। उसमें कर्नाटक की मणीपाल टेक्नोलॉजी कम्पनी की लापरवाही भी सामने आई है। परीक्षा 24 जनवरी को प्रदेश भर में प्रात: 8:30 बजे शुरू हुई लेकिन प्रश्न पत्र 23 जनवरी की रात को ही परीक्षार्थियों के हाथों में आ गया। अजमेर, जयपुर,झुंझुनू, जालोर आदि में प्रश्न पत्र पांच हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक में बिकने की खबरे सामने आई है। प्रदेश की जेलों की सुरक्षा के लिए राजस्थान सरकार ने 950 प्रत्याशियों की भर्ती का काम इस बार कर्नाटक की मणीपाल टेक्नोलॉजी लिमिटेड कम्पनी (एमपीएल) को दिया था। इस कंपनी ने ही प्रश्न पत्रों को छपवाना फिर पैकिंग की और परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचाया। चूंकि इस कंपनी का राजस्थान में कोई प्रभावी नेटवर्क नहीं है। इसलिए कंपनी के प्रतिनिधियों ने जिला स्तर पर परीक्षा के काम के ठेके दे दिए। जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई उनकी कोई गारंटी नहीं थी। कर्नाटक में बैठे कंपनी के संचालकों को यह पता ही नहीं चला कि अजमेर,जयपुर, झुंझुनू, जालोर आदि में किन लोगों को परीक्षा का ठेका दिया गया है। जिन लोगों के हाथों में प्रश्न पत्र थे उन्होंने ही परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्रों को बेचने का काम शुरू कर दिया। छोटे-छोटे ठेकेदारो ने मूल प्रश्न पत्र बेचने अथवा चुराने के बजाए मूल प्रश्न पत्र की फोटो मोबाइल फोन से खीची फिर उसे खरीददारो तक पहुंचा दिया। पुलिस ने प्रदेश भर में ऐसे परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र था। वह लोग भी गिरफ्तार हुए है जो प्रश्न पत्र को बेच रहे थे। शर्मनाक बात तो यह थी कि मोबाइल पर ही प्रश्न पत्र को इधर से उधर भेजा गया। भले ही प्रश्न पत्र एमपीएल कंपनी की लापरवाही से आउट हुआ हो लेकिन राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है। राजे इन दिनों सरकारी कामकाज में कारपोरेट घरानों का दखल करवा रही है। बिजली, पानी, चिकित्सा, शिक्षा आदि के क्षेत्रों में भी कारपोरेट घरानों को शामिल किया जा रहा है। जानकारों की माने तो जेल प्रहरी परीक्षा एमपीएल कंपनी से करवाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री राजे ने ही दिए थे। ठेका लेने से पहले कंपनी के प्रतिनिधि और सीईओ राजे से मिले थे। कंपनी ने यह दावा किया था कि कर्नाटक और देश के अन्य राज्यों में परीक्षाएं करवाने का काम कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के पास जो टेक्नोलॉजी है उसकी वजह से परीक्षा की गोपनीयता भी बनी रहेगी, लेकिन 24 जनवरी को एमपीएल के दावों की पोल पूरी तरह खुल गई। प्रश्न पत्रों के आउट होने की शिकायतों के बाद पुलिस महानिदेशक जेल अजीत सिंह ने एक आदेश जारी कर 24 जनवरी की परीक्षा को रद्द कर दिया। 
(एस.पी. मित्तल)  (24-01-2016)
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देवी सिंह भाटी ने बिगाड़ा ओम बिड़ला की बेटी के विवाह में वसुंधरा राजे का स्वाद।



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24 जनवरी को कोटा में भाजपा सांसद ओम बिड़ला की बेटी का विवाह धूमधाम से हुआ। इस अवसर पर भाजपा के दिग्गज नेता उपस्थित रहे। लेकिन इस विवाह समारोह में भाजपा के विधायक देवी सिंह भाटी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मुंह का स्वाद बिगाड़ दिया। विवाह समारोह में शामिल होने के लिए भाटी दोपहर को ही कोटा पहुंच गए। पत्रकारों ने जब राजे सरकार के कामकाज पर सवाल किए तो भाटी ने अपने अंदाज में कहा कि अफसर शाही जनप्रतिनिधियों की सुनती ही नहीं है। जिन विधायकों को मंत्री बनया गया है, उनकी चलती नहीं है। ऐसे में समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, इससे लोगों में भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। 
भाटी ने कहा कि सरकार के काम में कारपोरेट घरानों का दखल बढ़ गया है।
इधर भाटी ने बयान दिया। उधर प्रादेशिक न्यूज चैनलों पर भाटी का बयान प्रसारित हो गया। कांग्रेस के नेताओं को भी राजे सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया। कांग्रेस के नेताओं का कहना रहा कि जब भाजपा के विधायक ही संतुष्ट नहीं हंै तो फिर आम जनता कैसे संतुष्ट होगी। विवाह समारोह में वसुंधरा राजे से ज्यादा चर्चा भाटी के बयान को लेकर हुई। हालांकि समारोह में राजे की उपस्थिति प्रभावी तरीके से हुई, लेकिन भाटी के बयान को लेकर एक बार फिर भाजपा की राजनीति में गर्मी आ गई है। भाटी ने सरकार विरोधी बयान तब दिया है, जब उनके गृह जिले बीकानेर में गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह होने जा रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 25 जनवरी को ही बीकानेर पहुंच रही हैं। भाटी बीकानेर के कोलायत विधानसभा क्षेत्र से ही विधायक बनते हैं। बीकानेर में भाटी के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे लगातार सातवीं बार विधायक बने हैं। भाटी ने 24 जनवरी को ओम बिड़ला की बेटी के विवाह में वसुंधरा राजे का स्वाद ही नहीं बिगाड़ बल्कि राज्यस्तरीय गणतंत्र दिवस के समारोह के जश्न को भी कमजोर किया है। देखना है कि भाटी के इस बयान पर मुख्यमंत्री राजे की क्या प्रतिक्रिया आती है।
(एस.पी. मित्तल)  (24-01-2016)
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खुदा, भगवान, वाहे गुरु, ईसा मसीह क्या विद्यार्थियों की पीड़ा को सुनेंगे।



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24 जनवरी को सुबह एक महिला का फोन आया। महिला ने मुझसे कहा कि मैं आपके ब्लॉग रोजाना पढ़ती हंू और जिस तरह से मुद्दों को ब्लॉग में लिख जाता है, उससे प्रभावित होकर ही एक ज्वलंत मुद्दा बता रही हंू। महिला ने कहा कि उसका बेटा आईआईटी की परीक्षा की तैयारी कर रहा है, लेकिन उसके घर के निकट एक धार्मिक स्थल है। इस धार्मिक स्थल पर ऊंची आवाज वाला लाउड स्पीकर लगा हुआ है। दिन में कई बार जो आवाज आती है, उससे पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है। महिला का यह भी कहना था कि उसके परिवार में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखाए और फिर पुलिस लाउड स्पीकर को बंद करवाएं। यदि हिम्मत कर रिपोर्ट लिखा भी दी तो पुलिस में इतनी ताकत नहीं है कि वह किसी भी धार्मिक स्थल पर लगे लाउडस्पीकर को बंद करवा सके। भले ही ऐसी आवाजें रात 10 बजे बाद भी आती हों। महिला ने मुझे बताया कि फरवरी और मार्च के महीने में ही स्कूल कॉलेज की परीक्षाओं के साथ ही प्रवेश परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, भर्ती परीक्षा आदि होती है। ऐसे में परिवार का एक ना एक सदस्य रात और दिन पढ़ाई के लिए मेहनत करता है। लेकिन उसका ध्यान तब भंग हो जाता है, जब किसी धार्मिक स्थल से ऊंची-ऊंची आवाजें आती हैं। सवाल किसी एक धार्मिक स्थल का नहीं है। यह सवाल सभी धार्मिक स्थलों के लिए उठता है। आज देश के हालात इतने खराब हो गए हैं कि यदि किसी मस्जिद पर लगे लाउड स्पीकर को बंद कराने के लिए कोई हिन्दू पहल करेगा तो साम्प्रदायिक तनाव तत्काल हो जाएगा। 
इसी प्रकार किसी मंदिर, गुरुद्वारे अथवा गिरजा घर पर लगे लाउडस्पीकर को बंद कराने के लिए कोई मुसलमान शिकायत करेगा तो भी हालात बिगड़ जाएंगे। यह बात अलग है कि हिन्दू और मुसलमान दोनों ही परिवारों के बच्चे एक ही किताब से पढ़ाई कर रहे हंै। पुलिस प्रशासन को भी पता है कि लाउडस्पीकर लगाकर धार्मिक आयोजन करना ध्वनि प्रसारण नियंत्रण कानून के खिलाफ है। लेकिन इस कानून की किसी को भी चिंता नहीं है। शादी ब्याह के समारोह मे तो यह कानून टूटता ही है। कई बार तो पुलिस स्टेशन के निकट बने धार्मिक स्थल की आवाजों से पुलिस भी परेशान होती है। लेकिन इसके बावजूद भी धार्मिक स्थल के लाउडस्पीकर को बंद नहीं करवाया जा सकता है। और अब तो पुराने धार्मिक स्थलों की मरम्मत कर लाउडस्पीकर लगाने की होड़ मची हुई है। इस होड़ में किसी को भी उन विद्यार्थियों की चिंता नहीं है जिनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है। देर रात आवाजें आना और सुबह चार बजे से ही धार्मिक आयोजन को भी लाउडस्पीकर से प्रसारित किया जाता है। जो लोग खुदा, भगवान, वाहे गुरु, ईसा मसीह की शिक्षाओं पर चलने का दावा करते हैं वे धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों को बंद नहीं करवा सकते। ऐसे में खुदा, भगवान, वाहे गुरु, ईसा मसीह को ही विद्यार्थियों की मदद करनी पड़ेगी। जिस महिला ने 24 जनवरी को अपनी पीड़ा से मुझे अवगत कराया, उसमें मेरा भी यह मानना है कि धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की आवाज कम होनी चाहिए। कम से कम फरवरी और मार्च माह में तो ऐसी आवाजों पर रोक लगनी ही चाहिए। 
(एस.पी. मित्तल)  (24-01-2016)
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क्या अमित शाह नरेन्द्र मोदी को फिर से पीएम बनवा सकेंगे।



चुनौती भरा होगा भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल। 
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24 जनवरी को दिल्ली में अमित शाह को दोबारा से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। सब कुछ पहले से तय था, इसलिए गले में मालाएं डालने के अलावा कुछ नहीं हुआ। कामकाज छोड़कर भाजपा शासित राज्यों के सीएम, बड़े केन्द्रीय मंत्री पहले से ही बधाई देने के लिए मौजूद थे। अमित शाह अब आगामी तीन वर्ष तक भाजपा के अध्यक्ष रहेंगे। सब जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी को पीएम बनवाने में उत्तर प्रदेश से जीते भाजपा के 71 सांसदों की ही भूमिका थी। अमित शाह यूपी के प्रभारी थे, इसलिए इन 71 सांसदों की जीत का श्रेय भी शाह को ही दिया गया। शाह की ऐसी लहर चली कि राजनाथ सिंह के केन्द्रीय मंत्री बनने पर शाह को ही भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। महाराष्ट्र और हरियाणा में जीत दिलवाने के बाद अमित शाह दिल्ली और बिहार में मात खा गए। बिहार में जिस तरह से गैर भाजपा दलों का गठजोड़ हुआ, उससे अमित शाह के लिए आने वाला समय चुनौती पूर्ण होगा। इस वर्ष पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में विधानसभा के चुनाव होने है। भाजपा का केरल को छोड़कर शेष दोनों राज्यों में कोई ज्यादा प्रभाव नहीं है। हो सकता है कि इन तीनों राज्यों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़े। अगले वर्ष यूपी और पंजाब में चुनाव होने है। यदि बिहार की गणित यूपी में दोहराई गई तो अमित शाह को यूपी में भी हार का सामना करना पड़ेगा। सब जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव समधी हैं। लालू यह चाहेंगे कि बिहार जैसे परिणाम यूपी में भी सामने आए। पंजाब में भी भाजपा और अकाली दल का तीसरी बार चुनाव जीना मुश्किल नजर आ रहा है। 2018 के अंत में राजस्थान, एमपी आदि के चुनाव भी हो जाएंगे। इसके तुरंत बाद अमित शाह को लोकसभा चुनाव का सामना करना पड़ेगा। इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या अमित शाह नरेन्द्र मोदी को दोबारा से पीएम बनवा सकते हैं? इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी के भरोसे की वजह से ही अमित शाह दोबारा से अध्यक्ष बन पाए। भले ही शाह पार्टी अध्यक्ष हों, लेकिन सरकार में शाह का पूरा दखल है। यहां तक कि भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर भी अमित शाह ही मुहर लगाते हैं। अमित शाह जो भी निर्णय लेते हैं, उस पर नरेन्द्र मोदी की भी सहमति होती है। अमित शाह को भी इस बात का अहसास है कि आगामी तीन वर्ष उनके लिए चुनौतीपूर्ण होंगे। 
मोदी भले ही विदेशों में भारत का डंका बजवा रहे हों, लेकिन भारत में भाजपा सरकार की स्थिति कमजोर हुई है। असल में सत्ता का सुख तो भाजपा के नेता भोग रहे हैं, लेकिन आम जनता के लिए जो काम करने चाहिए वो नहीं किए गए हैं। विधायकों सांसदों और मंत्रियों का व्यवहार इतना खराब है कि आम लोग गुस्से में हैं। यही वजह है कि राजस्थान में हाल ही में पंचायतों, स्थानीय निकायों के जो चुनाव हुए है, उसमें भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। नरेन्द्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि सरकार की योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जाए, लेकिन भाजपा के नेताओं को सत्ता का सुख भोगने से फुर्सत ही नहीं मिल रही है। देखना होगा कि इन तीन वर्षों में अमित शाह कौन सा चात्मकार करते हैं। 
(एस.पी. मित्तल)  (24-01-2016)
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Saturday, 23 January 2016

गृहमंत्री कटारिया ने पीरदान का ईलाज शुरू करवाकर आर.के.मार्बल के मालिकों को बचाया।



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राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अजमेर के एसपी डॉ. नितिन दीप ब्लग्गन को अनशनकारी पीरदान सिंह राठौड़ के पास भेजकर कोई सहानुभूति नहीं दिखाई, बल्कि आर.के.मार्बल के मालिक अशोक पाटनी, विमल पाटनी और सुरेश पाटनी को बचाने का काम किया है। पीरदान और उनकी पत्नी कैलाश कंवर गत 10 दिसम्बर से आमरण अनशन पर थे। 20 जनवरी को स्वर्गीय गुरुशरण छाबड़ा के पुत्र अंकुर छाबड़ा और पूर्व विधायक गोपीचंद गुर्जर ने अजमेर के जेएलएन अस्पताल में राठौड़ दम्पत्ति से मुलाकात की। लगातार 42 दिनों से भूखे रहने की वजह  से पीरदान की हालत देखते हुए 21 जनवरी को पूर्व विधायक गुर्जर ने जयपुर में गृहमंत्री कटारिया से मुलाकात की। पीरदान मांग कर रहे हैं कि उनके व परिवार के सदस्यों के खिलाफ जो झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं उसकी जांच सीबीआई से करवाई जाए। पीरदान का आरोप है कि इन झूठे मुकदमों के पीछे आर.के.मार्बल के मालिकों की ताकत है। पीरदान ने पहले ही कह दिया है कि यदि अनशन की वजह से उनकी मौत होती है तो इसकी जिम्मेदारी आर.के.मार्बल के मालिकों की होगी। 21 जनवरी को कटारिया को जब पीरदान की धमकी का पता चला तो कटारिया ने अजमेर के एसपी डॉ. ब्लग्गन को पीरदान से मिलने के लिए भेजा, तब ऐसा लगा कि कटारिया पीरदान के प्रति सहानुभूति जता रहे है। लेकिन इस मुलाकात के बाद जिस तरह पुलिस ने पीरदान का अस्पताल में जबरन इलाज शुरू करवाया, उससे साफ हो गया कि कटारिया आर.के.मार्बल के मालिकों को बचा रहे हैं। कटारिया को यह पता था कि यदि पीरदान की मौत हो गई तो लिखित दस्तावेज के आधार पर अशोक पाटनी, विमल पाटनी और सुरेश पाटनी को गिरफ्तार करना पड़ेगा। सब जानते हैं कि कटारिया और आर.के.मार्बल के मालिक स्वजाति बंधु हैं। उदयपुर के बहुचर्चित तुलसी प्रजापति एनकाउंटर के मामले में भी आर.के.मार्बल के मालिक विमल पाटनी के साथ साथ गुलाबचंद कटारिया का नाम भी सीबीआई की रिपोर्ट में आया है। बहुचर्चित सोराबुद्दीन एनकाउंटर से जुड़े हुए इस मामले में कटारिया और विमल पाटनी की जमानत गुजरात की कोर्ट में हो रखी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कटारिया और आर.के.मार्बल परिवार के बीच कितने गहरे संबंध हैं। असल में कटारिया की रुचि पीरदान को न्याय दिलवाने में नहीं बल्कि इलाज शुरू करवाने में थी। ताकि आर.के.मार्बल के मालिकों को बचाया जा सके। अब चूंकि अस्पताल में पीरदान का इलाज जबरन शुरू हो गया है, इसलिए पीरदान की मौत का संकट टल गया। रात के अंधेरे में सशस्त्र जवानों के दम पर जिस तरह पीरदान का इलाज शुरू किया गया, उससे जाहिर है कि गृहमंत्री कटारिया पीरदान को न्याय नहीं दिलवाना चाहते है। अच्छा होता कि कटारिया पीरदान के दस्तावेज देखकर उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करते, जिन्होंने उनकी दो बेटियों और बेटों तक के खिलाफ डकैती जैसे संगीन अपराध के मुकदमे दर्ज किए। पीरदान की पत्नी कैलाश कंवर तो सीबीआई जांच की मांग को लेकर अनशन भी नहीं कर रही है। उसकी मांग को अपनी दोनों बेटियों के मुकदमे को लेकर है। कटारिया कम से कम कैलाश कंवर की मांग तो पूरा कर ही सकते हैं। कटारिया की छवि एक ईमानदार राजनेता की मानी जाती है। अन्य नेताओं की तरह कटारिया आर.के.मार्बल के मालिकों से कोई फायदा भी नहीं लेते होंगे। ऐसे में अभी भी यह गुंजाइश है कि इस मामले में कटारिया पीरदान को न्याय दिलवाएंगे। 

(एस.पी. मित्तल)  (23-01-2016)
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एडीए में खत्म होगी दलाली प्रथा। अध्यक्ष हेड़ा ने दो टूक कहा।



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अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) के अध्यक्ष शिवशंकर हेडा ने कहा है कि अब दलाली प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर सीधे उनसे मिल सकता है। 23 जनवरी को यहां गांधी भवन स्थित अजयमेरू प्रेस क्लब की ओर से आयोजित मीट द प्रेस कार्यक्रम में पत्रकारों के तीखे सवालों के जवाब में हेड़ा ने कहा कि उन्हें भी शिकायत मिली है कि एडीए में दलाल सक्रिय हैं। ऐसे दलाल अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत होने का दावा कर परेशान लोगों के काम करवाते हैं। हेड़ा ने कहा कि 21 जनवरी को ही उन्होंने अध्यक्ष का पद संभाला है और 22 जनवरी को अधिकारियों के साथ पहली बैठक की उसमें स्पष्ट कहा कि अब एडीए में कोई गड़बड़ी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जो चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी दी है उस पर खरा उतरूंगा। अधिकारियों से साफ कहा गया कि छोटे-छोटे कामों के निस्तारण के लिए राज्य सरकार से दिशा निर्देश मांगने की जरूरत नहीं है। सरकार ने एडीए को अपने आप में सक्षम बना रखा है। जिन मामलों में नियमों के मुताबिक स्वीकृति दी जा सकती है, उसमें तत्काल स्वीकृति दी जाए।
अवधि विस्तार शीघ्र :
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हेड़ा ने स्वीकार किया कि खाली भूखण्ड का अवधि विस्तार नहीं होने से हजारों लोग परेशान हो रहे हंै। मैंने अधिकारियों से कहा है कि जिन भी लोगों ने अवधि विस्तार के आवेदन कर रखे हैं, उनकी सूची बनाकर अगली बैठक में रखा जाए। इस मामले में एक निर्णय लेकर सभी को राहत प्रदान की जाएगी।
119 गांवों पर भी होगा निर्णय :
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प्राधिकरण की सीमा में पुष्कर और किशनगढ़ क्षेत्र को भी शामिल करने से 119 गांव भी आ गए हंै, जबकि यहां ग्राम पंचायत का भी कामकाज है। सरकार ने इन गांवों की भूमि एडीए को हस्तानान्तरित कर दी हैं। इन गांवों में आबादी विस्तार, नक्शे नियमन आदि की समस्याओं को हल करने के लिए एक बड़ा फैसला शीघ्र किया जाएगा। यदि इस मामले में कोई दिशा निर्देश लेने की जरूरत हुई तो स्वयं फाइल को लेकर जयपुर जाएंगे।
अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं :
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हेड़ा ने कहा कि जिन लोगों ने सरकारी जमीनों और प्राधिकरण की आवासीय कॉलोनियों में अतिक्रमण कर रखे हैं, उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। किसी भी भू-माफिया अथवा प्रभावशाली व्यक्ति को आवासीय कॉलोनी के लिए अधिगृहित की गई भूमि पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। मैंने अधिकारियों से ऐसे अतिक्रमणों की सूची बनाने के लिए कहा है। इस मामले में आम लोगों को भी सहयोग करना चाहिए। अतिक्रमण के बारे में कोई भी व्यक्ति सीधे उन्हें जानकारी दे सकता है।
पड़ाव से हटेंगी ट्रांसपोर्ट कंपनियां :
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हेड़ा ने कहा कि शहर के पड़ाव क्षेत्र में जो ट्रांसपोर्ट कंपनियां है उन्हें हर हालात में ब्यावर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में बसाया जाएगा। पूर्व में औंकार सिंह लखावत के अध्यक्षीय कार्यकाल में जब वे नगर सुधार न्यास के सदस्य थे तब ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण करवाया गया था। अब उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में ट्रांसपोर्ट कंपनियों को स्थानान्तरित किया जाएगा। अब तक कंपनियां क्यों स्थानान्तरित नहीं हुई इस विवाद में पडऩा नहीं चाहते।
नहीं तोडूंगा लखावत का रिकॉर्ड :
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हेड़ा ने कहा कि औंकारसिंह लखावत ने अपने कार्यकाल में शहर का विस्तार करवाया इसलिए आज भी अजमेर के नागरिक लखावत को याद करते हैं। मुझ से अपेक्षा है कि मैं विकास में लखावत का रिकॉर्ड तोड़ दूं। मेरी रूचि किसी के रिकॉर्ड तोडऩे की नहीं है। मेरा भरोसा अपनी लकीर को बड़ा करने में है। हेड़ा ने कहा कि पत्रकारों को डीडी पुरम योजना के बजाय कोटड़ा स्थित महाराणा प्रताप नगर की योजना में भूखंड कैसे आवंटित किए जा सकते है, इस पर गंभीरता के साथ निर्णय लिया जाएगा।
सिद्धांतत:
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 वे पत्रकारों की इस मांग से सहमत हैं कि कोटड़ा क्षेत्र में ही स्थित पत्रकार कॉलोनी के आसपास ही शेष पत्रकारों को भूखण्ड आवंटित किए जाए। कार्यक्रम के शुभारंभ पर दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण के सम्पादक डॉ.रमेश अग्रवाल, क्लब के अध्यक्ष एस पी मित्तल, महासचिव प्रताप सनकत, राजेन्द्र गुंंजल, सतीश शर्मा, सुरेश कासलीवाल आदि ने हेड़ा का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

(एस.पी. मित्तल)  (23-01-2016)
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मदारगेट पर बनेंगे पार्किंग स्थल।



पुलिस और व्यापारियों में हुई सहमति।
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शहर के सबसे व्यस्तम मदार गेट बाजार में चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक के बाद उत्पन्न हुई स्थितियों को देखते हुए अब बाजार में चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। 
23 जनवरी को क्लॉक टावर पुलिस स्टेशन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर अवनीश कुमार शर्मा, डीएसपी अदिति कामट के साथ मदार गेट व्यापारियों में प्रतिनिधियों की बैठक हुई। बैठक में व्यापारियों के प्रतिनिधि देवेश्वर प्रसाद गुप्ता, भगवान चंदीराम, गोपाल चंद गोयल, मोती जेठानी, रूपचंद आदि ने कहा कि चार पहिया वाहनों के नहीं आने से व्यवसाय चौपट हो गया है। चूंकि मदार गेट बाजार के आसपास पर निगम का कोई पार्किंग स्थल भी नहीं है, इसलिए कार वाले ग्राहकों ने मदार गेट से खरीददारी करना बंद कर दिया है। रेलवे स्टेशन की पार्किंग सीमित है और रेलवे का ठेकेदार मनमाना शुल्क वसूलता है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना रहा कि शहरवासियों के लिए यातायात के लिहाज से मदार गेट एक उदाहरण बन गया है और ऐसी ही व्यवस्था अब नया बाजार, नला बाजार आदि भीड़ वाले बाजारों में की जाएगी। लेकिन पुलिस प्रशासन व्यापारियों की इस बात से सहमत था कि चार पहिया वाहनों के लिए मदारगेट के आसपास पार्किंग होनी चाहिए। इसके लिए क्लॉक टावर थाने के सामने शहीद स्मारक की दीवार के निकट, के.जे.मेहता के शोरूम तथा रावत कॉलज के सामने जो रिक्त भूमि पड़ी है, उस पर कार पार्किंग बनाने पर सहमति जताई गई। इन छोटे-छोटे पार्किंग स्थलों का संचालन व्यापारी वर्ग अपने स्तर पर करेगा। 
बैठक के बाद पुलिस अधिकारियों और व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने संबंधित पार्किंग स्थलों का दौरा भी किया। बाटा कंपनी से फुट ओवर ब्रिज तक के मार्ग से भी अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया। 
महासंघ अध्यक्ष के साथ हुई नौक झौक:
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बैठक में अजमेर व्यापारिक महासंघ के अध्यक्ष मोहन लाल शर्मा के साथ मदार गेट के व्यापारियों की नोक झोक भी हुई। विवाद इतना बढ़ा कि शर्मा को बैठक से उठकर जाना पड़ा। मदारगेट के प्रतिनिधियों का कहना रहा कि पुलिस प्रशासन ने व्यापारियों को विश्वास में लिए बगैर ही चार पहिया वाहनों के प्रवेश  पर रोक लगा दी है। इस पर जब पुलिस अधिकारियों ने महासंघ अध्यक्ष शर्मा के साथ वार्ता की बात कही तो व्यापारियों का कहना था कि महासंघ से हमारा कोई संबंध नहीं है तथा मोहन लाल शर्मा की दुकान मदारगेट पर नहीं है। इसके साथ ही बैठक में स्पष्ट कहा गया कि मदार गेट के व्यापारी महासंघ के साथ भविष्य में कोई संबंध नहीं रखेंगे। व्यापारियों के रवैये से खफा होकर महासंघ के अध्यक्ष शर्मा बैठक को बीच में छोड़कर चले गए। 
सराहनीय काम:
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चार पहिया वाहनों में प्रवेश पर रोक भले ही मदार गेट के व्यापारियों को रास नहीं आ रही हो, लेकिन आम नागरिक इसे सराहनीय काम बता रहा है। अब मदार गेट बाजार में ठेले वाले,थड़ी वाले आदि भी नहीं होते हैं। ऐसे में यातायात पूरी तरह सुगम हो गयाहै। यदि बाजार के आसपास ही पार्किंग स्थल बन जाए तो व्यापारी वर्ग भी संतुष्ट हो सकता है। 
(एस.पी. मित्तल)  (23-01-2016)
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देश के भविष्य के साथ साइकिल चलाने में मजा आ गया।



रायन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों की निकली रैली।
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23 जनवरी को अजमेर के कोटड़ा क्षेत्र में चलने वाले इंग्लिश मीडियम रायन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने पर्यावरण, स्वास्थ्य, ऊर्जा संरक्षण आदि के उद्देश्य को लेकर  साइकिल रैली निकाली। यह रैली प्रात: साढ़े आठ बजे रीजनल कॉलेज चौराहा स्थित आना सागार की चौपाटी से शुरू हुई और कोई तीन किलोमीटर का मार्ग तय करते हुए स्कूल परिसर पहुंची। इस पूरे मार्ग में मैंने भी साइकिल चलाई और विद्यार्थियों की हौसला अफजाई की। जो विद्यार्थी देश का भविष्य हंै उनके साथ साइकिल चलाने में मजा आ गया। 
बच्चों के बीच जब साइकिल चलाई तो एक अलग ही अनुभव था। बच्चों के साथ उत्साही शिक्षिकाएं भी साइकिल चला रही थीं। जब एक शिक्षिका डगमगाने लगी तो एक बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत के साथ कहा कि मैडम आपको साइकिल चलाना नहीं आता। इसी प्रकार और बच्चों ने भी अपने अंदाजा में जो प्रतिक्रिया दी उससे लगा कि देश का भविष्य सुरक्षित है। रायन स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मालिनी मलिक का प्रस्ताव था कि मैं साइकिल रैली को झंडी दिखाकर रवाना करूं। लेकिन जब मैंने स्वयं साइकिल चलाने का प्रस्ताव रख दिया तो प्रिंसिपल को भी सकारात्मक पक्ष नजर आया। मैंने अंतर्राष्ट्रीय बॉस्केट बॉल खिलाड़ी रहे विनीत लोहिया के साथ रैली का शुभारंभ तो किया, लेकिन साथ ही साइकिल लेकर बच्चों के साथ रैली में शामिल हो गया। मैं सप्ताह में एक या दो दिन साइकिल पर ही घर से दफ्तर की यात्रा करता हंू। 
सस्ती दर पर साइकिल:
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साइकिल रैली को सफल बनाने में हीरो साइकिल के अजमेर में अधिकृत विक्रेता कमल चरण की भी भूमिका रही। इस अवसर पर कमल चरण ने कहा कि रायन स्कूल का जो छात्र उनके वैशाली नगर स्थित साइकिल वल्र्ड के शोरूम से साइकिल लेगा उसे निर्धारित मूल्य में 10 से 25 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। उनकी कंपनी चाहती है कि युवा वर्ग अधिक से अधिक साइकिल का उपयोग करें। 
(एस.पी. मित्तल)  (23-01-2016)
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Friday, 22 January 2016

रोहित की मौत पर लखनऊ में मोदी रोए पिता ने कहा हम दलित नहीं


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हैदराबाद की सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहत की मौत को लेकर देश की राजनीति में उफान आया हुआ है। 22 जनवरी को लखनऊ के अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्र रोहित की मौत का जिक्र करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी इतने भावुक हो गए कि दो मिनट तक उनके मुंह से शब्द नहीं निकले। मोदी ने रोते हुए अपनी जो भावनाएं प्रकट की उससे जाहिर हो रहा था कि देश के प्रधानमंत्री इस घटना से बेहद दुखी है। यह सही है कि रोहित की मौत से मोदी का कोई सरोकार नहीं है। चूंकि सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन चलती है इसलिए वहां होने वाली घटनाओं की जवाबदेही केन्द्र सरकार की भी बनती है। सब जानते है कि यूनिवर्सिटी में कित तरह से दलगत राजनीति होती है। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खुले आम अपने पसंदीदा राजनैतिक दल में काम करते है। अनेक प्रोफेसर तो पार्टी के पदाधिकारी भी होते है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हैदराबाद की सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी का माहौल कैसा होगा। यह सही है कि छात्र रोहित की मौत बेहद दुखद है और जिन लोगों के कृत्य से रोहित को आत्महत्या करनी पड़ी उन्हें सख्त से सजा मिलनी चाहिए। यदि इस मामले में केन्द्रीय श्रम मंत्री बंगारू भी दोषी हो तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही हो।
एक ओर कांग्रेस सहित विपक्षी इस मामले को दलित बनाम गैर दलित बना रहे है वहीं मृतक छात्र रोहित के पिता का कहना है कि हमारा परिवार दलित नहीं है। पिता ने इस बात पर अफसोस जताया है कि मेरे बेटे की मौत पर राजनीति हो रही है। पिता ने अब तक हुई कार्यवाही पर भी संतोष जताया है और साथ ही उम्मीद की है कि गुनाहगारों को सजा मिलेगी। अब सवाल उठता है कि जब प्रधानमंत्री के आंसू आए और पिता भी संतुष्ट है तो फिर कांग्रेस और विपक्ष हंगामा क्यों कर रहे है। जिस तरह से मामले को दलित और गैर दलित में विभाजित किया जा रहा है वह देश के लिए खतरनाक है।
(एस.पी. मित्तल)  (22-01-2016)
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अजमेर के राजवंश ऑटो व्हील्स के मालिक के खिलाफ मुदकमे के आदेश।


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अजमेर के अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 अमर वर्मा ने जयपुर रोड स्थित राजवंश ऑटो व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक गोविंद गर्ग और प्रदीप गर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 420, 406, 384, 120-बी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने के आदेश कोतवाली पुलिस को दिए हैं। 
नागौर जिले के कुचामन सिटी स्थित नीलकंठ कॉलोनी निवासी नटवरलाल ने अदालत में एक इस्तगासा दायर कर बताया कि 12 अक्टूबर 2014 को राजवंश ऑटो व्हीलस से निशान कंपनी की डस्टर कार खरीदी थी। कार के भुगतान के एवज में पुरानी कार व निर्धारित नकद राशि दी गई। साथ ही 6 हजार 464 रुपए की मासिक किश्त भी देना तय हुआ। प्रतिमाह किश्त की राशि दी जा रही है। वायदे के मुताबिक संस्था के निदेशक गोविंद गर्ग व प्रदीप गर्ग को रजिस्ट्रेशन देना था, लेकिन आज तक भी रजिस्ट्रेशन नहीं दिया। इससे वाहन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब संस्था के मालिक का कहना है कि दिए गए वाहन के इंजन व चैसिस नम्बर में गड़बड़ी हो गई है। इसलिए वाहन को पटेल मैदान स्थित शोरूम पर लाया जाए। इस्तगासे में परिवादी ने आशंका जताई कि गर्ग बंधु उसका वाहन हड़पना चाहते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजवंश ऑटो व्हील्स के निदेशक गोविंद गर्ग व प्रदीप गर्ग के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में पीडि़त की ओर से वकील अशोक मेघवंशी ने पैरवी की। 
(एस.पी. मित्तल)  (22-01-2016)
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मां भारती ग्रुप देगा पठानकोट के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि।



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मां भारती ग्रुप संस्था की ओर से पठानकोट के शहीद जवानों को 25 जनवरी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। अजमेर के बजरंगगढ़ स्थित शहीद स्मारक पर सायं छह बजे होने वाले इस देशभक्ति कार्यक्रम में कविता पाठ भी होगा। संस्था के सदस्यों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करें। मालूम हो कि हाल ही में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पंजाब प्रांत के पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस पर हमला किया, जिसमें सात जवान शहीद हो गए। 
(एस.पी. मित्तल)  (22-01-2016)
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35 रुपए में खरीद कर 32 रुपए में दूध बेचेगी डेयरी।



रामचन्द्र चौधरी की कमाल की घोषणा।
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अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने 22 जनवरी को कमाल की घोषणा की है। चौधरी ने कहा कि एक फरवरी से खरीद मूल्य में एक रुपए प्रति लीटर दूध की वृद्धि की जाएगी। इसी प्रकार एक मार्च को दो रुपए तथा एक अप्रैल से तीन रुपए वृद्धि का लाभ जिले भर के दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा। डेयरी वर्तमान में उपभोक्ताओं को साधारण दूध 32 रुपए प्रति लीटर मूल्य पर उपलब्ध करवा रही है। चौधरी ने खरीद मूल्य बढ़ाने के साथ-साथ बिक्री मूल्य बढ़ाने की घोषणा नहीं की है। यानी डेयरी 35 रुपए प्रति लीटर के भाव से दूध खरीदेगी और उपभोक्ताओं  को 32 रुपए लीटर के भाव से बेचेगी। चौधरी ने कहा है कि डेयरी के पास 125 करोड़ रुपए के मूल्य का घी और दूध का पाउडर पड़ा है। गर्मी में जब भाव बढ़ेंगे तब इसकी बिक्री की जाएगी। हालांकि डेयरी अपना गोल्ड मार्क वाला दूध 42 रुपए प्रति लीटर पर बेचती है,लेकिन आम उपभोक्ता के बीच 32 रुपए वाले दूध की ही मांग है। चौधरी ने बताया कि एक फरवरी से जो वृद्धि होगी, उसकी भरपाई बोनस और डिविडेंट में से की जाएगी। जबकि अगली दो वृद्धि का वहन डेयरी अपने कोष से करेगी। अनुमान है कि कोई साढ़े तीन करोड़ रुपए प्रति माह का बोझ डेयरी पर पड़ेगा। पशु पालकों को दूध का भुगतान समय पर हो, इसके लिए पचास करोड़ का ऋण आईसीआईसीआई बैंक से लिया जा रहा है। अजमेर डेयरी की क्षमता को बढ़ाने के लिए 250 करोड़ की लागत से एक नया प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है। 
(एस.पी. मित्तल)  (22-01-2016)
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राखी से लेकर तोप तक बनाई वृंदावन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने।



अपने हुनर का किया प्रदर्शन।
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22 जनवरी को अजमेर के माकड़वाली रोड स्थित वृंदावन पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने वार्षिक प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी के समारोह में मेरे साथ अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा, एमडीएस यूनिवर्सिटी के प्रो. लक्ष्मी ठाकुर तथा क्षेत्रीय पार्षद वीरेन्द्र वालिया को अतिथि के तौर पर बुलाया गया। हम सब ने  देखा कि छात्र-छात्राओं ने अपनी श्रेष्ठ योग्यता का प्रदर्शन किया। बच्चों ने जहां भाई-बहन के प्यार के प्रतीक राखियों को प्रदर्शित किया, वहीं दुश्मन से लडऩे के लिए तोप भी बनाई। साइकिल के कबाड़ पहिए और पुराने लोहे के पाइप को जोड़ कर शानदार तोप बनाई गई। तोप में रखे फूलों से ही अतिथियों का स्वागत किया गया। बच्चों ने स्वच्छता पर्यावरण, बिजली संरक्षण, जैविक खेती, गौपालन आदि के मॉडल बड़े ही प्रभावी तरीके से गए। पीएम नरेन्द्र मोदी युवाओं में जिस कुशल दक्षता की बात कर रहे हंै, उसके अनुरूप ही विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के मॉडल तैयार किए। वृंदावन स्कूल के विद्यार्थियों ने यह दिखा दिया कि यदि अवसर मिलेगा तो वे अपनी सोच से 'मेक इन इंडियाÓ का निर्माण कर देंगे। समारोह में प्राधिकरण के अध्यक्ष हेड़ा ने स्मार्ट सिटी के बारे में भी मॉडल तैयार करने के लिए कहा। मेरा स्कूल शिक्षकों से कहना रहा कि सभी विद्यार्थियों को सौ प्रतिशत अंक दिए जाएं, क्योंकि मॉडल तैयार करने में बच्चों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। प्राधिकरण के अध्यक्ष हेड़ा को मेरा यह सुझाव रहा कि प्राधिकरण की ओर से अंतर विद्यालय प्रदर्शनी प्रतियोगिता आयोजित की जाए। प्रो. ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पार्षद वालिया ने कहा कि इस स्कूल की हर संभव मदद की जाएगी। समारोह में स्कूल की निदेशक ज्योति जैन और प्रधानाचार्य डॉ. अनु सत्संगी ने गतिविधियों पर प्रकाश डाला। 
पहला समारोह:
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हेड़ा ने 21 जनवरी को प्राधिकरण के अध्यापक का पद संभाला और 22 जनवरी को वृंदावन पब्लिक स्कूल में पहला सार्वजनिक समारोह रहा। 
(एस.पी. मित्तल)  (22-01-2016)
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Thursday, 21 January 2016

मेहनता ने के लिए भटक रहे है कलाकार पुष्कर मेले में करवाएं थे प्रोग्राम



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इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर मेले में अजमेर के जिन कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, अब उन्हें अपने मेहनताने के लिए भटकना पड़ रहा है। शर्मनाक बात तो यह है कि राज्य सरकार ने इस बार पुष्कर मेले पर कोई दो करोड़ रुपए की राशि खर्च करवाई थी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पुष्कर मेले के प्रति आकर्षण बढ़वाने के लिए दिल्ली की दो इवेन्ट कंपनी ई-फेक्टर और टीम वर्क को कार्यक्रम प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई। एक कम्पनी को भुगतान पर्यटन विभाग ने किया जबकि दूसरी कंपनी को ब्यावर की श्रीसीमेंट संस्था से करवाया गया।
इन कंपनियों के चालाक प्रतिनिधियों ने स्थानीय कलाकारों पर दबाव डालकर मेले में अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करवा दिए। जिला कलेक्टर डॉ.आरूषी मलिक और पुष्कर मेले के प्रभारी व एडीएम हीरालाल मीणा ने भी स्थानीय कलाकारों से प्रोग्राम प्रस्तुत करने का आग्रह किया। सभी कलाकारों को उम्मीद थी कि वायदे के मुताबिक इवेन्ट कंपनियों के प्रतिनिधि मेहनताने का भुगतान कर देंगे। 21 जनवरी को ऊंट श्रृंगार कलाकार अशोक टांक ने कलेक्टर डॉ.मलिक को एक पत्र दिया है। इस पत्र में कहा गया कि गत वर्ष नवम्बर में पुष्कर मेले के दौरान 5 अलग-अलग कार्यक्रमों में अपने ऊंट को सजाकर प्रोग्राम दिया गया। मेरे ऊंट के श्रृंगार को इवेन्ट कंपनियों ने अपना प्रोग्राम बताया। चूंकि मुझे प्रति प्रोग्राम 10 हजार रुपए देने का वायदा किया गया था। इसलिए मैंने भी कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन न तो इवेन्ट कंपनियों के प्रतिनिधियों ने और न ही मेला प्रभारी मीणा ने मेरे पारिश्रमिक का भुगतान किया है। मैं पिछले दो माह से इधर-उधर भटक रहा हूं लेकिन मेरी कोई नहीं सुन रहा। कुछ ऐसी ही पीड़ा कत्थक नृत्य कलाकार दृष्टि रॉय की भी है। दृष्टि ने भी अपने ग्रुप के माध्यम से पुष्कर मेले में कत्थक नृत्यों की प्रस्तुति दी थी। चूंकि मेहनताने का वायदा किया गया था इसलिए नई ड्रेस भी कलाकारों को सिलवाई गई। सभी कलाकार अजमेर से पुष्कर पहुंचे थे। दृष्टि रॉय की भी पीड़ा है कि बार-बार आग्रह करने के बाद भी मेहनताने का भुगतान नहीं किया गया।
एक ओर अजमेर के कलाकार अपने मेहनताने के लिए भटक रहे है तो दूसरी और मेला प्रभारी हीरालाल मीणा का कहना है कि जिला प्रशासन ने पुष्कर मेले में कोई भुगतान नहीं किया। सारा काम ई-फेक्टर और टीम वर्क इवेन्ट कंपनियों का था। ऐसे में किसी कलाकार को मेहनताने का भुगतान करने की जिम्मेदारी कंपनी की ही है। वहीं ई-फेक्टर के अंकित गर्ग और टीम वर्क के राहुल सेन ने अब अजमेर के कलाकारों के फोन अटेण्ड करना ही बंद कर दिया है। यह बेहद शर्मनाक बात है कि पुष्कर मेले के कार्यक्रमों को लेकर जहां सरकार और जिला प्रशासन ने वाहवाही लूटी वहीं कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने वाले स्थानीय कलाकार अपने मेहनताने के लिए भटक रहे है। यह तब हो रहा है जब पुष्कर मेले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्वयं उपस्थिति दर्ज करवाई थी। मेले के दौरान दो दिनों तक वसुंधरा राजे पुष्कर में ही रहीं।
(एस.पी. मित्तल)  (21-01-2016)
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रक्तदान से भी बढ़कर है मां का दूध दान करना। राजस्थान में खुलेंगे 10 मदर मिल्क बैंक।


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भारतीय संस्कृति में किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक जमाना ऐसा आएगा, अब नवजात शिशु मंदिर की सीढिय़ों,कचरे के ढेर, नदी नालों में पड़े मिलेंगे। लेकिन आधुनिकता के इस दौर में रोजाना खबरें पढऩे को मिलती हैं कि नवजात शिशु लावारिस पड़ा मिला है। जो निर्दयी लोग शिशु को लावारिस फेंक देते हैं। वे यह नहीं सोचते कि इसकी जान कैसे बचेगी। ऐसे लावारिस नवजात शिशुओं की जान बचाने का बीड़ा योग गुरु देवेन्द्र अग्रवाल ने उठाया है। अग्रवाल उदयपुर में मां भगवती विकास संस्थान के संस्थापक हैं और अप्र्रैल 2013 से मांके दूध का बैंक चला रहे हैं। 3 हजार 317 माताओं से अब तक 757 लीटर दूध का दान करवाया गया है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती दो हजार से भी ज्यादा नवजात शिशुओं का जीवन बचाया गया है। 21 जनवरी को योगगुरु अग्रवाल ने मुझसे मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान के कामकाज को देखते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश के दस शहरों में मदर मिल्क बैंक खोलने की घोषणा की है और इसके लिए 10 करोड़ रुपए की राशि भी स्वीकृत की है। ऐसे बैंक चित्तौड़, भीलवाड़ा, बारा,बूंदी, टोंक, भरतपुर, अलवर, बांसवाड़ा, चूरू के साथ-साथ अजमेर जिले के ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल में भी खुलेगा। योग गुरु अग्रवाल ने कहा कि जागरुकता की वजह से रक्तदान तो आसान हो गया है, लेकिन मां के दूध के दान का काम बेहद ही कठिन है। ऐसा कई बार होता है कि शिशु को जन्म देने के बाद एक मां को अपने स्तन से दूध बेवजह निकलना होता है। सरकार की मदद से 10 स्थानों पर जो बैंक खोले जा रहे हैं। उनमें मां का दूध एकत्रित किया जाएगा। बच्चे को जन्म देने के बाद तीन प्रकार की माताएं दूध का दान कर सकती हैं। 1.अपने बच्चे को स्तनपान कराने के बाद अतिरिक्त दूध का दान 2. वे माताएं जिनके बच्चे चिकित्सा कारणों से स्तनपान नहीं कर पा रहे है 3. जिन बच्चों के जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाती है। ऐसी माताओं से जो दूध दान में मिलगा उसे बैंक की लैब में सुरक्षित रखा जाएगा। दूध की जांच के बाद ही छोटी शिशियों में दूध को भरकर उन नवजात शिशुओं को पिलाया जाएगा। जो किसी मंदिर की सीढिय़ों अथवा कचरे के ढरे में पड़े मिले हैं। 
योग गुरु अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बेहद ही संवेदनशील रुख अपनाया है। कई बार लावारिस शिशुओं की मौत इसलिए हो जाती है कि उन्हें मां का दूध नहीं मिलता। चिकित्सा विभाग भी मानता है कि मां के दूध में वो शक्ति हैजो कमजोर से कमजोर शिशु को भी ताकतवर बना देता है। उन्होंने कहा कि मां के दूध के दान के लिए वैसी ही जागरुकता चाहिए जैसे रक्तदान के लिए हुई है। आधुनिक और उपभोक्तावादी संस्कृति में महिला के स्तन को सैक्स की दृष्टि से देखा जाता है। वहीं भारतीय संस्कृति में महिला अपने स्तन की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ती है। रक्तदान आमतौर पर पुरुष करते है,जबकि दूध का दान तो सिर्फ महिलाओं को ही करना होता है। रक्तदान पुरुष अस्पताल में जाकर अपने हाथ से कर देता है, जबकि मां के दूध के लिए तो बहुत सारे जतन करने पड़ते हैं। पहली बात तो दूध के दान के लिए मां को मानसिक तौर पर तैयार करना है, चूंकि स्तन से दूध विशेष उपकरण के जरिए निकाला जाता है। ऐसे में मां को भी मानसिक परेशानी तो होती ही है, लेकिन इन सब चुनौतियों से निपटते हुए ही मदर मिल्क बैंक खोले जा रहे है। इसके साथ ही पालना घर का काम भी जुड़ा हुआ है। सरकार ने उन्हीं के संस्था की प्रेरणा से प्रदेश में 65 सरकारी चिकित्सालयों में पालना घर खोले है। जो लोग लोकलाज की वजह से अपने शिशुओं को मंदिर की सीढिय़ों और कचरे के ढेर में फेंकते हैं, उन्हें चाहिए कि वे पालना घर में शिशुओं को छोड़ आएं। जिन शिशुओं को पालना घर में पाला जाता है, उन्हें बाद में निर्धारित प्रक्रिया से गोद दे दिया जाता है। जो लोग इन सब सामाजिक कार्यों को और अधिक समझना चाहते हैं वे मोबाइल नम्बर 9414163163 पर योग गुरु देवेन्द्र अग्रवाल से सीधे सम्पर्क कर सकते हैं। 
(एस.पी. मित्तल)  (21-01-2016)
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