Thursday, 31 March 2016

गरीब नवाज की देग के चढ़ावे को नजर नहीं लगे। ठेके के लिए खादिमों ने ही बनाया पूल।


-----------------------------------------
अजमेर स्थित सांसर प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में दो देग लगी हुई हैं। इन दोनों देगों में रात के समय तबर्रुक (चावल आदि) पकाया जाता है। जब देग खाली होती है तो इसमें जायरीन अपनी अकीदत के अनुरूप चढ़ावा चढ़ाते हैं। इस चढ़ावे का खादिमों की संस्था अंजुमन के द्वारा ठेका दिया जाता है। चूंकि इस बार ख्वाजा साहब का उर्स का झंडा चांद दिखने पर पांच या छह अप्रैल को चढ़ेगा। इसलिए 4 अप्रैल से आगामी 15 दिनों के लिए देग के चढ़ावे का ठेका दिया जा रहा है। गत वर्ष इन 15 दिनों के लिए 3 करोड़ 36 लाख रुपए में ठेका छूटा था। यानि जिन खादिमों के समूह ने 15 दिनों का ठेका लिया, वे अंजुमन को 3 करोड़ 36 लाख रुपए देंगे औन इन 15 दिनों की अवधि में जो भी चढ़ावा आएगा उस पर खादिम समूह का हक होगा। दरगाह की परंपरा के अनुसार देग के चढ़ावे का ठेका दरगाह के खादिम ही ले सकते हंै। इस बार भी उर्स की अवधि के लिए देग के चढ़ावे की बोली लगाई गई तो खादिम समुदाय के लोगों ने ही पूल बना लिया। जिस प्रकार सरकारी निर्माण कार्यों में ठेकेदार पूल बनाकर संबंधित विभाग को अपनी शर्तों पर ठेका देने के लिए विवश करते हैं, उसी प्रकार खादिम समुदाय ने भी पूल बनाकर उर्स की अवधि के लिए मात्र एक करोड़ 50 लाख रुपए की बोली लगाई। यानि जो ठेका गत वर्ष 3 करोड़ 36 लाख रुपए था, उसे इस वर्ष मात्र 1 करोड़ 50 लाख रुपए में देने के लिए विवश किया। खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने देग के चढ़ावे पर पूल बनाए जाने पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि यदि 3 करोड़ 36 लाख रुपए से ज्यादा का प्रस्ताव नहीं आता है तो फिर अंजुमन ही देग के चढ़ावे को एकत्रित करेगी। उन्होंने बताया कि चढ़ावे से प्राप्त राशि को खादिम समुदाय के सामाजिक कार्य पर ही खर्च किया जाता है। 
अकीदत का सवाल:
सब जानते हैं कि ख्वाजा साहब को गरीब नवाज भी कहा जाता है, यानि गरीबों को नवाजने वाले। ख्वाजा साहब की दरगाह में जो जायरीन आता है, उसकी अकीदत पवित्र मजार से जुड़ी होती है। यही वजह है कि प्रतिवर्ष यहां आने वाले जायरीन की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जायरीन अपनी अकीदत और आर्थिक स्थिति के अनुरूप देग में चढ़ावा डालता है। जो लोग दरगाह में जियारत के लिए आए हैं, उन्हें पता है कि देग में नकद राशि के अलावा सोने, चांदी के आभूषण भी पड़े होते हैं। गरीब जायरीन चावल के कट्टे, गुड़, चीनी आदि खाद्य सामग्री भी देग के डालते हैं। ऐसे में देग के चढ़ावे का एक धार्मिक महत्त्व भी होता है। यह सही है कि अंजुमन प्राप्त राशि को सामाजिक कार्यों के साथ-साथ जायरीन की सुविधा के लिए भी खर्च करती र्है। ऐसे में दरगाह से जुड़े सभी प्रतिनिधियों का यह दायित्व है कि वे जायरीन की अकीदत का भी ख्याल रखें। 
चढ़ावे पर है तीन का हक:
ख्वाजा साहब की दरगाह में आने वाले चढ़ावे पर मुख्यत: तीन संस्थाओं का हक है। खादिम समुदाय की दो संस्थाएं बनी हुई हैं। इसके साथ ही आंतरिक व्यवस्थाओं के लिए केन्द्र सरकार ने दरगाह कमेटी का गठन कर रखा है। इसी प्रकार धार्मिक रस्मों के लिए दरगाह के दीवान का भी हक है। वर्तमान दरगाह दीवान सैय्यद जैनुल आबेदीन ने दरगाह में आने वाले चढ़ावे पर अपना हक भी जताया था। इसके लिए आबेदीन ने जिला न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में जंग की। अब गत वर्ष खादिम समुदाय और दीवान ने अदालत के बाहर समझौता कर लिया है। इस समझौते के मुताबिक खादिम समुदाय प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपए की राशि दीवान आबेदीन को देगा। इसके साथ ही दीवान आबेदीन दरगाह में आने वाले चढ़ावे पर अपना हक नहीं जताएंगे। दरगाह कमेटी ने भी दरगाह के अंदर दान पात्र लगा रखे हैं, इन दान पात्रों में भी करोड़ों रुपए की राशि आती है। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (31-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

3 अप्रैल को अजमेर के मिराज मॉल में खुशी मनाएंगे दिव्यांग


----------------------------------------
अजमेर के सर्किट हाउस के निकट बने मिराज मॉल में 3 अप्रैल को दिव्यांग बालक- बालिकाएं खुशी मनाएंगे।  प्रथम कम्प्यूटर की पहल पर हो रहे इस अनोखे कार्यक्रम में कोई भी दिव्यांग भाग ले सकता है। संस्था के चन्द्रभान प्रजापति और श्वेता शर्मा ने बताया कि दिव्यांग बच्चों को मॉल की सभी सुविधाओं का लाभ दिलवाया जाएगा। साथ ही जरुरतमंद बच्चों को ड्रेस भी दी जाएगी। खुशी का यह कार्यक्रम दोपहर तीन बजे से शुरू होगा। दिव्यांग बच्चों की अपनी पीड़ा होती है। जिन परिवारों में दिव्यांग बच्चे है उन्हें पीड़ा का एहसास है। ऐसे पीड़ादायक माहौल में यदि दिव्यांग बच्चे खुशी का एहसास करें तो यह सुखद अनुभूति होगी। सामान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर दिव्यांग बच्चों को खुशी दे सकते हैं। मिराज मॉल के फ्लाूेर पर दिव्यांग बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी बच्चों का मेडिकल चेकअप करवाया जाएगा। बच्चों को पिज्जा, बर्गर के साथ-साथ स्वादिष्ट व्यंजन भी खिलाए जाएंगे। प्रत्येक बच्चे को गिफ्ट भी दिया जाएगा। दिव्यांग बच्चों की हौंसलअफजाई के लिए इस अनोखे कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। 


नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (30-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

आखिर सर्राफा व्यापारियों की देशव्यापी बेमियादी हड़ताल की सुध क्यों नहीं ले रही मोदी सरकार। कांग्रेस भी खामोश।


-------------------------------------
31 मार्च को सर्राफा व्यापारियों की बेमियादी हड़ताल को पूरा एक माह हो गया। केन्द्र सरकार द्वारा सर्राफा कारोबार पर एक प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लागू करने के विरोध में देश भर के सर्राफा व्यापारी बेमियादी हड़ताल पर हैं। केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि ड्यूटी रोल बैक नहीं होगी। वहीं सर्राफा व्यापारियों ने भी घोषणा कर दी है कि जब तक रोल बैक नहीं होगा, तब तक सर्राफा दुकानों के ताले नहीं खुलेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नरेन्द्र मोदी की सरकार सर्राफा व्यापारियों की हड़ताल की सुध क्यों नहीं ले रही है? क्या कांग्रेस की तरह भाजपा की सरकार भी सर्राफा कारोबार को चोरों का कारोबार समझती है? भले ही मोदी सरकार ने इस तरह की बात नहीं कही हो, लेकिन यही कहा जा रहा है कि सेंट्रल एक्साइज के दायरे में आने से सर्राफा कारोबार में बेईमानी नहीं होगी, यानि उपभोक्ता को सोने के शुद्ध जेवरात उपलब्ध होंगे और यदि कोई व्यापारी चोरी और बेईमानी करेगा तो उसके विरुद्ध सेंट्रल एक्साइज कानून के तहत सख्त कार्यवाही होगी। वहीं सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सर्राफा कारोबार पूरी तरह भरोसे का कारोबार है, जबसे होलमार्क की प्रणाली लागू हुई है तब से तो बेईमानी की गुंजाइश खत्म हो गई है। ऐसे में सरकार सेंट्रल एक्साइज के माध्यम से इंसपेक्टर राज लागू करना चाहती है। सर्राफा कारोबार पर पहले से ही कोई तीस प्रतिशत टैक्स लागू है। ऐसे में किसी भी व्यापारी को एक-दो प्रतिशत और टैक्स देने पर कोई एतराज नहीं है। लेकिन सर्राफा कारोबार को सेंट्रल एक्साइज के दायरे में न लाया जाए। 
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्किल डवलपमेंट की बात करते हैं तो वहीं सर्राफा कारोबार पर सेंट्रल एक्साइज लागू कर रहे हैं, जबकि सेंट्रल एक्साइज की ड्यूटी उसी कारोबार पर लागू होती है, जहां मशीनों का उपयोग होता है। सर्राफा कारोबार में अधिकांश जेवर कारीगर हाथ से ही तैयार करते हंै, इसलिए इस करोबार से हजारों हस्तशिल्पी जुड़े हुए हैं, दुनिया में आज तक भी ऐसी कोई मशीन नहीं बनी है, जो पोली छोटी गोलियां बना सके। सर्राफा कारीगर अपने हाथ से ऐसी गोलियां बनाते हैं। सरकार ने सेंट्रल एक्साइज की ड्यूटी लागू कर हस्तशिल्प कला का गला घोटने का भी काम किया है। अच्छा होता कि मोदी सरकार इस हस्तशिल्प कला के विकास के लिए कोई निर्णय लेती।
हड़ताली सर्राफा व्यापारियों को इस बात पर भी अफसोस है कि कांग्रेस मोदी सरकार की छोटी-छोटी गलतियों का विरोध करती है, लेकिन सर्राफा व्यापारी गत एक माह से देशव्यापी बेमियादी हड़ताल पर हंै, लेकिन कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता ने अभी तक गंभीरता नहीं दिखाई है। एक ओर मोदी सरकार सुन नहीं रही तो दूसरी ओर कांग्रेस भी हड़ताल का समर्थन नहीं कर रही है। ऐसे में सर्राफा कारोबारी स्वयं को बेसहारा महसूस कर रहे हंै। सर्राफ कारोबारियों की यह भी पीड़ा है कि चुनाव के समय दोनों ही दलों के नेता चंदा वसूली करते हैं, लेकिन अब मुसीबत में उनकी कोई मदद नहीं कर रहा। वर्ष 2012 में जब कांग्रेस सरकार ने इसी प्रकार सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लागू की थी तो गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने विरोध किया था। इसके लिए मोदी ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर ड्यूटी को वापस लेने की मांग की थी, तब सरकार को ड्यूटी का रोल बैक करना भी पड़ा। यानि उस समय नरेन्द्र मोदी के विरोध को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने सर्राफा व्यापारियों को राहत दी, लेकिन आज वो ही नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर बैठे हैं, तो सर्राफा व्यापारियों से बात तक नहीं कर रहे। इसको लेकर गुजरात के सर्राफा व्यापारी भी मोदी से खफा है। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (30-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

Wednesday, 30 March 2016

हरफनमौला सोमरत्न आर्य के जन्मदिन के क्या कहने। बेसहारा लोगों के बीच खुशी का माहौल।


-----------------------------------------
अजमेर के डिप्टी मेयर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता सोमरत्न आर्य ने 30 मार्च को अपना 62वां जन्मदिन लोहागल स्थित अपना घर में रह रहे बेसहारा लोगों के बीच मनाया। अपना घर के संचालन में आर्य की भी भूमिका है। इसलिए यहां जो बेसहारा महिला और पुरुष रह रहे हैं, वे सब आर्य को अच्छी तरह जानते और पहचानते है। मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन भरतपुर के द्वारा संचालित अजमेर में अपना घर में उन्हीं महिला एवं पुरुष को रखा जाता है जिनका कोई सहारा नहीं होता। जब कभी सड़क पर कोई लावारिस व्यक्ति नजर आता है तो अपना घर के सेवाभावी उसे एम्बुलेंस से अपनाघर ले आते है। यहीं वजह है कि यहां मानसिक रूप से विकसित स्त्री-पुरुष भी रहते है। मैंने 30 मार्च को देखा कि अपनाघर में रहने वाले स्त्री और पुरुषों की मानसिक स्थिति कैसी भी हो लेकिन जब उन्होंने हरफनमौला सोमरत्न को देखा तो उनके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। सोमरत्न को देखते ही कुछ लोग गाना गाने तो कुछ तालियां बजाने लगे। अपनाघर में कोई 80 स्त्री-पुरुष रह रहे है और सभी लोग सोमरत्न को ऐसे देख रहे थे जैसे उनके घर का कोई सदस्य आ गया है। अपनाघर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष विष्णु गर्ग ने बताया कि जब कोई व्यक्ति ज्यादा परेशान होता है तो सोमरत्न आर्य को ही यहां बुलाया जाता है। वैसे सोमरत्न हर दूसरे दिन यहां आकर देखभाल करते है। हालांकि अपना घर में देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ, चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेंस आदि सभी व्यवस्थाएं है, लेकिन सोमरत्न का हरफनमौलापन इन सब के ऊपर है। सोमरत्न ने एक-एक व्यक्ति से ऐसे जानकारी ली जैसे वे डॉक्टर हों। इसलिए सोमरत्न ने अपना 62वां जन्मदिन अपने लोगों के बीच मनाया। 30 मार्च को सोमरत्न के साथ उनकी पत्नी श्रीमती वंदना आर्य, बहन उर्मिला आर्य तथा साध्वी उत्तमा यति भी थी। पूरे परिवार ने अपनाघर के सभी सदस्यों को भोजन कराया। इस अवसर पर समाजसेवी श्रीमती विनिता जैमन, उनके पति दीप जैमन व्यवसायी दिनेश गर्ग आदि भी उपस्थित रहे।
आर्य ने कहा कि वे अपना जन्मदिन अपनाघर के लोगों के बीच ही मनाते है। यहां मनोरोगी, मंदबुद्धि, नेत्रहीन, अंगविहीन, जख्मी, अस्थि भंग, लकवा-पोलियो, मिर्गी, टीबी, कुष्ठ रोगी, केंसर, एड्स एवं उदर आदि रोग से ग्रसित लोग प्रवेश पा सकते है। अपना घर में सभी को नि:शुल्क रखा जाता है। इसके लिए मुझसे मेरे मोबाइल नम्बर 9828039700 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (30-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511


रोहित के लिए दिल्ली में फिर निकला जुलूस। पर नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों और डॉ. नारंग की हत्या पर कुछ नहीं होता।


-----------------------------------------
30 मार्च को एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के मृतक छात्र रोहित वेमुला के समर्थन में जुलूस निकाला। 30 मार्च को ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में सात से भी ज्यादा जवान शहीद हो गए। रोहित वेमूला के आत्महत्या के प्ररकण में पहले भी दिल्ली में धरना प्रदर्शन हो चुके हैं। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि रोहित का मामला अब राजनीति का शिकार हो गया है। जो लोग रोहित के मामले को लेकर जुलूस और धरना प्रदर्शन करते हैं। उनकी मंशा रोहित के परिजन को न्याय दिलवाने के बजाए हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से लेकर केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी हटवाने में है। इसमें कोई दो राय नहीं कि रोहित वेमुला के परिजन को न्याय मिलना चाहिए। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या दूसरे मुद्दों पर इतनी जागरुकता दिखाई जाती है? अभी हाल ही में दिल्ली में डॉ. नारंग को छह युवकों ने पीट-पीट कर मार डाला। डॉ. नारंग की हत्या और 30 मार्च को नक्सली हमले में शहीद हुए सात जवानों का मामला भी ऐसा है, जिसमें तीखी प्रतिक्रिया होनी चाहिए। इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि मीडिया में रोहित के समर्थन में निकले जुलूस की तो चर्चा होती है, लेकिन डॉ. नारंग की हत्या के मामले में चुप्पी साधी जाती है। जबकि हमारे जवानों के शहीद होने पर तो कोई प्रतिक्रिया भी नहीं होती है। हमारे जवान नक्सली हमले के साथ-साथ आतंकी हमलों में भी आए दिन शहीद होते है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि आपराधिक घटना पर भी खुले आम राजनीति होती है। जो जवान देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाता है उसकी पीड़ा उसके परिजनों से पूछी जा सकती है। हमारा जवान देश की सीमा पर शहीद हो रहा है, इसलिए तो देश में सुरक्षित तौर पर जुलूस और धरना प्रदर्शन हो पाते हैं। यदि हमारा देश का जवान शहीद न हो तो फिर जंतर-मंतर और दूसरे स्थानों पर धरना प्रदर्शन भी नहीं हो सकते हैं। 
नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (30-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511


आखिर उत्तराखंड में ये क्या हो रहा है? चार दिन में हाईकोर्ट के तीन फैसले। बदलते फैसलों से भी राजनीतिक अस्थिरता।


------------------------------------------
माना जाता है कि नेताओं की वजह से राजनीतिक हालात बिगड़ते हैं। उत्तराखंड में भी गत 18 मार्च को जब कांग्रेस सरकार के 9 विधायकों ने बगावत की तो राजनीतिक अस्थिरता हो गई। विवाद तब और बढ़ा जब विधानसभा अध्यक्ष ने 9 विधायकों की सदस्यता को ही रद्द कर दिया। राजनेता तो अपने स्वार्थों की वजह से कुछ भी कर सकते हैं, १लेकिन यह उम्मीद की जाती है कि लोकतंत्र के सबसे मजबूत और निष्पक्ष तंत्र न्यायपालिका तो सोच समझ कर निर्णय देती है। लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट के गत चार दिनों में जो तीन फैसले आए हैं, उसमें राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है। अब 30 मार्च को नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैसला दिया है कि 31 मार्च को विधानसभा में हरीश रावत की सरकार का शक्ति परीक्षण नहीं होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में आगामी 6 अप्रैल को सुनवाई होगी, तभी कोई आदेश दिया जाएगा। यानि 31 मार्च को होने वाला शक्ति परीक्षण 6 अप्रैल तक के लिए टल गया। असल में केन्द्र सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट की डबल बैंच में इसलिए जाना पड़ा क्योंकि सिंगल बैंच ने 29 मार्च को आदेश दिया कि हरीश रावत 31 मार्च को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करें। यह आदेश तब दिया गया, जब 27 मार्च को ही केन्द्र सरकार उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू कर चुकी थी। यानि संवैधानिक तौर पर हरीश रावत की सरकार वजूद में नहीं थी। यदि राष्ट्रपति शासन के दौरान हरीश रावत विधानसभा में बहुमत सिद्ध करते तो यह आजाद भारत का शायद पहला मामला होता। इस संवैधानिक संकट को टालने के लिए ही केन्द्र सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट जाना पड़ा। हालांकि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी यह जानना चाहा, जब राज्यपाल ने 28 मार्च को बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा था तो फिर एक दिन पहले ही राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया? कोर्ट में उपस्थित अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी विधायकों की खरीद फरोख्त का हवाला दिया। कांग्रेस, भाजपा और केन्द्र सरकार के अपने-अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह से चार दिन में हाईकोर्ट के तीन फैसले सामने आए हैं, उससे अनेक सवाल खड़े होते हैं। राजनेताओं की वजह से ही अनेक बार न्यायपालिका और विधायिका आमने-सामने हो जाते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। उम्मीद है कि लोकतंत्र के दोनों महत्त्वपूर्ण पाए कोई ऐसा रास्ता निकालेंगे, जिसमें विवाद न हो। लोकतंत्र की रक्षा करने का दायित्व इन दोनों संस्थाओं पर है। हालांकि फिलहाल उत्तराखंड में संवैधानिक संकट टल गया है, लेकिन 6 अप्रैल को जब सुनवाई होगी, तो दोनों ही पक्षों को बीच का रास्ता निकालना होगा। फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि उत्तराखंड में राजनेताओं की वजह से जो कुछ भी हो रहा है, उससे उत्तराखंड के नागरिकों का ही नुकसान है। उत्तराखंड के लोगों ने गत वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेली है, ऐसे में उत्तराखंड में विकास कार्य करवाना ज्यादा जरूरी है।  अगले वर्ष तो विधानसभा के चुनाव होने ही हैं। 

(एस.पी. मित्तल)  (30-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

Tuesday, 29 March 2016

विधायक गौतम ने विधानसभा में उठाया बीसलपुर पाईप लाईन संधारण का मामला, की उच्चस्तरीय जांच की मांग।


जलदाय मंत्री ने उगा स्तरीय कमेटी गठित कर जांच का दिया आश्वासन।
------------------------------------
केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने 29 मार्च को विधानसभा में अजमेर शहर सहित जिले की लाईफ लाईन माने जाने वाली बीसलपुर अजमेर पाईप लाईन का संधारण एवं संचालन करने में सम्बन्धित ठेकेदार कम्पनी द्वारा गम्भीर अनियमिताएं बरतने का सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। विधायक गौतम ने विधानसभा में बोलते हुए जनस्वास्थ्य अभियान्त्रिकी मंत्री किरण माहेश्वरी को अवगत कराया कि बीसलपुर अजमेर पाईप लाईन व केकड़ी स्थित फिल्टर प्लांट का संधारण एवं संचालन करने वाली ठेकेदार कम्पनी नागार्जुन कन्सट्रक्शन कम्पनी गुडग़ांव को अनुबंध के अनुसार इस कार्य के लिए करीब 30 लाख रुपए महीने दिए जाते है। उन्होंने कहा कि अधिकारियो, कर्मचारियो द्वारा मिलीभगत कर पाईप लाईन में समय समय पर होने वाले लीकेज के दौरान व्यर्थ बहे पेयजल की नाम मात्र की कटौती राशि वसूल की गई है। विधायक शत्रुघ्न गौतम ने जनस्वास्थ्य अभियान्त्रिकी मंत्री किरण माहेश्वरी को अवगत कराया कि बीसलपुर अजमेर पाईप लाईन शोकलिया पुलिया व करणी पेट्रोल पम्प के पास लीकेज होने पर 14.90 मिलियन लीटर पानी व्यर्थ बहा था, जिस पर ठेकेदार कम्पनी द्वारा दी जाने वाली अनुबन्ध राशि में से मात्र 1 लाख 49 हजार रुपए की राशि वसूली गई, जो निर्धारित नियमानुसार करीब 10 गुना कम है। विधायक गौतम ने सदन में कहा कि इसके अलावा भी ठेकेदार कम्पनी द्वारा पाईप लाईन संधारण व संचालन के कार्य में विभिन्न अनियमिताएं बरती जा रही है, जिसकी लगातार शिकायते मिल रही है। गौतम ने कहा कि बीसलपुर पेयजल परियोजना से अजमेर शहर सहित जिले के सैकड़ो गांवो को जलापूर्ति होती है। बीसलपुर पाईप लाईन के संधारण एवं संचालन में किसी प्रकार की अनियमिता व लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विधायक गौतम ने मंत्री किरण माहेश्वरी से सदन में मांग की कि शीघ्र ही एक उगा स्तरीय कमेटी का गठन कर ठेकेदार कम्पनी द्वारा पाईप लाईन का अब तक किए जा रहे संधारण व संचालन कार्य के विस्तृत जांच होनी चाहिए, जिस पर जनस्वास्थ्य अभियान्त्रिकी मंत्री माहेश्वरी ने विधायक गौतम को आश्वस्त किया कि एक माह के भीतर उगा स्तरीय कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच की जायेगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियो, कर्मचारियो के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

मोटर वाहन उपनिरीक्षक परीक्षा के सफल अभ्यर्थी बने मुर्गा


आयोग के रवैये पर जताई नाराजगी
-----------------------------------------
मोटर वाहन उपनिरीक्षक परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों ने 29 मार्च को मुर्गा बनकर राजस्थान लोक सेवा आयोग के रवैये पर नाराजगी जताई। तय कार्यक्रम के अनुसार 29 मार्च को सफल अभ्यर्थी आयोग मुख्यालय के बाहर एकत्रित हुए। अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि श्रीचंद ढाका ने बताया कि 6 माह पहले आयोग ने परिणाम घोषित कर दिया, लेकिन आज तक भी नियुक्ति की अभिशंषा और परिणाम से जुड़े दस्तावेज राज्य सरकार को नहीं भेजे हैं, जिसकी वजह से सफल अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। गत छह माह में अभ्यर्थियों ने आयोग मुख्यालय के बाहर कई बार धरना प्रदर्शन किया और आयोग के अध्यक्ष ललित के.पंवार से भी मुलाकात की, लेकिन हर बार आयोग की ओर से कहा जाता रहा कि दो चार दिन में नियुक्ति की अभिशंषा राज्य सरकार को प्रेषित कर दी जाएगी, लेकिन हर बार आयोग प्रशासन अपने वायदे से मुकर जाता है। इसमें सफल अभ्यर्थियों में खासी नाराजगी है। आयोग के अध्यक्ष पंवार ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि नियुक्ति की अभिशंषा शीघ्र ही राज्य सरकार को भिजवा दी जाएगी। ढाका ने बताया कि आयोग का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंगलवार को चयनित अभ्यर्थी आयोग मुख्यालय परिसर में ही मुर्गा बन गए। इसके माध्यम से आयोग को हम यह बताना चाहते हैं कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी अभ्यर्थियों की स्थिति जानवर जैसी है। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 


(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

मोटर वाहन उपनिरीक्षक परीक्षा के सफल अभ्यर्थी बने मुर्गा


आयोग के रवैये पर जताई नाराजगी
-----------------------------------------
मोटर वाहन उपनिरीक्षक परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों ने 29 मार्च को मुर्गा बनकर राजस्थान लोक सेवा आयोग के रवैये पर नाराजगी जताई। तय कार्यक्रम के अनुसार 29 मार्च को सफल अभ्यर्थी आयोग मुख्यालय के बाहर एकत्रित हुए। अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि श्रीचंद ढाका ने बताया कि 6 माह पहले आयोग ने परिणाम घोषित कर दिया, लेकिन आज तक भी नियुक्ति की अभिशंषा और परिणाम से जुड़े दस्तावेज राज्य सरकार को नहीं भेजे हैं, जिसकी वजह से सफल अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। गत छह माह में अभ्यर्थियों ने आयोग मुख्यालय के बाहर कई बार धरना प्रदर्शन किया और आयोग के अध्यक्ष ललित के.पंवार से भी मुलाकात की, लेकिन हर बार आयोग की ओर से कहा जाता रहा कि दो चार दिन में नियुक्ति की अभिशंषा राज्य सरकार को प्रेषित कर दी जाएगी, लेकिन हर बार आयोग प्रशासन अपने वायदे से मुकर जाता है। इसमें सफल अभ्यर्थियों में खासी नाराजगी है। आयोग के अध्यक्ष पंवार ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि नियुक्ति की अभिशंषा शीघ्र ही राज्य सरकार को भिजवा दी जाएगी। ढाका ने बताया कि आयोग का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंगलवार को चयनित अभ्यर्थी आयोग मुख्यालय परिसर में ही मुर्गा बन गए। इसके माध्यम से आयोग को हम यह बताना चाहते हैं कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी अभ्यर्थियों की स्थिति जानवर जैसी है। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 


(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने दिव्यांग बच्चों के साथ मनाया जन्म दिन।



------------------------------------
अजमेर के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का जन्म दिन मनाने के लिए भले ही लोगों में होड़ मची हो, लेकिन स्वयं गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत के साथ अपना जन्म दिन दिव्यांग बच्चों के साथ मनाया। गहलोत के जन्म दिन के फ्लैक्स शहर भर में लगे हुए हैं। हर कोई अपना फ्लैक्स टांग कर गहलोत को जन्म दिन की बधाई और मुबारकबाद दे रहा है। गहलोत का जन्म दिन वर्ष 2015 में भी था। लेकिन तब किसी भी व्यापारी, उद्योगपति, समाजसेवी और भाजपा के नेता ने गहलोत के जन्म दिन के फ्लैक्स नहीं लगाए, लेकिन वर्ष 2016 के जन्म दिन पर गहलोत अजमेर के मेयर है, इसलिए फ्लैक्स टांगने और बधाई देने की होड़ मची हुई है। गहलोत भी वर्ष 2015 और 16 के जन्म दिन का फर्क समझते हैं, इसलिए गहलोत ने 29 मार्च को सबसे पहले अपना जन्म दिन बी.के.कौल नगर स्थित शुभदा के संस्थान में दिव्यांग बच्चों के साथ मनाया। 
यहां गहलोत ने केक काटा और बच्चों को अपने हाथों से केक खिलाया। मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों ने जब मेयर गहलोत और उनकी पत्नी हेमा गहलोत के हाथों से केक खाया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। गहलोत दिव्यांग बच्चों के साथ काफी देर तक रहे। गहलोत आज जब नगर निगम पहुंचे तो दिन भर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। एक दिन पहले से ही गहलोत ने जन्म दिन का धूमधड़ाका शुरू हो गया था। अजमेर के प्रभारी मंत्री वासुदेव देवनानी ने व्यक्तिगत तौर पर गहलोत को जन्म दिन की बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। गहलोत ने अपने जन्म दिन पर राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरवधाम के उपासक चम्पालाल महाराज से भी आशीर्वाद लिया है। गहलोत मेयर बनने का श्रेय चम्पालाल महाराज को ही देते हैं। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511





उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला कांग्रेस और हरीश रावत के पक्ष में नहीं माना जा सकता।



भाजपा को भी लगा झटका। 
-------------------------------------------
29 मार्च को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरीश रावत को बहुमत सिद्ध करने के लिए जो 31 मार्च का समय दिया है, उस फैसले को कांग्रेस और हरीश रावत के पक्ष में नहीं माना जा सकता, क्योंकि हाईकोर्ट ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को भी 31 मार्च को विधानसभा में वोट देने का अधिकार दे दिया है। कांग्रेस और हरीश रावत इस बात से खुश हो सकते हैं कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन थोपने का जो निर्णय लिया, उसे हाईकोर्ट ने एक तरह से गलत ही माना है। किसी सरकार को बहुमत है या नहीं का फैसला विधानसभा में ही होना चाहिए। यह बात अलग है कि विधानसभा के अध्यक्ष ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया था, यदि 9 बागी विधायकों को वोट देने दिया जाता तो हरीश रावत की सरकार 28 मार्च को ही हार जाती। हरीश रावत इस बात से खुश हो सकते हैं कि अब वे 31 मार्च को बहुमत सिद्ध करेंगे। लेकिन उत्तराखंड के राजनीतिक समीकरण में कोई बदलाव नहीं आया है। जब 9 बागी विधायक भाजपा के 27 विधायकों के साथ सरकार के विश्वास मत के खिलाफ वोट डालेंगे, तो हरीश रावत की सरकार अपने आप गिर जाएगी। माना जा रहा है कि 28 मार्च को जिन गैर कांग्रेसी विधायकों ने राज्यपाल के समक्ष हरीश रावत को समर्थन जातया था उसमें से भी कई विधायक 31 मार्च को सरकार के खिलाफ वोट डालेंगे। 
भाजपा की किरकिरी:
29 मार्च के हाईकोर्ट के फैसले से भाजपा की केन्द्र सरकार की भी किरकिरी हुई है। सवाल उठता है कि जब उत्तराखंड के राज्यपाल ने हरीश रातव कोबहुमत सिद्ध करने के िलए 28 मार्च का दिन निर्धारित किया था तो फिर 26 मार्च की रात को ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया? जहां तक विधायकों की खरीद फरोख्त का सवाल है तो ऐसे मौकों पर विधायक बिकते ही है। लेकिन भाजपा इस बात से खुश हो सकती है कि कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को वोट देने का अधिकार मिल गया है। 
हाईकोर्ट के निर्णय पर भी सवाल:
राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनजर उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्णय पर भी सवालिया निशान लग रहा है। 29 मार्च को हाईकोर्ट ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को वोट देने का अधिकार दिया है तो इससे पहले इसी हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका को खारिज कर दिया था। उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष ने बागी विधायकों की सदस्यता को रद्द करने का जो आदेश दिया उसे विधायकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन तब हाईकोर्ट ने विधानसभा के अध्यक्ष के निर्णय को ही उचित माना। यानि एक ही मुद्दे पर हाईकोर्ट की राय अलग-अलग सामने आई। सवाल उठता है कि जब एक बार बागी विधपायकों को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया तो फिर दूसरी बार के निर्णय में अधिकार क्यों दिया गया?हालंाकि हाईकोर्ट के निर्णय पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन लोकतंत्र में देश की जनता ही सर्वोच्च होती है। इसलिए सर्वोच्च संस्था के मस्तिष्क में हाईकोर्ट के दो फैसलों को लेकर सवाल तो उठेंगे ही। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

क्या भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र याव अजमेर के नेताओं से खफा हैं?



सलेमाबाद के बाद अब भांवता गांव को 
लिया गोद। 
-----------------------------------------
देश की सत्तारुढ़ पार्टी की राजनीति में खास स्थान रखने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव अजमेर के रहने वाले हैं। यादव राज्यसभा के सांसद हैं। इस नाते अजमेर जिले के गांवों को ही सांसद आदर्श ग्राम योजना में गोद लेते हैं। 29 मार्च को देहात भाजपा के जिला अध्यक्ष भगवती प्रसाद सारस्वत और यादव के अजमेर में प्रतिनिधि भाजपा पार्षद जे.के.शर्मा ने जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक को एक पत्र सौंपा। यादव के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कलेक्टर को बताया गया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना में इस वर्ष पीसांगन पंचायत समिति के भांवता गांव का चयन किया गया है। कलेक्टर से कहा गया कि इस गांव के विकास की योजना बनाकर भेजी जाए ताकि सांसद कोष से विकास कार्य करवाए जा सके, इससे पहले गत वर्ष यादव ने किशनगढ़ के निकट सलेमाबाद गांव को गोद लिया था। सांसदों के द्वारा अपने क्षेत्र के गांव को गोद लेने की योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्त्वकांक्षी योजना है। मोदी का मानना है कि यदि एक सांसद प्रतिवर्ष एक गांव की कायापलट कर दे तो पांच वर्ष में हजारों गांव शहर का रूप ले सकते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि जब कोई नेता राष्ट्रीय राजनीति में दखल रखता है तो अपने राजनीतिक प्रभाव का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए करता है। चूंकि सांसद यादव का अजमेर गृह जिला है। इसलिए अजमेर जिले के लोग भी यादव से अपेक्षाएं रखते हैं, लेकिन इसे राजनीति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यादव के प्रभाव का लाभ अजमेर के लोगों को नहीं मिल रहा है। राज्यसभा का सांसद बनने के बाद यादव ने स्वयं कहा था कि अजमेर के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। लेकिन यादव की कार्यप्रणाली बताती है कि उन्होंने अजमेर के विकास में कोई रुचि नहीं दिखाई है। यदि पीएम मोदी का दबाव नहीं होता तो यादव जिले के दो गांवों को भी गोद नहीं लेते। ऐसा नहीं कि यादव अजमेर में विकास कार्य नहीं करवाना चाहते। यादव चाहते तो है, लेकिन अजमेर के भाजपा नेताओं की गुटबाजी से बेहद खफा है, जिसका खामियाजा अजमेर के लोगों को उठाना पड़ रहा है। अजमेर के भाजपा नेताओं से यादव कितने खफा हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भांवता गांव को गोद लेने के महत्त्वपूर्ण मौके पर भी यादव अजेमर नहीं आए। यहां तक कि जिला प्रशासन की महत्त्वपूर्ण बैठकों में भी यादव भाग नहीं लेते हैं। इतना ही नहीं भाजपा संगठन की ओर से जो कार्यक्रम होते हैं, उसमें भी यादव शामिल नहीं होते। यादव ने गत वर्ष अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अरविंद यादव को अजमेर शहर भाजपा का अध्यक्ष मनोनित करवाया था, लेकिन हाल ही के चुनावों में जिस तरह से यादव को हटाने का अभियान चलाया गया, उससे भूपेन्द्र यादव बेहद खफा बताए जाते हैं। हालांकि अजमेर में अभी तक भी शहर अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका है। इसलिए अरविंद यादव ही अध्यक्ष बने हुए हैं। 
यादव के समर्थकों का कहना है कि वे अजमेर के भाजपा नेताओं के आपसी झगड़ों में उलझना नहीं चाहते है। अभी हाल ही में यादव ने केकड़ी में अपने निजी सहायक के पारिवारिक समारोह में भाग लिया, लेकिन अजमेर शहर के किसी भी नेता से नहीं मिले। केकड़ी नगर पालिका के समारोह में भी यादव क्षेत्रीय विधायक शत्रुघ्न गौतम की जिद के कारण शामिल हुए। अजमेर वासियों का मानना है कि यदि भाजपा के नेता एकजुट होकर यादव के राजनीतिक प्रभाव का लाभ उठाएं तो अजमेर की अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

अजमेर के सरपंचो का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन



----------------------------------------
29 मार्च को अजमेर जिले के सरपंचों ने जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। सरपंचों ने घोषणा की कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो एक अप्रैल को जयुपर में विधानसभा का घेराव किया जाएगा। जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह मझेवला ने कहा कि प्रदेशभर के सरपंच सरकार की वर्तमान नीतियों से बेहद खफा हैं। मझेवला ने बताया कि मनरेगा में वीसीआर दर पर सामग्री खरीदने, आंतरिक अंकेक्षण बंद करने, बेलदार की दर बाजार दर पर निर्धारित करने, नियम 181 में सुधार करने, जनता जल योजना में विद्युत बिलों का भुगतान सरकार द्वारा जमा करवाने, पक्के निर्माण कार्यों में मशीनरी के उपयोग की अनुमति देने, ग्राम पंचायत स्तर पर लगने वाले कैम्प की राशि निर्धारित करने, कार्मिक ग्राम सेवक और जेईएन को नियुक्त करने, हैंडपम्प आदि के लिए भूमि देने आदि की मांग लगातार की जा रही है। 
नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (29-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

Monday, 28 March 2016

आईटी के उपनिदेशक आशुतोष गौतम और अकाउंटेंट नागरमल शर्मा को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा


-------------------------------------
28 मार्च को अजमेर के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आईटी केन्द्र पर छापा मार कर एसीबी ने केन्द्र के उपनिदेशक आशुतोष गौतम और अकाउंटेंट नागरमल शर्मा को दस हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राममूर्ति ने बताया कि आईटी केन्द्रों पर लगे कम्प्यूटरों की फर्म को बकाया बिलों का भुगतान करवाने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी। पिछले कई दिनों से मोबाइल फोन को टेप किया जा रहा था। रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ही 28 मार्च को गौतम व शर्मा को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
(एस.पी. मित्तल)  (28-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

स्मार्ट सिटी के मुर्दे में गंगा जल के छीटें मारकर जान फूकेंगे।



एडीए अध्यक्ष शिवशंकर हेडा ने किया ऐलान।
--------------------------------
28 मार्च को अजमेर के विजयलक्ष्मी पार्क में फाल्गुन महोत्सव का समापन समारोह हुआ। फाल्गुन महोत्सव गत 23 मार्च को जवाहर रंगमंच पर आयोजित किया गया था। शहर के पत्रकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों आदि के सहयोग से होने वाले महोत्सव में अजमेर की स्मार्ट सिटी को लेकर व्यंग्य किए गए थे। 28 मार्च को समापन समारोह में अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा ने कहा कि फाल्गुन महोत्सव में स्मार्ट सिटी के मुद्दे पर जो मुर्दा दिखाया गया उसे अब गंगा जल के छीटें मारकर जिंदा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के मुद्दे पर अजमेर वासियों को निराश होने की जरूरत नहीं है। अजमेर को स्मार्ट बनाने का संकल्प पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम वसुधंरा राजे ने किया है। इसलिए हम सब मिलकर अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाएंगे। अगले वर्ष होली पर फाल्गुन महोत्सव के  दौरान ही जिन्दा स्मार्ट सिटी मिलेगी। हेड़ा ने महोत्सव की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह समारोह अब अजमेर की पहचान बन गया है। मंडल रेल प्रबंधक नरेश सालेचा ने कहा कि केन्द्र में शहरी विकास की अनेक योजनाए होती है। जब वे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय में उपसचिव थे तो अजमेर से भी विकास कार्यो के प्रस्ताव मांगे गए। लेकिन अजमेर से एक भी प्रस्ताव मंत्रालय के पास नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ स्मार्ट सिटी का नहीं है बल्कि केन्द्र सरकार की योजनाओं की क्रियान्विति करवाने का है। इसके लिए राजनेताओं के साथ-साथ आम लोगों को भी जागरूक होना होगा। समापन समारोह में दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण के संपादक डॉ रमेश अग्रवाल ने कहा कि फाल्गुन महोत्सव के माध्यम से राजनेताओं को हकीकत से रूबरू करवाया जाता है और उन्हें इस बात की खुशी है कि राजनेता भी सकारात्मक तौर पर स्वीकार करते हैं। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि फाल्गुन महोत्सव समिति का कोई पदाधिकारी नहीं है। कुछ लोग शुरूआत करते है और फिर कारवा बढ़ता जाता है। राजस्थान पत्रिका के स्थानीय सम्पादक उपेन्द्र शर्मा ने कहा कि उन्होंने कई शहरों में कार्य किया है लेकिन अजमेर में जिस तरह से पत्रकारों में सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता है वैसी जागरूकता कहीं भी नहीं देखी। अजयमेरु प्रेस क्लब के अध्यक्ष एस.पी.मित्तल ने कहा कि फाल्गुन महोत्सव सभी के सहयोग से सफल हुआ है। डॉ रमेश अग्रवाल के निर्देशन में सभी साथियों ने भरपूर सहयोग किया। नगर निगम के उपमहापौर संपत सांखला ने कहा कि महोत्सव का शहरवासी वर्षभर इंतजार करते हंै। महोत्सव की परम्परा के अनुरुप स्वामी न्यूज चैनल के एमडी कंवल प्रकाश किशनानी ने आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया। किशनानी ने विस्तृत तौर पर बताया कि किन-किन संस्थाओं और व्यक्तियों ने महोत्सव में सहयोग किया। महोत्सव में सक्रिय भूमिका निभाने वाले समाजसेवी सोमरत्न आर्य ने कहा कि टीम भावना की वजह से कार्यक्रम सफल हुआ। समारोह का संचालन करते हुए अजयमेरु प्रेस क्लब के महासचिव प्रताप सनकत ने कहा कि फाल्गुन महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई भी कलाकार अथवा सहयोगी पारिश्रमिक नहीं लेता है। सभी लोग स्वैच्छा से अपना-अपना योगदान देते है और इसलिए यह महोत्सव शहर का महोत्सव बन गया है।  समारोह के अंत में मोशन एज्युकेशन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से महोत्सव के कलाकारों और सहयोगियों को आकर्षक गिफ्ट भेंट की गई। यह गिफ्ट जी मरुधरा टीवी चैनल के अजमेर संभाग के प्रभारी मनवीर सिंह चुण्डावत और सिद्दी एडवरजाइजिंग के कमल बाधवा के प्रयासों से वितरित किए गए। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (28-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511


राजस्थान दिवस के कार्यक्रमों में आमजन की रुचि नहीं।


मंत्री के प्रोग्राम में आए 20 जने। 
--------------------------------------
प्रदेशभर में इन दिनों राजस्थान दिवस के उपलक्ष में कार्यक्रम हो रहे हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों में आमजन की कोई रुचि नहीं है। 28 मार्च को अजमेर के प्रभारी मंत्री वासुदेव देवनानी ने यहां सूचना केन्द्र में एक विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन तथा मशाल दौड़ का शुभारंभ किया। इन दोनों कार्यक्रमों में मंत्री सहित मुश्किल से 20 जने थे। स्वयं देवनानी ने भी इन दोनों कार्यक्रमों को ऐसे निपटाया जैसे राह चलते कोई कार्यक्रम हो रहा है। चंूकि राजस्थान दिवस के कार्यक्रम सरकारी स्तर पर हो रहे हैं, इसलिए प्रशासन के अफसरों ने मंत्री की सुविधा से विकास प्रदर्शनी के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित किया। देवनानी को प्रात:10 बजे जयपुर पहुंचना था, इसलिए देवनानी ने साफ कह दिया कि वे जयपुर जाते समय प्रात: 8:30 बजे प्रदर्शनी का उद्घाटन कर देंगे। आमतौर पर मशाल दौड़ संध्याकाल में होती है, लेकिन मंत्री की सुविधा को देखते हुए यह मशाल दौड़ भी सुबह ही आयोजित कर ली गई। एक दिन पहले सरकारी प्रेस नोट में अजमेर के संभागीय आयुक्त हनुमान सहाय मीणा के हवाले से कहा गया कि मशाल दौड़ संभाग स्तरीय है, इसलिए इस दौड़ में अजमेर नागौर, भीलवाड़ा व टोंक जिले के एथलीट और शहरवासी भाग लेंगे। लेकिन प्रदर्शनी के उद्घाटन और मशाल दौड़ के शुभारंभ के समय 20 लोग भी नहीं जुट पाए। यह 20 की संख्या भी इसलिए हो गई, क्योंकि मंत्री और संभागीय आयुक्त के ड्राइवर गनमैन सूचना केन्द्र के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आदि शामिल हो गए। इसे शर्मनाक स्थिति ही कहा जाएगा कि जिस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री और संभागीय आयुक्त मौजूद हो, उस कार्यक्रम में 20 जने ही शामिल हो। असल में जिस प्रकार प्रभारी मंत्री देवनानी चलताऊ काम कर रहे हैं, उसी प्रकार राजस्थान दिवस के कार्यक्रमों में जिला प्रशासन की भी रुचि नहीं है। 28 मार्च के कार्यक्रमों में जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक की गैर मौजूदगी भी बताती है कि इन कार्यक्रमों के प्रति जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। 
कहां हैं भाजपा के कार्यकर्ता:
राजस्थान में इस समय भाजपा की सरकार है, ऐसे में यह उम्मीद की जाती है कि सरकारी समारोह में भाजपा के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, लेकिन 28 मार्च को प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में भाजपा का कोई कार्यकर्ता उपस्थित नहीं था। सवाल उठता है कि जब राजस्थान दिवस के कार्यक्रम सरकार के हैं तो फिर भाजपा के कार्यकर्ता भागीदार क्यों नहीं बनते। 

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (28-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511


ईस्टर पर पोप ने मुस्लिम युवक के पैर धोए तो वहीं पाकिस्तान के लाहौर में ईस्टर का जश्न मना रहे अनेक ईसाइयों को मौत के घाट उतारा। ----------------------------------------


माना जाता है कि ईस्टर पर प्रभु यीशु का पुनर्जन्म हुआ था, इसलिए ईस्टर पर ईसाई समुदाय के लोग जश्न मनाते हैं। परंपरा के अनुरूप ही ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप आम व्यक्ति के पैर धो कर चूमते हैं। इस बार ईस्टर पर पोप ने एक मुस्लिम युवक के भी पैर धोए। इसके पीछे दुनिया भर में सद्भावना का संदेश देना रहा। पोप ने इस मौके पर कहा भी कि आतंकवाद को छोड़कर सद्भावना और भाईचारे के साथ ही रहना चाहिए। उधर वैटिकन सिटी में जब पोप मुस्लिम युवक के पैर धोकर भाईचारे का संदेश दे रहे थे, तो इधर पाकिस्तान के लाहौर शहर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में आत्मघाती युवक ने विस्फोट कर अनेक ईसाइयों को मौत के घाट उतार दिया। 26 मार्च को ईस्टर के दिन चर्च में प्रार्थना करने के बाद लाहौर के इसी पार्क में ईसाई समुदाय के लोग एकत्रित होकर जश्न मनाते है। इस मौके पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी होते हैं, लेकिन आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए तहरीक-ए-तालीबान से जुड़े एक युवक ने जो विस्फोट किया उसमें कोई 70 ईसाई-मुसलमानों की मौत हो गई और 300 से भी ज्यादा व्यक्ति बुरी तरह जख्मी हुए। सवाल उठता है कि जब भाईचारे के लिए ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु मुस्लिम युवक के पैर धो रहे हैं तो फिर लाहौर में बेकसूर लोगों को क्यों मारा जा रहा है। माना कि ईसाई और मुस्लिम समुदाय में पुरानी दुश्मनी है, जो आज तक जारी है। लेकिन सवाल यह भी है कि जब पोप ने मुस्लिम युवक के पैर धोकर सकारात्मक पहल की थी तो फिर मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं ने स्वागत क्यों नहीं किया? सब जानते हैं कि पाकिस्तान अब आतंकवादियों का अड्डा बन गया है। पाकिस्तान में कोई एक आतंकी गुट नहीं है, बल्कि अनेक गुट है। जो आए दिन आतंकी वारदात करते हैं। भारत के लिए सबसे खतरनाक बात यह है कि आतंकवादी पाकिस्तान की सीमा से ही भारत में प्रवेश करते हैं। पाकिस्तान में आए दिन आत्मघाती विस्फोट होते हैं, जबकि भारत में पाकिस्तान की सीमा से लगे जम्मू-कश्मीर में रोजाना आतंकवादियों से सेना की मुठभेड़ होती है। पाकिस्तान यह कह सकता है कि आतंकवाद से वह स्वयं पीडि़त है, लेकिन पाकिस्तान की सरकार आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही भी नहीं करती है। ऐसे में जिस प्रकार ईसाइयों के धर्मगुरु ने पहल की है, उसी प्रकार मुस्लिम धर्मगुरुओं को भी सकारात्मक पहल करनी चाहिए। पिछले दिनों दिल्ली में वल्र्ड सूफी कॉन्फ्रेंस हुई थी। इस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि सूफी वाद से ही आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकता है कि लेकिन इस कॉन्फ्रेंस के बाद मुस्लिम धर्मगुरु आतंकवाद के मुद्दे पर एक जुट नहीं हुए। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि पोप की पहल को देखते हुए मुस्लिम धर्मगुरु भी आगे आएंगे।
नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (28-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511




Sunday, 27 March 2016

विधानसभा में बहुमत से पहले उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का फैसला कितना उचित। क्या भाजपा भी कांग्रेस की तरह चलाएगी लोकतंत्र।


----------------------------
सवाल यह नहीं है कि 27 मार्च को केन्द्र की भाजपा सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करवा दिया। सवाल यह है कि यदि केन्द्र में कांग्रेस की और उत्तराखंड में भाजपा की सरकार होती तो भाजपा के नेता खासकर नरेन्द्र मोदी क्या प्रतिक्रिया देते? उत्तराखंड के राज्यपाल ने जब हरीश रावत को 28 मार्च को विधानसभा में बहुमत साबित करने का समय दिया था, तब 27 मार्च को ही हरीश रावत की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू क्यों किया गया? अब केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली तर्क दे रहे हैं कि उत्तराखंड में विधायकों की खरीद-फरोख्त से संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था और विधानसभा में विनियोग बिल के फेल हो जाने के बाद 1 अप्रैल से वित्तीय संकट भी खड़ा हो जाता। ऐसे में जेटली के तर्क अपनी जगह हैं, लेकिन  सवाल उठता है कि जब अगले दिन यानि 28 मार्च को विधानसभा में हरीश रावत को बहुमत सिद्ध करना था तो फिर अचानक बर्खास्तगी का निर्णय क्यों किया गया। क्या भाजपा को अपने 27 विधायकों पर भरोसा नहीं था? जब कांग्रेस के 9 विधायक बगावत कर भाजपा के खेमे में आ गए थे, तो 28 मार्च को जब सदन में बहुमत की बात आती तो भाजपा का पलड़ा भारी होता। लेकिन बहुमत को विधानसभा में तोलने से पहले ही केन्द्र सरकार ने अपने अधिकारों के तहत धारा 356 का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। यह माना कि उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के 9 विधायकों की सदस्यता रद्द कर और संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया था। लेकिन लोकतंत्र में यदि बहुमत का फैसला विधानसभा में होतो ज्यादा उचित होता, जहां तक सीएम हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन का सवाल है तो राजनीति में ऐसा होता ही रहता है। यह कोई नई बात नहीं है कि जब सीएम अपनी सरकार बचाने के लिए बागी विधायकों से सौदेबाजी कर रहा हो और फिर हरीश रावत तो सौदेबाजी के पुराने उस्ताद रहे हैं। यही कारण रहा कि गत 23 मार्च को जो हरीश रावत 15-15 करोड़ रुपए में विधायकों को खरीद रहे थे, वो ही हरीश रावत बर्खास्तगी के बाद 27 मार्च को मासूमियत के साथ कह रहे हैं कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने लोकतंत्र की हत्या कर दी है। कोई हरीश रावत से यह पूछे कि 23 मार्च को वे स्वयं लोकतंत्र के साथ क्या कर रहे थे? असल में सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की दोनों ही अपने नजरिए से लोकतंत्र को चला रहे हैं। भाजपा को यह पता था कि 28 मार्च को विधानसभा में जब हरीश रावत बहुमत होने पर मतदान करवाएंगे तब विधानसभा अध्यक्ष उन 9 विधायकों को बाहर निकलवा देंगे, जिन्होंने हरीश रावत के साथ धोखा किया है। विधानसभा में कांग्रेस के 27  और भाजपा के 28 विधायक हैं। भाजपा का एक विधायक पहले ही बगावत कर चुका है। भाजपा को अपने 27 विधायकों में भी बगावत की बू आ रही थी, इसलिए अनेक तर्क देते हुए केन्द्र सरकार ने 27 मार्च को ही उत्तराखंड की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। पहले अरुणाचल प्रदेश और अब उत्तराखंड पर अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा का शासन हो गया है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की बली हो जाए। भाजपा के युवा सांसद और बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर की आंख में हिमाचल में कांग्रेस की सरकार किरकिरी बनी हुई है। 

(एस.पी. मित्तल)  (27-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

फोटोग्राफी से शोहरत और धन दोनों मिल सकते हैं।


मशहूर फोटोग्राफर मुकेश श्रीवास्तव ने सिखाए फोटोग्राफी के गुर।
-------------------------------
देश-विदेश के अनेक पुरस्कारों से नवाजे गए मशहूर फोटोग्राफर मुकेश श्रीवास्तव ने कहा है फोटोग्राफी की कला से शोहरत और धन दोनों हासिल किए जा सकते। मीडिया के विस्तार में फोटोग्राफी क्षेत्र में भविष्य उज्ज्वल है। 27 मार्च को यहां गांधी भवन स्थित अजयमेरु प्रेस क्लब में शहर के फोटोग्राफरों की कार्यशाला में मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि सिर्फ कैमरे से कोई दृश्य कैद कर लेना ही फोटोग्राफी नहीं है। यह एक  ऐसी कला जिसके माध्यम से आप रोजगार के साथ-साथ अपनी पहचान भी बना सकते हंै। फोटोग्राफी क्षेत्र का महत्त्व इसी से समझा जा सकता है कि पहले अजमेर में दो-चार प्रेस फोटोग्राफर ही होते थे, लेकिन आज यदि हम गिनती करें तो पचास से भी ज्यादा प्रेस फोटोग्राफर हैं। 
अजमेर के अनेक फोटोग्राफर देश-विदेश के अखबारों और मैग्जिन में छपते हैं। जैसे-जैसे मीडिया का विस्तार हो रहा है। वैसे-वैसे फोटोग्राफर बढ़ते जा रहे हैं।  श्रीवास्तव ने कार्यशाला में उपस्थित पचास से भी ज्यादा फोटोग्राफरों को फोटोग्राफी की कला के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि घटना प्रदान फोटो के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण के फोटो भी अब अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर छपते हैं। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र की तरह फोटोग्राफी में भी प्रतिस्पद्र्धा है। ऐसे में फोटोग्राफरों को कैमरे की नई तकनीक और नए विचारों के साथ काम करना होगा। मीडिया क्षेत्र के अलावा शादी जैसे समारोह में भी उत्कृष्ट फोटोग्राफी की मांग लगातार बढ़ रही है। कई बार एक फोटोग्राफ फोटोग्राफर को रातों रात प्रसिद्धी दिलवा देती हैं।  कार्यशाला के शुभारंभ में प्रेस क्लब के अध्यक्ष एस.पी.मित्तल, महामंत्री प्रताप सनकत ने उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला का लाभ अजमेर के फोटोग्राफरों को मिलेगा। इससे पहले आनंद शर्मा अज्ञात ने मुकेश श्रीवास्तव का परिचय देते हुए कहा कि इन्होंने हाल ही में 21 मार्च को केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कार प्रदान किया है। श्रीवास्तव निकॉन इंडिया के ब्रॉड एम्बेसडर भी हैं।  अब तक देश-विदेश के 127 से भी ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं। 

(एस.पी. मित्तल)  (27-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

Saturday, 26 March 2016

नाटकों से ली जा सकती है जीवन की शिक्षा टर्निंग पाइंट स्कूल में युवा कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा


----------------------------------
26 मार्च को अजमेर के वैशाली नगर स्थित टर्निंग प्वाइंट पब्लिक स्कूल के परिसर में सुप्रसिद्ध संस्था नाट्यवृंद की ओर से नाट्य चेतना कार्यशाला आयोजित की गई। संस्था के निदेशक और जाने-माने रंगमकर्मी उमेश चौरसिया ने चुनिन्दा छात्र-छात्राओं को चार ऐतिहासिक नाटकों के बारे में जानकारी दी और फिर युवाओं से नाटक के कुछ अंश प्रस्तुत करने के लिए कहा। महाकवि कालीदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुन्तलम, राजकुमार वर्मा द्वारा रचित कौमुदी महोत्सव तथा भीष्म साहनी के कबीरा खड़ा बाजार में नाटकों का जिस प्रकार मंचन हुआ, उससे प्रतीत हुआ कि युवा पीढ़ी ऐसे नाटकों से जीवन की शिक्षा भी प्राप्त कर सकती है। अभिज्ञान शाकुन्तलम की रचना भले ही दो हजार साल पहले की गई हो लेकिन आज भी प्रांसगिक है। कार्यशाला में संस्कार भारती के राजस्थान के प्रमुख डॉ. सुरेश बबलानी ने कहा कि नाट्य शास्त्र के प्रणेता भरत मुनि के नाटक आज भी सामाजिक समरसता के प्रतीत है। ब्लॉगर एस.पी. मित्तल ने कहा कि नाटक की रचनाओं में शिक्षा से लेकर वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला किया जा सकता है। समाजसेवी सोमरत्न आर्य ने कहा कि इससे युवाओं की रचनात्मकता सामने आएगी। स्कूल के निदेशक डॉ अनन्त भटनागर ने नाट्यवृंद संस्था का आभार जताया कि कार्यशाला के लिए उनके स्कूल में विद्यार्थियों को अवसर दिया गया है। भटनागर ने श्रेष्ठ रचनाओं और उनके नाटकों का विशेष परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन गीतकार डॉ पूनम पाण्डे ने किया जबकि प्राचार्य रश्मि जैन ने भारत व्यक्त किया।
(एस.पी. मित्तल)  (26-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

हरीश रावत तो खरीद-फरोख्त के उस्ताद रहे हैं। ताजा स्टिंग क्या मायने रखता है।


शर्म आनी चाहिए ऐसे राजनेताओं को।
----------------------------------
26 मार्च को देशभर के चैनलों पर एक स्टिंग ऑपरेशन की सीडी चली। इस सीडी में उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत कांग्रेस के बागी विधायकों के नेता हरक सिंह रावत से मोबाइल फोन पर बात कर रहे हैं। इसमें हरीश रावत का कहना है कि बागी विधायकों को मंत्री पद तो दिया ही जाएगा साथ ही 15 करोड़ रुपए नकद भी देंगे। यानि जो विधायक भाजपा के पास चले गए हैं वे कुछ भी लेकर वापस आ जाए ताकि हरीश रावत उत्तराखंड के सीएम बने रहे। इस सीडी के प्रसारण के बाद हरीश रावत ने कहा कि सीडी में जिस पत्रकार को दिखाया गया है उसके बारे में देहरादून के लोग अच्छी तरह जानते है। यह पत्रकार ब्लैकमेलिंग का ही काम करता है। हो सकता है कि हरीश रावत सही कह रहे हों, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर इस ब्लैकमेलर पत्रकार के कहने पर सरकार का जहाज लेकर इच्छित स्थान पर हरीश राव क्यों आए? जब इस पत्रकार ने हरीश रावत को बातचीत के लिए बुलाया था तब क्या हरीश रावत को पत्रकार की ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति के बारे में पता नहीं था? असल में हरीश रावत उत्तराखंड का सीएम बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। यही वजह रही कि जब पत्रकार ने स्टिंग का जाल बिछाया तो हरीश रावत उसमें फंस गए। रावत ने यह भी नहीं सोचा कि जो हरक सिंह रावत भाजपा के पाले में बैठा है वह समझौते की बात किस प्रकार करेगा। जिस पत्रकार को हरीश रावत ब्लैकमेलर बता रहे है उसी पत्रकार के जरिए भाजपा ने हरीश रावत को फांसा है। वैसे भी हरीश रावत तो खरीद फरोख्त के पुराने उस्ताद हैं। वर्ष 2012 में जब सोनिया गांधी के दबाव से विजय बहुगुणा को सीएम बनाया गया, तब भी रावत ने खुला विरोध किया था। 2 वर्ष बाद ही कांग्रेस विधायकों को खरीद कर सोनिया गांधी के सामने ले जाकर खड़ा कर दिया। फलस्वरूप विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को सीएम बनाया गया। हरीश रावत को यह अच्छी तरह पता है कि उनके पार्टी के विधायक किस प्रकार से बिक जाते हैं। एक विधायक कोई 2 लाख मतदाताओं का नेतृत्व करता है। यदि ऐसे विधायक 15-15 करोड़ और मंत्री पद में बिक रहे हैं तो फिर राजनेताओं को शर्म आनी चाहिए। उत्तराखंड में जिस तरह विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही है उससे राजनीति शर्मसार हो गई है।
विजय बहुगुणा भी कूदे मैदान में :
चूंकि हरीश रावत विजय बहुगुणा को धक्का देकर ही सीएम बने, इसलिए 26 मार्च को बहुगुणा ने भी रावत पर हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिस बोल्ड अंदाज में बहुगुणा ने प्रेस कांफे्रंस की, उससे लगा कि अब हरीश रावत को सोनिया गांधी और राहुल गांधी का भी समर्थन नहीं है। बहुगुणा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि वे सीएम होते तो ऐसी परिस्थितियों में इस्तीफा दे देते और स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच की मांग करते। अभी भी रावत को चाहिए कि वे इस्तीफा देकर राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग करें। असल में बहुगुणा के माध्यम से कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब वह उत्तराखंड में खरीद-फरोख्त से हरीश रावत को टिकाए रखने के पक्ष में नहीं है।
भाजपा विधायकों का भी डर :
भले ही कांग्रेस में बगावत हुई हो लेकिन भाजपा को भी अपने विधायकों से डर है इसलिए सभी 27 भाजपा विधायकों को एक साथ जयपुर में रखा गया है। चूंकि राजस्थान में भाजपा की ही सरकार है इसलिए यहां पर विधायकों को सुरक्षित माना जा रहा है। भाजपा के बड़े नेता यह जानते है कि हरीश रावत उनके विधायकों को भी लालच देकर अपनी ओर आकर्षित कर सकते है। यदि भाजपा विधायकों के बिकने का डर नहीं होता तो होली जैसे पर्व पर विधायकों को उत्तराखंड में ही रखा जाता। उत्तराखंड की भूमि को देव भूमि कहा जाता है, लेकिन इस देवभूमि को विधायकों ने कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
राज्यपाल की भूमिका :
जिस तरह से विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आ रहे हैं उससे उत्तराखंड के राज्यपाल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा है। जानकारों के अनुसार 28 मार्च तक का समय देकर राज्यपाल ने खरीद-फरोख्त के काम को बढ़ावा ही दिया है। यहीं वजह है कि अब 28 मार्च को विधानसभा में घमासान होने की उम्मीद है। यह भी हो सकता है कि हरीश रावत मंत्रीमंडल की बैठक बुलाकर राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग करें।
(एस.पी. मित्तल)  (26-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511

Friday, 25 March 2016

होली पर बढ़ाया परिवारों का उत्साह। कृष्णगंज विकास समिति का आयोजन।



---------------------------
अजमेर के ऐतिहासिक आनासागर के किनारे बसे कृष्णगंज क्षेत्र की विकास समिति की ओर से 24 मार्च को परिवारों का उत्साह बढ़ाने वाला कार्यक्रम हुआ। होली के पर्व के दिन आयोजित इस समारोह में कृष्णगंज क्षेत्र के नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मेरे सहित अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, ट्रेफिक की डीएसपी अदिति कामठ, क्षेत्रीय पार्षद धर्मेन्द्र शर्मा आदि ने इस बात पर खुशी जताई कि क्षेत्र के विकास के लिए समिति बहुत सक्रिय है। समिति के अध्यक्ष राकेश डीडवानिया ने बताया कि अब कृष्णगंज में सभी मकानों के बाहर नेम प्लेट एक सी लगेगी। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पारितोषित भी दिए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिव ओमप्रकाश सोमानी, श्याम बिहारी शर्मा, कैलाश जोशी, महेश शर्मा, सुरेश टांक, अशोक राठी आदि ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।


नोट-  फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (25-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

उत्तराखंड के भाजपा विधायक आए ब्रह्मा की शरण में।



पुष्कर सरोवर में की पूजा अर्चना।
---------------------------------
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को 28 मार्च को विधानसभा में बहुमत हासिल करना है। रावत सरकार अल्पमत में है। क्योंकि कांग्रेस के 9 विधायक बागी हो गए हैं। बागी विधायक अब भाजपा की शरण में हैं तो भाजपा के 27 विधायक 25 मार्च को पुष्कर में ब्रह्मा की शरण में आ गए। चूंकि 28 मार्च को भाजपा के 27 और कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को एक साथ उत्तराखंड की विधानसभा में घुसेड़ा जाएगा, इसलिए सभी 36 विधायकों का टाइम पास करवाया जा रहा है। कांग्रेस के 9 विधायक तो अज्ञात स्थान पर हैं। जबकि भाजपा के 27 विधायकों को इधर-उधर घुमाया जा रहा है। भाजपा के नेता कांग्रेस की तिकड़मों को जानते हैं इसलिए अपने विधायकों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 25 मार्च को जब भाजपा के विधायक पुष्कर सरोवर के करमांचल घाट पर पूजा अर्चना कर रहे थे तब विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अजय भट्ट नजर नहीं आए। जो लोग विधायकों की निगरानी में लगे हुए थे उनके हाथ-पैर फूल गए। जब सरगर्मी से तलाश की गई तो अजय भट्ट सरोवर के ब्रह्मा घाट पर स्नान करते नजर आए। इस घटना के बाद भट्ट को हिदायत दी कि वे बिना बताए इधर उधर न जाएं। सभी विधायकों ने सरोवर की पूजा अर्चना करने के बाद संसार प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद विधायकों को दोपहर के भोजन के लिए भाजपा के दमदार नेता भंवर सिंह पलाड़ा के होटल भंवर सिंह पैलेस में ले जाया गया। पलाड़ा के किलेनुमा होटल में प्रवेश के बाद भाजपा के बड़े नेताओं ने राहत महसूस की। क्योंकि पलाड़ा के होटल से कोई भी विधायक इधर-उधर नहीं हो सकता था। होटल में ही राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, प्रदेश भाजपा के  महामंत्री कुलदीप सिंह धनकड़, संसदीय सचिव सुरेश रावत, अजमेर देहात भाजपा के अध्यक्ष भगवती प्रसाद सारस्वत, अजमेर के प्रभारी बीरम देव सिंह और स्वयं भंवर सिंह पलाड़ा ने मुलाकात की। शाम को भाजपा के सभी विधायक पुन: जयपुर पहुंच गए। माना जा रहा है कि विधायकों को 28 मार्च को जयपुर से सीधे ही देहरादून भेजा जाएगा।
भाजपा की बनेगी सरकार:
उत्तराखंड में भाजपा विधायक दल के नेता अजय भट्ट ने पुष्कर में पत्रकारों से कहा कि अब उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 9 विधायकों का समर्थन वापिस ले लेने के बाद भी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधानसभा में बजट स्वीकृत करवा लिया। बजट पर स्वीकृति पूरी तरह असंवैधानिक हैं। भट्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि अल्पमत में आने के बाद भी हरीश रावत ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में असंवैधानिक सरकार चल रही है। आगामी 28 मार्च को रावत को विधानसभा में अपनी स्थिति के बारे में पता चल जाएगा।

नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (25-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511


पेट्रोल पम्प मालिक पर लगा नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप। आरोपी ने भी लगाया मारपीट और लूट का आरोप।



-------------------------------
अजमेर के जयपुर रोड स्थित जिला परिषद कार्यालय के निकट संचालित बजरंग पेट्रोल पम्प के मालिक प्रदीप गर्ग और उसके साथियों पर एक नाबालिग युवक से दुष्कर्म का आरोप लगा है। गर्ग का परिवार वाहन व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। गर्ग परिवार में सदस्यों के पास निसान, सेवरलेट, हीरो होण्डा जैसे वाहनों की डीलरशिप है। स्थानीय कोतवाली पुलिस स्टेशन पर लिखाई गई रिपोर्ट में नाबालिग के पिता ने कहा है कि 24 मार्च को जब उसका पुत्र बजरंग पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल लेने गया तो पम्प के कर्मचारियों और मालिक प्रदीप गर्ग से कहासुनी हो गई। मेरे पुत्र को अकेला देखकर पम्प के परिसर के अंदर ले जाया गया और सारे कपड़े उतारकर प्रदीप गर्ग और अन्यों ने दुष्कर्म किया। वहीं प्रदीप गर्ग की ओर से भी एक रिपोर्ट कोतवाली पुलिस स्टेशन पर दर्ज करवाई गई है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि स्टेशन रोड स्थित टीकमगंज के युवकों ने पेट्रोल पम्प पर आकर मारपीट और तोड़ फोड़ की। प्रदीप गर्ग को भी बुरी तरह पीटा गया और 65 हजार रुपए नगद लूट कर ले गए। पुलिस ने दोनों पक्षों की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

(एस.पी. मित्तल)  (25-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

अजमेर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व को समझाने वाली प्रदर्शनी लगी है अजमेर के किले में।


-----------------------------
अजमेर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व को समझाने वाली एक प्रदर्शनी यहां नया बाजार स्थित अजेमर के किले (राजकीय संग्राहलय) में २५ मार्च से शुरू हुई है। यह प्रदर्शनी ३० मार्च तक रहेगी। राजस्थान दिवस के उपलक्ष में होने वाले समारोह की शुरुआत भी प्रदर्शनी के शुभारंभ के साथ हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन २५ मार्च को मेरे सहित राजस्थान लोक सेवा आयोग के उपसचिव भगवत सिंह राठौड़, मीडिया सलाहकार प्यारे मोहन त्रिपाठी ने फीता काट कर किया। जिला प्रशासन पर्यटन विभाग और अजमेर में किले के सहयोग से लगी प्रदर्शनी में सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर दीपक शर्मा के आकर्षक फोटो प्रदर्शित किए गए है। प्रदर्शनी से जुड़े इतिहासविद् प्रो. ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि चित्रों के माध्यम से अजमेर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व का वर्णन किया गया है। मुगलकाल और उसके बाद अंग्रेजों के शासन में किस तरह से अजेमर का विकास हुआ इसके भी दृश्य प्रदर्शनी में हैं। फोटोग्राफर दीपक शर्मा ने ख्वाजा साहब की दरगाह, पवित्र तीर्थ पुष्कर और अजमेर शहर के सुदंर नजारों को अपने कैमरे में कैद किया है। चित्रों में साम्प्रदायिक सद्भावना भी दशाई गई है। अजमेर के नागरिकों खासकर युवा पीढ़ी के लिए यह प्रदर्शनी प्रेरणादायक है। इस अवसर पर प्रो. शर्मा ने अजमेर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दी। 
संग्रहालय के अधीक्षक मोहम्मद आरिफ ने बताया की उदघाटन समारोह में पर्यटन विभाग के उप निदेशक संजय जालोरी, पर्यटन अधिकारी रतन लाल तुनवाल, डॉ. पूनम पांडे, रंगकर्मी राजेंद्र सिंह, संदीप पण्डे, सी.बी.एस.ई. के विभागाध्यक्ष अनिल जैन, वरिष्ठ फोटोग्राफर रणवीर सिंह, नदीम खान, दीपक सेन उपस्थित थे।  प्रदर्शनी ३० मार्च तक १० से ५ बजे तक खुली रहेगी।     
नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (22-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511


कहीं फट न जाए पुष्कर की तीर्थ की पवित्रता और मर्यादा।


होली के मौके पर यह कैसा हुड़दंग।
-----------------------------------
धुलंडी यानि 24 मार्च की सुबह मेरे एक मित्र का फोन आया और उसने कहा कि उनके पुत्रों को पुष्कर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। पुलिस ने अजमेर से पुष्कर शहर में प्रवेश करने वाले लीला सेवड़ी पर बेरीकेडिंग लगा दिए हैं। अजमेर के युवकों को पुष्कर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। हजारों लोग लीला सेवड़ी पर ही खड़े हैं। मुझे यह सुनकर ताज्जुब हुआ कि होली के मौके पर पुष्कर में ऐसा क्या हो गया, जिसकी वजह से अजमेर के युवकों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। मैंने तत्काल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से संवाद किया तो उस अधिकारी ने कहा कि पुष्कर में धुलंडी के दिन कपड़ा फाड़ होली खेली जा रही है, इसलिए अजमेर शहर के युवकों को पुष्कर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। अधिकारी का कहना रहा कि कपड़ा फाड़ होली में विदेशी लड़कियों और युवतियों के साथ अजमेर के युवक बदतमीजी कर सकते हैं। इसलिए सतर्कता के बतौर रोक लगाई गई है। पुलिस अधिकारी का बयान अपनी जगह है, लेकिन अब यह सवाल तो उठता ही है कि कहीं पुष्कर की पवित्रता और मर्यादा तो नहीं फट रही? सब जानते हैं कि पुष्कर का महत्त्व पवित्र सरोवर और संसार के एक मात्र ब्रह्मा मंदिर की वजह से है। यह माना कि विदेशी पर्यटकें को आकर्षित करने के लिए पुष्कर के होटल मालिक कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते हैं। उसी कड़ी में पुष्कर सरोवर के किनारे होली का चौक में अब प्रतिवर्ष कपड़ा फाड़ होली खेली जा रही है। यह माना कि अजमेर के युवक कपड़ा फाड़ होली में पुष्कर की पवित्रता और मर्यादा को तोड़ सकते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या ऐसी मर्यादा और पवित्रता सिर्फ अजमेर के ही युवक तोडेंग़े? क्या विदेशी युवतियों के साथ दूसरे युवक कपड़ा फाड़ होली नहीं खेलते? चंूकि इस बार कपड़ा फाड़ होली का प्रचार सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से हुआ था, इसलिए कोई 10 हजार से भी ज्यादा विदेशी नागरिक 24 मार्च को पुष्कर में जमा थे। इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों के आने से पुष्कर की सभी होटलें, रिसोर्ट आदि फुल  हो गए। दुकानदारों ने भी जमकर कमाया। यहां तक कि रेस्टोरेंटों में डबल रोटी और चीज खत्म हो गई। स्वाभाविक है कि ऐसे माहौल में पुष्कर का कोईभी व्यक्ति कपड़ा फाड़ होली का विरोध नहीं करेगा, लेकिन जो लोग इस होली के समर्थक हैं, उन्हीं पर पुष्कर की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। मुझे पता है कि पुष्कर में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर बड़ा विवाद हो जाता है। पुष्कर के लोग बहुत समझदार और विवेकशील हैं। अपने अधिकारों के प्रति हमेशा जागरुक रहते हैं, लेकिन पुष्कर के लोगों का ही यह दायित्व है कि वे ऐसा कोई काम न होने दे, जिसकी वजह से अजमेर से आने वाले युवकों को रोका जाए। अजीब बात है कि एक ओर कपड़ा फाड़ होली के लिए विदेशी युवक-युवतियों के स्वागत के लिए कालीन बिछाया जाता है तो दूसरी ओर अजमेर से जाने वाले युवकों को प्रवेश नहीं दिया जाता।
होलिका चौक में जिस तरह से फटे हुए कपड़े एक तार पर लटकाए गए यह भी पुष्कर की मर्यादा के अनुकूल नहीं है। कुछ लोग अपने लाभ के लिए भले ही कपड़ा फाड़ होली का आयोजन कर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करें, लेकिन ऐसे लोगों को यह भी समझना चाहिए कि पुष्कर में जब तक भारतीय संस्कृति रहेगी, तभी तक विदेशी पर्यटक आएंगे। कपड़ा फाड़ के आयोजन तो विदेशों में भी खूब होते हैं, लेकिन पुष्कर में महत्त्व इसलिए है कि यह पुष्कर भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। पुष्कर के लोग यह भी समझे कि अब पुष्कर में पश्चिमी संस्कृति के अनुकूल डांस के प्रोग्राम होने लगे हैं। होली से तीन चार दिन पहले ही इस तरह का आयोजन पुष्कर में हो चुका है। यदि अद्र्धनग्न पोस्टर बनाकर आयोजन होते रहे, तो फिर पुष्कर की पवित्रता की मर्यादा का क्या होगा?
नोट- कपड़ा फाड़ होली के फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें। 

(एस.पी. मित्तल)  (22-03-2016)
(spmittal.blogspot.inM-09829071511





Thursday, 24 March 2016

फागुन महोत्सव के कटाक्ष चुनौती के तौर पर स्वीकार करें अजमेर के राजनेता। लखावत ने कहा।



शिवशंकर हेड़ा मुर्खाधिपति और सुरेश रावत महामूर्ख चुने गए।
होली के अवसर पर 23 मार्च को अजमेर के जवाहर रंगमंच पर 20 वां फागुन महोत्सव हुआ। अजमेर के पत्रकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों आदि के द्वारा आयोजित इस समारोह में स्मार्ट सिटी को लेकर अजमेर के राजनेताओं पर तीखे कटाक्ष किए थे। जब-जब  राजनेताओं पर कटाक्ष हुए तब-तब हाऊस फुल रंगमंच पर लोगों ने जोरदार तालियां बजाई। समारोह की शुरूआत ही स्मार्ट सिटी की शवयात्रा और शोक सभा से हुई। स्मार्ट सिटी की अर्थी को सजाकर मंच पर इस अंदाज में लाया गया कि हकीकत में स्मार्ट सिटी की मृत्यु हो गई है। कोसिनोक जैन, दिनेश गर्ग, सूर्य प्रकाश गांधी, योबी जार्ज, राजेन्द्र सिंह, रजनीश रोहिल्ला आदि के नेतृत्व में निकली शवयात्रा और फिर दिलीप पारीक के द्वारा शोक सभा के अंदाज को सभी ने सराहा। इस शोक सभा में राजस्थानी भाषा में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अंदाज में ही शोक पत्र पढ़े गए।
दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण के सम्पादक डा. रमेश अग्रवाल द्वारा स्मार्ट सिटी पर लिखित एक नाटक का मंचन नाट्यकर्मी योबी जार्ज, राजेन्द्र सिंह, हरीश बैरी आदि ने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि किस तरह सत्तारूढ़ भाजपा के मंत्रियों और विधायकों ने आपस में ही लड़कर अजमेर को स्मार्ट सिटी की प्रतियोगिता से बाहर करवा दिया। जागरूक दर्शकों को आंसूदेव तेलपानी और श्रीमति नकेल मैड़म के संवाद शानदार लगे। एक अन्य नाटक में अजमेर शहर में जगह-जगह हो रही खुदाई पर जोरदार कटाक्ष किया गया। शराबी का रोल कर रहे अलताफ हुसैन - मैं बताऊं तो पूरे शहर में चर्चित हो गया। समारोह में फागुन समाचारों का लाइव कवरेज हुआ। अभिजीत दवे ने स्टूडियों में बैठकर मनवीर सिंह चूड़ावत, रजनीश रोहिल्ला, चन्द्रशेखर शर्मा, कौशल जैन आदि से मौके से रिपोर्ट ली। समारोह में एक मात्र वक्ता राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकरसिंह लखावत ने कहा कि  हम राजनेताओं को इस समारोह के कटाक्ष से नाराज नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार करने की आवश्यकता है। समारोह में स्मार्ट सिटी का जो मुर्दा रखा गया है उसमें हमें जान फूंकने की जरूरत है। अगली होली पर इस समारोह में जिंदा स्मार्ट सिटी बने इसके लिए हम सब को भरसक प्रयास करने चाहिए। इस समारोह के माध्यम से एक तरह से आइना दिखाया गया है। इसके लिए लखावत ने समारोह के कत्र्ता-धत्र्ताओं की हिम्मत की दाद दी। यह उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी के मुददे पर लखावत की भी कड़ी आलोचना की गई। 
फागुन समारोह में अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा को मुर्खाधिपति तथा संसदीय सचिव सुरेश रावत को महामूर्ख चुना गया। इसी प्रकार मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, मण्डल रेल प्रबन्धक नरेश सालेचा, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल, भाजपा के वरिष्ठ नेता भंवरसिंह पलाड़ा, अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्दर चौधरी तथा दैनिक नवज्योति के प्रधान सम्पादक दीन बन्धु चौधरी को मूर्खराज घोषित किया गया। इसी प्रकार स्मार्ट सिटी छलिया अवार्ड नगर निगम के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत को दिया गया। इस अवार्ड में भाजपा के देहात अध्यक्ष बी.पी. सारस्वत, शहर अध्यक्ष अरविंद यादव, निगम के डिप्टी मेयर सम्पत सांखला, नीरज जैन, पूर्व सांसद रासासिंह रावत आदि का नोमिनेशन हुआ। पायलट चप्पू अवार्ड में पूर्व मेयर कमल बाकोलिया, पूर्व विधायक डा. राजकुमार जयपाल, सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पारीक, कांग्रेस के प्रदेश मंत्री महेन्द्रसिंह रलावता और शहर कांग्रेस कमेठी के अध्यक्ष विजय जैन को मंच पर बुलाया गया। यह अवार्ड विजय जैन को दिया गया। इधर के न उधर के का अवार्ड भाजपा से निष्कासित सुरेन्द्र सिंह शेखावत को दिया गया। इस अवार्ड में नरेन साहनी, राजेश टंडन, पूर्व मंत्री ललित भाटी, हरि सिंह गुर्जर, कुलदीप कपूर आदि का नोमिनेशन हुआ। विजय माल्या अवार्ड के लिए सीताराम गोयल, राधे चोयल, एस.पी. सहगल, भगवान चंदीराम, संजय खण्डेलवाल आदि को मंच पर बुलाया और सीताराम गोयल को अवार्ड दिया गया। कागजी शेर अवार्ड के लिए दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण के सम्पादक डा. रमेश अग्रवाल, सरेराह मीडिया गु्रप के प्रमुख भंवरसिंह पलाडा, राजस्थान पत्रिका के अमित वाजपेयी, रमेश शर्मा, स्वामी न्यूज के कंवल प्रकाश, दैनिक नवज्योति के संजय माथुुर, जी न्यूज के मनवीर सिंह, ईटीवी के अभिजीत दवे, अमर उजाला के वीरेन्द्र आर्य तथा ब्लागर एस.पी. मित्तल को मंच पर बुलाया गया। यह अवार्ड वीरेन्द्र आर्य को दिया गया। तीन दरवाजे अवार्ड के लिए टीटी के राष्ट्रीय महासचिव धनराज चौधरी, भाजपा के वरिष्ठ नेता सोमरत्न आर्य, आरपीएससी में मीडिया सलाहकार प्यारे मोहन त्रिपाठी आदि को मंच पर बुलाया और चौधरी को अवार्ड दिया गया। बड़े बाबू का अवार्ड आरपीएससी के उपसचिव भगवतसिंह राठौड़ को दिया गया, जबकि इस अवार्ड के नोमिनी राजस्व मण्डल के सदस्य मिरजूराम शर्मा, निगम के राजस्व अधिकारी रेखा जैसवानी, जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक महेश शर्मा थे।
समारोह में जयबहादुर माथुर और उनकी टीम, सप्तक की ओर से नृत्यकला केन्द्र के कलाकारों तथा प्रथम कम्प्यूटर के युवाओं द्वारा समूह नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। एम.पी. नानकराम साईकिल वालों की ओर से ललित नागरानी ने एटलस रेंजर साईकिल प्रथम ईनाम के तौर पर दी। जबकि शेष नौे इनाम पुरानी मंडी स्थित न्यू कुवेरा कलेक्षन के मालिक आर.डी. कुवेरा की ओर से दिए गए। अंत में आभार प्रकट करते हुए एस.पी. मित्तल ने बताया कि समारोह में अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, अजमेर डेयरी, चंदूमल पेठेवाले, सतीश बंसल, राम भरोसे कैटर्स, विजय गुप्ता, स्वामी काम्प्लेक्स आदि का सहयोग रहा। मित्तल ने माना कि उपस्थित लोगों की संख्या को देखते हुए जवाहर रंगमंच छोटा पड़ गया है। रंगमंच के अंदर और बाहर खड़े सैकड़ों लोगों से माफी भी मांगी गई। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रताप सनकत, नरेन्द्र भारद्वाज, फरहाद सागर तथा हेमंत शर्मा ने किया।
इनका भी रहा सहयोग
समारोह में अरविंद गर्ग, राजकुमार पारीक, रजनीश शर्मा, योगेश सारस्वत, सुरेश कासीलवाल, सत्यनारायण झाला, अनिल गुप्ता, जी.एस. बिरदी, मुबारक खान, अमरसिंह राठौड़, गिरीश बाशानी, चन्द्रशेखर अग्रवाल, अमित टाक, बंसत सेठी, सैयद सलीम, विनीत लोहिया, राजेन्द्र गांधी, मंजीत सलूजा, करनैल सिंह, संजय नाथानी, सचिन मुदगल, नबाव हिदायतुल्ला, रंजीत मलिक, नानक भाटिया, अतुल सिंह, गिरधर तेजवानी, अतुल दुबे, उमेश चौरसिया, नवीन सोगानी, सुनील गर्ग बबना, अनुराग जैन, रजनीश रोहिल्ला, संजय अग्रवाल, सुरजीत लबाना, विजय हंसराजानी, इन्दर चौहान, सरदार खुराणा, नेमीचंद तंबोली, चन्द्रशेखर शर्मा, मुकेश परिहार, महेश नटराज, आनंद शर्मा, सौरभ बजाड़, सुनील लारा आदि का भी सहयोग रहा। 
नोट:- फागुन समारोह 2016 के चुनिंदा फोटो मेरे फेसबुक अंकाउट पर देखें।
(एस.पी. मित्तल)  (24-03-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511