Saturday, 21 October 2017

#3173
दीपावली पर मुस्लिम महिलाओं की आरती पर दारुल उलूम देवबंद को ऐतराज। सोशल मीडिया पर फोटो और महिलाओं के बाल कटवाने को भी इस्लाम विरोध बताया।
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दीपावली पर यूपी के बनारस में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा उर्दू में रचित श्रीराम की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करने को देवबंद स्थित दरुल उलूम ने गैर इस्लामिक करार दिया है। दरअसल मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं के लिए संघर्ष करने वाली नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने दीपावली पर श्रीराम की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इस पर दरुल उलूम ने फतवा जारी कर कहा है कि अल्लाह को छोड़ कर किसी अन्य ईश्वर की पूजा करने वाला मुस्लिम नहीं रह सकता। मालूम हो कि नाजनीन अंसारी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 501 रुपए का चंदा भी दिया है तथा अपने संगठन मुस्लिम महिला फाउंडेशन की ओर से सबसे पहले तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार के रुख का समर्थन भी किया था। 
फोटो और बल कटवाने पर भी ऐतराजः
दारुल उलूम ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम पुरुष और महिलाओं की फोटो बेवजह अपलोड करने को भी नजायज बताया है। अपने फतवे में दारुल उलूम ने कहा मुस्लिम महिलाओं एवं पुरुषों को अपनी या अपने परिवार के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इससे पहले भी दारुल उलूम ने मुस्लिम महिलाओं की हेयर कटिंग और आइब्रो बनवाने को भी नजायज करार दिया था। दरअसल सहारनपुर के एक शख्स ने जानना चाहा था कि क्या वह अपनी पत्नी को बाल कटवाने और आइब्रो बनवाने की इजाजत दे सकता है? इस पर दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि इस्माल में आइब्रो बनवाना और बाल कटवाना धर्म के खिलाफ है। कोई महिला ऐसा करती है तो वह इस्माल के नियमों का उल्लंघन कर रही है। इस फतवे को जारी करने के पीछे तर्क दिया गया कि इस्लाम में महिलाओं पर दस पाबंदिया लगाई गई है उन्हीं में से बाल काटना और आइब्रो बनवाना भी शामिल है। इस्लाम मजबूरी में बाल काटने की इजाजत देता है बिना किसी मजबूरी के बाल कटवाना नाजायज है। 
एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3172
सरवाड़ दरगाह के निलंबित मुतवल्ली के मामले में जांच शुरू। बेटा जमानत पर छूटा।
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सूफी संत ख्वाजा साहब के पुत्र ख्वाजा फखरुद्दीन की सरवाड़ (अजमेर) स्थित दरगाह के निलंबित मुतवल्ली मोहम्मद यूसुफ खान के मामले में राजस्थान वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमान उल्ला खान ने जांच शुरू कर दी है। 21 अक्टूबर को खान ने सरवाड़ पहुंचकर दरगाह से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुतवल्ली खान पर वित्तीय अनियमित्ताओं का आरोप लगाते हुए विगत दिनों मुसलमानों के प्रतिनिधि मंडलों ने सीएम वसुंधरा राजे को ज्ञापन दिए थे। सीएम के दिशा निर्देश पर ही 18 अक्टूबर को वक्फ बोर्ड की आपात बैठक कर खान को मुतवल्ली के पद से निलंबित किया गया तथा जांच के लिए अमान उल्ला खान को सरवाड़ भेजा गया। हालांकि बोर्ड की इस जांच में निलंबित मुतवल्ली के पुत्र रेहान खान ने बाधा डालने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने सख्त कार्यवाही करते हुए रेहान को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। बाद में एसडीएम की अदालत से रेहान की जमानत हुई।
नहीं दिया चार्जः
यूसुफ खान ने दरगाह के मुतवल्ली पद का चार्ज अभी तक नहीं दिया है। इसके साथ ही खान जांच को भी प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के बयान दर्ज करवाए गए हैं जो मुतवल्ली के समर्थक हैं। दरगाह परिसर में दुकान चलाने वाले अनेक दुकानदार अब यूसुफ खान को ईमानदार बता रहे हैं। सीएम को ज्ञापन देने वालों का कहना है कि यूसुफ खान अभी भी अपने पद के प्रभाव को काम में ले रहे हैं।

एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3171
तो वसुंधरा राजे के राज में भ्रष्टाचारियों की हो जाएगी मौज। कोर्ट के आदेश से भी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज नहीं हो सकेगा मुकदमा। विधानसभा के इसी सत्र में रखा जाएगा विधेयक।
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23 अक्टूबर से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र में राजस्थान की भाजपा सरकार एक ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है जिसके पास होने पर भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी और कर्मचारी और निर्भय हो जाएंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सीएम वसुंधरा राजे ने इस विधेयक को प्रस्तुत करने की स्वीकृति दे दी है। असल में यह विधेयक सीएम की पहल पर ही लाया जा रहा है। सरकार ने भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए एसीबी का गठन कर रखा है, लेकिन यह जांच एजेंसी भी सरकार की स्वीकृति के बिना किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती है। इसलिए भ्रष्टाचारियों से परेशान पीड़ित लोग कई अफसरों के खिलाफ सीधे कोर्ट में इस्तेगासा दायर कर मुकदमे के आदेश करवा रहे हैं। सरकार में बैठे लोगोें का यह मानना है कि इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। अदालत के आदेश होते ही अफसरों के नाम अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर छप रहे हैं। सरकार अब जो विधेयक ला रही है उसमें ऐसा प्रावधान है कि अदालत के आदेश के बाद भी पुलिस सरकारी कर्मिकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती है। भले ही कोर्ट ऐसे आदेश कर दें यानि कोर्ट के आदेश के बाद भी संबंधित पुलिस को पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। जब तक सरकार की अनुमति नहीं मिलेगी तब तक मुकदमा भी दर्ज नहीं हो सकेगा। इतना ही नहीं मात्र आरोप के आधार पर खबर प्रकाशित करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष तक की सजा दी जा सकेगी। सरकार में बैठे लोग माने या नहीं, लेकिन यदि यह विधेयक पास होता है तो भ्रष्ट अधिकारी और निर्भय हो जाएंगे। अभी जिन लोगों का सरकारी दफ्तरों में काम पड़ता है उन्हें पता है कि भ्रष्टाचार किस तरह फैला हुआ है। जायज काम भी रिश्वत दिए बिना नहीं होता। अच्छा होता कि सरकार ऐसा कोई कानून लाती, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता। सब जानते है कि सरकार का यह विधेयक आसानी से विधानसभा में पास हो जाएगा, क्योंकि 200 में से 162 विधायक भाजपा के हैं।
एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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#3170
अब 23 अक्टूबर को होगा अजमेर के पटेल मैदान में दुधियों का सम्मेलन। सीएम राजे के सामने डेयरी अध्यक्ष चैधरी करेंगे शक्ति प्रदर्शन।
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राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे की उपस्थिति में 22 अक्टूबर को होने वाला अजमेर जिले के दुधियों का सम्मेलन अब 23 अक्टूबर को पटेल मैदान पर होगा। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चैधरी ने बताया कि सीएम राजे के 22 अक्टूबर को अयंत्र व्यस्त होने के कारण अब यह सम्मेलन 23 अक्टूबर को रखा गया है। इस सम्मेलन में सीएम राजे डेयरी के नए प्लांट का शिलान्यास भी करेंगी। यह सम्मेलन प्रातः 11 बजे शुरू होग जाएगा। केन्द्र सरकार ने नए प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत किया है। इसमें 50 करोड़ रुपए की राशि अनुदान के तौर पर मिलेगी। नया प्लांट अत्याधुनिक तकनीक पर बनेगा। जिससे डेयरी के उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। दूध उत्पादक और डेयरी के कारोबार से जुड़े सभी ग्रामीणों को दोपहर का भोजन डेयरी प्रबंधन की ओर से कराया जाएगा। वाहनों के लिए पटेल मैदान के आसपास ही इंतजाम किए गए हैं।
चैधरी का शक्ति प्रदर्शनी भीः
जिलेभर के दुधियों का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। इस चुनावों के मद्देनजर ही सीएम राजे जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद का कार्य कर चुकी हैं। इन सभी जन संवादों में क्षेत्रीय भाजपा विधायक और नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन भी किया। ऐसे में डेयरी के सम्मेलन और प्लांट के शिलान्यास को भी डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चैधरी का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। चैधरी भी उपचुनाव में भाजपा के टिकट के प्रमुख दावेदार हैं। सीएम के सामने 20 हजार से भी ज्यादा ग्रामीणों की उपस्थिति दर्ज करवा कर चैधरी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि पूरा आयोजन चैधरी पर ही निर्भर है। डेयरी के इस आयोजन मे भाजपा संगठन की भी कोई भूमिका नहीं है। जिलेभर से ग्रामीणों को लाने और फिर वापस गांव तक पहुंचाने के सारे प्रबंध चैधरी के समर्थक ही कर रहे हैं। सम्मेलन स्थल पटेल मैदान पर लगने वाले टेंट, मंच आदि का खर्च भी चैधरी के माध्यम से हो रहा है। असल में चैधरी सीएम के सामने यह दिखाना चाहते हैं कि अजमेर जिले में उनकी कितनी पकड़ है। वह अकेले दम पर हजारों की भीड़ एकत्रित कर सकते हैं।
एस.पी.मित्तल) (21-10-17)
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Friday, 20 October 2017

#3167
आखिर भाजपा में रासासिंह रावत की उपेक्षा क्यों की जा रही है ?
18 साल संसद में बैठने की वजह से कान तक खराब हो गए।
नरेन्द्र मोदी और अमित शाह तथा राजस्थान में वसुन्धरा राजे के नियंत्रण वाली भाजपा में ऐसे अनेक नेता हैं जो एक या दो बार सांसद रहे, लेकिन आज वे किसी प्रांत के राज्यपाल हैं अथवा अन्य किसी सरकारी पद पर बैठे हुए सत्ता का सुख प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन अजमेर से पांच बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले 77 वर्षीय रासासिंह रावत आज किसी मंत्री अथवा मुख्यमंत्री के आने पर लाइन में माला लेकर खड़े नजर आते हंै। रावत ने 6 बार अजमेर और एक बार भाजपा के टिकट पर राजसमंद से चुनाव लड़ा और पांच बार विजयी हुए। पांच बार चुने जाने की वजह से ही रावत ने करीब 18 साल अजमेर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। यह रावत का दुर्भाग्य रहा कि जब वे अजमेर से चुनाव जीते तो केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी, इसलिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट तो रावत अजमेर में नहीं ला सके। लेकिन रेल्वे कारखाने का आधुनीकीकरण, ब्राडगेज की लाइन, बीसलपुर का पानी आदि उपलब्धियां रावत के खाते में गनाई जा सकती हैं। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट जब केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री थे तब अजमेर के सीआरपीएफ के एक ग्रुप सेंटर को दौसा जिले में ले जाना चाहते थे, लेकिन तब रावत ने संसद में पायलट के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया। आज दोनों ग्रुप सेंटर अजमेर में चल रहे हैं। अजमेर संभवत देश में एक मात्र शहर होगा, जहां सीआरपीएफ के दो सेंटर संचालित हैं। चूंकि एक सेंटर में हजारों जवान मौजूद रहते हंै, इसलिए इसका असर अजमेर शहर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। चूंकि रावत शिक्षाविद हैं इसलिए संसद में हर विषय पर बोलने की क्षमता रखते हंै। भाजपा की राजनीति में जब अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आड़वाणी, मुरली मनोहर जोशी का दखल था तब प्रखर वक्ता के तौर पर रावत ही संसद में सत्तापक्ष को जवाब देते थे। रावत की संसद में कितनी प्रभावी भूमिका रही इस बात को आडवाणी और जोशी जैसे नेता अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन भाजपा में अब दोनों ही नेताओं का कोई वजूद नहीं है, इसलिए पांच बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले रासासिंह रावत मंत्रियों के स्वागत के लिए माला लेकर खड़े हुए हैं।
कान भी हो गए खराब:
संसद में रावत की सौ प्रतिशत उपस्थिति रही है। चूंकि पूरे समय रावत संसद में सक्रिय रहते थे इसलिए अपने कान पर ईयर फोन लगा कर रखते थे। ईयरफोन के लगातार लगे रहने से रावत की सुनने की क्षमता भी आज कम हो गई है। यही वजह है कि उन्हें दोनों कानों में सुनने की मशीन लगाकर रखनी पड़ती है, लेकिन उनकी कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं है। स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल बने हुए है तो रासासिंह तो अभी फर्राटा दौड़ में भाग ले सकते हैं। जो लोग इस समय भाजपा के कर्णधार बने हुए है वे माने या नहीं, लेकिन रासासिंह रावत ने राजस्थान में विपरीत परिस्थितियों में अजमेर से भाजपा का झंडा बुलंद रखा था। बल्कि यह भी कहा जा सकता है कि 1977 में जब पहली बार रावत ने चुनाव लड़ा तब जन्म लेने वाले भाजपा के आज के नेता भी रावत की राजनीतिक यात्रा को नहीं देख रहे हंै। राजस्थान भाजपा में रावत अकेले ऐसे नेता हैं जो पांच बार सांसद रह चुके हैं।
उपचुनाव में दावेदार:
अजमेर संसदीय क्षेत्र में इसी वर्ष लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। रावत ने एक बार फिर पुरजोर तरीके से अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। सीएम वसुंधरा राजे ने अजमेर जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद किया। सातों जगह रावत ने सीएम को गुलदस्ता भेंट किया। नसीराबाद के अंतिम जनसंवाद में तो सीएम को भी कहना पड़ा कि रासासिंह जी आप तो अभी भी जवान हो। यह टिप्पणी सीएम ने रावत की राजनीतिक सक्रियता पर की। रावत अब इस बात से बेहद उत्साहित हैं कि सीएम ने अपनी आफिशियल फेसबुक पर रावत के स्वागत वाला फोटो पोस्ट किया है। रावत का भी मानना है कि यदि सीएम राजे चाहे तो उपचुनाव में भाजपा का उम्मीदवार बनवा सकती हैं। रावत ने अपनी उम्मदवारी के लिए सीएम राजे को 6 पेज का बायोडेटा भी दे दिया है। यदि इस बायोडेटा को कोई नेता पढ़े तो वाकई प्रभावित होगा। उम्र के लिहाज से भले ही रावत को उपचुनाव में उम्मीदवार न बनाया जाए, लेकिन कम से कम गोवा जैसे छोटे प्रांत का राज्यपाल तो बनाया ही जा सकता है। लेकिन रावत का मानना है कि यदि उन्हें उम्मीदवार बनाया जाता है तो वे बड़ी आसानी से उपचुनाव में भाजपा की जीत करवा सकते हैं। ब्यावर विधानसभा क्षेत्र भले ही अजमेर ससंदीय क्षेत्र में न आता हो, लेकिन उनकी जाति के डेढ़ लाख रावत मतदाता आज भी हंै। चूंकि पचास साल के राजनीतिक सफर में आज तक भी उन पर भष्ट्चार का कोई दाग नहीं लगा है, इसलिए सर्व समाज में उनकी इमेज साफ सुथरी है। किसी समय जब टेलिफोन और रसोई गैस कनेंशन संासद कोटे में मिलते थे तब उन्होंने पार्टी के कार्यकत्र्ताओं और आमजनों को यह सुविधा उपलब्ध करवाई। उपचुनाव में अपनी उम्मीदवारी को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिल चुके हंै और अब उनका प्रयास राष्ट््ीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का है। विदेशमंत्री श्रीमति सुषमा स्वराज ने भी रावत को अमित शाह से मिलने की सलाह दी। 
एस.पी.मित्तल) (20-10-17)
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#3168
वाकई बेहद कठिन है ब्लाग लिखना।
भाई सुरेन्द्र चतुर्वेदी का आभार।
सोशल मीडिया पर डाले जा रहे ब्लाग और पोस्टों की जब चौतरफा आलोचना हो रही है, तब देश के सुविख्यात साहित्यकार और कवि सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने मेरे ब्लाग लेखन पर अपने सटीक विचार प्रकट किए हैं। दीपावली के अवसर पर भाई सुरेन्द्र ने जो लिखा है, उसे मैं ज्यों का त्यों यहां पोस्ट कर रहा हूं। मैं एक बार फिर यह बताना चाहरता हूं कि मेरे ब्लाग रोजाना करीब तीन हजार व्हाटसएप ग्रुप में पोस्ट किए जाते हैं। अकेले अजमेर जिले के करीब एक हजार व्हाटसएप ग्रुप मुझसे जुड़े हुए हंै। राजस्थान के प्रमुख शहरों के एडमिनों ने भी अपने अपने व्हाटसएप  गु्रप से मुझे जोड़ रखा है। यही स्थिति देश के हिंदी भाषी शहरों की भी है। आज मेरा फेसबुक पेज बीस-बीस हजार लोगों तक पहुच रहा है। इतना ही नहींं ब्लाग स्पाट पर एक लाख पाठक हैंं इसके अतिरिथ्त वेबसाइट, फोन ऐपिलेकेशन आदि के जरिए भी मेरा ब्लाग कई लाख लोगों तक पहुंच रहा है। जितना कठिन कार्य ब्लाग लेखन का है उतना ही कठिन काम सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से लोगों तक ब्लाग पहुंचाना है। चूंकि भाई सुरेन्द्र मुझसे बड़े हैं और सहित्य जगत में उनकी धाक है इसलिए उनके लेखन पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर रहा , ेलेकिन मेरे पाठकों को यह बताना चाहता हूं कि भाई सुरेन्द्र ने देश के बड़े बड़े कवि सम्मेलेनों में भाग ले रहे हंै और शायद ही कोई कवि होगा जिसके साथ मंच साझा न किया हो। भाई सुरेन्द्र ने जो गीत और गजल लिखी हैं उन्हें फिल्म जगत में भी काम में लिया गया है। भाई सुरेन्द्र को साहित्य के अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया है। भाई सुरेन्द्र से मोबाइल नं 9829271388 व 9251425388 पर सम्पर्क किया जा सकता है।  

ब्लॉग लेखक मित्तल 

           💥सुरेंद्र चतुर्वेदी

वैसे तो अजमेर में ब्लॉग लिखने का एक फैशन ही चल निकला है। जिसे देखो ब्लॉग लिख रहा है ।दूध पीते बच्चे भी,,,,, दारु पीते लुच्चे भी ।जिसके हाथ में गलती से भी कलम आ जाती है वह सबसे पहले ब्लॉग लिखता है। ब्लॉग लिखना छुआ छूत की बीमारी है ।जो शुरू होने के बाद जलकुंभी की तरह फैल जाती है। अजमेर में भी ये दिन दूनी रात चौगुनी फ़ैल रही है। ब्लॉग लिखने के लिए जरूरी नहीं कि कोई ठोस विषय हो। बस विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा की तर्ज पर लिखने वाला लिखना शुरु कर देता है।
 शहर की सेहत के लिए मैं इसे अच्छी बात मानता हूं ।कम से कम लोगों की भड़ांस तो निकल रही है ।भड़ांस निकालने वाले ब्लॉग लेखकों के अलावा शहर में कुछ सीरियस ब्लॉगर भी हैं। जो बड़ी जिम्मेदारी से सोच समझ कर बात लिखते हैं। वह जानते हैं कि कब किसकी गाय मारनी है और किसका बछड़ा बचाना है। इन में से सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर हैं  SP मित्तल साहब।मेरी नज़र में वे  दुनिया के सबसे  लोकप्रिय ब्लॉग रचियता हैं। अजमेर के जितने भी Whatsapp ग्रुप है इनमें आप मित्तल जी को सर्वव्यापी रूप से देख सकते हैं ।Google से लेकर गली कूचे तक उनकी कला गुलाचे मारती है। राजनीति या रागनीति या  कूटनीती या अनीती ।मित्तल साहब  देखते ही लिखने को  चाह कर भी रोक नहीं पाते ।यही वजह है कि शहर में कोई नई दुकान खोले ।किसी का ट्रांसफर हो जाए। कोई अच्छा या बुरा मामूली सा काम भी कर दे तो मित्तल साहब ब्लॉग लिख देते हैं ।मैं उनको नमन करता हूं ।उनकी कलम  शासन प्रशासन है हर रोज के राशन पर चल उठती है।वह राजा को रंक बना देती हैबिच्छु का डंक बना देती है।
मां सरस्वती ने सच में उन्हे ब्लॉग लेखन  के लिए ही पैदा किया है। लेकिन यह बात मेरे सिवा कोई नहीं समझ पाया ।पंजाब केसरी भी नहीं।अजमेर केसरी मित्तल ने पंजाब केसरी छोड़ दी। लेकिन ब्लॉग लिखना नहीं छोड़ा ।मेरे जैसा मामूली लेखक होता तो प्राण त्यागने तक पंजाब केसरी नहीं छोड़ता मगर मित्तल साहब मेरे जैसे नहीं ।वे कमाल के व्यक्तित्व हैं।
अमेरिका का ट्रम्प हो या अजमेर का कोई पार्षद वे किसी को भी ब्लॉग में लपेट सकते हैं।
वे  भारत-पाक की सीमा पर कहीं होने वाली हलचल  पर भी ब्लॉग लिख  सकते हैं तो उतार घसेटी की हल चल पर भी। वह कई बार तो शहर की राजनीति ही तय कर देते हैं ।कौन कहां से चुनाव लड़ेगा? कौन जीतेगा ?कौन हारेगा ?कौन कौन कहां कौन सी टीम से खेल रहा है वे सब जानते हैं ।सच में मैं उन्हें सर्व व्यापी ,सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग रचियता मंटा हूँ। मेरी अंतिम इच्छा है की वो दिर्गायु हो और ब्लॉग लिखते रहें। अजमेर की वे धड़कन हैं।अन्य ब्लॉग लिखने वालों की वे प्रेरणा हैं। ये बात अलग है कि आज जितने जलकुम्भी ब्लॉगर हैं सब उनकी ही दें हैं।ईश्वर सभी को सद्बुद्धि दे।ॐ नमः शिवाय।
एस.पी.मित्तल) (20-10-17)
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#3169
तो सीएम वसुंधरा राजे चाहेंगी, तब होंगे अलवर और मांडलगढ़ में उपचुनाव।
राजस्थान कैडर के रिटायर आईएएस सुनील अरोड़ा हंै चुनाव आयुक्त।
सब जानते हैं कि राजस्थान के अलवर में लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर सीएम वसुंधरा राजे ने 15 और 16 अक्टूबर को अलवर के दो विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद की घोषणा कर दी थी। अलवर के भाजपा विधायकों ने तैयारियां भी शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं भीलवाड़ा के मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तो सीएम ने जनसंवाद का कार्यक्रम भी कर लिया। सीएम की इस राजनीतिक कवायद से यह लगा कि अजमेर के लोकसभा के उपचुनाव के साथ साथ अलवर और मांडलगढ़ में उपचुनाव होंगे। आमतौर पर ऐसा ही होता है कि एक प्रांत के सभी उपचुनाव एक साथ हो जाए। लेकिन सबने देखा कि ऐन मौके पर सीएम ने अलवर का दौरा रद्द कर दिया और अजमेर जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद का कार्यक्रम पूरा किया। यहां तक कि धनतेरस के दिन भी सीएम ने नसीराबाद में जनसंवाद किया। लेकिन अब कहा जा रहा है कि अलवर और मांडलगढ़ के उपचुनाव अजमेर के साथ नहीं होंगे। इस पर सीएम राजे भी सहमत हैं। भले ही उपचुनाव के बारे में सीएम राजे खुद कोई फैसला न करें, लेकिन सब जानते हैं, कि राजस्थान कैडर के रिटायर आईएएस सुनिल अरोडा को पिछले माह ही देश का चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। जानकारों की माने तो सीएम राजे को यही समझाया गया कि अलवर और मांडलगढ़ के लिए कोई जल्दबाजी न कि जाए। संविधान में किसी सांसद या विधायक के निधन के बाद अगले 6 माह में उपचुनाव कराने का प्रावधान है। चूंकि अजमेर के सांसद सांवरलाल जाट के निधन को तीन माह का समय हो गया है इसलिए अजमेर में उपचुनाव करवाएं जा सकते हैं, लेकिन अलवर के सांसद और मांडलगढ़ की विधायक का निधन तो हाल ही में हुआ है। अलवर और मांडलगढ़ में अगले वर्ष फरवरी-मार्च तक उपचुनाव करवाएं जा सकते हैं। सीएम के सामने जब यह प्रस्ताव रखा गया तो उन्होंने भी सहमति जताई क्योंकि अब एक साथ तीन चुनावों में ताकत नहीं लगानी पड़ेगी। इस वर्ष अजमेर और अगले वर्ष अलवर व मांडलगढ़ के चुनाव करवाए जा सकते हैं। चूंकि राजनीति में कुछ संभव है इसलिए सीएम का यह फैसला भी बदल सकता है। पहले इस बात का आकलन किया जाएगा कि राजस्थान में भाजपा को एक साथ चुनाव करवाने में फायदा है या नहीं। यदि राजनीतिक फायदा नजर आया तोएक साथ उपचुनाव करवाये जा सकते है । चूंकि चुनाव आयोग से कोई निर्णय करवाने में परेशानी नहीं है इसलिए यह माना जा रहा है कि सीएम राजे जब चाहेंगी तब राजस्थान में उपचुनाव होंगे।  ऐसा भी कोई जरूरी नहीं कि अजमेर के उपचुनाव गुजरात के चुनाव के साथ करवाएं जाए।
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Sunday, 1 October 2017

यह तो प्रधानमंत्री की सुरक्षा और व्यवस्थाओं में चूक है। दिल्ली में रावण दहन के अवसर पर कमान का टूटना। =======

#3094
यह तो प्रधानमंत्री की सुरक्षा और व्यवस्थाओं में चूक है। दिल्ली में रावण दहन के अवसर पर कमान का टूटना।
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30 सितम्बर को दिल्ली में रामलीला मैदान पर जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रावण दहन के लिए तीर चलाने की परंपरा को निभा रहे थे कि तभी कमान टूट गई। हालांकि बाद में मोदी ने अपने हाथ से भाले की तरह तीर को फेंक कर परंपरा को निभाया। कमान टूटने को लेकर अब अनेक प्रतिक्रिया मीडिया में आ रही है। चूंकि मोदी एक राजनीतिक दल के नेता हैं इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश के प्रधानमंत्री पर कोई भी टिप्पणी की जा सकती है। भारत जैसे देश में तो कुछ भी कहा जा सकता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात प्रधानमंत्री की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की चूक उजागर होना है। सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री के हाथ में कोई भी वस्तु बिना जांच पड़ताल के सौंप दी जाती है? प्रधानमंत्री की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मापदंड निर्धारित हैं। ऐसे में तीर कमान की जांच पड़ताल पहले से ही होनी चाहिए थी। ऐसा प्रतीत होता है कि समारोह के आयोजकों और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे अधिकारियों ने इस मुद्दे पर लापरवाही बरती है। यदि तीर-कमान की जांच पहले होती तो प्रधानमंत्री के हाथों में कमान टूटती नहीं। कमान के टूटने की घटना का प्रसारण मैंने भी टीवी पर लाइव देखा है। मैंने देखा कि जब पहली बार प्रधानमंत्री मोदी ने कमान की रस्सी को खींच कर तीर चलाया तो चला ही नहीं। ऐसे में पीएम ने स्वयं रस्सी को कमान पर कसा। ऐसा इसलिए किया गया कि कमान में रस्सी ढीली थी। लकड़ी का बना कमान इतना कमजोर निकला की रस्सी पर तीर को लगाते ही कमान टूट गई। असल में इस समारोह के आयोजकों का सारा ध्यान राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मिजाजपुर्सी में लगा रहा। समारोह के आयोजकों ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि यह समारोह प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए बनी एसपीजी के अधिकारी भी क्या कर रहे थे? अच्छा हो कि भविष्य में सुरक्षा अधिकारी सतर्कता बरते।
एस.पी.मित्तल) (01-10-17)
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भारत की एकता अखंडता में संघ के स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका। रोहिंग्या मुसलमानों को मुस्लिम देश क्यों नहीं देते शरण? इन्द्रेश कुमार ने उठाया सवाल। ======

#3095
भारत की एकता अखंडता में संघ के स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका। रोहिंग्या मुसलमानों को मुस्लिम देश क्यों नहीं देते शरण? इन्द्रेश कुमार ने उठाया सवाल।
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1 अक्टूबर को राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक इन्द्रेश कुमार ने राजस्थान के नागौर जिले के कुचामन शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नवनिर्मित स्वातिक भवन का लोकार्पण किया। इन्द्रेश कुमार संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। इस मौके पर कोई 10 हजार स्वयं सेवकों की एक सभा को संबोधित करते हुए इन्द्रेश कुमार ने कहा कि देश की एकता अखंडता को बनाए रखने में संघ के स्वयं सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश में सक्रिय आतंकी और विघटनकारी ताकतों का मुकाबला संघ का कार्यकर्ता ही करता है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल, केरल आदि राज्यों में स्वयं सेवकों की हत्याएं हो रही है। ऐसा ही दौर पूर्व में उत्तर प्रदेश में भी चला था। स्वयं सेवक जहां देश की खातिर बलिदान देने के लिए तैयार रहता है। वहीं समाज में समरसता को भी बढ़ावा देता है। समाज का कोई भी व्यक्ति संघ के स्वयं सेवक पर भरोसा कर सकता है। यही वजह है कि संघ आज समाज के सभी वर्गों में काम कर रहा है। संघ का कार्यकर्ता आदिवासी इलाकों से लेकर पहाड़ी और रेगिस्तान तक में सक्रिय है। कुचामान जैसे छोटे शहर में भी स्वयं सेवकों की इतनी संख्या बताती है कि संघ के सिद्धांत  और शिक्षा लोकप्रिय हैं। समारोह में केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी और नागौर के भाजपा के नेता भी उपस्थित रहे।
रोहिंग्याओं को मुस्लिम राष्ट्र क्यों नहीं देते शरणः
मीडिया से संवाद करते हुए इन्द्रेश कुमार ने कहा कि म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक से गुहार की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुस्लिम देश रोहिंग्या मुसलमानों को शरण क्यों नहीं देते हैं? उन्होंने कहा कि हकीकत ये है कि कोई भी देश अपनी शांति में विघ्न नहीं चाहता है। ऐसे में रोहिंग्याओं को मुस्लिम राष्ट्र भी शरण नहीं दे रहे हैं। उन्हांेने इस मुद्दे पर भारत सरकार की प्रशंसा की और कहा कि भारत सरकार ने जन भावना के अनुरूप ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर रोहिंग्याओं को शरण देने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि देश के कई मोर्चों पर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की सराहनीय कार्य कर रही है।
एस.पी.मित्तल) (01-10-17)
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मुख्यमंत्री के पुष्कर आने से पहले ही सीवरेज का गंदा पानी पवित्र सरोवर में पहुंचा। तीर्थ पुरोहितों ने पालिका के खिलाफ जताया गुस्सा।

#3096
मुख्यमंत्री के पुष्कर आने से पहले ही सीवरेज का गंदा पानी पवित्र सरोवर में पहुंचा। तीर्थ पुरोहितों ने पालिका के खिलाफ जताया गुस्सा।
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1 अक्टूबर का दिन तीर्थ नगर पुष्कर के लिए बेहद ही खराब रहा। जिस पवित्र सरोवर के जल को श्रद्धालु अपने माथे पर लगाकर आचमन करते हैं उसी सरोवर में सीवरेज का गंदा पानी चला गया। अंदाजा लगाया जा सकता है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को कितनी ठेस पहुंची होगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार परिक्रमा मार्ग पर बने ब्रह्म घाट पर सुबह ही सीवरेज लाइन ओवर फ्लो हो गई और गंदा पानी घाट की सीढ़ियों से उतर कर पवित्र सरोवर में जा मिला। हालांकि कुछ तीर्थ पुरोहितों ने  वाइपर के जरिए गंदे पानी को सरोवर में जाने से रोकने का प्रयास किया। सीवरेज का पानी सरोवर में जाने पर कुछ तीर्थ पुरोहितों ने पुष्कर नगर पालिका के प्रति भी गुस्सा जताया। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का भी कहना रहा कि पुष्कर का प्रशासन पूरी तरह विफल है। जिस पवित्र समारोह में स्नान करने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं उसी सरोवर में यदि गंदा पानी गिरता है तो यह बेहद ही शर्मनाक बात है। पुष्कर की सड़कों पर सीवरेज का गंदा पानी बहना तो आम बात है, लेकिन अब तो यह पानी पवित्र सरोवर में भी जाने लगा है। गंदा पानी सड़कों पर बहने से परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी होती है। महत्वपूर्ण बात तो ये है कि इस समय अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के पद पर भाजपा के शिव शंकर हेड़ा और पालिका के अध्यक्ष पद पर भाजपा के ही कमल पाठक विराजमान हैं। पुष्कर में सीवरेज लाइन का कार्य प्राधिकरण ने किया था और अब रख रखाव की जिम्मेदारी पालिका अध्यक्ष की है। पिछले दिनों पुष्कर में स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन सीवरेज का गंदा पानी यह बताता है कि सारे दावे खोखले हैं। पुष्कर के वकील भीकम शर्मा ने आरोप लगाया है कि स्वच्छता अभियान के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि आगे चल कर डस्टबिन घोटाला उजागर होगा। पुष्कर के तीर्थ पुरोहित श्याम सुंदर पाराशर, बाबूलाल पाराशर, गिरीराज पाराशर आदि ने भी पालिका की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है एक ओर जहां पुष्कर के आम श्रद्धालु परेशान हैं, वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के पदाधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। माना जा रहा है कि पुष्कर में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभाने में पूरी तरह असमर्थ है। जहां तक पालिका अध्यक्ष कमल पाठक का सवाल है तो वे बयान बाजी तो बहुत करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। यह सब तो तब हो रहा है जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शीघ्र ही पुष्कर आना है। जानकार सूत्रों के अनुसार पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर के आधुनिकीकरण के कार्य के शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री का 4 अक्टूबर को अजमेर दौरा प्रस्तावित है। देखना है कि पुष्कर नगर पालिका मुख्यमंत्री के आने से पहले उत्पन्न चुनौतियों से कैसे निपटती है। 
एस.पी.मित्तल) (01-10-17)
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चीन की वामपंथी सरकार ने शिनजियांग प्रांत में मुसलमानों पर फिर लगाई पाबंदियां। पाकिस्तान के मुसलमान चीन के इस दोहरे चरित्र को समझें।

#3097
चीन की वामपंथी सरकार ने शिनजियांग प्रांत में मुसलमानों पर फिर लगाई पाबंदियां। पाकिस्तान के मुसलमान चीन के इस दोहरे चरित्र को समझें।
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सब जानते हैं कि चीन का शिनजियांग प्रांत मुस्लिम आबादी वाला है। चीन की वामपंथी सरकार आए दिन इस प्रांत के निवासियों के लिए फरमान जारी करती रहती है। अभी ताजा फरमान में मुसलमानों से कहा गया कि वे अपने घरों में रखी धार्मिक पुस्तकों को सरकार में जमा करा दें। इसमें पवित्र कुरान भी शामिल हैं। इतना ही नहीं मस्जिदों में नमाज के समय काम आने वाली चटाई आदि के उपयोग के बारे में भी निर्देश दिए गए हैं। असल में चीन सरकार अपने कायदे कानून से ही रहने की इजाजत देती है। यदि कोई नागरिक सरकार के आदेश नहीं मानता है तो उसे सजा-ए-मौत दी जाती है। कोई किसी भी धर्म का हो, लेकिन उसे सिर्फ एक संतान पैदा करनी होगी। यह नियम भी सख्ती से लागू होता है। चीन के इस दोहरे चरित्र को पाकिस्तान के मुसलमानों को समझना चाहिए। पाकिस्तान के मुसलमानों को इस बात से खुश नहीं होना चाहिए कि हाफिज सईद जैसे व्यक्तियों को आतंकी घोषित नहीं करने में चीन पाकिस्तान की मदद करता है। भारत ने जब भी संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान में बैठेे आतंकियों का मुद्दा उठाया तो चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर भारत के प्रयासों पर पानी फेर दिया। असल में चीन ऐसा इसलिए करता है क्योंकि पाकिस्तान के आतंकी सिर्फ भारत में ही गतिविधियां करते हैं। हाफिज सईद, मसूद अजहर जैसे पाकिस्तानी हमारे कश्मीर का मुद्दा तो उठाते हैं, लेकिन चीन के शिनजियांग प्रांत का नहीं। इन पाकिस्तानियों को भी पता है कि शिनजियांग प्रांत के मुसलमानों के प्रति जरा सी भी हमदर्दी दिखाई गई तो जो हाल ओसामा बिन लादेन का हुा, उससे भी बुरा हाल इन पाकिस्तानियों का होगा। जबकि सब जानते हैं कि अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीरियों को विशेष अधिकार मिले हुए हैं। ऐसे विशेषाधिकार तो मुसलमानों को पाकिस्तान में भी नहीं है। यह बात कश्मीरियों को भी समझनी चाहिए। इससे ज्यादा और क्या हो सकता है कि कांग्रेस के शासन में भगाए गए 4 लाख हिन्दुओं को भाजपा के शासन में भी बसाया नहीं जा सका। जबकि जम्मू-कश्मीर में भी महबूबा मुफ्ती की सरकार भाजपा के समर्थन से ही चल रही है। सवाल उठता है कि पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने वाले मुस्लिम नेता चीन के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते? क्या किसी नागरिक की धार्मिक मान्यताओं पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं? हाफिज सईद, अजहर मसूद जैसे नेताओं को चीन के शिनजियांग प्रांत के मुसलमानों की सुध लेनी चाहिए। 
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आखिर एक अक्टूबर से किशनगढ़ एयरपोर्ट से शुरू नहीं हो सकी उड़ानें। अजमेर में नहीं है राजनीतिक ताकत। =======

#3098
आखिर एक अक्टूबर से किशनगढ़ एयरपोर्ट से शुरू नहीं हो सकी उड़ानें। अजमेर में नहीं है राजनीतिक ताकत।
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1 अक्टूबर 2017 भी गुजर गया और अजमेर के किशनगढ़ एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू नहीं हुई। एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों और अजमेर के भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि एक अक्टूबर से कॉमर्शियल उड़ानें शुरू हो जाएगी। भाजपा के मंत्री, विधायक आदि फोटो खींचवाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचते रहे। यहां तक दावा किया गया कि एक विमान कंपनी ने तो बुकिंग भी शुरू कर दी है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि डायरेक्ट्रेट जनरल आफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने किशनगढ़ के एयरपोर्ट को लाइसेंस नहीं दिया है। सवाल उठता है कि जब एयरपोर्ट को लाइसेंस ही नहीं दिया गया तो फिर उड़ानों की बुकिंग जैसी बकवास क्यों की गई? यह सही है कि किशनगढ़ का एयरपोर्ट बन कर तैयार है, लेकिन अजमेर के भाजपा नेताओं में इतनी राजनीतिक ताकत नहीं है कि वे उड़ानें शुरू करवा सकें। उड़ानों का पूरा मामला राज्य सरकार और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच का है। संभावना है कि जब उड़ानें शुरू होंगी तो भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए कोई समारोह भी करेगी। हालांकि एयरपोर्ट का उद्घाटन चार वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह कर चुके हैं, लेकिन जब एयरपोर्ट अधूरा था। तब अधूरे एयरपोर्ट का उद्घाटन कर कांग्रेस ने वाह-वाह लूटी तो अब पूरा होने भाजपा पीछे कैसे रहेगी। अजमेर के किसी भी भाजपा विधायक में इतनी हिम्मत नहीं कि वह इस मुद्े पर सीएम वसुंधरा राजे से बात कर सके। जबकि अजमेर में भाजपा के 8 में से 7 विधायक हैं और इनमें से चार मंत्री सत्ता की सुविधा भोग रहे हैं। यह सही है कि अजमेर के भाजपा सांसद सांवरलाल जाट का निधन हो चुका है, लेकिन प्रभारी मंत्री हेमसिंह भडाना, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत ऐसे नेता हैं जो सीएम के सामने एयरपोर्ट के मामले को प्रभावी तरीके से रख सकते हैं, लेकिन अजमेर के भाजपा  विधायकों की आपसी खींचतान की वजह से ऐसे नेता चुप रहना ही उचित समझते हैं। राजनीतिक कमजोरी की वजह से उड़ानों का मामला अटका हुआ है। अब तो अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव भी होंगे। माना जा रहा है कि उपचुनाव की घोषणा से पहले कोई रास्ता निकल जाए। डीजीसीए का लाइसेंस तो सिर्फ बहाना है। 
एस.पी.मित्तल) (01-10-17)
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Saturday, 30 September 2017

भूपेन्द्र यादव ने गुजरात में की विजयादशमीं पर पूजा तो नरेश सालेचा दिल्ली में दलाई लामा से मिले। =========

#3088
भूपेन्द्र यादव ने गुजरात में की विजयादशमीं पर पूजा तो नरेश सालेचा दिल्ली में दलाई लामा से मिले।
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अजमेर से जुड़े राज्यसभा के सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव ने 30 सितम्बर को विजयादशमीं पर गुजरात के बोटाद जिला स्थित स्वामी नारायण सम्प्रदाय के कष्ट भंजन हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना की। यादव ने इस अवसर पर मंदिर की परंपरागत पौषाक धोती पहनी। मंदिर के प्रतिनिधियों ने यादव को स्वामी नारायण सम्प्रदाय के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के धार्मिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा अर्चना करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। मालूम हो कि यादव केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली के साथ गुजरात के चुनाव प्रभारी हैं और इन दिनों गुजरात में ही डेरा जमाए हुए हैं। चुनाव आयोग कभी भी गुजरात में चुनाव की घोषणा कर सकता है। 
सालेचा दम्पत्ति मिले दलाई लामा सेः
अजमेर डीआरएम रहे नरेश सालेचा और उनकी पत्नी निर्मला सालेचा ने 27 सितम्बर को दिल्ली में बोध धर्म गुरु और नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त दलाई  लामा से मुलकात की। सालेचा ने कहा कि दलाई लामा से मुलाकात करना उनके लिए गर्व की बात है। बातचीत में लगा ही नहीं कि वे एक विश्व स्तरीय धर्म गुरु से मिल रहे हैं। इस मुलाकात में दलाई लामा ने सालेचा दम्पत्ति को आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मालूम हो कि सालेचा वर्तमान में रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 
एस.पी.मित्तल) (30-09-17)
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तो अब वसुंधरा सरकार के मंत्रियों पर होने लगे हैं हमले। कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाए आत्म विश्लेषण करें मंत्री-विधायक।

#3089
तो अब वसुंधरा सरकार के मंत्रियों पर होने लगे हैं हमले। कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाए आत्म विश्लेषण करें मंत्री-विधायक।
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29 सितम्बर की रात को राजस्थान के पीडब्ल्यूडी और परिवहन मंत्री यूनुस खान जब अपने गृह जिले नागौर के गांव छोटी खाटू से गुजर रहे थे कि तभी उनके सरकारी वाहन पर हमला किया और कार को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इस हमले में यूनुस खान बड़ी मुश्किल से बच पाए। हमले के बाद यूनुस खान का आरोप रहा कि यह कांग्रेस की साजिश है। यूनुस खान कुछ भी कहें, लेकिन राजस्थान का राजनीतिक माहौल अभी ऐसा नहीं हुआ है, जिसमें एक दल दूसरे पर जानलेवा हमला करवावे। यूनुस खान को आरोप लगाने से पहले आत्म विश्लेषण करना चाहिए। यह आत्म विश्लेषण राज्य की भाजपा सरकार के सभी मंत्रियों और विधायकों को करना चाहिए। सत्ता के नशे में डूबे मंत्री और विधायक माने या नहीं, लेकिन उनके प्रति लोगों में नाराजगी है। यह सही है कि यूनुस खान पर हुए हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता। हमलावरों को गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर प्रदेश में इतनी विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न क्यों हो रही है? जबकि नागौर तो भाजपा का गढ़ है। नागौर से यूनुस खान, अजय क्लिक जैसे मंत्री हैं तो सीआर चौधरी केन्द्र सरकार के मंत्री हैं। यूनुस खान को यह भी समझना चाहिए कि छोटी खाटू उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र डीडवाना में आता है। यदि मंत्रियों को अपने ही घर में हमले का शिकार होना पड़े तो हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। 
आनंदपाल से जुड़ा हो सकता है हमलाः
मंत्री पर हमले के आरोप में पुलिस ने राजपूत समाज से जुड़े कुछ युवकों को गिरफ्तार किया है।  ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि हमला आनंदपाल एनकाउंटर से जुड़ा हुआ है। इस एनकाउंटर को लेकर प्रदेश भर में राजपूत समाज का जो आंदोलन हुआ उसमें नागौर ही केन्द्र बिन्दू रहा। पूरे आंदोलन में यूनुस खान की भूमिका को लेकर भी सरकार के प्रति राजपूत समाज में नाराजगी है। हालांकि इस नाराजगी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यूनुस खान पर हमला यह बताता है कि मुख्यमंत्री के प्रयासों का समाज पर कोई असर नहीं हो रहा है।
मंत्री और विधायक आचरण सुधारेंः
भाजपा के मंत्री और विधायकों को अपने आचरण को सुधारने की जरुरत है। घमंडी आचरण की वजह से अधिकांश मंत्रियों और विधायकों के प्रति नाराजगी है। अगले वर्ष राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा के विधायकों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं के साथ सीधा संवाद करना चाहिए। 
एस.पी.मित्तल) (30-09-17)
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दरगाह के सामने स्वयं सेवकों का हुआ कदम ताल। पुष्प वर्षा भी हुई। अजमेर में विजयादशमीं पर संघ का पथ संचलन। =======

#3091
दरगाह के सामने स्वयं सेवकों का हुआ कदम ताल। पुष्प वर्षा भी हुई। अजमेर में विजयादशमीं पर संघ का पथ संचलन।
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इसे अजमेर में कौमी एकता का मिजाज ही कहा जाएगा कि 30 सितम्बर को विजयादशमीं के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के हजारों स्वयं सेवकों ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के सामने कदम ताल किया। दरगाह बाजार में खड़े अनेक मुसलमानों ने स्वयं सेवकों पर पुष्प वर्षा की। जब स्वयं सेवक कदम ताल करते हुए दरगाह के सामने से गुजर रहे थे, तब लोगों ने देश भक्ति के नारे भी लगाए। पूरा माहौल साम्प्रदायिक सद्भावना से भरा हुआ था। हालांकि प्रशासन ने अपने स्तर पर दरगाह के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन माहौल को देखते हुए साफ प्रतीत हो रहा था कि अजमेर में कट्टरता पर सद्भावना भारी है। अजमेर में वर्ष भर में ऐसे कई अवसर आते हैं, जब दरगाह के बाहर कौमी एकता का मंजर नजर आता है। चेटीचंड के जुलूस में शामिल हजारों लोगों के सिर पर दरगाह के बाहर मौलाई कमेटी के चीफ सैयद अब्दुल गनी गुर्देजी और उनसे जुड़े खादिम दस्तार बंदी करते हैं।
शानदार रहा पथ संचलनः
30 सितम्बर को संघ के महानगर का पथ संचलन शानदार रहा। महानगर के संघ चालक सुनील दत्त जैन की अगुवाई में निकले इस पथ संचलन में स्वयं सेवकों ने देश भक्ति के संकल्प का जोरदार प्रदर्शन भी किया। जैन ने बताया कि इस बार 93 वर्ष हो गए जब संघ ने अपना स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया है। संघ की स्थापना के समय जो संकल्प लिया गया था, वह पूरा हो रहा है। संघ आज समाज के हर वर्ग में अपनी भूमिका निभा रहा है। आज के पथ संलचन को दो भागों में विभाजित किया गया था। कॉलेज के विद्यार्थियों और तरुण वर्ग के स्वयं सेवकों का पथ संचलन मोइनिया इस्लामिया स्कूल से शुरू हुआ जो मदार गेट, नया बाजार, दरगाह बाजार, नला बाजार होता हुआ पुनः इसी स्कूल पर समाप्त हुआ। बालक वर्ग के स्वयं सेवकों ने केसरगंज क्षेत्र में पथ संचलन किया।
राष्ट्रवाद की भावना जरूरी-वेद माथुरः
पथ संचलन से पूर्व मोइनिया स्कूल के मैदान पर संघ की ओर से शक्ति पूजन का समारोह रखा गया। इसमें शस्त्र पूजन के बाद मुख्य अतिथि के पद से बोलते हुए पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक वेद माथुर ने कहा कि आज देश में राष्ट्रवाद की भावना जरूरी हो गई है। यह भावना हमारे नैतिक चरित्र से ही आएगी। देश के किसी भी नागरिक के लिए देश भक्ति सबसे पहले होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ न केवल चरित्र निर्माण कर रहा है, बल्कि युवाओं को जागरुक कर राष्ट्र भक्ति की भावना भी प्रबल कर रहा है। समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए चित्तौड़ प्रांत के शारीरिक शिक्षण प्रमुख कार्तिकेय नागर ने संघ की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
देवनानी, गहलोत और पलाड़ा आदि भी दिखेः
संघ के समारोह में स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा आदि भी उपस्थित रहे।
एस.पी.मित्तल) (30-09-17)
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आज के बाबा रावण से भी बढ़कर हैं-तरुण सागर।

#3093
आज के बाबा रावण से भी बढ़कर हैं-तरुण सागर।
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कवड़े वचनों के लिए विख्यात जैन संत तरुण सागर महाराज ने कहा कि आज के बाबा रावण से भी बढ़कर हैं। तरुण सागर इन दिनों राजस्थान के सीकर में चातुर्मास कर रहे हैं। 30 सितम्बर को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए तरुण सागर ने कहा कि रावण ने सीता जी के अपहरण का अपराध किया था, लेकिन अपहरण के बाद कोई बदसलूकी नहीं की। लेकिन हम देख रहे हैं कि आज के बाबा महिलाओं के साथ बलात्कार जैसे घिनौने कृत्य कर रहे हैं। आज के बाबा रावण से भी बढ़कर अपराधी हैं। समाज को ऐसे बाबाओं से सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को धर्म का अनुसरण तो करना चाहिए, लेकिन अंध भक्त होकर नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी साधु-संत का जीवन तपस्या का होता है। यदि कोई साधु संत ऐशो आराम की जिन्दगी जीता है तो फिर वह धर्म के अनुरूप आचरण नहीं करता। 
एस.पी.मित्तल) (30-09-17)
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Thursday, 28 September 2017

आखिर सुरेन्द्र सिंह शेखावत भाजपा में शामिल हुए। इधर पायलट अजमेर आए, उधर जयपुर में प्रदेशाध्यक्ष परनामी ने निलम्बन रद्द किया। ============

#3083
आखिर सुरेन्द्र सिंह शेखावत भाजपा में शामिल हुए। इधर पायलट अजमेर आए, उधर जयपुर में प्रदेशाध्यक्ष परनामी ने निलम्बन रद्द किया।
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28 सितम्बर को जयपुर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने अजमेर के बागी नेता सुरेन्द्र सिंह शेखावत को भाजपा में फिर से शामिल कर लिया। परनामी ने उम्मीद जताई कि शेखावत अब पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अजमेर में भाजपा को मजबूत  करने का काम करेंगे। माना जा रहा है कि अजमेर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर शेखावत को भाजपा में शामिल करवाने में अजमेर दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक और प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल की सक्रिय भूमिका रही है। शेखावत को भाजपा में शामिल करवाने में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर का भी दबाव रहा है। हालाकि शेखावत के भाजपा में शामिल होने से उत्तर क्षेत्र के विधायक व स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी खुश नहीं होंगे। क्योंकि शेखावत पूर्व में भी उत्तर क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी जता चुके है। देवनानी और शेखावत की लड़ाई जग जाहिर रही है। शेखावत के भाजपा में आने से अब श्रीमती भदेल को भी राजनैतिक दृष्टि से मजबूती मिलेगी।
बागी उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था मेयर का चुनाव :
मालूम हो कि शेखावत ने वर्ष 2015 में भाजपा के बागी उम्मीदवार के तौर पर अजमेर नगर निगम में मेयर का चुनाव लड़ा था। तब शेखावत ने कांग्रेस के पार्षदों की मदद से 60 में से 30 मत प्राप्त कर भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार धर्मेन्द्र गहलोत की बराबरी कर ली लेकिन बाद में जब लॉटरी की पर्ची से परिणाम घोषित किया गया तो गहलोत की जीत हो गई। हालाकि इस परिणाम को शेखावत ने अदालत में चुनौती भी दी लेकिन अदालत का फैसला भी गहलोत के पक्ष में रहा। बगावत करने की वजह से ही शेखावत को छह वर्ष के लिए पार्टी से निलम्बित कर दिया गया।
चम्पालाल महाराज ने कराया समझौता :
मेयर धर्मेन्द्र गहलोत और शेखावत के बीच पिछले दिनों राजगढ़ स्थित मसाणियां भैरव धाम के उपासक चम्पालाल महाराज ने समझौता करवाया था। भैरव धाम पर गहलोत  और शेखावत ने महाराज के सामने यह संकल्प लिया कि वह भविष्य में कभी भी झगड़ा नहीं करेंगे। इस सुलह के बाद ही शेखावत का भाजपा में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया था।
पायलट को झटका :
शेखावत के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट को भी झटका लगा है। मेयर के चुनाव में भाजपा में बगावत करने के पीछे पायलट की ही भूमिका थी। यदि कांग्रेस के दो-तीन पार्षद क्रॉस वोटिंग न हीं करते तो आज कांग्रेस की मदद से ही शेखावत अजमेर के मेयर होते। भाजपा ने 28 सितम्बर को शेखावत को तब भाजपा में शामिल किया जब पायलट अजमेर शहर में साइकिल रैली कर रहे थे।
एस.पी.मित्तल) (28-09-17)
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साइकिल पर सवार होकर पायलट ने अजमेर में जीत की संभावनाओं को तलाशा। उपचुनाव के मद्देनजर कांग्रेसियों में उत्साह भरा। =======

#3079
साइकिल पर सवार होकर पायलट ने अजमेर में जीत की संभावनाओं को तलाशा। उपचुनाव के मद्देनजर कांग्रेसियों में उत्साह भरा।
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28 सितम्बर को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने अजमेर में साइकिल पर सवार होकर लोकसभा के उपचुनाव में अपनी जीत की संभावनाओं को तलाशा। हालांकि कांग्रेस की ओर से 28 सितम्बर को प्रदेश भर में महंगाई और पेट्रोल की मूल्य वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन किया गया। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पायलट ने अजमेर में ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसके लिए साइकिल रैली निकाली गई। पायलट ने स्वयं साइकिल चलाई और यह संदेश देने का प्रयास किया कि महंगाई और पेट्रोल के दाम बढ़ने से लोग अब साइकिल चलाने को मजबूर हंै। लेकिन इस साइकिल रैली के पीछे पायलट की उपचुनाव की रणनीति भी रही। कांग्रेस का आम कार्यकर्ता चाहता है कि लोकसभा के उपचुनाव में अजमेर से पायलट ही उम्मीदवार हों। हालांकि पायलट ने अभी तक भी चुनाव लड़ने से इंकार नहीं किया है। लेकिन पायलट पहले अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होना चाहते हैं। यही वजह रही कि 28 सितम्बर को साइकिल पर सवार होकर पायलट ने यह जाना कि अजमेर के लोगों में उनके प्रति कितनी हमदर्दी है। रणनीति के अनुसार जिले भर से कार्यकर्ताओं को अजमेर बुलाया गया। ताकि पायलट की हौंसला अफजाई हो सके। देहात कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह राठौड़ और शहर अध्यक्ष विजय जैन ने इस बात के भरपूर प्रयास किए कि लोगों की अधिक से अधिक उपस्थिति रखा जाए।
उत्तर और दक्षिण के क्षेत्रों में हुई रैलीः
चुनाव गणित के हिसाब से ही पायलट की साइकिल रैली अजमेर शहर के दक्षिण और उत्तर विधानसभा क्षेत्रों में की गई। रैली की शुरुआत दक्षिण क्षेत्र के राजा साइकिल चैराहे से हुई और समापन उत्तर क्षेत्र में आने वाले गांधी भवन चैराहे पर हुआ। यहां पायलट ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केन्द्र सरकार की नीतियों की आलोचना भी की। पायलट ने राज्य की भाजपा सरकार को भी कोसा।
जीत कांग्रेस की होगी-पायलटः
रैली के दौरान मीडिया से संवाद करते हुए पायलट ने कहा कि अजमेर से कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता चुनाव लड़े, लेकिन जीत कांग्रेस की ही होगी। यदि हाईकमान कहेगा तो मैं स्वयं भी चुनाव लड़ूंगा। मैं पहले भी दो बार अजमेर से चुनाव लड़ चुका हंू। अजमेर के आम लोगों से मेरा सीधा संबंध है। मैंने सांसद और फिर केन्द्रीय मंत्री रहते हुए अजमेर का जो विकास करवाया, उसे पिछले साढ़े तीन वर्ष में रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह पता है कि कांग्रेस का कार्यकर्ता मेरी उम्मीदवारी की घोषणा का इंतजार कर रहा है। आज जिस तरह कार्यकर्ताओं ने साइकिल रैली में उत्साह दिखाया है उससे यह तय हो गया है कि न केवल उपचुनाव में बल्कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की जीत होगी।
रैली में साइकिल रिक्शे का उपयोगः
कांगे्रस के जो बुजुर्ग और अस्वस्थ नेता साइकिल नहीं चला सके, उन्हें साइकिल रिक्शाओं का उपयोग करना पड़ा। हालांकि पायलट के साथ देहात और शहर कमेटी के अध्यक्षों ने साइकिल चलाई, लेकिन वहीं पूर्व सांसद प्रभा ठाकुर, पूर्व विधायक रघु शर्मा, श्रीमती नसीम अख्तर, डाॅ. श्रीगोपाल बाहेती, ललित भाटी आदि ने साइकिल रिक्शे का उपयोग किया। दक्षिण क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में प्रबल दावेदार हेमंत भाटी के नेतृत्व में युवाओं ने बड़ी संख्या में साइकिल चलाई।
डूडी भी साथ रहेः
विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी भी पायलट की साइकिल रैली में साथ रहे। डूडी ने भी कहा कि राज्य की भाजपा सरकार की वजह से आम लोग परेशान है। अब तो केन्द्र सरकार की नीतियों पर भाजपा के नेता भी खिलाफ बोलने लगे हैं।
एस.पी.मित्तल) (28-09-17)
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कश्मीर में रमजान अहमद और म्मांयार में हिन्दुओं की सामूहिक हत्याओं पर अब रोहिंग्या मुसलमानों के हिमायती चुप क्यों हैं? =======

#3080
कश्मीर में रमजान अहमद और म्मांयार में हिन्दुओं की सामूहिक हत्याओं पर अब रोहिंग्या मुसलमानों के हिमायती चुप क्यों हैं?
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28 सितम्बर को कश्मीर घाटी के बांदीपोरा में बीएसएफ के जवान रमजान अहमद को सुपुर्दे-ए- खाक कर दिया गया। रमजान अहमद का पूरा परिवार गमगीन और महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल था। आतंकवादियों ने रमजान अहमद को इसलिए मारा क्योंकि वह बीएसएफ में नौकरी कर रहा था। आतंकवादी नहीं चाहते कि कश्मीर का कोई युवक देश के सुरक्षा बलों में काम करें, इसलिए पहले लेफ्टिनेंट कर्नल उमर फैयाज और कश्मीर पुलिस के डीएसपी पंडित अयूब को भी मौत के घाट उतार दिया गया। पिछले दो दिनों में मीडिया में यह बात भी सामने आई है कि म्मांयार में हिन्दुओं की सामूहिक हत्याएं की गई। हिन्दुओं की हत्याएं उन इलाकों में हुई जहां रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या ज्यादा थी। सवाल उठता है कि देश में जो लोग रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने की हिमायत कर रहे हैं वे रमजान अहमद और हिन्दुओं की समूहिक हत्याओं पर चुप क्यों है? क्या रमजान अहमद और म्मांयार में रहने वाले हिन्दू इंसान नहीं हैं? जबकि न तो रमजान अहमद और न म्मांयार के हिन्दुओं ने कोई अपराध किया। म्मांयार में सिर्फ दहशत फैलाने के लिए हिन्दुओं को मौत के घाट उतारा गया तो रमजान अहमद को सुरक्षा बल में काम करने की सजा दी गई। क्या किसी कश्मीरी को इसलिए मार डाला जाएगा कि वह सुरक्षा बलों में काम करता है? रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले प्रशांत भूषण की भी बोलती बंद है। रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में देश भर में मौन जुलूस निकाले गए। लेकिन रमजान अहमद के हत्या के विरोध में एक मोमबत्ती भी नहीं जलाई जा रही है।
एस.पी.मित्तल) (28-09-17)
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आखिर पिता यशवंत सिन्हा को जवाब देने के लिए बेटे जयंत सिन्हा को आना ही पड़ा। बेटे के हमले के बाद नरम पड़े यशवंत।

#3081
आखिर पिता यशवंत सिन्हा को जवाब देने के लिए बेटे जयंत सिन्हा को आना ही पड़ा। बेटे के हमले के बाद नरम पड़े यशवंत।
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मैंने पहले भी लिखा है कि मैं न तो भविष्यवेत्ता हंू और न ही दिल्ली में बैठ कर हाई लेवल की पत्रकारिता करता हंू। मैं तो राजस्थान की धार्मिक नगरी अजमेर में बैठकर रोजाना अपने तीन-चार ब्लाॅग लिखता हंू। 27 सितम्बर को जब दिन भर देश के प्रमुख हिन्दी और अंग्रेजी न्यूज चैनलों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक आर्टिकल को लेकर चर्चा हो रही थी, तब मैंने अकेले ने देश के सामने यशवंत सिन्हा के बेटे और केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का मुद्दा रखा। मैंने साफ-साफ कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि यशवंत सिन्हा आर्थिक नीतियों पर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार की आलोचना करें और उनका बेटा जयंत सिन्हा उसी सरकार में मंत्री बने रहें। हालांकि मेरे 27 सितम्बर के ब्लाॅग पर कुछ लोगों ने प्रतिकूल टिप्पणी भी की, लेकिन 28 सितम्बर को मुझे इस बात का संतोष रहा कि मैंने अजमेर में बैठकर जयंत सिन्हा का जो मुद्दा उठाया, उसी के अनुरूप दिल्ली में राष्ट्रीय राजनीति में विचार हुआ। 28 सितम्बर को जयंत सिन्हा का एक आर्टिकल टाइम्स आॅफ इंडिया में प्रकाशित हुआ है। इस आर्टिकल में जयंत सिन्हा ने उन सभी सवालों का जवाब दिया है जो उनके पिता यशवंत सिन्हा ने अपने आर्टिकल में उठाए थे। जयंत ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी गेम चेंजर साबित होंगे। सरकार की वर्तमान आर्थिक नीति नए भारत के निर्माण के लिए है। छह माह में देश की अर्थव्यवस्था का आंकलन किया जाना उचित नहीं है। आने वाले दिनों में नोटबंदी और जीएसटी के सुखद परिणाम सामने आएंगें।
यशवंत सिन्हा नरम पड़ेः
जयंत सिन्हा ने जिस अंदाज में अपने पिता को जवाब दिया, उसके बाद यशवंत सिन्हा नरम पड़ गए। 28 सितम्बर को टाइम्स आॅफ इंडिया में अपने बेटे का जवाब पढ़ने के बाद यशवंत सिन्हा ने एएनआई न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर को बुलाकर सरकार के प्रति अपना नरम रुख रखा। यशवंत सिन्हा ने कहा कि मैंने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की योग्यता पर कोई सवाल नहीं उठाया। मेरा तो इतना ही कहना था कि जेटली के पास वित्त मंत्रालय के अलावा भी दूसरे मंत्रालयों का काम रहता है, इसलिए वह अपने मंत्रालय को पूरा समय नहीं दे पाते। जहां तक जीएसटी के लागू करने का सवाल है तो में स्वयं भी इसका पक्षधर हंू, लेकिन मैं चाहता था कि जीएसटी को एक अप्रैल 2018 से लागू किया जाता। चूंकि सरकार ने गत वर्ष नवम्बर में नोटबंदी की थी, इसलिए एक जुलाई से जीएसटी को लागू नहीं किया जाना चाहिए था। चूंकि जीएसटी को जल्दबाजी में लागू किया गया है, इसलिए व्यापारी वर्ग को परेशानी हो रही है। अर्थव्यवस्था नोटबंदी के झटके से उभर भी नहीं पाई थी कि सरकार ने जीएसटी लागू का एक और झटका दे दिया।
एस.पी.मित्तल) (28-09-17)
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Wednesday, 27 September 2017

लगातार दूसरे दिन भी सरकारी कार्यशाला में नहीं आईं जिला प्रमुख। अजमेर की जिला परिषद के सदस्यों की भी रुचि नहीं।

#3078
लगातार दूसरे दिन भी सरकारी कार्यशाला में नहीं आईं जिला प्रमुख। अजमेर की जिला परिषद के सदस्यों की भी रुचि नहीं।
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सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए जिला परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में लगातार दूसरे दिन 27 सितम्बर को भी जिला प्रमुख सुश्री वंदना नोगिया नहीं आईं। जिला प्रमुख की अनदेखी के चलते ही परिषद के सदस्यों ने भी कोई रुचि नहीं दिखाई। जबकि सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी के लिए यह कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण थी। इस कार्यशाला में विकास योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ उसकी क्रियान्विति और पात्र व्यक्तियों के बारे में भी जानकारी दी गई। पंचायती राज विभाग ने इस दो दिवसीय कार्यशाला पर लाखों रुपया खर्च भी किया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के जिन जानप्रतिनिधियों को इसका लाभ उठाना था वे ही नहीं आए। ऐसे में दोपहर के भोजन के पैकेट का लुत्फ जिला परिषद के कर्मचारियों ने ही उठाया। अजमेर में जिला परिषद के 32 सदस्य हैं। इनमें से 22 सत्तारुढ़ भाजपा के हैं। कम से कम भाजपा की जिला प्रमुख और सदस्यों को तो इस कार्यशाला में उपस्थिति दर्ज करवानी ही चाहिए थी।
नाराज है जिला प्रमुखः
जानकार सूत्रों के अनुसार जिला परिषद के अधिकारियों से जिला प्रमुख वंदना नोगिया नाराज हैं। सूत्रों की माने तो कार्यशाला की वजह से ही नोगिया 26 और 27 सितम्बर को जिला परिषद ही नहीं गई। नोगिया ने स्वीकार किया कि कार्यशाला की अध्यक्षता उन्हें ही करनी थी, लेकिन अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहने की वजह से कार्यशाला में भाग नहीं ले सकीं। सवाल उठता है कि जिस कार्यशाला का आयोजन सरकार की ओर से ही किया गया है, उस कार्यशाला में भाग लनेे से बड़ा और क्या कार्यक्रम हो सकता है? जिला प्रमुख का ऐसा व्यवहार तब सामने आ रहा है जब कुछ ही दिनों में अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। पंचायती राज व्यवस्था में जिला प्रमुख का पद पूरे जिले में सबसे बड़ा है। ऐसे में उपचुनाव में भी भाजपा के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला प्रमुख की ही होगी। देखना है कि छोटी-छोटी बातों पर नाराज होने वाली जिला प्रमुख नोगिया लोकसभा उपचुनाव की बड़ी चुनौती का सामना कैसे करती हैं? गत वर्ष सरकारी वाहन पर लाल बत्ती को लेकर हुआ विवाद भी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहा।
एस.पी.मित्तल) (27-09-17)
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मोदी सरकार के कार्यकाल में तीसरी बार सर्जिकल स्ट्राइक कितने मायने रखती है। म्मांयार में फिर किया आतंकी कैम्पों पर हमला।

#3077
मोदी सरकार के कार्यकाल में तीसरी बार सर्जिकल स्ट्राइक कितने मायने रखती है। म्मांयार में फिर किया आतंकी कैम्पों पर हमला।
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27 सितम्बर को तड़के भारतीय सेना ने एक फिर म्मांयार की सीमा में घुसकर आतंकी कैम्पों को नष्ट किया। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली तीन वर्ष पूरानी सरकार में यह तीसरा अवसर है जब हमारी सेना ने किसी दूसरे देश की सीमा में घुसकर हमला किया है। दो वर्ष पहले म्मांयार में तथा फिर पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैम्पों पर हमला बोला था। 27 सितम्बर के हमले में नागा उग्रवादी निशाने पर रहे। जानकार सूत्रों के अनुसार म्मांयार में 15 किलो मीटर तक घुसकर सेना ने लांग्खू गांव के निकट नागा उग्रवादियों को भारी नुकसान पहुंचा। इसमें हमारा कोई नुकसान नहीं हुआ। म्मांयार में यह कार्यवाही तब क गई जब म्मांयार के रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के लिए भारत में वाद-विवाद हो रहा है। मोदी सरकार ने सुप्रमी कोर्ट में हलफनामा देने रोहिंग्या मुसलमानों के एक गुट के संबंध पाक के आतंकवादियों से होना बताए हैं। इसलिए रोहिंग्या मुसलमानों को शरण नहीं दी जा रही। जहां एक ओर मोदी सरकार ने रोहिंग्याओं को शरण देने से इंकार कर दिया, वहीं 27 सितम्बर को म्मांयार में सर्जिकल स्ट्राइक कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि विदेशी धरती पर आतंकियों ने कोई साजिश की तो ऐसे आतंकियों को उसी देश सबक सिखाया जाएगा।
एस.पी.मित्तल) (27-09-17)
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तो यशवंत सिन्हा मोदी मंत्रिमंडल में शामिल अपने बेटे जयंत सिन्हा को क्यों नहीं समझाते? अखबार में लेख लिखने से कुछ नहीं होगा।

#3076
तो यशवंत सिन्हा मोदी मंत्रिमंडल में शामिल अपने बेटे जयंत सिन्हा को क्यों नहीं समझाते? अखबार में लेख लिखने से कुछ नहीं होगा।
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27 सितम्बर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का एक लेख प्रकाशित हुआ है। इस लेख में जहां नोटबंदी की आलोचना की गई है, वहीं जीएसटी लागू करने को अर्थव्यवस्था में गिरावट का कारण बताया गया है। सब जानते हैं कि यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हैं। यदि यशवंत सिन्हा को आम व्यक्ति की परेशानियों की इतनी ही चिंता है तो उन्हें सबसे पहले अपने बेटे से मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाना चाहिए। यदि जयंत सिन्हा नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दे पर मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते हैं तो फिर नरेन्द्र मोदी पर भी दबाव बनेगा। यशवंत सिन्हा के किसी अखबार में लेख लिखने के बाद टीवी चैनलों पर कितनी भी बहस हो जाए उसका कोई असर नहीं होगा। यशवंत सिन्हा माने या नहीं, लेकिन आज उनका बेटा जयंत ही उनकी बात से सहमत नहीं है, तो फिर लेख लिखने का क्या फायदा? ऐसा नहीं हो सकता कि जयंत सिन्हा मंत्री की हैसियत से सरकार की सुविधाओं का उपभोग भी करते रहे और यशवंत सिन्हा अपने बेटे की सरकार की आलोचना करते रहे। यशवंत सिन्हा आज भी भाजपा में बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि जब उन्हें सरकार की नीतियों पर ऐतराज है तो फिर भाजपा से इस्तीफा क्यों नहीं देते? यह माना कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से व्यापारी वर्ग परेशान है, बाजार में भीषण मंदी का दौर है। यशवंत सिन्हा के मन में परेशान लोगों की इतनी ही हमदर्दी है तो उन्हें सबसे पहले अपने बेटे से इस्तीफा दिलवाना चाहिए।
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अजमेर में भक्तों ने भजन गायक नरेन्द्र चंचल को माता के स्वरूप में माना। यह है भारत की सनातन संस्कृति।

#3075

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26 सितम्बर की रात को देश के सुविख्यात भजन गायक नरेन्द्र चंचल ने अजमेर के आजाद पार्क में भजनों की शानदार प्रस्तुति दी। सब जानते हैं कि चंचल न तो कोई संत है और न ही धर्मगुरु। लेकिन इसके बाद भी अजमेर के भक्तों ने चंचल को नवरात्र में माता का स्वरूप माना। लोगों ने चंचल को माता की चुनरी ओढाई और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। चंचल भी इस आदर और सम्मान  से अभीभूत नजर आए। यही वजह रही जो चुनरी उन्हें ओढाई गई उन्हें चंचल ने माता के प्रसाद के तौर पर भक्तों को बांट दिया। जिन भक्तों को चंचल द्वारा पहनाई गई चुनरी मिली वह स्वयं को भाग्यशाली समझ रहे थे। भक्तों को ऐसा लगा जैसे स्वयं माता रानी ने चुनरी भेजी है। जिन लोगों ने चंचल की चुनरी ओढी वे स्वयं को गौरवांवित समझ रहे थे। मैं यह सब बातें इसलिए लिख रहा हंू ताकि युवा पीढ़ी को हमारी सनातन संस्कृति का अहसास हो। जब हम एक भजन गायक को माता के स्वरूप में देख सकते हैं तो फिर हमें उन सब बुराईयों से बचना चाहिए, जिनकी वजह से हम अनेक परेशानियां झेल रहे हैं। नरेन्द्र चंचल पर माता रानी की कृपा ही कहा जाएगा कि वह पिछले 37 वर्षों से लगातार माता के भजन गा रहे हैं। जब सिर्फ भजन गाने से ही चंचल माता के स्वरूप में देखे जाते हैं तो फिर माता रानी की शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता हैं। हमारी सनातन संस्कृति में माता के नौ प्रमुख स्वरूप माने गए हैं। इसलिए नवरात्र का उत्सव 9 दिनों तक मनाया जाता है। दसवें दिन भले ही रावण को जलाया जाता हो, लेकिन असली ताकत नवरात्र में मात की पूजा अर्चना से ही मिलती है।
मेहंदी खोला मंदिर का आभारः
नवरात्र के दिनों में नरेन्द्र चंचल जैसे महंगे भजन गायक को अजमेर में बुलाने के लिए शास्त्री नगर स्थित श्राइन बोर्ड मेहंदी खोला का आभार प्रकट किया जाना चाहिए। बोर्ड के अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा, पंकज टांक, विकास टांक, योगेन्द्र भाटी, पार्षद ज्ञान सारस्वत, संदीप भार्गव आदि ने पूरे आयोजन के लिए कड़ी मेहनत की। आजाद पार्क के विशाल मैदान में आकर्षक मंदिर बना कर माता रानी की प्रतिमा स्थापित की और चंचल की प्रसिद्धि के अनुरूप स्टेज बनाया। पूरा आजाद पार्क खचाखच भरा था। हालांकि चंचल स्टेज पर रात 11 बजे आए। लेकिन आते ही भजनों की झड़ी लगा दी। बिना रुके एक के बाद एक लोकप्रिय भजन गाए तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इससे पहले हरियाणा के भजन गायक नरेश सेन और अजमेर के विमल गर्ग ने भी भजनों की प्रस्तुति दी। शास्त्री नगर में ही मेहंदी खोला का भव्य मंदिर बना हुआ है।
एस.पी.मित्तल) (27-09-17)
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135 करोड़ की येाजना के शिलान्यास पर भी ब्यावर में भाजपा की फूट चैराहे पर। विधायक शंकर सिंह रावत की वजह से कोई मंत्री भी नहीं आया।

#3074
135 करोड़ की येाजना के शिलान्यास पर भी ब्यावर में भाजपा की फूट चैराहे पर। विधायक शंकर सिंह रावत की वजह से कोई मंत्री भी नहीं आया।
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आमतौर पर लाख दो लाख की योजना के शिलान्यास या उद्घाटन के मौके पर सत्तारुढ़ राजनीतिक दल के नेता श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, लेकिन 26 सितम्बर को अजमेर जिले के ब्यावर उपखंड में जब 135 करोड़ की सीवरेज योजना का शिलान्यास समारोह हुआ तो क्षेत्रीय भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ही सर्वेसर्वा बने रहे। विधायक ने अपनी समर्थक नगर परिषद के सभापति श्रीमती बबीता चैहान को बुलाकर शिलान्यास समारोह सम्पन्न करवा लिया। संगठन पदाधिकारी के नाम पर मंडल अध्यक्ष जय किशन बल्दुआ और दिनेश कटारा ही उपस्थित रहे। सवाल उठता है कि जब 135 करोड़ की सीवरेज योजना का शिलान्यास हो रहा था तो राज्य की भाजपा सरकार का कोई मंत्री क्यों नहीं आया ? हालांकि इसमें केन्द्र सरकार अमृत योजना में धनराशि देगी, लेकिन राज्य सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इतनी बड़ी योजना के शिलान्यास के अवसर पर मुख्यमंत्री नहीं तो कम से कम नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी को तो आना ही चाहिए था। लेकिन अजमेर जिले के मंत्री वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल तक उपस्थित नहीं रहीं। भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम और सुरेश रावत संसदीय सचिव भी हैं, लेकिन इन्हें भी आमंत्रित नहीं किया गया। इतना ही नहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष बीपी. सारस्वत भी अनुपस्थित रहे। सारस्वत तो हर विधायक के कार्यक्रम में उपस्थित रहते हैं। यदि सारस्वत को सम्मान पूर्वक बुलाया जाता तो वे जरूर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते। भाजपा के अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी भी समारोह में उपस्थित नहीं थे।
विधायक रावत का रवैयाः
असल में भाजपा के विधायक रावत के रवैए की वजह से मंत्री और संगठन के पदाधिकारी ब्यावर आने से कतराते हैं। रावत ब्यावर से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। लेकिन फिर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पहली बार विधायक बने पुष्कर के सुरेश रावत को संसदीय सचिव बना दिया। इससे भी शंकर सिंह रावत असंतुष्ट बताए जाते हैं। इसलिए ब्यावर में जो भी सरकारी कार्य होता है उसमें विधायक ही सर्वेसर्वा होते हैं। अपने रवैए की वजह से ही रावत ने दोनों मंडल अध्यक्ष पद पर अपने चेहतों को बैठा दिया है। ऐसे में जिला संगठन अथवा अग्रिम संगठनों की भी परवाह विधायक को नहीं है। भले ही ऐसे समारोहों में आम लोग व कार्यकर्ता न आए। हाल ही में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी के समारोह में पूर्व विधायक देवीशंकर भूतड़ा ने जो कार्यक्रम किए उसमें ज्यादा भीड़ देखी गई। लेकिन विधायक रावत भूतड़ा को भाजपा का बागी बता कर मेहनत पर पानी फेर देते हैं। भले ही भूतड़ा ने पिछला चुनाव बागी उम्मीदवार के तौर पर लड़ा हो, लेकिन आज भी भूतड़ा और उनके हजारों समर्थक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांत पर चलते हैं। विधायक रावत को इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि नगर परिषद में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। उनके समर्थकों को कहना है कि रावत तो तीसरी बार भी रावत मतों के दम पर जीतेंगे। चूंकि ब्यावर में ग्रामीण क्षेत्रों में रावत मतदाता अधिक हैं, इसलिए चुनाव की रणनीति में शंकर सिंह का पलड़ा भारी रहता है। इसमें कोई दो राय नहीं अपने विधानसभा क्षेत्र के रावत मतदाताओं पर विधायक की पकड़ मजबूत है। इसलिए वे ब्यावर के शहरी मतदाताओं की परेशानियों को दूर करने में कोई रुचि नहीं रखते हैं। सीवरेज का फायदा भी सिर्फ ब्यावर शहर के लोगों को होगा।
एस.पी.मित्तल) (27-09-17)
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आज तक का आॅपरेशन पद्मावती राजस्थान में राजपूत समाज की एकता को कमजोर करेगा।

#3070
आज तक का आॅपरेशन पद्मावती राजस्थान में राजपूत समाज की एकता को कमजोर करेगा।
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26 सितम्बर को टीवी न्यूज चैनल आजतक ने आॅपरेशन पद्मावती का जो प्रसारण किया, उससे राजस्थान में राजपूत समाज की एकता प्रभावित होगी। पहले फिल्म पद्मावती का विरोध और फिर आनंदपाल के एनकाउंटर के मामले में राजपूत समाज की एकता देखने को मिली थी। फिल्म पद्मावती के मामले में जहां निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली को लिखित में समझौता करना पड़ा, वहीं आनंदपाल के मामले में राज्य सरकार भी नरम दिखी। लेकिन राजपूत समाज की इस एकता को आॅपरेशन पद्मावती से धक्का लगेगा। इस आॅपरेशन में करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी और अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के बीच तो दीवार खींची है साथ ही यह भी प्रतीत होता है कि डेढ़ करोड़ के लालच में समाज के सम्मान का सौदा किया गया। हालांकि आज तक के स्टिंग में पैसों का कोई लेनदेन नहीं हुआ, लेकिन करणी सेना के महाराष्ट्र के प्रभारी उम्मेद सिंह ने साफ-साफ कहा कि यदि डेढ़ करोड़ की राशि दे दी जाए तो कोई भी निर्माता किसी भी प्रकार की फिल्म बना सकता है। यह स्टिंग मुगल शासक औरंगजेब के जीवन पर बनने वाली तथाकथित फिल्म को लेकर हुआ था। गंभीर बात यह है कि इस स्टिंग में करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने भी संवाद किया और औरंगजेब पर फिल्म बनाने से पहले मुम्बई में उम्मेद सिंह से बात करने को कहा। सुखदेव सिंह ने कहा कि उम्मेद सिंह जो बात करेगा उस पर राजस्थान में करणी सेना सहमत होगी। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का भी कोई विरोध न हो, इसके लिए भी दोनों राजपूत नेताओं ने बात की। राजस्थान में राजपूत समाज का गौरवमयी इतिहास रहा है। अपनी आन बान शान के लिए समाज के लोगों ने बड़ी कुर्बानी दी है। चित्तौड़ के महाराणा प्रताप की वीरता इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखी गई है। ऐसे में यदि समाज का कोई प्रतिनिधि जन भावनाओं के विरुद्ध कोई काम करता है तो इससे समाज की एकता प्रभावित होगी ही। अच्छा हो जिन लोगों के नाम आॅपरेशन पद्मावती में आए हैं वे अपने पक्ष को समाज के समक्ष रखें ताकि एकता बनी रहे।
एस.पी.मित्तल) (26-09-17)
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Tuesday, 19 September 2017

#3043
स्मार्ट सिटी में बातें ज्यादा काम कम हो रहा है। स्वायत्त शासन मंत्री कृपालनी की उपस्थिति में देवनानी और अजमेर के अन्य जनप्रतिनिधियों ने जताया असंतोष।
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19 सितम्बर को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में राजस्थान के स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने अजमेर जिले की स्थानीय निकाय संस्थाओं के प्रमुखों, विधायकों तथा भाजपा संगठन प्रमुख, प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। अजमेर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर आयोजित इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन निकायों के प्रमुखों, विधायकों और भाजपा के पदाधिकारियों का कहना रहा कि अफसरशाही की वजह से निकायों का काम संतोषजनक नहीं है। 
स्मार्ट सिटी में काम कम बाते ज्यादा-देवनानी:
बैठक में अजमरे उत्तर क्षेत्र के भाजपा विधायक और प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट कहा कि अजमेर को स्मार्ट सिटी बानने की योजना में काम कम और बातें ज्यादा हो रही हैं। यदि कार्यों की गति इसी प्रकार रही तो अजमेर को स्मार्ट बनाने में वर्षों लग जाएंगे। उन्होंने मंत्री कृपलानी को सुझाव दिया कि वे निर्माण कार्यों की स्वयं निगरानी करें ताकि कामों का गति मिल सके। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना में लगे अधिकारी और इंजीनियर बातें बहुत करते हैं, लेकिन मौके पर काम बहुत कम होता है।
स्ट्रीट लाइट पर नाराजगी:
जनप्रतिनिधियों ने सबसे ज्यादा गुस्सा स्ट्रीट लाइट का संचालन करने वाली ईएसएल कंपनी पर उतारा। अजमेर नगर निगम के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, पुष्कर के पालिकाध्यक्ष कमल पाठक आदि का कहना रहा कि कंपनी के कर्मचारी जन शिकायतों का समाधान नहीं करते हैं। चूंकि कंपनी पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई नियंत्रण नहीं है, इसलिए कर्मचारी कोई परवाह नहीं करते। संवाद में यह बात भी सामने आई कि अजमेर जिले में स्ट्रीट लाइट का ठेका इस कंपनी को दिलवाने में स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव मंजीत सिंह की भूमिका रही है। इसलिए कंपनी के कर्मचारी किसी से भी नहीं डरते हैंं। स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल, विधायक भागीरथ चौधरी आदि ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को रखा। संवाद में देहात भाजपा के अध्यक्ष प्रो.बी.पी.सारसस्वत और शहर अध्यक्ष अरविंद यादव ने अपने विचार रखे। यादव ने कहा कि निकाय अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं है। यादव का यह भी कहना रहा कि बैठक में एजेंडे के विपरित संवाद हो रहा है। अधिकारी वर्ग अपनी मनमर्जी कर रहा है। इस पर मंत्री कृपलानी ने यादव को इशारों में समझाया कि वे उनसे अलग से बात कर लें। 
दो माह से लगातार जल रही है लाइट-सरस्वत:
बैठक में देहात भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रो.बी.पी.सारस्वत ने कहा कि सिविल लाइन स्थित उनके आवास के बाहर स्ट्रीट लाइट पिछले दो माह से लगातार जल रही हैं। दिन में भी लाइट जलने की शिकायत उन्होंने नगर निगम से लेकर सरकार के पोर्टल तक पर दर्ज कराई, लेकिन आज तक भी सुधार नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जब मेरे घर के बाहर ही स्ट्रीट लाइट का ये हाल है तो फिर जिले में हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सारस्वत की बात सुनते ही मंत्री कृपलानी ने तत्काल मौके पर भेज कर सच्चाई पता लगाया। 
नालों को कवर करें-भदेल:
श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि उनके दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में खुले नालों को कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की योजना ऐसी बनाई जाए जिसमें उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को भी सुविधाएं मिल सके। 
नहीं आए तीन विधायक :
बैठक में केकड़ी के भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम, पुष्कर के सुरेश सिंह रावत तथा मसूदा की श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा नहीं आईं। इन तीनों विधायकों की गैर मौजूदगी संवाद में चर्चा का विषय बनी रही। 
हर समस्या का समाधान होगा-कृपालनी :
बैठक में श्रीचंद कृपलानी ने अजमेर के जनप्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहती हैं कि अजमेर का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो, इसलिए अजमेर को स्मार्ट सिटी का तोहफा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जन समस्याओं का कभी अंत नहीं होता। लेकिन हम सबकी यह जिम्मेदारी है कि सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के सामने लाया जाए। अब जब अजमेर में उपचुनाव होने हैं तो फिर सरकार की उपलब्धियां भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने विधायकों और स्थानीय निकायों के प्रमुखों से कहा कि वे अपनी समस्याएं लिखित में उन्हें दे दें वे सबका का समाधान करवाएंगे। 
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3042
नोबल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने भी माना की रोहिंग्या मुसलमानों में आतंकी भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा म्मांयार।
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19 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र संघ की सभा में म्मांयार की स्टेट काउंसलर और नोबल शांति पुरस्कार आंग सांग सू ची की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि म्मांयार अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश के आराकान इलाके में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के बीच आतंकी भी हैं जो हमारे देश का माहौल बिगड़ रहे हैं। सरकार की ओर से हाल ही में ऐसे तत्वों के विरुद्ध जो कार्यवाही की गई है वह उचित है। उन्होंने माना कि मानवाधिकार का उल्लंघन ठीक नहीं है, लेकिन रोहिंग्या मुसलमानों का एक वर्ग पुलिस बलों पर हमले और देश विरोधी काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो शरणार्थी लौटना चाहते हैं वे जांच के बाद म्मांयार आ सकते हैं। सू ची के ताजा बयान से भारत के रुख को भी मदद मिली है। एक दिन पहले ही केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर रोहिंग्या मुसलमानों की उपस्थिति को गैर कानूनी करार दिया था। केन्द्र सरकार का कहना रहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के एक वर्ग के संबंध पाकिस्तान के आतंकवादी गुटों से है, इसलिए इन्हें भारत में शरण नहीं दी जा सकती है। अब जब नोबल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सख्त टिप्पणी की है तब भारत के रुख को समर्थन मिला है। मालूम हो कि म्मांयार में लोकतंत्र की बहाली के लिए सू ची ने लम्बा संघर्ष किया। उन्हें कई वर्षों तक जेल में भी रहना पड़ा। लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष पर ही उन्हें शांति का नोबल पुरस्कार मिला। ऐसे में रोहिंग्या मुसलमानों पर सू ची का दिया गया बयान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में महत्व रखता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर पूरी दुनिया में आवाज उठ रही है।
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3041
सीएम वसुंधरा राजे ने संघ प्रमुख भागवत को दी सरकार की रिपोर्ट। नासाज तबीयत के बारे में ली जानकारी। 
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19 सितम्बर को जयपुर के भारती भवन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत से राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने मुलाकात की। भागवत तीन दिन के जयपुर प्रवास पर हंै। 19 सितम्बर को प्रवास का अंतिम दिन रहा। फाइल का फोल्डर लेकर पहुंची राजे ने भागवत के सामने अपनी सरकार के काम काज और विभिन्न योजनाओं की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संघ के काम काज की दृष्टि से सीएम की मुलाकात एक सामान्य प्रक्रिया है। संघ प्रमुख के प्रवास के समय संबंधित प्रांत के प्रचारक और प्रमुख स्वयं सेवक अपने-अपने संगठन की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। चूंकि भाजपा भी संघ परिवार का सदस्य है। इस नाते सीएम राजे ने भी अपनी सरकार की रिपोर्ट दी। भागवत ने सीएम राजे के कथन को भी उसी अंदाज में सुना, जिसमें दूसरे संगठनों के प्रमुखों को सुना। आम तौर पर संघ प्रमुख कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, लेकिन सीएम राजे की तबीयत खराब होने के संबंध में भागवत ने सलाह दी कि वे पहले अपने स्वास्थ का ख्याल रखंे। सीएम ने बताया कि वे पिछले तीन दिन से बूंदी जिले के दौरे पर थीं। आसोज की झुलसा देने वाली गर्मी में गांव-ढाणी के दौरे तथा लगातार जनसुनवाई व सरकारी बैठकों की वजह से थकावट कुछ ज्यादा ही हो गई। भागवत और राजे की मुलाकात का माहौल भी अच्छा रहा। इस मुलाकात में जयपुर के रामगंज क्षेत्र में हाल ही में हुई आगजनी और कफ्र्यू की घटना पर विचार हुआ। सीएम ने बताया कि किन परिस्थतियों में हालात बिगड़े और प्रशासन ने किस सूझबूझ से नियंत्रण पाया। 
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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#3040
सीकर में गैंगरेप, जोधपुर में व्यापारी की हत्या जैसी घटनाएं सरकार की छवि खराब कर रही हैं। बड़े अफसर भी खुले आम झगड़ रहे हैं।
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19 सितम्बर को राजस्थान का जोधपुर शहर बंद रहा, तो सीकर में दिनभर हंगामा होता रहा। जोधपुर में एक डिपार्टमेंटल स्टोर के मालिक वासुदेव इसरानी की सरेआम हत्या और सीकर में एक प्राइवेट स्कूल के मालिक व शिक्षक द्वारा 12वीं की एक छात्रा के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं राजस्थान में सरकार की छवि खराब कर रही हैं। यह छवि तब खराब हो रही है, जब राजस्थान में भाजपा की सरकार को लोकसभा  के दो और एक विधानसभा के उपचुनाव की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जोधपुर में सरेआम व्यापारी की हत्या पर तो हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोविंद माथुर और विनीत कुमार ने पुलिस और सरकार के कामकाज पर बेहद ही सख्त टिप्पणी की है। दोनों न्यायाधीशों ने व्यापारी की हत्या पर कहा कि यदि हम पुलिस कमिश्नर होते तो अब तक इस्तीफा दे देते। या तो पुलिस नाकारा है या फिर अपराधियों से मिली भगत है। पुलिस नाम की कोई चीज नहीं है। शहर भाग्य भरोसे चल रहा है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से राजस्थान में पुलिस महकमे का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना है कि वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चल रही सरकार हाईकोर्ट की टिप्पणी को कितनी गंभीरता के साथ लेती है। 
सीकर के स्कूल में गैंगरेप: 
गुरुग्राम के रेयान स्कूल में एक सात वर्षीय मासूम छात्र की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि राजस्थान के सीकर जिले के अजीतगढ़ क्षेत्र में चलने वाले जनता बाल निकेतन स्कूल की 12वीं की छात्रा के साथ स्कूल के प्रबंधक जगदीश यादव, शिक्षक जगत सिंह गुर्जर के द्वारा गैंगरेप करने का गंभीर मामला उजागर हो गया। अब 18 वर्षीया पीड़िता जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। शर्मनाक बात तो यह है कि बार-बार बलात्कार करने के बाद छात्रा का गर्भपात शाहपुरा राजनीश अस्पताल में करवाया गया और तभी छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। हालांकि पुलिस ने दोनों बलात्कारियों को हिरासत में लेकर अस्पताल के डाॅक्टर रजनीश और डाॅक्टर कानन शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। लेकिन आखिर सवाल उठता है कि हमारी बेटियां स्कूलों में सुरक्षित क्यों नहीं है? असल में अपराधी पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को भी शिक्षा के मंदिर चलाने के लाइसेंस दे दिए जाते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्कूल का मालिक ही छात्रा से बलात्कार कर रहा है तो उस स्कूल के हालात कैसे होंगे? यूं दिखाने को राजस्थान में सरकार ने महिला आयोग बना रखा है, लेकिन जाहिर है कि इस आयोग की कोई प्रभावी भूमिका नहीं है। आपराधिक तत्वों में कानून का भय नहीं है। 
झगड़ रहे हैं अफसर: 
एक ओर जहां हाईकोर्ट सरकार के काम काज पर प्रतिकूल टिप्पणी कर रहा है, तो वहीं सरकार में बैठे आईएएस स्तर के अधिकारी आपस में झगड़ रहे हैं। आयुर्वेद विभाग के शासन सचिव आर वेकेटश्वरन अपने अधिनस्थ मेडिशनल प्लांटस बोर्ड के सदस्य सचिव भरत तेमनी को सस्पेंड करने की धमकी देते हैं। तो तेमनी का कहना है कि वेकेटश्वरन मेरे बाॅस नहीं हैं। असल में दो अफसरों के झगड़े में भी सरकार की लापरवाही ही है। तेमनी 1987 बैच के आईएसएफ अधिकारी हैं। जबकि उन्हें 1990 बैच के आईएएस वंेकटेश्वरन के अधीन नियुक्त किया गया। यदि सरकार में बैठे लोग थोड़े भी समझदार होते तो एक सीनियर को जूनियर के नीचे नियुक्ति नहीं देते।
उपचुनाव की है चुनौतियां:
हालांकि राजस्थान में अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। लेकिन इससे पहले भाजपा सरकार को इसी वर्ष होने वाले दो लोकसभा (अजमेर और अलवर) और एक विधानसभा का (भीलवाड़ा के माडलगढ़) के उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। सरकार में बैठे लोग माने या नहीं, लेकिन ये तीनों उपचुनाव चुनौती भरे हैं। ऐसे में जहां सरकार की उपलब्धियां सामने आनी चाहिए वहां सरेआम हत्या, गैंगरेप, जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
एस.पी.मित्तल) (19-09-17)
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Monday, 18 September 2017

#3038
भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं रोहिंग्या मुसलमान। केन्द्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा। पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्यों नहीं लेते शरण।
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18 सितम्बर को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश कर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत की सुरक्षा के लिए खतरा माना है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या मुसलमानों के सम्पर्क पाकिस्तान के अनेक आतंकी संगठनों से हैं। इतना ही नहीं खूंखार आतंकी संगठन आईएस से भी तार जुड़े हुए हैं। हवाला के जरिए भी रोहिंग्या मुसलमानों को मदद मिलती है, मानव तस्करी में भी लिप्त हैं। हलफनामे में गृह मंत्रालय ने रोहिंग्य मुसलमानों की उपस्थित को भारत में गैरकानूनी माना है। 16 पन्ने के हलफनामे में कहा गया है कि अनेक रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत में मतदाता पहचान पत्र तथा पेन कार्ड तक बनवा लिए हैं। हलफनामे में कहा गया कि यदि रोहिंग्य मुसलमानों को भारत में शरण दी जाती है तो भारत के नागरिकों के अधिकारों का हनन होगा। मालूम हो कि म्मांयार से 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में आ चुके हैं। इनमें से 10 हजार से ज्यादा आतंकवाद ग्रस्त कश्मीर में हैं। 
प्रशांत भूषण की है याचिकाः
आम आदमी के संस्थापक सदस्य रहे प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि म्मांयार में इन मुसलमानों पर अत्याचार हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे पर अब प्रशांत भूषण से जवाब मांगा गया है। इस मामले में 3 अक्टूबर को सुनवाई होगी। 
पाक-बांग्लादेश क्यों नहीं देते शरण?ः
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सुब्रह्मणय स्वामी ने सवाल उठाया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान और बांग्लादेश शरण क्यों नहीं देते हैं? यदि मुसलमानों को अपने समुदाय के लोगों की इतनी ही चिंता है तो उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश पर दबाव बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों को वहां बसाना चाहिए। स्वामी ने कहा कि जब पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसे मुस्लिम राष्ट्र ही रोहिंग्य मुसलमानों को शरण देने को तैयार नहीं है तो फिर भारत में शरण देने का माहौल क्यों बनाया जा रहा है? रोहिंग्या मुसलमानों ने म्मांयार में जो कृत्य किया उसी की वजह से उन्हें म्मांयार से भगाया गया है। रोहिंग्य मुसलमानों को भारत में रहने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। स्वामी ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि रोहिंग्य मुसलमानों को शरण दिलवाने के लिए जुम्मे की नमाज के बाद जुलूस निकाले जा रहे हैं। जबकि  कश्मीर घाटी से 4 लाख हिन्दुओं को पीट-पीट कर भगा दिया, लेकिन किसी ने भी हिन्दुओं की वापसी की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि रोहिंग्य मुसलमानों पर बेवहज की राजनीति की जा रही है। भारत में रोहिंग्य मुसलमानों को किसी भी स्थिति में शरण नहीं दी जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (18-09-17)
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#3037
अजमेर के अमित वाजपेयी को मिला श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार।
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राजस्थान पत्रिका के जयपुर संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी अमित वाजपेयी को श्रीफल पत्रकारिता से सम्मानित किया गया। वाजपेयी अजमेर के रहने वाले हैं और उन्होंने पत्रिका के अजमेर संस्करण में लम्बे समय तक कार्य किया है। 17 सितम्बर को बैंगलूरू में आचार्य पुष्प दंत सागर, मुनि प्रमुख सागर और मुनि पूज्य सागर के सान्निध्य में हुए भव्य धार्मिक समारोह में पुरस्कारों का वितरण किया गया। यह पुरस्कार पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चंद कुलिश की स्मृति में दिए जाते हैं। इस वर्ष भी देश के 6 पत्रकारों को यह पुरस्कार दिया गया। प्रशंसा पत्र, श्रीफल और शाॅल के साथ-साथ 21 हजार रुपए की राशि दी गई। इससे पहले भी अखबार के प्रबंधन के साथ अच्छे संबंधों को लेकर भी वाजपेयी को सम्मानित किया जा चुका है। पत्रकारिता के क्षेत्र में वाजपेयी का उल्लेखनीय योगदान है। मोबाइल नम्बर 9571886633 पर वाजपेयी को बधाई दी जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (18-09-17)
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Sunday, 17 September 2017

#3033
कांग्रेस और भाजपा को अब राजस्थान में दो नहीं तीन उप चुनावों का सामना करना पड़ेगा। अलवर के भाजपा सांसद चांदनाथ का भी निधन।
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17 सितम्बर को अलवर के भाजपा सांसद महंत चांदनाथ का भी निधन हो गया। चांदनाथ लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। लाख कोशिश के बाद भी उन्हें कैंसर के जानलेवा रोग से नहीं बचाया जा सका। चांदनाथ के निधन के साथ ही अब राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस को तीन उपचुनावों का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले अजमेर के भाजपा सांसद सांवरलाल जाट और भीलवाड़ा के मांडलगढ़ की भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी का स्वाइन फ्लू से निधन हो गया था। राजस्थान में अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों राजनीतिक दलों के लिए दो लोकसभा और विधानसभा का उपचुनाव महत्वपूर्ण होगा। जहां सत्तारुढ़ भाजपा को अपनी साख बचानी होगी, वहीं कांग्रेस को भी यह साबित करना होगा कि प्रदेश की जनता भाजपा शासन से परेशान है। भाजपा के लिए ये उपचुनाव  आसान नहीं होंगे। 
एस.पी.मित्तल) (17-09-17)
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#3036
एक सप्ताह में दूसरी बार अजमेर में रावत समाज ने दिखाई ताकत। लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज।
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17 सितम्बर को अजमेर जिले के बांदनवाड़ा कस्बे में रावत सेना का एक बड़ा सम्मेलन हुआ। एक सप्ताह में यह दूसरा अवसर रहा जब जिलेभर के रावत इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। हालांकि रावत सेना के सम्मेलन में मंच से बार बार कहा गया कि इसका उद्देश्य राजनीतिक नहीं है। लेकिन सब जानते हैं कि गत 10 सितम्बर को जब पुकर में रावत समाज का प्रतिभावान सम्मान समारोह हुआ था, तब अनेक रावत नेताओं ने मंच से खुलकर राजनीति की बातें की। सब जानते हैं कि भाजपा सांसद सांवरलाल जाट के निधन से अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। ऐसे अजमेर का राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। एक सप्ताह में दूसरी बार रावतों के एकत्रित होने से प्रतीत होता है कि अन्य जातियों के मुकाबले रावतों ने भी अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया। पुष्कर स्थित रावत महासभा के अध्यक्ष ज्ञान सिंह रावत ने तो पुष्कर के सम्मेलन में स्पष्ट कहा था कि यदि रावत समुदाय को गुर्जरों की तरह आरक्षण के लिए विशेषदर्जा नहीं दिया गया तो उपचुनाव में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।
कुंदन सिंह रावत की रही भूमिकाः
बांदनवाड़ा में रावत सेना का सम्मेलन करवाने में महेन्द्र सिंह और गोपाल सिंह के साथ-साथ सेना के संयोजक कुंदन सिंह रावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि कुंदन ने भी अपने संबोधन में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की बात कही, लेकिन सब जानते हैं कि कुंदन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के विश्वास पात्रों में से हैं। पायलट की मेहरबानी से ही कुंदन कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश संगठक बने हुए हैं। जब कोई राजनेता अपने समाज में भी सक्रिय होता है तो उसकी महत्वकांक्षा के बारे में सब जानते हैं। रावत सेना को मजबूत करने में कुंदन की भी भाग दौड़ रही है। सम्मेलन को सफल बनाने के लिए ही 17 सितम्बर को कोई तीन सौ वाहनों  की रैली भी कुंदन के नेतृत्व में ही निकाली गई।
अजमेर में खासा महत्वः
यंू तो राजस्थान के भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़ तथा जयपुर में रावत समुदाय के लोग हैं, लेकिन सबसे ज्यदा असर अजमेर जिले में है। उपचुनाव के मद्देनजर अजमेर संसदीय क्षेत्र से भले ही ब्यावर को अलग कर दिया गया हो, तो भी पुष्कर में 40 हजार, नसीराबाद में 25 हजार, मसूदा में 40 हजार तथा अजमेर शहर के निकटवर्ती गांवों में 20 हजार से ज्यादा रावत मतदाता माने जाते हैं। उम्मीदवारी जताने वाले रावतों का कहना है कि पहले भी पांच बार अजमेर से रासा सिंह रावत सांसद चुने गए हैं। 
सामाजिक कुरीतियां मिटाने का संकल्पः
सम्मेलन में सामाजिक एकता के संकल्प के साथ-साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने का निर्णय भी लिया गया। सम्मेलन में युवाओं को आगे लाने की बात कही गई। सम्मेलन में रावत समाज का प्रथम संत समागम, प्रदेश स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता, गुरु वंदन छात्र अभिनंदन जैसे समारोह करने का भी निर्णय लिया गया। रावत सेना से जुड़ने के लिए मोबाइल नम्बर 9414009085, 9929283257, 9413949259 तथा 9001437376 पर सम्पर्क करने के लिए कहा गया। इस सम्मेलन को सफल बनाने में रामकमल सिंह, शक्ति सिंह, चमन सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, हरचंद राजोरिया, वेद प्रकाश मसूदा, युवाराज सिंह आदि की भी सक्रिय भूमिका रही।
एस.पी.मित्तल) (17-09-17)
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#3035
रक्तदान में अजमेर अग्रवाल समाज के युवाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
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17 सितम्बर को अजमेर में अग्रसेन जयंती के महोत्सव के अंतर्गत अग्रवाल पाठशाला भवन में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का शुभारंभ मैंने दीप प्रज्ज्वलित कर और महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर मेरे साथ जयंती महोत्सव के प्रमुख अशोक पंसारी, विष्णु मंगल, गोपालचंद गोयल, शैलेन्द्र अग्रवाल, अगम प्रसाद मित्तल आदि थे। शिविर संयोजक संदीप बंसल, मनोज गर्ग व नितेश बिंदल ने बताया कि रक्तदान के लिए युवाओं में भारी उत्साह है। इस उत्साह को देखते हुए ही जवाहर लाल नेहरू अस्पताल और मित्तल अस्पताल की चिकित्सा टीमों को बुलाया गया है। रक्तदान के प्रति युवाओं जागृती बढ़ी है। शिविर में मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प पत्र भी भरवाया गया। जयंती समारोह के दौरान ही कैरम और शतरंज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
एस.पी.मित्तल) (17-09-17)
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#3034
राजेश टंडन के शो में अजमेर के सब अफसर पहुंचे। रिटायर डीजीपी मनोज भट्ट का शानदार हुआ इस्तकबाल।
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आम तौर पर यही माना जाता है कि प्रभावशाली व्यक्ति के बुलावे पर ही बड़े प्रशासनिक अधिकारी पहुंचते हैं। लेकिन 16 सितम्बर की रात को फाॅयसागर रोड स्थित होटल ग्रेंड जीनिया के खूबसूरत परिसर में राजेश टंडन के निमंत्रण पर प्रशासन और पुलिस के बड़े अधिकारी मौजूद थे। टंडन ने हाल ही में डीजीपी के पद से रिटायर हुए मनोज भट्ट के सम्मान में समारोह रखा था। इसे टंडन पर बजरंग चैराहा स्थित अम्बे माता मंदिर की कृपा ही कहा जाएगा कि समारोह में रेंज की आईजी श्रीमती मालिनी अग्रवाल, कलेक्टर गौरव गोयल, एसपी राजेन्द्र सिंह चैधरी, आईपीएस राममूर्ति, डीआरएम पुनीत चावला के साथ-साथ अनेक आरएएस और आरपीएस मौजूद थे। पुष्कर के विधायक सुरेश सिंह रावत, शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन, पूर्व सांसद रासा सिंह  रावत आदि भी उपस्थित रहे।
शानदार हुआ इस्तकबालः
टंडन ने मनोज भट्ट का नागरिक सम्मान करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सूफी संत ख्वाजा साहब की दरगाह से जुड़ी दोनों अंजुमनों के पदाधिकारियों और दरगाह के प्रमुख खादिम सैयद अब्दुल गनी गुर्देजी ने दस्तारबंदी कर भट्ट का सम्मान किया। गनी गुर्देजी ने जहां भट्ट को नोटों का हार पहनाया, वहीं अंजुमन के अध्यक्ष मोईन सरकार, सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह, मुन्नवर चिश्ती, इकबाल चिश्ती, शेखजादा जुल्फीकार चिश्ती आदि ने शाॅल ओढ़ाया। कोई एक घंटे तक माला पहनाने वालों की लाइन लगी रही। पुष्कर स्थित चित्रकूट धाम के उपासक पाठक जी महाराज ने भी आशीर्वाद दिया।
अजमेर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे टंडन वर्तमान में किसी भी प्रभावी पद पर नहीं है, लेकिन फिर भी उनके संबंध समाज के सभी वर्गों के लोगों से हैं। 16 सितम्बर को भट्ट का अजमेर आना मुश्किल था, क्योंकि उनकी सास जयपुर में एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती थीं, लेकिन भट्ट अपने पुराने साथी टंडन के आग्रह को टाल नहीं सके। बजरंगगढ़ चैराहा स्थित अम्बे माता मंदिर के संचालन और विकास में टंडन की मुख्य भूमिका है। मंदिर के माध्यम से वे जरुरतमंदों की सहायता भी करवाते हैं। टंडन के इल्म और व्यवहार के बारे में और अधिक जानकारी उनके मोबाइल नम्बर 9829071211 पर ली जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (17-09-17)
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#3032
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लम्बी उम्र के लिए ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश कर दुआ की। अजमेर में हुए अनेक कार्यक्रम।
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17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर अजमेर स्थित विश्व विख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में सूफी परंपरा के अनुरूप पवित्र मजार पर चादर पेश की गई। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे के पदाधिकारियों ने दरगाह में नरेन्द्र मोदी की लम्बी उम्र के लिए दुआ की। कार्यकर्ताओं का कहना रहा कि प्रधानमंत्री सबका साथ सबका विकास का उद्देश्य लेकर देश को तरक्की की राह पर ले जा रहे हैं। इस मौके पर मोर्चे के अध्यक्ष शफिक खान, अशफान चिश्ती, सरदार तेजपाल सिंह, जावेद शेख, मोइन खान आदि उपस्थित रहे।
दरगाह में चला स्वच्छता अभियानः
ख्वाजा साहब की दरगाह के निकट ही बड़े पीर रोड स्थित 800 वर्ष पुरानी मीरा नातवांशाह की दरगाह में भी प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान चलाया गया। दरगाह से जुड़े सैयद मंसूर अली ने बताया कि बुजुर्ग कमर अली दरवेश के नेतृत्व में सम्पूर्ण दरगाह परिसर में सफाई की गई। इससे हाजी कुर्बान हुसैन आदि शामिल थे। 
ब्रेन ट्यूमर का हुआ आॅपरेशनः
अजमेर के वार्ड तीन के लोकप्रिय पार्षद ज्ञान सारस्वत ने बताया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन को सार्थक बनाने के लिए 17 सितम्बर को सरकार की भामाशाह योजना में हनुमान प्रसाद के ब्रेन ट्यूमर का आॅपरेशन पुष्कर रोड स्थित प्राइवेट मित्तल अस्पताल में करवाया गया। डाॅ. सिद्धार्थ वर्मा ने बताया कि आॅपरेशन सफल रहा है। पार्षद के अनुसार इतने बड़े और महंगे आॅपरेशन के लिए मरीज से कोई राशि नहीं ली गई है।
रंग भरो प्रतियोगिता व मिट्टी की प्रतिमा का निःशुल्क वितरणः
वार्ड 60 के भाजपा पार्षद चन्द्रेश सांखल के नेतृत्व में रीजनल काॅलेज चैराहे के निकट आनासागर चैपाटी पर बच्चों के लिए स्वच्छता प्रकल्प के अंतर्गत चित्रकला  तथा रंग भरो प्रतियोगिता की गई। बच्चों ने अपने मन से स्वच्छता और पर्यावरण पर चित्र बनाए और रंग भरे। इसी प्रकार लोगों को मिट्टी से बनी दुर्गा प्रतिमाएं निःशुल्क वितरित की गई। इससे पहले बच्चों ने मिट्टी से बनी प्रतिमाओं पर रंग भी भरे। संकल्प से सिद्धि तक के अभियान में लोगों से स्वच्छता को लेकर शपथ भी दिलवाई गई। सांखला ने बताया कि बच्चों में प्रतियोगिता को लेकर बेहद उत्साह रहा। करीब 550 प्रतिभागियों ने भाग लिया, इस अवसर पर मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा, शहर भाजपा अध्यक्ष अरविंद यादव आदि ने सांखला के प्रयासों की प्रशंस की। 
एस.पी.मित्तल) (17-09-17)
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Saturday, 16 September 2017

#3031
पेट्रोल मूल्य वृद्धि से क्या कार-स्कूटर वाले भूखे मर जाएंगे? केन्द्रीय मंत्री एल्फोंस का बयान कितना उचित। इसे कहते हैं जले पर नमक छिड़कना।
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16 सितम्बर को केन्द्रीय पर्यटन राज्यमंत्री के.जे.एल्फोंस का एक ऐसा बयान सामने आया है जो जले पर नमक छिड़कने वाली कहावत को चरितार्थ करता हैं। एल्फोंस ने पेट्रोल और डीजल की मूल्स वृद्धि के सवालों के जवाब में कहा कि पेट्रोल  और डीजल का उपभोग करने वाले कार और स्कूटर मालिक भूखे नहीं मर रहे हैं। जब आप कार और स्कूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर टैक्स चुकाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। यूपीए की सरकार में बड़े-बड़े घोटाले हुए जबकि पूरा देश जानता है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार टैक्स से एकत्रित राशि को गरीबों के कल्याण के लिए खर्च करती है। यह माना कि जो व्यक्ति पचास लाख या इससे भी अधिक की कीमत वाली कार का इस्तेमाल करता है वह 70 रुपए प्रति लीटर की दर पर भी पेट्रोल खरीद सकता है। लेकिन केन्द्रीय मंत्री एल्फोंस को यह जमीनी हकीकत समझनी चाहिए कि डीजल और पेट्रोल की मूल्य वृद्धि सिर्फ कार और स्कूटर वालों पर ही नहीं होती। इसका असर आम व्यक्ति पर पड़ता है। जब परिवहन खर्च बढ़ जाएगा तो परचूनी के सामान से लेकर फल-सब्जी तक महंगे होंगे। डीजल की मूल्यवृद्धि से किसानों पर भी आर्थिक भार पड़ेगा। इतना ही नहीं ट्रेनों और बसों से सफर करने वाले भी प्रभावित होंगें। पूरे देश में इस समय डीजल और पेट्रोल के मूल्य को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इस समय एक बैरल कच्चा तेल मात्र 45 डाॅलर में मिल रहा है, और देश में डीजल 65 रुपए व पेट्रोल 75 रुपए लीटर के भाव बिक रहा है, जबकि यूपीए के कार्यकाल में जब एक बैरल तेल 110 डाॅलर में मिलता था, तब देश में पेट्रोल अधिकतम 72 रुपए प्रति लीटर में बिका। आज आम व्यक्ति के जहन में डीजल-पेट्रोल की मूल्यवृद्धि को लेकर संशय हैं। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री एल्फोंस का बयान जले पर नमक छिड़कने वाला है। जब देश की जनता किसी मुद्दे पर सवाल उठा रही हैं तब सरकार के मंत्रियों को ऐसे बेतुके बयानों से बचना चाहिए। जहां तक एल्फोंस का सवाल है, जब वे 40 वर्षों आईएएस रहे तब भी उन्हें मुफ्त पेट्रोल मिलता था और आज भी मिल रहा है। जिस व्यक्ति को मुफ्त में पेट्रोल मिलता रहा है उसे आम व्यक्ति की पीड़ा समझ में नहीं आएगी।
एस.पी.मित्तल) (15-09-17)
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