Saturday, 19 August 2017

#2925
राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश की मंत्री यशोधरा व उनकी बहन उषा पर 10 हजार का हर्जाना लगा। राजमाता विजय राजे की वसीयत का मामला।
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मध्यप्रदेश के ग्वालियर के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सचिन शर्मा की अदालत ने राजस्थान के सीएम वसुंधरा राजे मध्यप्रदेश की मंत्री यशोधरा राजे और उनकी बहन उषा राजे पर 10 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। न्यायाधीश शर्मा का मानना रहा कि तीनों बहने वसीयत के विवाद को लम्बित रखने के लिए बार-बार प्रार्थना पत्र पेश कर रही हैं। इसके साथ ही न्यायाधीश ने वाद प्रश्न की मांग वाला प्रार्थना पत्र भी खारिज कर दिया। न्यायाधीश शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माना राशि का उपयोग गरीब बच्चों की शिक्षा पर किया जाए।
मां की वसीयत पर है आपत्ति:
ग्वालियर राज घराने की राजमाता रही ंविजय राजे सिंधिया ने अपनी जो वसीयत की है, उस पर तीनों बेटियों को ऐतराज है। मालूम हो कि स्वर्गीय विजय राजे सिंधिया ने अपने जीवन काल में ही जो वसीयत लिखी, उसमें राजघराने की सम्पत्ति को राज घराने से बाहर के लोगों को भी दिया गया है। अदालत में हो रही सुनवाई में कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य राजे भी शामिल हैं। ज्योतिरादित्य पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय माधवराज सिंधिया के पुत्र हैं। 
एस.पी.मित्तल) (19-08-17)
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#2924
राजनीति केवल भाग्य की नहीं, बल्कि पुरुषार्थ की मांग भी करती है। 
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अजमेर से जुड़े भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव का एक लेख 19 अगस्त को दैनिक जागरण में प्रकाशित हुआ है। भाजपा की राजनीति पर लिखा यह लेख जागरण से सफर करते हुए मेरे पाठकों के लिए भी प्रस्तुत है। 
केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां पीएम पद को 'प्रधानसेवकÓ का दर्जा देकर देश की जनता के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया, वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री के इस ध्येय को संगठन के माध्यम से पार्टी में चरितार्थ करके संगठन कुशलता का परिचय दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बीते तीन वर्षों में अमित शाह ने एक संगठनकर्ता के रूप में अपनी कार्यप्रणाली से संगठन में कार्यकर्ता भाव को अपने आचरण एवं व्यवहार के माध्यम से जागृत करने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने पार्टी में हाईकमान प्रणाली को कभी भी स्वीकृति नहीं दी। पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने किसी प्रकार की अनावश्यक सुविधा एवं खर्चे को अस्वीकार करते हुए आवश्यकता के अनुरूप विकल्पों का चयन किया, जैसे होटल के बजाय सरकारी गेस्ट हाउस का प्रयोग और जनसंघ की रीति-नीति के अनुसार सामान्य कार्यकर्ता एवं पार्टी पदाधिकारी के घर भोजन करना। राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां बनाते हुए भी उन्होंने बूथ, जिला एवं प्रदेश के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करने की परंपरा का भी विकास किया है। यह भारतीय राजनीति का वह परंपरागत स्वरूप है जो वंशवाद और जातिवाद की राजनीति के बीच कहीं गौण होता गया, पर अमित शाह ने इसको न केवल फिर से विकसित किया, बल्कि भाजपा को कर्मठ कार्यकर्ताओं वाली पार्टी के रूप में मजबूती से स्थापित करने का कार्य भी किया। उन्होंने अपने साथियों और सहयोगियों को यह भी सिखाया कि एक राजनीतिक कार्यकर्ता को सत्ता के साथ समन्वय स्थापित करके सकारात्मक एवं गुणात्मक कार्य करने चाहिए। आधुनिक शासन व्यवस्था में सरकार और संगठन का बेहतर तालमेल ही नवाचार ला सकता हैए यह पिछले तीन वर्षो में प्रकट हुआ है।
सामान्यतया तालमेल के अभाव में सरकार अपने सांगठनिक वोट बैंक की बंधक बन जाती है और नए फैसले नहीं ले पाती है, परंतु मोदी सरकार के साथ ऐसा नहीं है। गत तीन साल में अमित शाह के संगठनात्मक नेतृत्व में बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी की राजनीतिक विचारधारा को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने की एक शृंखलाबद्ध व्यवस्था शुरू की गई है। एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए विभिन्न दायित्वों को आइटी एवं सोशल मीडिया, मीडिया प्रकाशन आदि विभागों में बांटकर अपने दौरों के माध्यम से प्रदेश स्तर तक इसे पहुंचाने का कार्य भी उन्होंने बखूबी किया है। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सामाजिक दायित्वों को सुनिश्चित करने के लिए बेटी बचाओ, नामामि गंगे और स्वच्छता मिशन जैसे प्रकल्पों को भी खड़ा करने का कार्य किया है। कार्यकर्ता की वैचारिक स्पष्टता को पुख्ता करने और उसके दायित्वों के सही बोध को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था को भी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।
पंडित दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष में भाजपा द्वारा 15 दिन से एक साल तक एक विस्तारक कार्यकर्ता के लिए अन्य क्षेत्रों में कार्य करने की योजना तैयार की गई है। अमित शाह जब इस योजना पर कार्यकर्ताओं से संवाद करते हैं तो उनका स्पष्ट संदेश यही होता है कि हम जब पार्टी के लिए समय दे रहे हैं तो पार्टी इसका माध्यम हो सकती है, लेकिन इसका उद्देश्य देश की उन्नति की दिशा में समर्पित भाव से कार्य करने का ही होना चाहिए। उनके साथ कार्य करने वाले लोग यह जानते हैं कि वे परिश्रम की पराकाष्ठा दिखाते हैं। उनके साथ कार्य करके यह अनुभव आया है कि राजनीति केवल भाग्य की नहीं, बल्कि पुरुषार्थ की मांग भी करती है। मैंने महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और यूपी से लेकर गुजरात के राज्यसभा चुनाव तक उनके साथ कार्य किया है। मैंने देखा है कि पार्टी की प्रतिष्ठा के लिए वे बूथ कार्यकर्ता के साथ जुझारू व्यक्तित्व के तौर पर खड़े दिखाई देते हैं। वे कई बार पार्टी के लोगों से अनुशासन का हिसाब भी मांगते हैंए क्योंकि वे खुद कठोर अनुशासन के अनुपालक हैं। आमतौर पर बहुत छोटी और सामान्य सी लगने वाली बात के पीछे उनका दृष्टिकोण बेहद गहरा और व्यापक होता है। वे मानते हैं कि हमें अपने सार्वजनिक जीवन में ऐसी किसी वस्तु या विषय के प्रति लगाव का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए जो अनावश्यक लाभ लेने की प्रवृति अथवा उपहार संस्कृति को बढ़ावा दे, क्योंकि इससे कार्यकर्ता का नेतृत्व के प्रति भटकाव होता है। इस भटकाव से संगठन एवं देश के हितों की उपेक्षा कर निजी स्वार्थ की प्रवृति को बढ़ावा मिलता है। इस सामान्य से अनुशासन के माध्यम से उन्होंने शुद्ध राजनीतिक मिशन का एक संदेश प्रस्तुत किया है। पार्टी में भी वे पारदर्शिता को लेकर बेहद आग्रही हैं और इसीलिए अपने प्रवास में वे आजीवन सहयोग निधि का जिक्र करते हैं। उनका मानना है कि पार्टी का संचालन शुद्ध कोष व्यवस्था से ही होना चाहिए।
राजनीतिक क्षेत्र में एक बड़ा विषय समाज के हर स्तर पर संवाद स्थापित करने का है। अमित शाह की कार्यशैली कार्यकर्ताओं में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता के भाव को जागृत करने का कार्य करती है। इसी वजह से तीन वर्ष के कार्यकाल में उनके नाम अनेक उपलब्धियां अर्जित हैं। इन वर्षो में पार्टी 10 करोड़ सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो 18 राज्यों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकार चलाने का गौरव भी इसी कालखंड में पार्टी को हासिल हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि अमित शाह की दृष्टि से शासन का विस्तार महज शासकीय मानसिकता के साथ नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य लोक कल्याण में सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा करने का भी होना चाहिए। पार्टी आधुनिकता से संपन्न हो, परंतु विचारों और परंपरागत मूल्यों का ह्रास न होने पाए, यह भी उनके द्वारा कार्यकर्ताओं के बीच अक्सर कहा जाता है। संवाद को स्पष्टता से रखना और अपनी वैचारिक निष्ठा के प्रति खुला दृष्टिकोण रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है और इसीलिए वे अपनी बात बेहद स्पष्टता से रखते हैं। सामाजिक न्याय, सर्वधर्म समभाव आदि को लेकर भाजपा के खिलाफ जो दुष्प्रचार किया जाता रहा है, उसके तर्कसंगत और तथ्यात्मक जवाब से अमित शाह सदैव लैस रहते हैं। वे कहते हैं कि हमने सिर्फ भाषण नहीं दिए हैं, बल्कि हमने ठोस रूप में इन आदर्शो के प्रति कदम उठाए हैं।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शो पर जिस जनसंघ की बुनियाद रखी गई थीए भाजपा आज उसी मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। पिछले सात दशकों में अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने त्याग और बलिदान से भाजपा को देश की राजनीति के द्र में स्थापित किया है। समर्पण भाव और ध्येय के बिना वर्तमान राजनीति में आगे नहीं बढ़ा जा सकताए यह अमित शाह बखूबी जानते हैं और इसीलिए एक कुशल रणनीतिकार, संगठक, अनुभवी प्रशासक और प्रभावी व्यक्तित्व के तौर पर उनकी पहचान होने के बावजूद वे भाजपा मिशन के कार्यकर्ता के रूप में अधिक दिखते हैं। वस्तुत: यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
एस.पी.मित्तल) (19-08-17)
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#2923
तो क्या अजमेर के भाजपा नेताओं को नजर लग गई है? अब केकड़ी के पूर्व विधायक और राज्य खादी बोर्ड के अध्यक्ष शंभुदयाल बडग़ुर्जर का निधन।
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पूर्व केन्द्रीय, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष और अजमेर के भाजपा सांसद सांवर लाल जाट के निधन के बाद अभी 12वें की रस्म भी नहीं हुई कि अजमेर से जुड़े एक ओर बड़े भाजपा नेता शम्भुदयाल बडग़ुर्जर का 19 अगस्त को जयपुर में निधन हो गया। बडग़ुर्जर अजमेर जिले के केकड़ी विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार भाजपा के विधायक रह चुके हैं। स्वर्गीय बडग़ुर्जर का अंतिम संस्कार 19 अगस्त को ही जयपुर में लाल कोठी स्थित श्मशान स्थल पर कर दिया गया। सीएम वसुंधरा राजे ने स्वर्गीय बडग़ुर्जर के निवास स्थान पर जाकर श्रद्धांजलि दी। चूंकि बडग़ुर्जर भाजपा के दिग्गज नेता होने के साथ-साथ वर्तमान में भी राज्य खादी बोर्ड के अध्यक्ष थे, इसलिए श्मशान स्थल पर अनेक मंत्री और भाजपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सांवरलाल जाट के निधन से भाजपा को अजमेर में जो क्षति हुई, वह अभी भरी भी नहीं थी कि भाजपा को अपने एक ओर प्रभावशाली नेता को खोना पड़ा है। बडग़ुर्जर का अजमेर की राजनीति में कितना असर रहा इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बडग़र्जुर केकड़ी से वर्ष 1990 और 1993 में लगातार दो बार विधायक चुने गए। बडग़र्जुर ने पहला चुनाव जनता दल उम्मीदवार के तौर पर जीता और फिर भैरों सिंह शेखावत को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए जनतादल को तोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसलिए 1993 में बडग़र्जुर ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता। केकड़ी में आजादी के बाद से 14 बार विधानसभा के चुनाव हुए। हरिभाऊ उपाध्याय के बाद बडग़र्जुर दूसरे ऐसे नेता रहे जो दो बार केकड़ी के विधायक चुने गए। अधिकांशत: केकड़ी का विधायक दूसरी बार चुनाव नहीं जीता सका है। गत बार 2013 में कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा का दावा था कि वे दूसरी बार भी चुनाव जीतेंगे। लेकिन उन्हें भाजपा के शत्रुघ्न गौतम से 8 हजार 867 मतों से हार का सामना करना पड़ा। बडग़र्जुर के निधन से केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में भी शोक का माहौल रहा। भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष बी.पी.सारस्वत ने बडग़र्जुर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए माना कि इससे पार्टी को नुकसान हुआ है। 
पहाडिय़ा पछाड़:
केकड़ी में स्वर्गीय बडग़ुर्जर की पहचान पहाडिय़ा पछाड़ से हो गई थी। 1993 में बडग़र्जुर के सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगन्नाथ पहाडिय़ा उम्मीदवार थे। तब कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि पहाडिय़ा जैसे दिग्गज नेता चुनाव हार जाएगा। लेकिन बडग़ुर्जर ने 3 हजार 617 मतों से पहाडिय़ा को मात दे दी। पहाडिय़ा जैसे बड़े नेता को हरा देने पर ही बडग़र्जुर को पहाडिय़ा पछाड़ कहा जाने लगा। 
स्वर्गीय जाट के 12वें की रस्म 20 अगस्त को:
भाजपा के सांसद सांवरलाल जाट के 12वें की रस्म 20 अगस्त को अजमेर जिले के गोपालपुरा गांव में सम्पन्न होगी। प्रात: 10 बजे होने वाली पगड़ी की रस्म में कई केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के बड़े नेता उपस्थित रहेंगे। 
एस.पी.मित्तल) (19-08-17)
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#2922
उदयपुर के गीताजंलि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के नाम पर लूटने का मामला कोर्ट में पहुंचा। राजस्थान पत्रिका और एडवोकेट अजय जैन का आधार।
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राजस्थान ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख उदयपुर स्थित गीतांजलि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में प्रवेश के नाम पर करोड़ों रुपए लूटने का मामला अब कोर्ट मे पहुंच गया है। जयपुर स्थित एसीबी कोर्ट संख्या एक ने 18 अगस्त को एक आदेश दिया है, जिसमें एसीबी से इस मामले में 22 सितम्बर तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इस गंभीर मामले में तत्कालीन विशिष्ट सचिव (चिकित्सा) श्रीमती रोली सिंह और चिकित्सा विभाग के ही अतिरिक्त निदेशक के साथ-साथ गीतांजलि एजुकेशन सोसायटी के जे.पी.अग्रवाल को भी आरोपी बनाया गया है। असल में हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील अजय कुमार जैन ने एसीबी में एक शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि उदयपुर में 10 एकड़ जमीन सरकार से रियायती दर पर लेने के बाद भी सरकार के नियमों के तहत कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। कायदे से गीतांजलि को दी गई भूमि का आवंटन स्वत: ही निरस्त हो जाना चाहिए। लेकिन रोली सिंह जैसे अधिकारियों ने अपने दायित्व का निर्वाहन नहीं किया। जबकि इस कॉलेज ने करोड़ों रुपए लेकर प्रवेश दिए। प्रवेश परीक्षा लिए बिना ही 51 विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया। एडवोकेट जैन के प्रार्थना पत्र पर ही अब कोर्ट ने एसीबी से जांच रिपोर्ट तलब की है। सब जानते हैं कि गीतांजलि कॉलेज के मालिक बेहद प्रभावशाली हैं। इसीलिए मजबूर अभिभावक चुपचाप करोड़ों रुपए दे देते हैं। मशहूर डॉक्टरों को अपने बेटो ंको भी डॉक्टर बनवाना होता है। इसलिए वे गीतांजलि जैसे कॉलेजों का ही इस्तेमाल करते हैं। चूंकि सरकार में बैठे अधिकारी और मंत्री भी उपकृत होते हैं। इसलिए शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती। लेकिन एडवोकेट जैन ने हिम्मत दिखाई और सबूत एकत्रित कर गीतांजलि को कोर्ट तक ले गए। इसके लिए एडवोकेट जैन का आभार तो होना ही चाहिए। साथ ही राजस्थान पत्रिका का भी आभार व्यक्त किया जाना चाहिए कि उसने गीतांजलि कॉलेज के खिलाफ खबर प्रकाशित की है। गीतांजलि की ओर से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के विज्ञापन दिए जाते हैं। लेकिन पत्रिका ने विज्ञापन के दबाव को हटाते हुए गीतांजलि के खिलाफ खबर लगाई है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में गीतांजलि अस्पताल के विज्ञापन पत्रिका में प्रकाशित न हो। पत्रिका ने इस सच्चाई को जानते हुए भी पाठकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है। 
एस.पी.मित्तल) (19-08-17)
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#2921
ईद-उल-अजहा पर मुसलमानों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम हो। हाजी शकील सेफी ने प्रधानमंत्री से अपील की।
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मुस्लिम युवा आतंकवाद विरोधी समिति के अध्यक्ष हाजी शकील सेफी ने 19 अगस्त को अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जियारत की। जियारत के बाद पत्रकारों से संवाद करते हुए सेफी ने कहा कि आगामी 2 सितम्बर को मनाए जाने वाले ईद-उल-अजहा के पर्व पर देशभर में मुसलमानों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम होने चाहिए। सेफी ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषणों में कई बार यह स्वीकार किया है कि क थित गौ रक्षक हिंसा कर रहे है। ऐसे में अब प्रधानमंत्री का दायित्व है कि अब वह ईद-उल-अजहा मनाने वालों की सुरक्षा के इंतजाम करवा कर इसके लिए खास कर भाजपा शासित राज्यों में केन्द्र सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी होनी चाहिए। सेफी ने कहा कि ईद-उल-अजहा के पर्व से पहले कुर्बानी के लिए बकरों की खरीद-फरोख्त होगी। मंडियों से बकरों को एक-दूसरे स्थान पर ले जाया जाएगा। क्योंकि बकरें की कुर्बानी मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी हुई है इसलिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम होने चाहिए। राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़कों पर बेवजह हिंसा नहीं हो। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान एक धर्म निरपेक्ष देश है। यहां हर नागरिक अपने धर्म के अनुरुप रह सकता है। ऐसे में मुसलमानों के इस पर्व पर कोई हिंसक घटना न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम होने चाहिए।
एस.पी.मित्तल) (19-08-17)
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Friday, 18 August 2017

#2919
दलित वर्ग की लादी देवी पौन बीघा अपनी जमीन के लिए दबंगों से कर रही हैं संघर्ष।  पीडि़ता के दर्द को सुनने वाला अजमेर में कोई नहीं। 
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अजमेर जिले के सरवाड़ थाना अंतर्गत आने वाले शोकलिया गांव में बुजुर्ग दलित वर्ग की बुजुर्ग महिला लादी देवी नायक  अपनी पौन बीघा जमीन बचाने के लिए दबंगों से लड़ रही है। 19 अगस्त 2013 को तहसीलदार की रिपोर्ट में भी भूमि को लादी देवी के पति सूरजमल की ही माना गया है, लेकिन इसके बाद भी दबंगों ने ट्रेक्टर चला कर जमीन पर से खेती को उखाड फेंका और अब मौके पर दीवार भी बना दी है। इस गैर कानूनी कार्यवाही के विरोध में लादी देवी की ओर से पुलिस स्टेशन पर एक मुकदमा दायर किया गया। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में रंगलाल, महेन्द्र सिंह, खाजू खां, अल्ला बख्श, ग्यारसमल और श्यामलाल को धारा 447 आईपीएसी व 3(1)(5) (एससीएसटी) में दोषी भी माना, लेकिन 8 माह गुजरने के बाद भी सरवाड़ पुलिस आरोपियों के विरुद्ध अदालत में चालान पेश नहीं कर सकी। पुलिस का इस मामले में कहना है कि नोटिस देने के बाद भी आरोपी नहीं आ रहे हैं। जबकि पूरा गांव जानता है कि आरोपी खुलेआम गांव में घुम रहे हैं। पुलिस की ढिलाई की वजह से आरोपीगण दलित महिला को ही डरा धमका रहे हैं। इतना ही नहीं अब तहसील से मिलीभगत कर पूर्व की रिपोर्ट भी बदलवाई जा रही है। दलित महिला ने राज्य सरकार के पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लादी देवी के पुत्र पवन नायक का आरोप है कि दबंगों को क्षेत्र के रोजनताओं का भी संरक्षण प्राप्त है। ऐसे नेता ही पुलिस पर दबाव डाल कर आरोपियों को बचा रहे हैं। दलित परिवार से जुड़े इस पूरे मामले में मोबाइल नम्बर 8290636314 पर जानकारी ली जा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (18-08-17)
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#2918
लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर अजमेर में भाजपा और कांग्रेस सक्रिय। दोनों पार्टियों के बड़े नेता आएंगे। 
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अजमेर में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव के मद्देनजर दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। किसी न किसी बहाने कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में लगी हुई हैं। कार्यकर्ता कितना सक्रिय होगा यह तो उपचुनाव के परिणाम ही बताएंगे, लेकिन दोनों पार्टियां फिलहाल अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। 
भाजपा का संकल्प सिद्धि अभियान:
न्यू इंडिया के निर्माण के अंतर्गत भाजपा ने संकल्प सिद्धि अभियान चलाया है। इसके अंतर्गत 19 अगस्त को पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक पर एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया है। इस कार्यक्रम के महत्त्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान के प्रभारी अविनाश राय खन्ना उपस्थित रहेंगे। खन्ना दिन भर अजमेर में ही रहेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार खन्ना दिवंगत भाजपा सांसद सांवर लाल जाट के गांव गोपालपुरा जाकर श्रद्धांजलि देंगे, वहीं सूफी संत ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत भी करेंगे। खन्ना हिन्दुओं के तीर्थगुरु पुष्कर में पूजा अर्चना भी करेंगे। शहर भाजपा के अध्यक्ष अरविंद यादव ने बताया कि 19 अगस्त को शाम 7 बजे प्रताप स्मारक पर होने वाले देशभक्ति के कार्यक्रम में दिवंगत भाजपा सांसद जाट को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। इस कार्यक्रम में सांस्कृति संस्था सप्तक के कलाकार प्रस्तुति देंगे। इसमें सामाजिक, धार्मिक संगठनों की भी भूमिका होगी। 
कांग्रेस मनाएगी राजीव जयंती:
20 अगस्त को कांग्रेस भी अजमेर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर बड़ा कार्यक्रम करेगी। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन ने बताया कि 20 अगस्त को प्रात:11 बजे केसरगंज स्थित कांग्रेस कार्यालय से एक रैली शुरू होगी जो शहर के विभिन्न मार्ग से होते हुए। बजरंगगढ़ चौराहा स्थित विजय स्मारक पर समाप्त होगी। इस रैली का नेतृत्व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल करेंगे। कांग्रेस और उसके अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रैली में भाग लेंगे। रैली की सफलता को लेकर 18 अगस्त को पदाधिकारी की एक बैठक हुई। 
एस.पी.मित्तल) (18-08-17)
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#2917
अजमेर कलेक्टर की पहल पर महिला फोटोग्राफरों के चित्रों की प्रदर्शनी और प्रतियोगिता। 
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अजमेर में फोटोग्राफी के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब महिला फोटोग्राफरों द्वारा खींचे गए चित्रों की प्रदर्शनी और प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस ऐतिहासिक कार्य को अजमेर के कलेक्टर गौरव गायेल की पहल पर किया जा रहा है। कलेक्टर गोयल का मानना है कि जब महिलाएं सभी क्षेत्रों में अपनी दक्षता दिखा रही हैं, तब फोटोग्राफी का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहना चाहिए। पृथ्वीराज फाउंडेशन के बैनर तले हो रही इस प्रदर्शनी में अजमेर की 80 महिला फोटोग्राफरों के करीब 300 चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। निर्णायक सर्वेश्रेष्ठ चित्रों का चयन कर विजेताओं को पुरस्कार भी देंगे। यह प्रदर्शनी 19 से 21 अगस्त तक सूचना केन्द्र में लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के प्रमुख आयोजक सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर दीपक शर्मा ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 19 अगस्त को प्रात: 10 बजे कलेक्टर गौरव गोयल करेंगे। शर्मा ने बताया कि महिला फोटोग्राफरों के चित्रों की प्रदर्शनी में अजमेर विकास प्राधिकरण का भी विशेष योगदान हैं। अजमेर के नागरिकों को महिला फोटोग्राफरों के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शनी के संबंध में अधिक जानकारी दीपक शर्मा से मोबाइल नम्बर 9828549049 पर ली जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (18-08-17)
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#2916
तो केन्द्र सरकार की दरगाह कमेटी ने कर दिया गरीबों का लंगर महंगा।
जबकि राजस्थान में वसुंधरा सरकार 8 रुपए में खिला रही है भरपेट खाना।
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राजस्थान में जहां वसुंधरा राजे की सरकार अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत गरीबों को 8 रुपए में भरपेट खाना खिला रही है, वहीं केन्द्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली दगराह कमेटी ने गरीबों के लिए वितरित किए जाने वाले लंगर (जौ और नमक का दलिया) को महंगा कर किया है। अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दगाह में आंतरिक इंतजाम दरगाह कमेटी ही करती है। कमेटी के द्वारा ही चालीस किलो लंगर प्रतिदिन तैयार कर दरगाह में आने वाले गरीबों को वितरित किया जाता है। इस लंगर के पीछे जायरीन की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हंै। ख्वाजा साहब अपने जीवन काल में ऐसा ही लंगर रोजाना पीते थे। इस आस्था के चलते ही मध्यम वर्गीय जायरीन अपनी ओर से भी लंगर तैयार करवा कर वितरित करवाते हैं। इसके लिए दरगाह कमेटी में नमकीन लंगर के लिए 2100 रुपए तथा मीठे लंगर के लिए 5500 रुपए दरगाह कमेटी में शुल्क जमा होता था। लेकिन हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त किए गए नाजिम आई.बी.पीरजादा ने नमकीन लंगर के 3000 रुपए तथा मीठे लंगर के 6500 रुपए शुल्क कर दिया। ऐसा नहीं कि दरगाह कमेटी की आर्थिक स्थिति खराब है। प्रतिवर्ष कमेटी की आय में वृद्धि हो रही है। ऐसे में लंगर का शुल्क बढ़ा देने से उन जायरीन को परेशानी है जो लंगर की अधिक राशि वहन नहीं कर सकते। 
दरगाह में दो तरह का तबर्रुख:
ख्वाजा साहब की दरगाह में दो तरह का तबर्रुख (प्रसाद) तैयार होता है। धनाढ्य जायरीन दरगाह कमेटी के माध्यम से दो बड़ी देगों में चावल और काजू आदि का तबर्रुख तैयार करवाते हैं। जबकि मध्यम वर्गीय जायरीन जौ का लंगर तैयार करवाता है। चावल वाले तबर्रुख में धनाढ्य जायरीन को कोई चिंता नहीं होती, जबकि माध्यम वर्गीय जायरीन के लिए जौ का लंगार महंगा होना परेशानी का सबब बनेगा। आम जायरीन की मांग है कि दरगाह कमेटी ने जौ के लंगर का जो शुल्क बढ़ाया है उसे वापस लिया जाए। दरगाह कमेटी अन्य स्त्रोतों से भी आय बढ़ा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (18-08-17)
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Thursday, 17 August 2017

#2915
तो सचिन पायलट ने अजमेर से उपचुनाव लडऩे से इंकार नहीं किया। पायलट के आने से मुकाबला कड़ा होगा।
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17 अगस्त को समाचार पत्रों में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट का एक बयान छपा है। इस बयान में पायलट ने कहा कि अजमेर में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव में मेरी उम्मीदवारी का फैसला कांग्रेस हाईकमान करेगा। यानि पायलट ने अजमेर से लगातार तीसरी बार चुनाव लडऩे से इनकार नहीं किया है। भाजपा सांसद सांवरलाल जाट के निधन की वजह से अजमेर संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव होने हैं। सब जानते हैं कि कांग्रेस के सोनिया गांधी और राहुल गांधी वाले हाईकमान में पायलट को कितनी चलती है। हाईकमान के महत्त्वपूर्ण निर्णयों में पायलट भी शामिल होते हैं। यदि पायलट को उपचुनाव नहीं लडऩा होता तो वे साफ तौर पर इनकार भी कर सकते थे। लेकिन हाईकमान पर छोड़कर पायलट ने अपनी उम्मीदवारी की संभावनाओं को बरकरार रखा है। यदि पायलट उपचुनाव लड़ते हैं तो यह लगातार तीसरा अवसर होगा, जब पायलट अजमेर से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। पायलट ने पहला चुनाव वर्ष 2009 में जीता था। लेकिन 2014 में पायलट को हार का सामना करना पड़ा। पायलट भले ही मोदी लहर में हारे हो। लेकिन उन्हें हार का मलाल आज तक है। पायलट को लगता था कि उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी, किशनगढ़ में हवाई अड्डा, अजमेर शहर को स्लम फ्री सिटी बनाने जैसे जो बड़े काम किए हैं, उसकी वजह से जनता हर परिस्थितियों में जितवाएगी। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पायलट जब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो उनका सबसे ज्यादा फोकस अजमेर पर ही रहा। आज कांग्रेस के सभी महत्त्वपूर्ण पदों पर पायलट के समर्थक ही बेठे हुए हैं। समर्थकों की माने तो पायलट वर्ष 2014 की हार का बदला भी लेना चाहते हैं। लेकिन पायलट यह भी समझते हैं कि उपचुनाव में उनका मुकाबला सत्ता की ताकत से होगा। चूंकि अगले वर्ष नवम्बर में ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए सरकार हर कीमत पर उपचुनाव को जीतना चाहेगी। यही वजह है कि इन दिनों पायलट अपने समर्थकों के माध्यम से अजमेर संसदीय क्षेत्र का माहौल पता लगाने में लगे हुए हैं। पायलट पिछली हार के कारणों को जानने की भी कोशिश कर रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि पायलट के आने से उपचुनाव में भाजपा को कड़ा मुकाबल करना होगा। 
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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#2914
अजमेर यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष शाहनी और दलाल गिदवानी पर फिर लटकी गिरफ्तारी की तलवार। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत का प्राथ्रना पत्र खारिज। 
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17 अगस्त को हाईकोर्ट के न्यायाधीश पंकज भंडारी ने अजमेर के यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष नरेन शाहनी और दलाल मनोज गिदवानी के अग्रिम जमानत के प्रार्थना पत्र खारिज कर दिए। कोर्ट के इस फैसले से शाहनी और गिदवानी पर एक बार फिर गिरफ्तारी की तलवार लट गई है। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील दीपक चौहान ने कहा कि एसीबी का ट्रेप फेल हो गया था और एसीबी के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिसमें रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ हो। इसके जवाब में शिकायतकर्ता अजमत खां के वकील इन्द्रेश शर्मा का तर्क रहा कि एसीबी ने जो कॉल रिकॉर्डिंग की उसमें भूमि के बदले भूिम के प्रकरण में शाहनी और दलाल गिदवानी के बीच लेन देन का संवाद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश भंडारी ने अग्रिम जमानत के प्रार्थना पत्र खारिज कर दिए। 
एसीबी कोर्ट से जारी है गिरफ्तारी वारंट:
अजमेर स्थित एसीबी कोर्ट ने शाहनी और गिदवानी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी  कर रखे हैं। एसीबी ने पूर्व में ही इन दोनों को आरोपी मानते हुए चार्जशीट पेश कर रखी है। अब दोनों आरोपी या तो एसीबी कोर्ट में सरेंडर करेंगे या फिर अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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#2913
तो यूपी में पुलिस थानों पर जन्माष्टमी पर्व भी मना और कावड़ यात्रा में डीजे भी बजेंगे। सीएम योगी ने कहा हेलीकॉप्टर से फूल भी बरसाओ।
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इसे उत्तर प्रदेश में राज बदलने का संकेत ही माना जाएगा कि इस बार प्रदेश के पुलिस स्टेशनों पर जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इतना ही नहीं सावन और भादवा के माह में निकलने वाली कावड़ यात्राओं में डीजे बजाने की भी छूट दी गई। पिछली अखिलेश यादव की सरकार ने हिन्दुओं के इन दोनों ही धार्मिक कार्य पर रोक लगा दी थी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में प्रेरणा जनसंचार एवं सिद्ध संस्थान के एक कार्यक्रम में कहा कि उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक में अधिकारियों ने जब मेरे सामने जन्माष्टमी पर्व और डीजे बजाने का रोक का मामला रखा तो मैंने पूछा कि क्या सरकार कोई ऐसा आदेश निकाल सकती है, जिसमें सभी धार्मिक समारोहों में माइक पर प्रतिबंध लग जाए। इस पर अधिकारियों ने कहा कि सरकार सभी धार्मिक समारोह पर ऐसी रोक नहीं लगा सकती। इस पर मैंने सवाल किया तो फिर जन्माष्टमी का पर्व और कावड़ यात्रा में डीजे बजाने पर रोक क्यों लगाई गई? मेरे इस सवाल का कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे सका। योगी ने कहा कि यदि हम भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव भी नहीं बना सकते तो फिर इस देश में क्या कर सकते हैं। यही वजह रही कि इस बारे पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस थानों में भी जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया और कावड़ यात्रा में डीजे भी बज रहे हैं। उन्होंने कहा कि कावड़ यात्राओं पर संभव हो तो हेलीकॉप्टर से पूल भी बनाए जाए। योगी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि जब ईद की नमाज सड़क पर हो सकती है फिर कावड़ यात्रा में डीजे अथवा पुलिस थानों में जन्माष्टमी का पर्व क्यों नहीं मनाया जा सकता?
बयान पर विवाद:
योगी के बयान पर विवाद भी शुरू हो गया है, अनेक मुस्लिम नेताओं ने कहा कि योगी अब पूरे यूपी के सीएम हैं। अत: उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। यह माना कि पहले योगी हिन्दू समुदाय के नेता थे, लेकिन अब वे समाज के सभी समुदायों का नेतृत्व करते हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना हे कि योगी ने ऐसी कोई बात नहीं कही जो दो समुदायों में भेदभाव करने वाली हो। असल में तुष्टीकरण के नाम पर भेदभाव तो कांग्रेस, सपा और बसपा की सरकारों में हुआ। योगी तो जब सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार कर रहे हैं। 
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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#2912
राजस्थान में जनता देगी चुनाव में सरकार की सफलता का प्रमाण पत्र। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा। 
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लंबे समय तक राजस्थान में सक्रिय रहे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा कि जनता ही चुनाव में सरकार की सफलता का प्रमाण पत्र देगी। 17 अगस्त को अजमेर में पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिय़ा के निवास पर पत्रकारों से संवाद करते हुए माथुर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सरकार की सफलता का पैमाना चुनाव से ही तय होता है। माथुर से प्रदेश में भाजपा सरकार की सफलता के बारे में सवाल पूछा गया था। माथुर ने कहा कि राजस्थान में अगले वर्ष ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और पत्रकारों को सभी सवालों के जवाब में मिल जाएंगे। माथुर ने पीएम नरेन्द्र मोदी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचानी चाहिए। इस समय जहां देश का नेतृत्व नरेन्द्र मोदी के हाथों में है तो वहीं भाजपा का नेतृत्व अमित शाह के हाथों में सुरक्षित है। वे स्वयं भी अमित शाह के कहने पर ही अपना कामकाज करते हैं। 
यूपी में मौसम जनित है बीमारियां:
भाजपा के यूपी प्रभारी ओम माथुर ने कहा कि हाल ही में गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का जो मामला हुआ है, उसके पीछे मौसम जनित बीमारियां हैं। फिर भी जांच रिपोर्ट के बाद सरकार दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करेगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार सफलतापूर्वक अपना काम कर रही हैं। 
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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#2911
मीडिया में है मेंरा और वसुंधरा राजे का विवाद। तो फिर ओम माथुर से क्यों कतराते हैं भाजपाई?
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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य सभा सांसद ओम माथुर 17 अगस्त को अल्प प्रवास पर अजमेर में पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिय़ा के निवास पर रुके। माथुर ने दोपहर का स्वादिष्ट भोजन भी पहाडिय़ा के निवास पर ही किया। माथुर के आने की सूचना पहाडिय़ा को पत्रकारों के साथ-साथ भाजपा के नेताओं को भी दी। लेकिन अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा को छोड़कर भाजपा का कोई बड़ा नेता अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का स्वागत करने के लिए नहीं आया। माथुर के स्वागत के लिए अधिकांश वो ही नेता उपस्थित थे, जो वर्तमान व्यवस्था में उपेक्षित हैं। इन में पूर्व मंत्री श्रीकृष्ण सोनगरा, पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व सांसद रासा सिंह रावत, राकेश पहाडिय़ा, प्रवीण जैन, पूर्व शहर अध्यक्ष पूर्णाशंकर दशोरा आदि शामिल थे। भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष बी.पी.सारस्वत, शहर अध्यक्ष अरविंद यादव, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, जिला प्रमुख वंदना नोगिया जैसे नेताओं ने माथुर से दूरी बनाए रखी। आमतौर पर जब भाजपा का कोई प्रदेश स्तरीय नेता भी आता है तो कार्यकर्ताओं और नेताओं की भ्ीाड़ लग जाती हैं। लेकिन 17 अगस्त को तो सूचना मिलने के बाद भी अजमेर के भाजपा नेता अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के स्वागत के लिए नहीं आए। माना जाता है कि सीएम वसुंधरा राजे से खींचतान के चलते भाजपा के नेता ओम माथुर से दूरी बनाते हैं। 17 अगस्त को जब पत्रकारों ने माथुर से सीएम वसुंधरा राजे के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया तो माथुर ने अपने अंदाज में कहा कि मेरे और सीएम राजे के बीच मीडिया में ही विवाद है। यानि मेरा सीएम से कोई विवाद नहीं है। यदि ओम माथुर की यह बात सही है तो फिर सवाल उठता है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ओम माथुर से क्यों कतराते हैं? जब भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहा जाता है तो क्या उसके अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के अगमन पर गिने चुने कार्यकर्ता  ही आएंगे? अभी पिछले दिनों ही प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अशोक परनामी के समधी का अजमेर में निधन हुआ तो परनामी को शक्ल दिखाने के लिए भाजपा के नेता श्मशान स्थल तक पहुंच गए। तब किसी भी नेता को कोई जरूरी काम नहीं हुआ। भले ही ऐसे भाजपा नेताओं की पहचान परनामी के समधी जयकिशन जिंदल से नहीं थी। स्वर्गीय जिंदल के परिजनों को इस बात पर आश्चर्य हो रहा था कि जिन भाजपा नेताओं को वे जानते तक नहीं हैं वे भी पूरे दो घंटे श्मशान स्थल पर मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के आगमन पर भाजपा के नेता कोई न कोई बहाना कर नहीं आए। ओम माथुर माने या नहीं, लेकिन यदि सीएम वसुंधरा राजे का डर नहीं होता तो अजमेर के भाजपा नेता स्वागत के लिए लाइन बना कर खड़े रहते।
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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Wednesday, 16 August 2017

#2910
दरगाह कमेटी के लापरवाह पूर्ण रवैए के विरोध में मुस्लिम एकता मंच का प्रदर्शन। 
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16 अगस्त को अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के मुख्य द्वारा पर मुस्लिम एकता मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के लापरवाहपूर्ण रवैए की वजह से दरगाह में आने वाले जायरीन को परेशानी हो रही है। दरगाह कमेटी पर भेदभावपूर्ण तरीके से काम करने का भी आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना रहा कि स्मार्ट सिटी की योजना के अन्तर्गत दरगाह के अंदर भी हैरिटेज लाईटें लग रही थीं, लेकिन दरगाह कमेटी ने लाईटों के काम को रूकवा दिया है। ईद के अवसर पर नमाजियों के लिए धूप से बचने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। जबकि प्रतिवर्ष टेन्ट आदि लगाए जाते हैं। रमजान माह में नगर निगम द्वारा आयोजित रोजा अफ्तार के कार्यक्रम पर भी दरगाह कमेटी ने बेवजह का एतराज जताया है। दरगाह के अंदर आए दिन आवारा जानवरों के घुसने पर भी प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई। प्रदर्शन के बाद दरगाह कमेटी के कार्यालय पहुंच कर कमेटी के अध्यक्ष शेख अलीम और नाजिम आई.बी. पीरजादा को ज्ञापन दिया गया। अध्यक्ष और नाजिम ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में जायरीन की हर सहूलियत का ख्याल रखा जाएगा। ज्ञापन देने वालों में पार्षद अमाद चिश्ती, पीर नफीस मिया चिश्ती, शेखजादा जुल्फीकार, काजी मुनव्वर अली, उस्मान घडिय़ाली आदि शामिल थे। 
एस.पी.मित्तल) (16-08-17)
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#2909
अजमेर का लोकसभा उपचुनाव तय करेगा वसुंधरा राजे का राजनीतिक भविष्य। 
अगले वर्ष नवम्बर में होने वाले हैं विधानसभा के चुनाव। 
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अजमेर में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव के परिणाम राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा। मालूम हो कि भाजपा सांसद सांवरलाल जाट के निधन की वजह से अजमेर में उपचुनाव होने हैं। उम्मीद है कि आगामी नवम्बर में गुजरात विधानसभा के साथ ही अजमेर के उपचुनाव भी करवा दिए जाए। वैसे तो राजस्थान में भी अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। लेकिन सांसद जाट के निधन की वजह से प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को फाइनल से पहले सेमीफाइनल मैच अजमेर में खेलना पड़ेगा। कांग्रेस के पास तो गंवाने के लिए कुछ भी नहीं है। क्योंकि गत चुनावों मे ंकांग्रेस प्रदश्ेा की सभी 25 सीटें हार चुकी हैं। लेकिन भाजपा तो चुनावी सफलता के शीर्ष पर बैठी हुई है। सीएम वसुंधरा राजे को लेकर कई बार नाराजगी सामने आई है। अभी हाल ही में आनंदपाल प्रकरण को लेकर राजपूत समाज में नाराजगी है। आरोप है कि अभी भी हजारों राजपूत युवक जेलों में बंद हैं। राज्य कर्मचारी पिछले कई दिनों से सामूहिक अवकाश पर हैं तो अजमेर में विद्युत वितरण निगम के 200 तकनीकी कर्मचारी अपने परिजनों के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। निगम के एमडी मेहराम विश्नाई ने 200 कर्मचारी के तबादले अजमेर जिले से बाहर कर दिए है। इस मामले में गंभीर बात तो यह है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े श्रमिक संघ की भी सरकार परवाह नहीं कर रही है। अजमेर में आठ में से सात भाजपा के विधायक हैं। इनमें से 4 मंत्री स्तर की सुविधाएं ले रहे हैं। लेकिन अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायकों के प्रति नाराजगी है। हालांकि कोई एक चुनाव किसी मुख्यमंत्री का राजनीतिक भविष्य तय नहीं करता है, लेकिन राजस्थान में अगले वर्ष ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए सीएम राजे के लिए अजमेर का उपचुनाव बहुत मायने रखता है। यदि इस चुनाव में भाजपा की हार होती है तो इसका सीधा असर विधनसभा के चुनाव पर पड़ेगा। ऐसे में सीएम राजे को लेकर भाजपा हाईकमान कोई बड़ा फैसला ले सकता है। कांग्रेस इस उपचुनाव को लेकर बहुत गंभीर है। कांग्रेस का प्रयास है किसी सरकार और भाजपा विधायकों के प्रति जो नाराजगी है। उसे उपचुनाव में भुनाया जाए। राजपूत समाज ने तो अभी से ही अजमेर में हलचल शुरू कर दी है। अजमेर संसदीय क्षेत्र में कोई 2 लाख राजपूत मतदाता हैं। आंनदपाल प्रकरण के समय आंदोलन में अजमेर प्रमुख केन्द्र रहा। जिन भाजपा विधायकों ने आंदेालन के दौरान सरकार की तरफदारी की उन्हें अब अपने विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत मतदाताओं का भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा। 
एस.पी.मित्तल) (17-08-17)
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#2909
अजमेर का लोकसभा उपचुनाव तय करेगा वसुंधरा राजे का राजनीतिक भविष्य। 
अगले वर्ष नवम्बर में होने वाले हैं विधानसभा के चुनाव। 
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अजमेर में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव के परिणाम राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा। मालूम हो कि भाजपा सांसद सांवरलाल जाट के निधन की वजह से अजमेर में उपचुनाव होने हैं। उम्मीद है कि आगामी नवम्बर में गुजरात विधानसभा के साथ ही अजमेर के उपचुनाव भी करवा दिए जाए। वैसे तो राजस्थान में भी अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। लेकिन सांसद जाट के निधन की वजह से प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को फाइनल से पहले सेमीफाइनल मैच अजमेर में खेलना पड़ेगा। कांग्रेस के पास तो गंवाने के लिए कुछ भी नहीं है। क्योंकि गत चुनावों मे ंकांग्रेस प्रदश्ेा की सभी 25 सीटें हार चुकी हैं। लेकिन भाजपा तो चुनावी सफलता के शीर्ष पर बैठी हुई है। सीएम वसुंधरा राजे को लेकर कई बार नाराजगी सामने आई है। अभी हाल ही में आनंदपाल प्रकरण को लेकर राजपूत समाज में नाराजगी है। आरोप है कि अभी भी हजारों राजपूत युवक जेलों में बंद हैं। राज्य कर्मचारी पिछले कई दिनों से सामूहिक अवकाश पर हैं तो अजमेर में विद्युत वितरण निगम के 200 तकनीकी कर्मचारी अपने परिजनों के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। निगम के एमडी मेहराम विश्नाई ने 200 कर्मचारी के तबादले अजमेर जिले से बाहर कर दिए है। इस मामले में गंभीर बात तो यह है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े श्रमिक संघ की भी सरकार परवाह नहीं कर रही है। अजमेर में आठ में से सात भाजपा के विधायक हैं। इनमें से 4 मंत्री स्तर की सुविधाएं ले रहे हैं। लेकिन अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायकों के प्रति नाराजगी है। हालांकि कोई एक चुनाव किसी मुख्यमंत्री का राजनीतिक भविष्य तय नहीं करता है, लेकिन राजस्थान में अगले वर्ष ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए सीएम राजे के लिए अजमेर का उपचुनाव बहुत मायने रखता है। यदि इस चुनाव में भाजपा की हार होती है तो इसका सीधा असर विधनसभा के चुनाव पर पड़ेगा। ऐसे में सीएम राजे को लेकर भाजपा हाईकमान कोई बड़ा फैसला ले सकता है। कांग्रेस इस उपचुनाव को लेकर बहुत गंभीर है। कांग्रेस का प्रयास है किसी सरकार और भाजपा विधायकों के प्रति जो नाराजगी है। उसे उपचुनाव में भुनाया जाए। राजपूत समाज ने तो अभी से ही अजमेर में हलचल शुरू कर दी है। अजमेर संसदीय क्षेत्र में कोई 2 लाख राजपूत मतदाता हैं। आंनदपाल प्रकरण के समय आंदोलन में अजमेर प्रमुख केन्द्र रहा। जिन भाजपा विधायकों ने आंदेालन के दौरान सरकार की तरफदारी की उन्हें अब अपने विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत मतदाताओं का भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा। 
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#2908
संघ प्रमुख मोहन भागवत को केरल के एक प्राइवेट स्कूल में ध्वजारोहण करने से रोकना कितना उचित। क्या यह वामपंथी सरकार की द्वेषता नहीं है?
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केरल में वामपंथी सरकार किस राजनीतिक द्वेषता के साथ काम कर रही है इसका उदाहरण स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त को केरल के पलक्कर इलाके में देखने को मिला। इस क्षेत्र के करनाकियामम के एक प्राइवेट स्कूल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत को स्वाधीनता दिवस पर प्रात:9 बजे ध्वजारोहण करना था, लेकिन 14 अगस्त की रात को ही जिला प्रशासन ने स्कूल के संचालक को नोटिस जारी करते हुए कहा कि स्कूल में कोई जनप्रतिनिधि या फिर स्कूल के प्रमुख ही ध्वजारोहण कर सकते हैं। इस नोटिस में यह भी कहा गया कि चूंकि इस स्कूल को राज्य सरकार से आर्थिक मदद मिलती है, इसलिए सरकार का आदेश मानना अनिवार्य है। यानि संघ प्रमुख मोहन भगवान से ध्वजारोहण न करवाया जाए। लेकिन स्कूल संचालक ने प्रशासन के इस नोटिस को दरकिनार कर संघ प्रमुख से ही ध्वजारोहण करवाया। संचालक को भी पता है कि अब केरल की वामपंथी सरकार उसे बेवजह परेशान करेगी। सब जानते हैं कि केरल में सरकारी संरक्षण में संघ के कार्यकर्ताओं की हत्याएं की जा रही है। केरल के हालातों को देखते हुए ही संघ प्रमुख ने केरल के एक प्राइवेट स्कूल में ध्वजारोहण करने का निर्णय लिया था। सवाल उठता है कि आखिर संघ प्रमुख को ध्वजारोहण करने से क्यों रोका गया? क्या यह वामपंथी सरकार की राजनीतिक द्वेषता नहीं है? केरल की वामपंथी सरकार को चाहिए कि वह बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के नागरिकों से समान व्यवहार करें। 
एस.पी.मित्तल) (16-08-17)
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Tuesday, 15 August 2017

#2906
तो अशोक गहलोत के समर्थक को मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने सम्मानित नहीं होने दिया। पाली के समारोह में देखने को मिली राजनीतिक द्वेषता।

पाली जिले के बर कस्बे के समाजिक कार्यकत्र्ता महेन्द्रसिंह चौहान को स्वाधीनता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को जिला स्तर पर सम्मानित होना था। चूंकि जिला कलेक्टर सुधीर शर्मा ने बाकायदा लिखित सूचना देकर आमंत्रित किया था इसलिए चौहान सजधज कर पाली के जिलास्तरीय समारोह में पहुंच गए, लेकिन चौहान उस समय अवाक रह गए जब उन्हें सम्मानित करने से इंकार कर दिया गया। पाली के प्रशासन ने चौहान से माफी मांगते हुए अपनी लाचारी जता दी। जानकार सूत्रों के अनुसार पाली जिले के जैतारण से भाजपा विधायक और प्रदेश के जल संसाधन मंत्री सुरेन्द्र गाोयल के विरोध की वजह से चौहान का नाम ऐन मौके पर सम्मानित होने वाले व्यक्तियों की सूची से हटा दिया गया। गोयल ही पाली के जिला स्तरीय समारोह के मुख्य अतिथि थे, इसलिए किसी भी अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं कि वह चौहान का पक्ष रख सके। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत से व्यक्तिगत संबंध होने के कारण चौहान को सम्मानित नहीं किया गया। गहलोत कई बार चौहान के निवास स्थान पर आ चूके है। चौहान के पिता देवराव चौहान रायपुर पंचायत समिति के दो बार प्रधान रहें है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वच्छता अभियान में रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने कि लिए ही चौहान का चयन सम्मान के लिए किया गया था। चौहान ने मंत्री सुरेन्द्र गोयल पर राजनीतिक द्वेषता का आरोप लगाया है।
एस.पी.मित्तल) (15-08-17)
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#2905
तो क्या कश्मीरी लग पायेंगे प्रधानमंत्री के गले ? पीडीपी तो पहले ही गले में लटकी हुई है।
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से चौथी बार देश को संबोधित किया। देशवासियों को उम्मीद थी कि पीएम चीन और पाकिस्तान से चल रहे ठकराव पर कुछ बोलेंगे, लेकिन पीएम ने हमारी सेना को सक्षम बताते हुए कहा कि कश्मीर में गोली और गाली से समस्या का समाधान नहीं होगा। बल्कि कश्मीरियों को गले लगाने से समाधान निकलेगा। इसमें कोई दो राय नहीं की पीएम ने अपनी ओर से एकबार फिर सकारात्मक पहल की है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या कश्मरी गले लगेंगे ? सब जानते हैं कि दो वर्ष पहले पीएम मोदी की पहल पर ही भाजपा ने जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन किया। जबकि विपक्ष में रहते हुए भाजपा के नेता पीडीपी को कश्मीर के अलगाववादियों की पार्टी बताते रहे। पीएम मोदी ने इसी उम्मीद से पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार बनायी कि कश्मीरी अलगाववाद का रास्ता छोड़कर देश की मुख्य धारा से जुड़ेंगे। लेकिन आज पूरा देश देख रहा कि अलगाववादियों के रवैए में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उल्टे सीएम महबूबा मुफ्ती भी कई अवसरों पर अलगाववादियों की भाषा बोलती रही है। अभी हाल ही में महबूबा में कहा कि यदि अनुछेद 370 के साथ छेड़छाड़ की गई तो कश्मीर में तिरंगे को क ोई कंधे देने वाला भी नहीं मिलेगा। सवाल उठता है कि जब भाजपा के सर्मथन से पीडीपी की सरकार चलाने वाली महबूबा मु$फ्ती ही गले लगने को तैयार नहीं है तो फिर आतंकवाद में लिप्त कश्मीरियों से क्या उम्मीद की जा सकती है पीएम मोदी ने कहा कि मुटठी भर लोग कश्मीर का माहौल बिगाड़ रहे है। जो कश्मीरी आतंकवादियों की मुटठी से बाहर है वे गले क्यों नहीं लगते। उम्मीद की जानी चाहिए कि पीएम की अपील के सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे। 
एस.पी.मित्तल) (15-08-17)
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#2903
शहीद भगतसिंह नौजवान सभा ने बांटे 2500 हैलमेट। ऐतिहासिक और रिकार्ड वाली रही वाहन रैली।

15 अगस्त को देश में संभवत यह पहला अवसर रहा जब अजमेर शहर में शहीद भगतसिंह नौजवान सभा की ओर से निकाली गई वाहन रैली में करीब 2500 हैलमेट निशुल्क बांटे गए। इस अवसर पर कलेक्टर गौरव गोयल,मेयर धर्मेन्द्र गहलोत डिप्टी मेयर संपत सांखला, आदि ने रेैली के आयोजकों को बधाई दी। यह रैली 71 वें स्वतंत्रता दिवस को अजमेर के सिने वल्र्ड सिनेमा घर से रवाना होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए बजरंगगढ़ चौराहा स्थित विजय स्मारक पर पहुंची। यहां पर एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम हुआ। रैली में ढ़ाई हजार युवक जब लाल रंग का हैलमेट पहन कर शामिल हुए तो न केवल सुरक्षा का संदेश गया बल्कि देशभक्ति के माहौल में चार चांद लग गए। रैली से जुड़े आयोजक विजय तत्ववेदी, सुरेश शर्मा, प्रमोद जैन, ने बताया की युवाओं में हैलमेट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही रैली में ढ़ाई हजार हैलमेट निशुल्क दिए गए। इतनी बढ़ी संख्या में हैलमेट उपलब्ध करवाने में समृद्धि बिल्डर के पवित्र कोठारी, कादरी बिल्डर के हाजी मुस्मकीम, विनायक ज्वैलर्स के राजेश सोनी, सैमी इंजीनिंयरिंग के गुरविंदर सिंह, एम्बेसी होटल के अमित जैन, सेवन डी सिनेमा के प्रतीक अग्रवाल, मणिरत्नम ज्वैलर्स के सुशील सोनी, मुन्ना ओटो मोबाइल का सहयोग रहा। कार्यक्रम में जी राजस्थान चैनल ने मीडिया पार्टनर की भूमिका निभायी। रैली के शुभांरभ पर रेडियो जाकी प्रिया, अजय, और अशुंमान ने अपने निराले अंदाज में युवाओं का मनोरंजन किया। रैली से पहले हैलमेट वितरण का कार्य भी अनुशासित तरीके से किया गया।
अगले वर्ष पांच हजार हैलमेट का लक्ष्य।
समृद्धि बिल्डर के पवित्र कोठारी और विनायक ज्वेलर्स के राजेश सोनी ने कहा कि आज अनेक वाहर चालकों को हैलमेट नहीं मिल सकें हांलाकि ढाई हजार हैलमेट वितरित कर दिए गए थे। अगले वर्ष 15 अगस्त को पांच हजार हैलमेट वितरित किए जायेंगे। 
एस.पी.मित्तल) (15-08-17)
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#2904
वतंत्रता सैनानी के पैरों में बैठे अजमेर के कलेक्टर और गौरव गोयल और अपने दोनों बेटों को बताया आजादी का महत्व।

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का जिला स्तरीय समारोह अजमेी के पटेल मैदान पर आयोजित हुआ। इस समारोह में स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ध्वजारोहण किया, लेकिन जिला कलेक्टर गौरव गोयल भी परंपरागत राजस्थानी वेशभूषा में उपस्थित रहें। समारोह समाप्ति पर कलेक्टर गोयल अपने दोनों छोटे बेटों को एक स्वंत्रता सैनानी के पास ले गए। कलेक्टर को देखकर स्वतंत्रता सैनानी खड़े हो गए, लेकिन गोयल ने कलेक्टर के रूतबे को हटाकर स्वयं स्वतंत्रता सैनानी की कुर्सी के नीचे बैठ गए। गोयल ने अपने दोनों बेटों से कहा कि इन जैसे स्वतंत्रता सैनानियों के कारण ही देश को आजादी मिली है। भले ही दोनों बेटे छोटे हो, लेकिन गोयल ने अपनी तरफ से अपने पुत्रों को संस्कार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक कलेक्टर का स्वतंत्रता सैनानी के पैरों में बैठना यह दर्शाता है कि गोयल के मन में स्वतंत्रता सैनानियों के प्रति कितना महत्व है। कलेक्टर गोयल जब पटेल मैदान पर स्वतंत्रता सैनानी के पैरों में अपने दोनों पुत्रों के साथ बैठे हुए तभी प्रेसफोटोग्रार्फर आनंद शर्मा ने क्लिक कर लिया। कलेक्टर के इस फोटों को मेरी फेसबुक, फेसबुक पेज, ब्लाग, वेबसाइट आदि पर देखा जा सकता है। 
एस.पी.मित्तल) (15-08-17)
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Monday, 14 August 2017

#2902
बेटा इतना गिर चुका है कि अब मैं शक्ल देखना नहीं चाहता। रेमण्ड के मालिक विजयपत सिंघानिया ने बयां किया अपना दर्द।
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देश के सुप्रसिद्ध औद्योगिक घराने रेमण्ड के मालिक विजयपत सिंघानिया ने कहा है कि मेरा बेटा गौतम सिंघानिया इतना गिर चुका है कि अब मैं उसकी शक्ल देखना नहीं चाहता। 14 अगस्त को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बुजुर्ग सिंघानिया ने कहा कि मैंने मुम्बई स्थित संपत्ति को लेकर न्यायालय में जो वाद दायर किया है, उसमें अदालत ने मुझे अपने बेटे से बात करने के लिए कहा है। मैं अदालत के फैसले का सम्मान तो करता हूं, लेकिन मैं अब अपने बेटे गौतम सिंघानिया की शक्ल देखना पसंद नहीं करता। मैंने अपने वकीलों से कहा है कि वे कोर्ट के आदेश के अनुरुप मेरे बेटे से बात करें। बुजुर्ग सिंघानिया ने इस बात पर अफसोस जताया कि जिस बेटे को मैंने अपना सब कुछ दे दिया वहीं बेटा आज मुझ पर लांछन लगा रहा है। वो मुझे पूरी तरह निचोडऩा चाहता है। मेरे साथ जो गुजरी है वह किसी भी माता-पिता के साथ नहीं गुजरे। मैं माता-पिता को यह सलाह देना चाहता हूं कि वह अपने बेटे की अच्छी तरह देखभाल करें, प्यार करें, लेकिन सब कुछ आंख बंद कर न करें। अपने भविष्य का भी ख्याल रखें। आज मैं बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा हूं और मेरे बेटे गौतम सिंघानिया ने मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया है। मुझे बेहद मजबूरी में अदालत की शरण लेनी पड़ी है। मेरा कारोबार करोड़ों रुपयों का है, लेकिन मुझे मोहताज होना पड़ रहा है। मालूम हो कि रेमण्ड के अध्यक्ष की हैसियत से गौतम सिंघानिया ने संपूर्ण कारोबार पर एकाधिकार कर लिया है। गौतम का कहना है कि उसके पिता वक्त के साथ नहीं चल रहे है, इसलिए उन्हें बुरे दिन देखने पड़ रहे है। मुम्बई की एक बिल्डिंग में एक हिस्से को लेकर ही बुजुर्ग सिंघानिया ने अदालत की शरण ली है।
एस.पी.मित्तल) (14-08-17)
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#2901
जब अनुच्छेद 370 का लाभ लेते हंै तो फिर देशभक्ति क्यों नहीं दिखाते कश्मीरी। अब उमर अब्दुल्ला ने चेताया।
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जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है, तब 14 अगस्त को जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला का एक बयान सामने आया है। उमर ने कहा है कि यदि अनुच्छेद 370 को खत्म किया गया तो अन्य राज्यों के लोग कश्मीर आकर संपत्तियां खरीदेंगे और अपने बच्चों के लिए शैक्षणिक स्कॉलरशिप हांसिल करेंगे। राहत सामग्री लेंगे और सरकारी नौकरियां भी ले लेंगे। यानि उमर अब्दुल्ला यह मानते है कि अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीरी अतिरिक्त सुविधाएं प्राप्त कर रहे हंै। जब कि ऐसी सुविधाएं देश के अन्य नागरिकों को नहीं मिल रही। सवाल उठता है कि जब विशेष सुविधाएं ली जा रही हैं तो फिर कश्मीरी देशभक्ति क्यों  नहीं दिखाते? उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूख अब्दुल्ला बताएं कि जो कश्मीरी हमारे सुरक्षा बलो पर पत्थर फैंकते है उन्हें अनुच्छेद 370 का लाभ दिया जाए? इसे देश की व्यवस्था का मजाक ही कहा जाएगा जो कश्मीरी आतंकवादियों का साथ देते हैं वो कश्मीरी ही विशेष सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं। पिता-पुत्र को यह समझना चाहिए कि आज कश्मीरियों को जो सुविधाएं मिली हुई हैं, वह देश के आम नागरिक से टैक्स वसूल कर दी जाती है। यानि कश्मीरियों का बोझ देश का आम नागरिक उठा रहा है। यह हालात तब है जब अलगाववादियों ने चार लाख हिन्दुओंं को पीट-पीटकर कश्मीर से भगा दिया। फारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला कश्मीरियों के लिए अनुच्छेद 370 को लागू रखने की बात तो कहते है, लेकिन अपने ही देश के शरणार्थी बने हिन्दुओं को वापस कश्मीर में बसाने की बात नहीं करते। यदि देश के एक हिस्से में हिन्दू समुदाय के लोग नहीं रह सकते तो कश्मीरी को भी अनुच्छेद 370 का लाभ नहीं मिलना चाहिए। अब्दुल्ला परिवार के शासन में ही हिन्दुओं को कश्मीर से भगाया गया। क्या हिन्दुओं को कश्मीर का नागरिक होने के नाते अनुच्छेद 370 का लाभ नहीं मिलना चाहिए? इसे बेहद शर्मनाक कहा जाएगा कि 4 लाख हिन्दुओं को भगा कर अब्दुल्ला परिवार आज कश्मीरियों के लिए 370 की वकालत कर रहे है।
एस.पी.मित्तल) (14-08-17)
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#2900
ख्वाजा सहाब की दरगाह से लेकर विजय स्मारक तक भारत माता की जय की गूंज।  अजमेर में चारों तरफ देश भक्ति का माहौल। पर फीकी रही भाजपा की रैली।
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देश की आजादी की 71वीं सालगिराह पर अजमेर में 14 अगस्त को ही देश भक्ति का माहौल देखा गया। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से लेकर बजरंगगढ़ चौराहा स्थित विजय स्मारक तक भारत माता की जय की गूंज होती रही। 14 अगस्त की सुबह ऊंटड़ा स्थित मदरसे के बच्चे ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर एकत्रित हुए। यहां बच्चों ने अपने हाथ में तिरंगा झंडा लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए। हाजी महमूद खान की ओर से सभी को तिरंगे झंडे वितरित किए गए। दरगाह के बाहर आमतौर पर कौमी एकता का माहौल रहता है। लेकिन आज देशभक्ति का माहौल प्रभावी तरीके से देखने को मिला। इस अवसर पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश गौरा, सिटी मजिस्टेट अरविंद सेंगवा, डीएसपी ओम प्रकाश मीणा, सीआई मानवेन्द्र सिंह, मौलाना अयूब कासमी, दरगाह कमेटी के सहायक नाजिम डॉ. आदिल, अब्दुल्ज रज्जाक भाटी, पीर नफीस मियां चिश्ती, दैनिक भास्कर के चीफ रिपोर्टर सुरेश कासलीवाल, दैनिक पंजाब केसरी संवाददाता नवाब हिदायतउल्ला आदि भी उपस्थित रहे। बाद में सभी लोगों ने दरगाह से देहली गेट तक पैदल मार्च भी किया। दरगाह जियारत के लिए आने वाले जायरीन ने भी देश भक्ति के नारे लगाए। 
भाजपा की तिरंगा रैली:
शहर भाजपा की ओर से भी तिरंगा रैली निकाली गई। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, शहर अध्यक्ष अरविंद यादव मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, एडीए अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा, सोमरत्न आर्य के नेतृत्व में युवा मोर्चे की यह रैली शहर के विभिन्न मार्ग से होते हुए सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय पर समाप्त हुई। हालांकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोशीले नारे लगाए। लेकिन इस रैली में कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत कम थी। चूंकि तिरंगा रैली निकालने का आह्वान राष्ट्रीय स्तर पर था। इसलिए भाजपा ने रैली निकालने की खानापूर्ति की। बताया जा रहा है कि भाजपा की रैली को पार्टी के दोनों विधायकों का समर्थन नहीं मिला। शहर अध्यक्ष यादव ने अपने बूते पर ही रैली निकाली। 
अखंड भारत संकल्प समिति की रैली:
अखंड भारत संकल्प समिति अजयमेरु की ओर से भी 14 अगस्त को एक विशाल तिरंगा रैली निकाली गई। मां भारती गु्रप से जुड़े युवाओं ने रैली में जमकर देशभक्ति के नारे लगाए। इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम युवक भी शामिल हुए। रैली को स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी, जिला कलेक्टर गौरव गोयल, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, एडीए अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा आदि ने झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय से रवाना होकर केसरगंज, नला बाजार होते हुए जब ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर पहुंची तो जोरदार पुष्प वर्षा के साथ देशभक्ति के नारे लगाए गए। रैली का समापन बजरंगगढ़ चौराहा स्थित विजय स्मारक पर हुआ। यहां रैली को संबोधित करते हुए युवा नेता सुभाष काबरा ने कहा कि आज देशभक्ति की जरुरत है। विदेशी ताकतें देश को तोडऩा चाहती हैं। ऐसे में देश के सभी नागरिकों को मिलकर देशभक्ति दिखानी चाहिए। मां भारती ग्रुप के प्रमुख पवन ढिल्लीवाल ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद, अशफाख उल्ला खां जैसे क्रांतिकारियों के परिवारों के सदस्यों का भी स्वागत किया गया। रैली में कोई तीन हजार युवाओं ने भाग लिया। 
स्कूली बच्चों ने भी निकाली रैली:
14 अगस्त को अजमेर शहर के विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने भी रैली निकाल कर देशभक्ति का परिचय दिया। फॉयसागर रोड स्थित ब्लोसम स्कूल के बच्चों ने शानदार रैली निकाली। इस रैली में बैंड, घोड़े, वाहन आदि भी शामिल हुए। बच्चों ने देशभक्ति के नारे लगाए। 14 अगस्त को दिनभर विजय स्मारक पर देशभक्ति का माहौल बना रहा। 
रैली में मिलेंगे नि:शुल्क हेलमेट:
15 अगस्त को अजमेर में भगत सिंह नौजवान सभा की ओर से जो वाहन रैली निकाली जाएगी उसमें शामिल सभी वाहन चालकों को हेलमेट नि:शुल्क दिया जाएगा। कोई ढाई हजार हेलमेट दिए जाने का लक्ष्य है। इस मौके पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। माना जा रहा है कि देश में यह पहला अवसर होगा, जब 2 हजार से ज्यादा हेलमेट नि:शुल्क दिए जाएंगे। जश्न-ए-आजादी की यह वाहन रैली दोपहर 3:30 बजे कोटड़ा स्थित सिनेवल्र्ड सिनेमा घर से रवाना होकर विजय स्मारक पर पहुंचेगी। 
जाग्रति रैली:
15 अगस्त को दोपहर एक बजे ट्राम्बे स्टेशन से ऑक्सफो-कैम्ब्रिज स्कूल की ओर से जाग्रति रैली निकाली जाएगी। इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे भाग लेंगे। स्कूल से जुड़े चन्द्रभान प्रजापति ने बताया कि रैली में 60 घोड़े, 100 ई-रिक्शा आदि भी शामिल होंगे। 
एस.पी.मित्तल) (14-08-17)
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#2899
थानेदार महावीर सिंह को मिलेगा राष्ट्रपति पुलिस पदक।
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अजमेर के सदर कोतवाली पुलिस स्टेशन पर लम्बे समय तक तैनात रहे सब इंस्पेक्टर महावीर सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा जाएगा। महावीर सिंह इस समय नागौर  जिले के थांवला पुलिस स्टेशन के प्रभारी हंै। पुलिस में नवाचार करने और ईमानदारी दिखाने के लिए ही महावीर सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक देने की घोषणा की गई है। यह पुलिस पदक महावीर सिंह को अगले वर्ष गणतंत्र दिवस पर महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों दिया जाएगा। वर्ष 2006 में भी सिंह को पुलिस पदक से नवाजा जा चुका है। 37 वर्षों की पुलिस सेवा में सिहं सबसे अधिक समय तक अजमेर सदर कोतवाली पर ही नियुक्त रहे। कोतवाली में सिपाही के पद पर आने के बाद सिंह ने हैड कांस्टेबल, एएसआई और एसआई के पद पर पदोन्नति ली। सिंह भीलवाड़ा के रायला, जयपुर के मनोहरपुरा और नागौर के पिलवा थाने के भी प्रभारी रहे। सिंह को उनके मोबाइल नम्बर 9413412345 पर बधाई दी जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (14-08-17)
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Sunday, 13 August 2017

#2898
14 अगस्त को अजमेर में निकलेगी तिरंगा रैली। क्रांतिकारियों के परिजन भी भाग लेंगे। 
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अखण्ड भारत संकल्प समिति अजयमेरु की ओर से 14 अगस्त को अजमेर शहर में तिरंगा रैली निकाली जाएगी। समिति के संयोजक सुनील दत्त जैन, सह संयोजक सुभाष काबरा और पवन ढिल्लीवाल ने बताया कि यह रैली 14 अगस्त को सायं 4 बजे सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय से आरंभ होकर केसरगंज, मदारगेट, नला बाजार, दरगाह बाजार, नया बाजार चौपड़, चूड़ी बाजार, आगरा गेट होते हुए बजरंग गढ़ स्थित विजय स्मारक पर पहुंचेगी। रैली में 2 हजार से भी जयादा युवक दुपहिया वाहनों पर सवार होंगे। इस रैली का नेतृत्व शहीद भगत सिंह, सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद, असफाकउल्ला खां आदि के परिवार से जुड़े सदस्य करेंगे। रैली का जगह-जगह स्वागत किया जाएगा। इस रैली का उद्देश्य अखण्ड भारत को बनाना है। विजय स्मारक पर शहीदों के परिजनों का सम्मान भी किया जाएगा। रैली में अंतर्राष्ट्रीय धावक बादल सिंह तंवर की उल्टी दौड़ आकर्षण का केन्द्र होगी। रैली की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। 
(एस.पी.मित्तल) (13-08-17)
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#2897
अजमेर उपचुनाव में धौलपुर फार्मूला अपना सकती है भाजपा। दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है। 
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भाजपा के सांसद सांवरलाल जाट के निधन के बाद होने वाले अजमेर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा धौलपुर का फार्मूला अपना सकती है। यानि स्वर्गीय जाट के परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हाल ही में सम्पन्न हुए धौलपुर विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व विधायक बी.एल. कुशवाह की पत्नी शोभारानी को ही उम्मीदवार बनाया और जातीय समीकरण में भाजपा की जीत हो गई। भाजपा ने शोभारानी को तब उम्मीदवार बनाया जब उनके पति बी.एल. कुशवाह को अदालत ने हत्या के आरोप में दोषी ठहरा दिया। सजा के बाद कुशवाह का विधायक पद भी चला गया। लेकिन जब भाजपा ने कुशवाह की पत्नी शोभारानी को उम्मीदवार बनाया तो विधायक का तमगा वापस कुशवाह परिवार में आ गया। हालांकि अजमेर में धौलपुर जैसे हालात नहीं है क्यों कि स्वर्गीय सांवरलाल जाट का अजमेर में लम्बा राजनीतिक सफर रहा है। चूंकि अगले वर्ष नवंबर में ही राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना चाहती, जिसमें जोखिम हो। भाजपा के भी बड़े नेताओं का मानना है कि यदि स्वर्गीय जाट के परिवार से किसी को उम्मीदवार बनाया जाता है तो भाजपा की जीत हो सकती है। लेकिन वहीं भाजपा का एक धड़ा यह मानता है कि स्वर्गीय जाट के परिवार के किसी सदस्य को लोकसभा के बजाए विधानसभा के चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाए। स्वर्गीय जाट ने भी नसीराबाद के उपचुनाव में उनके पुत्र रामस्वरूप लाम्बा को टिकट देने की मांग की थी, लेकिन तब भाजपा हाईकमान ने साफ इंकार कर दिया। लेकिन तब भाजपा को नसीराबाद उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसलिए भाजपा इस बार जाट की लोकप्रियता की अनदेखी नहीं करना चाहती है। भाजपा स्वर्गीय जाट की बेटी सुमन चौधरी के नाम पर भी विचार कर सकती है। श्रीमती सुमन के ससुर मदन गोपाल चौधरी अजमेर सेन्ट्रल कॉ-आपरेटिव बैंक के अध्यक्षक है। चौधरी भी इस प्रयास में है कि उनकी पुत्रवधु को उम्मीदवार बना दिया जाए। हालांकि अभी स्वर्गीय जाट के परिवार ने उम्मीदवारी को लेकर दावेदारी नहीं जताई है। लेकिन राजनीति का दस्तुर ही ऐसा है कि कोई पद खाली होने के साथ ही दावेदार सक्रिय हो जाते हैं। चूंकि जिले भर में स्वर्गीय जाट की लोकप्रियता रही। इसलिए जाट समुदाय का कोई दूसरा नेता फिलहाल सामने नहीं आ रहा है। ऐसा नहीं कि जाट समुदाय का कोई नेता उपचुनाव लडऩा नहीं चाहता। लेकिन इच्छुक नेता भी स्वर्गीय जाट के परिवार में से किसी को भी उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है। लेकिन यदि किन्हीं कारणों से स्वर्गीय जाट के परिवार में से उम्मीदवार नहीं बनाया जाता है तो भाजपा में अनेक जाट नेता चुनाव लडऩे के इच्छुक है। ऐसे में दूसरी जातियों के नेता भी दावेदारी जता सकते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों से जाट के पुत्र रामस्वरूप लाम्बा राजनीति में सक्रिय रहे। स्वर्गीय जाट का स्वास्थ्य खराब होने की वजह से बैठकों में लाम्बा ही सांसद प्रतिनिधि के तौर पर भाग ले रहे थे। स्वर्गीय जाट के समर्थक भी चाहते हैं कि लाम्बा को भाजपा का उम्मीदवार बनाया जाए। 
(एस.पी.मित्तल) (13-08-17)
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#2896
तो उदयपुर के रेयान स्कूल में 14 अगस्त को ही मनेगा स्वतंत्रता दिवस। 
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राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी बार-बार यह दावा करते हैं कि प्राईवेट स्कूलों पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि प्राईवेट स्कूल के संचालक सरकार के नियमों का पालन करंे। लेकिन हकीकत यह है कि प्राईवेट स्कूल अपने नजरिए से ही संचालित होते हैं। इसका ताजा उदाहरण रेयान इंटरनेशनल स्कूल की उदयपुर ब्रांच का है। इस स्कूल के प्रिंसिपल ने बाकायदा एक लिखित सूचना जारी कर कहा है कि 15 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व की वजह से स्कूल में अवकाश रहेगा। इसलिए स्वतंत्रता दिवस के सभी कार्यक्रम 14 अगस्त को ही होंगे। 14 अगस्त को भी स्कूल प्रात: 7:40 से दोपहर 1:40 बजे तक चलेगा। सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन की तरह नोट बुक आदि साथ में लाना होगा। यानि जब पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जाएगा, तब रेयान स्कूल में अवकाश रहेगा। उदयपुर के रेयान स्कूल के प्रबंधक ने यह जता दिया है कि वे सरकार के नियम-कायदों से नहीं बल्कि अपने नजरिए से स्कूल को चलाते हैं। यहां तक की देश की आजादी का दिन भी बदल सकते  हैं। 
एस.पी.मित्तल) (13-08-17)
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#2895
अजमेर के सेटेलाइट अस्पताल में नहीं हो सका रक्तदान। तैयारियां धरी रह गईं। 
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13 अगस्त को अजमेर कांग्रेस के युवा नेता हेमन्त भाटी के जन्म दिन मौके पर रक्तदान करने के लिए आदर्श नगर स्थित सेटेलाइट अस्पताल में कोई डेढ़ सौ युवक एकत्रित हो गए। लेकिन रक्त एकत्रित करने वाली चिकित्सा टीम के नहीं आने से रक्तदान नहीं हो सका। युवा शक्ति संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना था कि 13 अगस्त को 150-200 युवक रक्त करेंगे, इसकी सूचना अस्पताल के प्रभारी को पहले ही दे दी गई थी। लेकिन फिर भी रक्त लेने के लिए इंतजाम नहीं किए गए। यदि रक्त एकत्रित किया जाता तो इससे सरकारी अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीजों को ही लाभ मिलता। सरकार एक ओर रक्तदान के लिए जागरूकता का अभियान चलाती है तो दूसरी ओर जब रक्तदाता सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं तो रक्त नहीं लिया जाता। सेटेलाइट अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक का कहना है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के अधीक्षक को पूर्व में ही पत्र लिख दिया था। लेकिन इसके बावजूद भी 13 अगस्त को नेहरू अस्पताल से चिकित्सा टीम सेटेलाइट अस्पताल नहीं आई। हालांकि रक्त लेने के लिए अस्पताल में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। लेकिन रक्त संग्रहण के लिए जो उपकरण चाहिए थे, वे उपलब्ध नहीं हुए। इतनी बड़ी मात्रा में रक्त एकत्रित नहीं होने पर कांग्रेस के नेता हेमन्त भाटी ने भी नाराजगी जताई है। भाटी ने दोषी चिकित्सा अधिकारियों के विरूद्व कार्यवाही करने की मांग की है। 
एस.पी.मित्तल) (13-08-17)
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Saturday, 12 August 2017

#2894
35 बच्चों की मौत के लिए तो योगी सरकार ही जिम्मेदार है। विपक्ष तो राजनीतिक करेगा ही। 
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यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ और डिप्टी सीएम सिद्धार्थनाथ सिंह कल्पना करें कि यदि इस समय मायावती या अखिलेश यादव सीएम होते तो गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में हुई 35 बच्चों की मौत पर भाजपा क्या करती? क्या इन मौतों के लिए भाजपा मायावती या अखिलेश सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराती? राजनीति का चरित्र ही ऐसा है कि जो पार्टी सत्ता में होती है, उसे ही कमियों के लिए ही दोषी ठहराया जाता है। इसलिए 35 बच्चों की मौत की जिम्मेदार यूपी की योगी सरकार ही है। अब बचाव में कुछ भी कहा जाए, लेकिन योगी सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे शर्मनाक बात 9 अगस्त को सीएम के गोरखपुर दौरे की रही। सीएम ने इसी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था का जायजा भी लिया, लेकिन कॉलेज के किसी भी चिकित्सा अधिकारी ने सीएम को यह नहीं बताया कि 4 अगस्त से ही कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद है। यह भी नहीं बताया कि बजट के अभाव में ऑक्सीजन करने वाली फर्म को बकाया 68 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। इससे प्रति होता है कि सीएम के आने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधिकारियों ने सिर्फ लीपापोती का काम किया। ऐसी कोई बात उजागर नहीं होने दी, जिससे सीएम नाराज होते। उम्मीद तो यही थी कि योगी के सीएम बनने के बाद यूपी के बिगड़े प्रशासनिक ढांचे में बदलाव होगा। लेकिन गोरखपुर के अस्पताल में 35 बच्चों की मौत यह बताती है कि व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है। क्या सीएम के नाते योगी को उन चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही नहीं करनी चाहिए जिन्होंने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के बारे में नहीं बताया? यदि 9 अगस्त को ही ऑक्सीजन की सप्लाई के बारे में सीएम को बता दिया जाता तो संबंधित सप्लायर को बकाया भुगतान हो जाता। ऑक्सीजन के सिलेंडर सप्लाई करने वाली फर्म के मैनेजर मनीष भंडारी का कहना है कि फर्म बकाया भुगतान के लिए 100 बार पत्र लिखे, लेकिन बकाया भुगतान नहीं हुआ। जब बच्चों की मौत हो गई तब 11 अगस्त को 52 लाख रुपए की राशि चुपचाप बैंक खाते में डाल दी। सीएम योगी माने या नहीं लेकिन यूपी में निचले स्तर पर काम काम में कोई सुधार नहीं हुआ है। 
समझ में नहीं आता कि अब योगी सरकार किस जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है? सरकार को चाहिए की दोषी चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही करें और पीडि़त परिवारों को समुचित मुआवजा दिलवाएं। योगी को यह बताना होगा कि उनकी सरकार बसपा और सपा से अलग है। यदि ऑक्सीजन के अभाव में 35 मासूम बच्चे दम तोड़े दें तो यह किसी भी सरकार के लिए कलंक हैं। जहां तक विपक्षी दलों के राजनीतिक करने का सवाल है तो विपक्ष तो राजनीति करेगा ही। विपक्ष की राजनीति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री गुलामनबी आजाद ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का दौरा कर अस्पताल के डॉक्टरों को तुरंत क्लीन चिट दे दी। आजाद का कहना रहा कि इन मौतों के लिए डॉक्टर नहीं बल्कि राज्य की भाजपा सरकार जिम्मेदार है। 
और अस्पताल में भी हो सकती हैं मौतें:
बदलते मौसम की वजह से इन दिनों पूर्व उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस रोग का प्रकोप है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी बच्चों की मौतों का सिलसिला शुरू हो जाए। 
एस.पी.मित्तल) (12-08-17)
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#2893
तो क्या राजस्थान की भाजपा सरकार के दबाव में लिया ललित मोदी ने क्रिकेट छोडऩे का फैसला?
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12 अगस्त को राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में यह सवाल उछलता रहा कि आखिर क्रिकेट के दिग्गज ललित मोदी ने अचानक क्रिकेट के सभी पदों से इस्तीफा क्यों दे दिया? ललित मोदी की ओर से यह कहा गया कि वे नागौर के अध्यक्ष के पद से भी इस्तीफा दे रहे हैं। अब राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) से उनका कोई संबंध नहीं रहेगा। मोदी के इस फैसले से आरसीए को सीधा लाभ पहुंचेगा क्योंकि ललित मोदी की वजह से बीसीसीआई ने आरसीए पर प्रतिबंध लगा रखे थे। जिन लोगों ने भाजपा का पिछला शासन राजस्थान में देखा हैं, उन्हें पता है कि ललित मोदी का कितना दखल था। बड़े-बड़े आईएएस और भाजपा के नेता भी मोदी के सामने खड़े रहते थे। जयपुर का जो एसएमएस स्टेडियम सभी खेलों के काम आता था, उसे मोदी के नेतृत्व वाले आरसीए को दे दिया गया। हालांकि बाद में गंभीर आरोप लगने के बाद ललित मोदी को भारत छोड़ कर लंदन में बसना पड़ा। माना जा रहा है कि ललित मोदी का इस्तीफा वर्तमान भाजपा सरकार के दबाव में हुआ है। असल में भाजपा की सरकार अब उन सभी लोगों से दूर दिखना चाहती है, जिनकी वजह से पूर्व में छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा था। चूंकि अगले वर्ष नवम्बर में विधानसभा चुनाव भी होने है। इसलिए सरकार को साफ-सुथरा दिखना है। ऐसा कोई निशान न रहे जिस पर लोग अंगुली उठा सके। भाजपा सरकार और ललित के संबंधों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत भी हर मौके पर प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अब गहलोत को भी बोलने का अवसर नहीं मिलेगा। पिछले दिनों ही ललित मोदी के पुत्र रूचिर मोदी ने आरसीए के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सी.पी. जोशी के मुकाबले मोदी की हार हो गई। भाजपा के शासन में सी.पी. जोशी की जीत पर भी आश्चर्य व्यक्त किया गया। अब जब ललित मोदी ने ही राजस्थान की क्रिकेट को छोड़ दिया है तो रूचिर मोदी की हार के कारण भी समझ में आ जाने चाहिए। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि राजस्थान के खिलाडिय़ों को क्रिकेट में अपनी योग्यता दिखाने का अवसर मिले। 
एस.पी.मित्तल) (12-08-17)
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#2892
तो क्या सचिन पायलट लगा सकते हैं दांव? अजमेर लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारी का मामला।
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सांसद सांवरलाल जाट के निधन के बाद होने वाले अजमेर लोकसभा के उपचुनाव में उम्मीदवारी को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही मंथन शुरू हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार का मामला तो ऊपर तक जाएगा, लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार के मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट की ही मुख्य भूमिका रहेगी। पायलट यदि स्वयं उपचुनाव लडऩा चाहते हैं तो कांग्रेस हाईकमान को भी ऐतराज नहीं होगा। लेकिन असल सवाल यही है कि क्या पायलट इस उपचुनाव में अपनी राजनीति को दांव पर लगाएंगे? कोर्ट भी राजनीतिक दल जातिवाद नहीं करने का दावा करें लेकिन हकीकत में जाति के हिसाब से मतदाताओं की संख्या देखते हुए ही उम्मीदवार का चयन किया जाता है। स्वयं पायलट ने वर्ष 2009 में दौसा छोड़कर अजमेर से चुनाव इसीलिए लड़ा कि यहां उनकी जाति के गुर्जर मतदाताओं की संख्या अधिक है। वर्ष 2009 में पायलट ने अजमेर से चुनाव जीता भी, लेकिन 2014 में पायलट को मात देने के लिए भाजपा ने जातिय समीकरण देखते हुए ही जाट समुदाय के लोकप्रिय नेता सांवरलाल जाट को उम्मीदवार बनाया। इस बार जाट ने पायलट को मात दे दी। लेकिन आज भी अजमेर में सचिन पायलट की लोकप्रियता बनी हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच केन्द्रीय मंत्री रहते हुए पायलट ने अजमेर में विकास के जो कार्य करवाए, उन्हें जनता आज भी याद करती है। हालांकि 2014 में पायलट की हार का एक कारण मोदी लहर भी थी। उस लहर में कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज चुनाव हार गए। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बन गए। इसीलिए अजमेर से पायलट का सम्पर्क लगातार बना रहा। पायलट के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने अजमेर जिले के नसीराबाद विधानसभा का उपचुनाव भी जीता। यानि आज भी अजमेर में सबसे मजबूत उम्मीदवार सचिन पायलट ही हैं। सब जानते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने पर पायलट को ही मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व प्रभारी गुरुदास कामत ने तो पायलट के नेतृत्व में ही विधानसभा का चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी थी। ऐसे में अब यह पायलट को तय करना है कि अजमेर से उपचुनाव लड़ें या नहीं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राजस्थान में अगले वर्ष नवम्बर में ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। यदि उपचुनाव में पायलट जीत जाते हैं तो उनके राजनीतिक कद में और बढ़ोत्तरी होगी। अजमेर जिले में कांग्रेस में ऐसा दमखम वाला नेता नहीं है, जो उपचुनाव में सत्ता का मुकाबला कर सके। यह बात अलग है कि कांग्रेस के उम्मीदवार को अजमेर जिले के भाजपा विधायकों के प्रति व्याप्त नाराजगी का लाभ मिलेगा। पायलट की उम्मीदवारी से इस संसदीय क्षेत्र के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में भी नई ऊर्जा का संचार होगा। यह उपचुनाव कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि सत्तारुढ़ भाजपा के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। इस उपचुनाव के परिणाम अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पर असर डालेंगे। 
एस.पी.मित्तल) (12-08-17)
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#2891
एक माह से पति के शव का इंतजार कर रही है गुण सागर। 
साऊदी अरब में 15 जुलाई को हुई थी मौत।
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राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा कस्बे में रहने वाली श्रीमती गुणसागर जीनगर पिछले एक माह से अपने पति बिरदीचंद जीनगर के शव का इंतजार कर रही हैं। बिरदीचंद गत फरवरी में मजदूरी करने के लिए साऊदी अरब गया था। लेकिन हार्ट अटेक आ जाने के कारण बिरदीचंद की गत 15 जुलाई को साऊदी अरब में मौत हो गई। साऊदी अरब की सरकार ने भी बिरदीचंद की मौत की पुष्टि कर दी है। साऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को भी पता है कि बिरदीचंद की मौत हो गई है। लेकिन इसके बावजूद भी बिरदीचंद का शव भारत नहीं आ रहा है। अपने पति के शव को लाने के लिए विधवा गुणसागर ने विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज से भी अपील की है। ट्विटर पर भी विदेश मंत्री का ध्यान आकर्षित किया गया है। गुणसागर को उम्मीद थी कि कम से कम सुषमा स्वराज तो उसके दर्द को समझेंगी। लेकिन अभी तक भी विदेश मंत्रालय ने गुणसागर को कोई सूचना नहीं दी है। गुणसागर बेहद ही गरीब परिवार से संबंध रखती है। उसके पास इतना पैसा नहीं कि वह अपने स्तर पर साऊदी अरब से पति का शव ला सके। जो लोग मजदूरी के बहाने बिरदीचंद को साऊदी अरब ले गए, उनका भी कोई पता नही ंचल रहा है। जब तक बिरदीचंद का अंतिम संस्कार नहीं हो जाता तब तक गुणसागर के परिवार में चूल्हा भी नहीं जल सकता। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस परिवार को कितनी वेदना के साथ दिन गुजारने पड़े रहे है। गुणसागर के सामने आंसू टपकाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। अब तो आंख का पानी भी सूख गया है। यदि जल्द ही पति का शव नहीं आया तो गुणसागर की जान को भी खतरा है। इस संबंध में भीलवाड़ा के भाजपा सांसद सुभाष बहेडिया ने भी अपने सांसद होने का फर्ज अभी तक भी नहीं निभाया है। इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में और अधिकारी जानकारी मोबाइल नम्बर 96678362328005959379 पर ली जा सकती है। 
एस.पी.मित्तल) (12-08-17)
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Friday, 11 August 2017

#2890
श्रीश्री रविशंकर कश्मीर में सूफी-संतों का मार्च निकलवाएं।
पीएम मोदी ने ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत की इच्छा जताई।
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11 अगस्त को दिल्ली में संसद भवन परिसर में अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के गद्दीनशीन सैय्यद फखर काजमी चिश्ती के नेतृत्व में सूफी विचारधारा के मुसलमानों के प्रतिनिधि मंडल ने पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में मोदी ने प्रतिनिधि मंडल से कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रवि शंकर के साथ मिलकर कश्मीर में रह रहे सूफी संतों से सम्पर्क किया जाए। पीएम ने कहा कि कश्मीर घाटी में शांति बहाली के लिए सूफी विचारधारा से जुड़े मुसलमानों और सूफी संतों का एक मार्च निकाल जाए। मोदी ने माना कि आज देश में सूफी विचारधारा को आगे बढ़ाने की जरुरत है। इस विचारधारा के माध्यम से ही देश में अमन चैन कायम हो सकता है। पीएम मोदी ने सूफी प्रतिनिधि मंडल से कहा कि अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्द्ीन चिश्ती की दरगाह से जुड़े प्रतिनिधियों को भी पहल करनी चाहिए। फखर काजमी ने पीएम को भरोसा दिलाया कि वे श्रीश्री रवि शंकर से सम्पर्क करेंगे और कश्मीर में सूफी संतों का एक मार्च निकलवाएंगे। काजमी ने पीएम से ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत करने का आग्रह किया। पीएम ने कहा कि उनकी भी इच्छा दरगाह में जियारत करने की है। अजमेर में किशनगढ़ हवाई अड्डे के शुभारंभ पर उनका अजमेर आने का कार्यक्रम बन सकता है। तब वे दरगाह में आकर सूफी परंपरा के अनुरूप जियारत भी करेंगे। इस मुलाकात के बाद फकर काजमी ने पीएम मोदी के सरल स्वभाव की जमकर प्रशंसा की। काजमी ने कहा कि पीएम मोदी एक नेक दिल इंसान है। 
एस.पी.मित्तल) (11-08-17)
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#2889
तो क्या भाजपा और कांग्रेस के नेता एक ही दिन में भूल गए सांवरलाल जाट को? उठावने की बैठक में कोई मंत्री, विधायक उपस्थित नहीं रहा।
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11 अगस्त को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और अजमेर के सांसद स्वर्गीय सांवरलाल जाट के उठावने की बैठक जिले के गोपालपुरा गांव में हुई। इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि उठावने की बेठक में भाजपा और कांग्रेस का कोई बड़ा नेता, मंत्री, विधायक आदि उपस्थित नहीं रहा। 10 अगस्त को जब जाट का अंतिम संस्कार किया गया तो राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के साथ पूरा मंत्रिमंडल उपस्थित था। अजमेर जिले के सभी भाजपा नेता और विधायक भी उपस्थित रहे। स्वर्गीय जाट की दमदार राजनीतिक छवि को भुनाने के लिए ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ कांग्रेस के छोटे बड़े नेता भी उपस्थित रहे। इतना ही नहीं 10 अगस्त को जब जाट की पार्थिव देह को सड़क मार्ग से जयपुर से उनके पैतृक गांव गोपालपुरा लाया गया तो जगह-जगह भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि दी। अजमेर शहर में तो नगर निगम के अग्निशमन केन्द्र के परिसर में श्रद्धांजलि देने का विशेष कार्यक्रम रखा गया। कल तक सरकार ने भी जाट की पार्थिव देह को इतनी गंभीरता से लिया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह को खासतौर से अजमेर भेजा। अजमेर में भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के साथ पूरा मंत्रिमंडल उपस्थित था। लेकिन 11 अगस्त को उठावने की बैठक में उपस्थित न होकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने एक दिन में स्वर्गीय जाट को भुला देने की बात की है। उठावने की बैठक में अजमेर जिले के सात भाजपा विधायकों में से एक भी उपस्थित नहीं रहा। 10 अगस्त को जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, वहीं 11 अगस्त को जाट के परिजन को ही टेंट आदि लगवाना पड़ा। हालांकि उठावने की बैठक में गोपालपुरा और उसके आसपास के गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने ही बैठक में स्वर्गीय जाट को श्रद्धांजलि दी। 
चौधरी और कुमावत रहे उपस्थित:
उठावने की बैठक में अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी और कांग्रेस के पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत ही नेताओं के तौर पर देखे गए। असल में डेयरी अध्यक्ष चौधरी का स्वर्गीय जाट से पारिवारिक संबंध था। डेयरी के विकास में स्वर्गीय जाट की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। जाट के निधन के बाद भी डेयरी अध्यक्ष चौधरी उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
एस.पी.मित्तल) (11-08-17)
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#2888
तो क्या अजमेर डिस्कॉम के एमडी मेहराम विश्नोई भाजपा सरकार की छवि खराब कर रहे हैं? जिला बदर हुए 200 तकनीकी कर्मचारी 4 अगस्त से बेमियादी धरने पर हैं।
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11 अगस्त को भी अजमेर विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) के करीब 200 तकनीकी कर्मचारी धरने पर बैठे रहे। ये कर्मचारी गत 4 अगस्त से ही बेमियादी धरने पर हैं। अजमेर शहर की बिजली व्यवस्था टाटा पावर कंपनी को दे देने के बाद इन तकनीकी कर्मचारियों का तबादला भीलवाड़, उदयपुर आदि शहरों में कर दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में जो समझौता हुआ था उसमें डिस्कॉम प्रबंधन की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि कर्मचारी का तबादला अजमेर से बाहर नहीं किया जाएगा। इस समय अजमेर जिले में तकनीकी कर्मचारियों के 300 पद खाली पड़े हैं। लेकिन डिस्कॉम के एमडी मेहराम विश्नोई अजमेर जिले में नियुक्ति नहीं दे रहे हैं। पहले तो कर्मचारियों से कोई संवाद ही नहीं किया, लेकिन जब जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने विश्नोई से कर्मचारियों से वार्ता करने के लिए कहा तो विश्नोई ने वार्ता में शुरू से ही नकारात्मक रुख अपनाया। विश्नोई ने जिस अडिय़ल अंदाज में संवाद किया, उससे वार्ता विफल हो गई। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि कलेक्टर गोयल ने जो सकारात्मक बात की उससे जाहिर होता है कि राज्य सरकार कर्मचारियों को बेवजह परेशान नहीं करना चाहाती। लेकिन एमडी विश्नोई जान बूझ कर राज्य की भाजपा सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। विश्नोई के व्यवहार से डिस्कॉम के इंजीनियर और अन्य अधिकारी भी परेशान हैं। ज्यादा परेशान होने वाले अधिकारी तो विश्नोई के जोधपुर स्थित घर जाकर समस्या का समाधान करवा लेते हैं। डिस्कॉम के प्रबंधन पद विश्नोई के पुत्र का भी प्रभाव माना जाता है। लेकिन जिला बदर हुए गरीब तकनीकी कर्मचारियों की इतनी स्थिति नहीं है कि वे जोधपुर जा सके। जिला बदर हुए कर्मचारियों के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ भी खड़ा है। लेकिन इसका भी विश्नोई पर कोई असर नहीं हो रहा है। 
एस.पी.मित्तल) (11-08-17)
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#2887
महबूबा मुफ्ती बताएं कि इससे ज्यादा और क्या हालात बिगडेंगे कश्मीर के।
अनुच्छेद 370 हटने पर ही सुधरेंगे हालात।
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11 अगस्त को दिल्ली में जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। महबूबा ने पीएम से कहा कि यदि अनुच्छेद 370 को हटाने की कोशिश की गई तो कश्मीर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कश्मीर के लोगों में गलत संदेश जाएगा। इससे पहले भी महबूबा ने कहा था कि 370 हटने पर कश्मीर में तिरंगे को कंधा देने वाला भी नहीं मिलेगा। महबूबा मुफ्ती अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर इतना चिंतित हो रही है, लेकिन महबूबा को यह भी बातना चाहिए कि इससे ज्यादा कश्मीर के हालात क्या बिगड़ेंगे? आज हमारे सुरक्षा बल तैनात न हो तो कश्मीर के अलगाववादी स्वयं को पाकिस्तान में शामिल होने की घोषणा कर दें। महबूबा खुद जानती हैं कि कश्मीर मेंं जब हमारे सुरक्षा बल आतंकवादियों से मुकाबला करते हैं तो कश्मीरी हमारे जवानों पर पत्थर फेंकते हैं और पाकिस्तान के झंडे को लहराया जाता है। कोई भी कश्मीरी भारत जिंदाबाद का नारा नहीं लगाते हैं। बल्कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाते हैं। कुछ थोड़े बहुत कश्मीरी यदि भारत के प्रति वफादारी दिखाते हैं तो उनकी हत्याएं की जाती हैं। यह सब इसलिए हो सका कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू हैं। यदि इस अनुच्छेद के अंतर्गत कश्मीर को विशेष अधिकार नहीं मिलते तो आज कश्मीर घाटी हिन्दू विहीन नहीं होती। महबूबा को अनुच्छेद 370 के हटने की तो चिंता है, लेकिन चार लाख हिन्दुओं की चिंता नहीं है। घाटी से भगाए गए हिन्दू आज भी शरणार्थी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। महबूबा बताए कि क्या हमारे कश्मीर में हिन्दुओं को रहने का अधिकार नहीं है? महबूबा माने या नहीं लेकिन कश्मीर के हालात तब तक नहीं सुधरेंगे, जब तक 370 लगी रहेगी। यदि हालात सुधारने हैं तो तत्काल प्रभाव से 370 को हटाना चाहिए। अनुच्छेद 370 का लाभ देश के अन्य हिस्सों में रह रहे मुसलमानों को भी नहीं मिलता। मुलाकात के बाद महबूबा ने दावा किया पीएम का रुख सकारात्मक रहा है। असल में पीएम मोदी को भी जम्मू कश्मीर में महबूबा के साथ भाजपा गठबंधन की सरकार चलाने का मोह त्यागना होगा। मोदी जब विपक्ष में थे तो अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग करते थे। लेकिन आज जब मोदी सत्ता में है तो अपनी ही मांग से पीछे हट रहे हैं। मालूम हो कि एक स्वयं सेवी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 को चुनौती दी है। चूंकि यह अनुच्छेद संविधान का हिस्सा नहीं है, इसलिए हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद को हटाने के आदेश दे दे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में सरकार का रुख बहुत महत्त्वपूर्ण होगा। महबूबा चाहती हैं कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में 370 के पक्ष में हलफनामा दे। 
एस.पी.मित्तल) (11-08-17)
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